टमाटर पर 200+ शायरी Tamatar Par Shayari (लाल टमाटर की जादुई बातें)
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टमाटर एक प्रकार की सब्जी है, जो की अपने भारत में अधिक खाई जाती है। और टमाटर में लाइकोपीन, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के और पोटेशियम पाया जाता है, इसलिए यह हमारे लिए सबसे ज्यादा उपयोगी सब्जी मानी जाती है।
और यही कारण है कि टमाटर अपने भारत के प्रत्येक व्यक्ति को पसंद आते है। यदि आप भी टमाटर खाने के शौकिन है, तो आप जरूर टमाटर पर शायरी पढना पसंद करेगे। और आज के इस लेख में हम आपके लिए टमाटर पर शायरी लेकर आए है, तो आइए टमाटर पर शायरी पढे।
टमाटर पर 200+ शायरी Tamatar Par Shayari (लाल टमाटर की जादुई बातें)

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टमाटर के भाव भी
असामन छू जाते है।
मगर फिर भी टमाटर
बाजार में ज्यादा बिक जाते है।
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टमाटर की लाली ने
दिल कईयों का धडकाया है।
तभी तो आजकल
टमाटर महंगा हो गया है।
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टमाटर का भाव क्या बडा
टमाटर तो शहजादा बन गया।
मिलने लगा बाजार में महंगा
तभी तो आजकल कम बिकने लग गया।
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बंद आंखो से ख्वाब तो देखिए
जो न बुलाए पास उन्हे याद तो किजिए।
महंगे फल मीठाईया तो न सही
पर कम से कम टमाटर तो खिला दिजिए।
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महंगाई की मार ने
गरीब को कर्ज के निचे ला दिया।
उपर से महंगे टमाटर ने
पसीना ग्राहकों के ला दिया।
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किसान भी टमाटर कम उगाने लग गया
तभी तो आजकल टमाटर महंगा होने लग गया।
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जो बैठे है ऊंचे महलो में
उनको भी किसान के पास आना होगा।
जब बाजार में लाल लाल टमाटर
फिर से महंगा होगा ।
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सूरज की धूप में
किसान की चमडी दिन रात जलती है।
और चंद सिक्के देकर
वो महलो में बैठकर टमाटर खाती है।
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टमाटर कि किमत बाजार में बढ गई है।
तभी तो टमाटर की सब्जी साही बन गई।
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टमाटर गिरा मंडी में
और आई आपकी याद मुझे ठंडी में
दिल तो लाल था पहले से
अब गाल भी लाल है इस बेदर्दी ठंडी में।
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गरीबो की थाली में
कल तक वो हंसकर बैठता था।
जो टमाटर आजकर
अमीरों के पास ताज पहनकर बैठता है।
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दाल रोटी भी फिकी लगने लग गई
जब टमाटर की किमत आसमान छू गई।
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टमाटर के लाल रुप ने
दिल को बडा धडकाया था।
और मेरे प्यासे दिल को
अपना मीठा रस पिलाया था।
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टमाटर के लाल रस ने
जीभ को बडा तरसाया है।
पिलाकर अपना मीठा रस
दिल को खुश किया है।
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टमाटर की चमक ने
उसे नई दुल्हन बनाया है।
और सजाकर थाली में
टमाटर को हिरा बनाया है।
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टमाटर की चमक ने
अंधेरी रात में उजाला कर दिया।
और पिलाकर मीठा रस
मेरे दिल के दर्द को दूर कर दिया।
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टमाटर का हाल भी बेहाल हो जाता है
जब यह महंगा होकर गरीबो से दूर हो जाता है।
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गरीबों ने जिसे दिन रात प्यार किया था ।
उसी टमाटर ने धोका गरीबो को दिया था।
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टमाटर के बिना सब्जी भी अधूरी लगती है।
जैसे बिना पानी के पानीपुरी लगती है।
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किसान की चमडी भी
जलने लग जाती है।
तब जाकर टमाटर की फसल
पकने लग जाती है।

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धूप में जो दिन भर पसीना बहाता है
वही किसान तो टमाटर को उगाता है।
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टमाटर की फसल
जब खेतों मे लहराती है।
तब किसान के दिल की धडकन भी
इश्क का गीत गाती है।
