176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari (धोखेबाज के लिए दो अल्फाज)

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दोस्त, आपका स्वागत है हमारे शायरी के ब्लॉग padhakushayari.in में, और आज हम आपके लिए aasteen ke saanp par shayari लेकर आए है, जहां पर हम केवल आस्तीन के सांप पर शायरी जानेगे ।

दोस्त, आस्तीन का सांप का अर्थ होता है  एक ऐसा मित्र जो की पास रहकर धोका देता है। यानि कपटी मित्र को आस्तीन का सांप कहा जाता है। तो ऐसे में यदि आपके पास कोई ऐसा व्यक्ति है जो की आपके लिए खास है, और आप उसके लिए खास है। मगर फिर भी वो आपको धोका देने की सोचता रहता है। तो ऐसे लोगो को आस्तीन का सांप कहा जाता है।

मतलब जो पास रहकर धोका देता है वह किसी सांप से कम नही है, जो की पास रहकर मालिक को ही काट लेता है। इसलिए दोस्त, आस्तीन का सांप जो होता है वह धोकेबाज मित्र होता है।

और आज के इस लेख में हम इसी प्रकार के लोगो पर कुछ शायरी लेकर आए है, जिन्हे आप टेग कर कर याद दिला सकते है की वो आस्तीन के सांप है। और यह शायरी के माध्यम से होगा, तो आप सोच ले कितना सानदार हो सकता है।

तो आइए आस्तीन के सांप के बारे में शायरी पढे,

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शौक शौक में दोस्त मैंने खुब बनाए थे,

एक एक दोस्त को अपने राज बताए थे ।

जब डसने लगे एक पर एक दोस्त,

तब समझा मैंने तो आस्तीन के सांप पाले थे ।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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मेरे अपनों ने इज्जत पर कंकर मेरे उछाले थे,

जिन्हे समझा अपना खास दोस्त,

वही आस्तीन के सांप निकले थे ।

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दिल उसका मैं देख न सका था ,

जो था दिल में काला उसके वह पहाचन सका था ।

तभी तो बनाया था उस दोस्त को मैंने,

आस्तीन का सांप वो निकलेगा सोच न सका था ।

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मैंने उसे अपना मित्र समझा,

पर वो आस्तीन का सांप निकला,

जिसे समझा था अपना खास,

वही दुश्मन मेरा निकला ।

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जिस थाली में खाते हो,

उसी में तुम छेद कर देते हो,

हो तुम आस्तीन के सांप,

तभी तो अपनो का बुरा हाल करते हो ।

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जिसे मैंने भाई समझा,

वो दुश्मन मेरा सबसे बडा निकला ।

जिसे दिया जीवन में मैंने सब कुछ,

वही आस्तीन का सांप निकला ।

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उनके चेहरे पर मुस्कान होती है,

दिल में बडा जहर होता है।

जो अपनों पर ही वार करे,

वही तो आस्तीन के सांप होता है।

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जीवन भर तुझे नमक मैंने खिलाया,

जो चहा था तुने वह तक लाकर दिया ।

मुझे क्या पता था तु आस्तीन का सांप है,

तभी तो दिन रात तुझे अपना सब कुछ दिया ।

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दुश्मनों से डर मुझे नही लगता,

क्योंकी वो वार सामने से करते है।

दुश्मनों से खतरनाक तो आस्तीन के सांप है,

जो पीठ पीछे वार करते है।

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बडी आस तुझ पर लगाए बैठे थे,

पर तु ही मेरा दुश्मन बन गया,

जिसे समझा जीवन भर अपना मित्र

तु वही आस्तीन का सांप बन गया ।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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कुछ लोग उम्र भर साथ होते है,

फिर भी उनके दिल में जहर होता है।

होते है जो आस्तीन के सांप,

वही तो अपनों मे चोर होते है।

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तेरे लिए मैंने घरवालों तक को छोड़ा,

पर तु मिरा अपना न निकला ।

करती थी तुझसे इश्क हर पर

पर तु ही आस्तीन का सांप निकला ।

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जो बात बात पर मुस्कुराते है,

कुछ ऐसे दोस्त ही दुश्मन होते है।

जिन्हे मानते हो तुम अपना ,

उन्ही में कुछ आस्तीन के सांप होते है।

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इश्क में भी कुछ आस्तीन के सांप होते है,

जो देते है पीछे पीछे धोका,

वही दिल के सबसे बडे चोर होते है।

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इस जमाने पर किसी पर

भरोषा मत करना यारो,

यहां कदम कदम पर

आस्तीन के सांप मिलते है यारो ।

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दोस्त ही मेरा आस्तीन का सांप निकला ।

तो मैंने दोस्त बनाना तक छोड़ दिया ।

पर फिर निकले रिश्तों मे छीपे दुश्मन,

तो मैंने रिश्ते निभाना तक छोड़ दिया ।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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जो सोते हुए को ही काट ले

वो आस्तीन के सांप होते है।

जो करे सामने आकर वार,

वही दुश्मन होते है।

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वहां रे इंसान क्या तेरी दोस्ती है,

चेहरे पर मुस्कान और दिल में आग है।

जो करते हो अपनो पर ही वार,

ऐसा तु आ​स्तीन का सांप है।

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जो बोलते है मीठी बोली

उनसे मुझे तो डर लगता है।

क्योकी वही तो

आस्तीन का सांप निकलता है।

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उसी का खाते हो

उसी को मारना चाहते हो ।

तुम दोस्त हो या फिर

आस्तीन का सांप हो ।

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आस्तीन का सांप न कहो उसे,

वो हालात का मारा है।

जिसने किया मुझ पर वार,

वही बिचारा दोस्त हमारा है।

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वो छूरी से वार करता रहा

मैं दोस्ती का रिश्ता निभाता रहा ।

जब कहने लगे लोग उसे आस्तीन का सांप,

मैं लोगो का मुंह तक बंद करता रहा ।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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मुझे किसी पर भरोषा तक नही,

कोई हो मेरा अपना यह यकिन तक नही ।

क्योकी निकलते है वही आस्तीन के सांप,

जिन पर भरोषा सबसे ज्यादा होता है।

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मुस्कान उनकी अच्छी

और दिल में जहर होता है।

यही खास आस्तीन के सांप

का पहचान होता है।

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सामने आकर वार जो करे,

उनके वार से कष्ट न होता है।

जो करते है पीठ पर वार,

वह आस्तीन का सांप होता है।

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आस्तीन के सांप से बडा कष्ट होता है,

जिसे समझा अपना वही दुश्मन होता है।

जब करे वार वो पीठ पर,

फिर भी दर्द तो दिल को होता है।

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जिसे मैंने अपनो से ज्यादा माना,

उन्ही ने भरोषा मेरा तोडा है।

वो है आस्तीन के सांप,

तभी तो वार छुप के किया है।

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जहर जैसा उनका कर्म होता है,

बातों मे चीनी जैसी मिठास होती है,

जो होते है आस्तीन का सांप,

यह सब उनकी पहचान होती है  ।

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जिसे समझा था अपना

वह दुश्मन से मिल गया ।

है वही आस्तीन का सांप

तभी तो उसने यह काम कर दिया ।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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पहली बार जीत पर भी दुख हुआ है,

इश्क में धोका मुझे हुआ है।

जिसे माना था अपना सब कुछ,

वही आस्तीन का सांप हुआ है।

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जमाने से क्या सिकायते होगी,

जब अपने ही जहर उगलते है।

दुश्मनों से क्या डर जब अपने ही

आस्तीन के सांप निकलते है।

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दुश्मन होने के बाद भी दोस्त बना रहना

आस्तीन के सांप की अलग पहचान है।

मत समझना इन लोगो को अपना खास,

यह तो उनकी एक अलग चाल है।

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उसने ही मेरे राह में कांटे बाए थे,

हो न सकू सफल इसलिए तंत्र मंत्र करवाए थे ।

कैसे पहचान लेता उसकी असली पहचान को,

आखिर दोस्त ही आस्तीन के सांप निकले ​थे ।

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जिन्हे अपने घर का सदस्य माना,

उन्होने टोटके मुझ पर करवाए,

हो न सकु सफल मैं,

इसलिए ​मेरे कई आस्तीन के सांप बनाए ।

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उनकी असली औकात को

मैं कभी जान न सका,

जो थे अपने पास मेरे

उन आस्तीन के सांप को पहचान न सका ।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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दोस्ती बनकर पीठ पीछे वार करता है,