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मिट्टी की खुशबू ने
टमाटर को बडा महकाया है।
बनाकर मीठा लाल इसे
बाजार में खुब बिकाया है।
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आलू सब्जियों का राजा होता है
मगर आलू भी टमाटर के बिना अधूरा होता है।
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प्याज की सब्जी ने
आंखो में आसू ला दिया।
और टमाटर ने मीठा रस पिलाकर
दिल को खुश कर दिया।
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बैंगन का स्वाद भी
फिका लगने लग जाता है।
जब टमाटर बाजार में
सस्ता मिलने लग जाता है।
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मिर्ची का तिखा स्वाद भी
मीठा लगने लग जाता है।
जब मिर्ची के साथ
टमाटर बिकने लग जाता है।
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टमाटर जैसे लाल मीठे तेरे गाल लगते है।
और चुमकर तेरे होठो को हम सब भूल बैठते है।
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तेरी सुरत को देखकर
दिल मेरा धडकता रहता है।
और जब खाती है तु टमाटर अकेली
दिल मेरा जलता रहता है।
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तेरे होठो की खुशबू ने
कई आशिकों को तडपाया है।
और खा कर तुने लाल टमाटर
इश्क का जादू फैलाया है।
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वो टमाटर भी बाजार में महंगा बिकता है।
जिस तु अपने हाथों से उगाती है।
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आलू टमाटर की जोडी ने
शादियों मे माहौल बनया है।
पिलाकर मीठा रस इसने
अतिथियों को खुश किया है।
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गुलाब के साथ टमाटर भी
उठने बैठने लग गया।
तभी तो लाल टमाटर
आजकल इश्क का साथी बन गया।
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मटर पनीर में जो टमारट पडते है
वही तो बाजार में महंगे मिलते है।
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भिंडी की सब्जी में
टमाटर की खुशबू मिल जाती है।
तब जाकर भिंडी की सब्जी
अच्छी बन जाती है।
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टमाटर भिंडी की सब्जी ने
खुशबू का जादू चलाया है।
बुलाकर पास मुझे अपने
प्यार का रस तुने पिलाया है।
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लाल टमाटर की खुशबू ने
बागों को महका रखा है।
पिला पिलाकर मीठा रस अपना
ग्राहकों को पास बुला रखा है।
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भर भरकर थैली
वो टमाटर की ले जाने लग गया।
जब बाजार में टमाटर
ज्यादा सस्ता मिलने लग गया।
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चांद की रौशनी में
जुगनू खुब चमकते है।
और महंगे होने के बाद भी
टमाटर बाजार में ज्यादा बिकते है।
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हरे पत्तों के बिच में
लाल टमाटर लटका रहता है।
जो पिलाता है मीठा रस अपना
ऐसा टमाटर महकता रहता है।
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टमाटर पर भी चाकू से वार हो जाते है
जब टमाटर पककर लाल हो जाते है।
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किसान को भी सूरज की
तेज गर्मी लगने लग गई।
तभी तो आजकल बाजार में
टमाटर की किमत बढ गई।
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किसान भी हवा में उडने लग जाता है।
जब खेतों मे टमाटर पकने लग जाता है।
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एक समय की सब्जी में
आधी तनख्वाह जाने लग गई।
तब समझ में आया
टमाटर की किमत ज्यादा बढ गई।
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उदास चेहरा लेकर
दिन रात काम पर लेगे रहते है।
तब जाकर शाम को महंगे टमाटर
बाजार से खरीद पाते है।
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एक एक टमाटर को तोडकर
टोकरी में भरने वो लग जाता है।
जब आसमान में खडा सूरज
आग सा तपने लग जाता है।
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नींबू का खट्टा मीठा स्वाद भी
फिका लगने लग जाता है।
जब टमाटर अपना मीठा रस
पिलाने लग जाता है।
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तेरे लाल गुलाबी होठो ने
मेरे दिल को बडा धडकाया है।
और तेरे छोटे छोटे टमाटर ने
पास मुझे अपने बुलाया है।
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लाल टमाटर को देखकर
तोते का दिल खुश हो जाता है।
तभी तो खाने के लिए टमाटर