दिल में नफरत लेकर दोस्ती की बात करता है।

सच कहूं तो दुनिया में खतरनाक वही है,

जो आस्तीन के सांप वार पर वार करता है।

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मैंने जिसे अपना खास माना,

वह दुनिया की भीड़ में पराया निकला ।

न जाने क्यों दिल के रिश्ते जलाकर वो

आस्तीन का सांप बन निकला ।

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अपना समझ कर उसे दिन रात पास रखा था ।

दिल की हर राज खोलकर उसे बताया था ।

पर दुश्मन से मिलकर वार करना चहा,

वही आस्तीन का सांप उसे पाया था ।

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अच्छा बनकर पास मेरे वो आया,

दोस्ती के नाम पर दिल में दर्द छिपाकर आया ।

किसे पता था वही आस्तीन का सांप निकलेगा,

जो आंखो में आसू लेकर मेरे पास आया ।

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वो सामने देखकर मुझे खुब मुस्कुराता है,

और पीठ पीछे मजाक मेरा बनाता है।

उसे पता नही है कि इस कदर,

आस्तीन का सांप वही बनता है।

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मेरा हर राज उसे मालूम था ।

क्योकी वही मेरा सच्चा मित्र था ।

जिसका दिया हर पल साथ मैंने

वही आस्तीन का सांप निकला था ।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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दुश्मनों पर भरोषा कर सकता हूं,

पर दोस्त पर नही ।

क्योकी आस्तीन के सांप वही होते है,

जो अपने दिल के पास होते है।

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जिस देश के लिए मैंने जान दी,

उस देश के लोग ही मुझे लुटेरा कहते है।

जिनकी की हिफाजत मैंने उम्र भर,

वही आस्तीन का सांप मुझे कहते है।

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तेरे दिल के हमेशा करीब रहा हूं,

तुझे अपने दिल का दोस्त बनाय रखा हूं ।

नही बताउगा तेरा कोई भी राज किसी को,

क्योकी मैं आस्तीन का सांप तो नही हूं ।

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चेहरे से तो बडा मासुम लगता है,

पर दिल में काला जहर मिलता है।

अरे है यही तो आस्तीन का सांप,

जो पास रहकर छूरी चलाता है।

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मुझे क्या पता था यही

आस्तीन का सांप निकलेगा,

जो चेहरे से प्यारा हो,

उसी के दिल में जहर निकलेगा ।

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जिसने कभी उम्र भर

साथ निभाने का वादा किया था,

उसी ने आस्तीन का सांप

बनकर मुझे डसा था ।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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रिश्तों मे कोई अपना नही होता है,

यहां सब अपने पराय बने बैठे है।

जिन्हे समझते हो तुम अपना,

वही आस्तीन के सांप बने बैठे है।

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जिसे मुश्किलों मे सहारा मैने दिया,

अपनों से ज्यादा जिसे अपना करीबी समझा,

वही आस्तीन का सांप बन गया,

जिसे मैंने खुद से ज्यादा अहम समझा ।

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तुझे अपना मानना मेरी भुल थी,

पास रखना मेरी बडी गलती थी ।

तु तो है आस्तीन का सांप,

तुझे माफ कर देना भी मेरी गलती थी ।

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वो पीठ पीछे मेरे नाम की हंसी उडाता है,

साथ रहकर दोस्ती में जहर घोलता है।

अब क्या कहूं इन आस्तीन के सांपों की,

जो साथ रहकर छुरा तक घोंपता है।

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जो खुन के प्यासे दुश्मन थे,

उन्हे अपना हमने बनाया है।

जो है आस्तीन के सांप,

उन्हे नमक हमने खुब खिलाया है।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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जिसने दिल मेरा चीर दिया,

वो अपनो की भीड़ में पराया निकला ।

जिसे दिन रात नमक मैंने खिलाया,

वही आखिर आस्तीन का सांप निकला ।

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आस्तीन के सांपों ने बदानाम खुब किया है,

हर बात को हमसे जोड तक दिया है।

अब क्या कहूं उन धोकेबाजों के बारे में,

उन्होने तो पीठ पर वार तक किया है।

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जिन्हे नमक खिलाया था

वही आस्तीन का सांप होता है

इनसे से तो कई गुणा अच्छा

अपना दुश्मन होता है।

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साथ रहता था दिन रात,

पीछे पीछे वार वो करता रहा ।

वक्त ने बताया उसके बारे में

जो आस्तीन का सांप पलता रहा ।

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आस्तीन के सांप को तो

काट कर फैंक देना चाहिए ।

जो करते है पीठ पर वार,

उन्हे जड़ से मिटा देना चाहिए ।

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हाथ पकड़कर आगे बढाता है,

और पीछे रास्ते का रोड़ा बनता है।

किसे कहे इस जहां मे अपना,

जो आस्तीन का सांप ही मुस्कुराता है।

176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

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दिल को तसली मैं देता रहा ,

छीप छीपकर वार वो करता रहा ।

आस्तीन का सांप भी ऐसा था,

जिसे मैं हर वक्त अपना समझता रहा ।

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हाथ से हाथ उसका पड़कर चलता था,

आस्तीन के सांप को भी अपना मानता था ।

कैसे पता होता मुझे आस्तीन का सांप है वो,

बात बात पर वो मुस्कुराता रहता था ।

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मेरी ही छाया में वो पलता रहा,

आस्तीन का सांप साथ साथ मेरे रहा ।

नही समझा उस दोस्त को मैं,

जो पीठ पीछे वार खुब करता रहा । 

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दर्द जब मुझे होता था वो खुब हंसता था,

जब होता था खुश मैं वो दुखी होता रहा ।

मैं तो नादान था कुछ समझ नही पाया,

उस आस्तीन के सांप को मैं पालता रहा।

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जिसके लिए मैंने घरवालों से लड़ाई की,

वो ही मेरे जीवन का आस्तीन का सांप निकला,

जिसे मैंने आपना सब कुछ माना,

वही मेरे नाम का ओरो में जहर घोलता रहा,

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जिसके सामने मैंने अपना दिल खोला,

वो तो आस्तीन का सांप निकला ।

जिसके लिए छोड दिया जहां को,

वही दुश्मन मेरा सबसे बडा निकला ।

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मुंह पर मीठी बाते करते है,

और दिल में जहर लेकर फिरते है।

सावधान रहना यारो ऐसे लोगो से,

जो आस्तीन के सांप होते है।

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दुश्मनों से मुझे क्या डर,

जब साथ मेरा दोस्त हो,

जब दोस्ती आस्तीन का सांप निकले,

तो फिर दोस्ती में भी क्या दम हो ।

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लगी जब दिल पर चोट वार उसने कर दिया,

आस्तनी के सांप ने कुछ बोले बिना,

दिल को चीर कर रख दिया ।

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मेरे दर्द का उसे सब पता था,

दिल के राज का वही तो मालिक था ।

जिसने मुझे नींद में ही डसा

वही आस्तीन का सांप था ।

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सफल तो मैं भी हो जाता,

पर दोस्त ही मेरा बेईमान निकला,

जिसे पाला था वर्षों तक

वह कुत्ता ही आस्तीन का सांप निकला ।

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176+ आस्तीन के सांप पर शायरी aasteen ke saanp par shayari

दिल रात रोटी उसे खिलाता था,

नोकर से भी अहम उसे मानता था ।

पर था आस्तीन का सांप वह,

जो कभी कभार काटता रहता ​था ।

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पीठ पर उसके वार का निशान है,

जो दिया धोका उसने उसका खिताब है।

क्या कहे उस आस्तीन के सांप का,

जब जब उसने डसा उसका हिसाब है।

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इश्क वफादार होना चाहिए,

झुंठा तो आस्तीन का सांप भी होता है।

हमसफर का साथ जीवन भर हो,

आधे रास्ते तक तो दुश्मन भी होता है।

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चेहरे पर मुस्कान लेकर

दिल को मेरे चिरता रहा,

फिर भी उस आस्तीन के सांप को

माफ मैं करता रहा ।

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क्या बताउ यारों उसका,

वो विश्वास के लायक नही ।

अरे है वो तो आस्तीन का सांप,

उसके साथ रहना भी अच्छा नही ।

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जीवन भर दुवा उसके लिए मांगी थी,

सफलता की सीढी उसे चढानी थी ।

पर था वो आस्तीन का सांप,

दोस्ती को बीच में ही उसे छोडनी थी ।

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तो इस तरह से दोस्त, आस्तीन का सांप पर शायरी लेख आपको कैसा लगा, क्या आप सच में इसी प्रकार की शायरी ओर चाहते है, या आप अपने किसी टॉपीक पर शायरी बनवाना चाहते है तो कमेंट में जरूर बताइए ।

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