तोता धरती पर आ जाता है।
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लाल टमाटर की खुशबू ने
पास अपने बुलाया था।
पिलाकर मीठा रस अपना
दिल मेरा बहलाया था।
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नमक और टमाटर
खाने का आदी हो गया।
तभी तो बिचारा तोता
सर्दी में बीमार हो गया।
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आलू और टमाटर में
झगडा हो गया ।
तभी तो आलू से ज्यादा
महंगा टमाटर हो गया।
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लाल तो पहले से ही था
उपर से तेरे लाल होठो ने छू लिया।
तभी तो टमाटर इतना महंगा
बाजार में बिक गया ।
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तेरे होठो के छूने से
टमाटर भी महंगा हो जाता है।
खरीद लेते है तेरे आशिक पल भर में
जब टमाटर बिकने को आ जाता है।
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टमाटर भी दुल्हन सा
सजकर बैठ जाता है।
जब बाजार में यह टोकरी में
बिकने लग जाता है।
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टमाटर के हुस्न की अदाओ ने
भिंडी को बडा सताया है।
पिलाने मीठा रस अपना
भिंडी को मिलने बुलाया है।
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सूरज की पहली किरण ने
टमाटर को चमकाया है।
और फैलाकर खुशबू टमाटर ने
जादू अपना दिलो पर चलाया है।
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सब्जी भी महंक उठती है
जब टमाटर की खुशबू मिलती है।
अरे आता है स्वाद जीभ को
जब टमाटर भिंडी एक साथ बनती है।
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होली के त्योहार पर
टमाटर मिठायों पर सजने लग गया।
तभी तो टमाटर मटर पनीर में
इतना कम पड गया।
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थाली भी मुस्कुरा उठती है
जब टमाटर की सब्जी बनती है।
अरे खिल जाते है दिल भी
जब टमाटर की सब्जी जीभ खाती है।
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तेरे गालो की लाली को
देखे तो मेरी आंखे ठहर जाती है।
और खा कर तु टमाटर अकेली
कातिल बन जाती है।
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जब सब्जी में टमाटर न मिले
तो सब्जी में वो मजा नही होता।
और न हो तेरी आंखे नशीली
तो देखकर तुझे नशा नही होता।
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रसोई की शान तो
टमाटर ही होता है।
तभी तो टमाटर के बिना
रसोई बदनाम होता है।
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तरह तरह के पकवानों पर
टमाटर कटकर सजते है।
और खाकर इन पकवानों को
दिल कईयों के खुशु हो जाते है।
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टमाटर की खुशबू भी
सोने जीतनी महंगी होने लग गई।
जब बाजार में टमाटर के साथ
भिंडी बिकने लग गई।
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टमाटर तू बड़ा निराला,
हर सब्जी में तू मतवाला।
देख तुझे हो जाते है दिल खुश
जैसे तु हो मेरे घरवाला ।
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किसान के फटे होठों पर भी
मुस्कान छाने लग जाती है।
जब टमाटर की फसल,
अच्छी होने लग जाती है।
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टमाटर तू तो खेतो की शान है
तेरे बिना अधूरा किसान है।
अरे कैसे रहेगे तुझसे दूर हम
तेरे दिना तो उदास दिल की धडकन है।
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लाल फल जब
खेतों मे पकने लग जाता है।
आसामन में उठता हुआ तोता भी
टमाटर खाने निचे आ जाता है।
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मेहनत दिन रात करता हूं
तब जाकर टमाटर मैं पाता हूं।
अरे बिकते है यह बाजार में महंगे बहुत
मगर फिर भी मैं चंद पैसे कमा पाता हूं।
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किसान का चेहरा भी
उदास हो जाता है।
जब महंगा होकर टमाटर भी
सस्ते में बेचना पड जाता है।
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चंद पैसे किसान को मिलते है
फिर भी टमारटर शहरों मे महंगे मिलते है।
न जाने कौनसा मुनाफा कमाते है लोग
जो 10 रुपय के टमाटर 100 के बिचने लगते है।
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धरती मां की गोद में
खिलकर पौध उगता है।
तब जाकर उस पौधे पर
मीठा लाल टमाटर लगता है।
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धरती मां ने अपने आंचन में छिपाया था
तभी तो किसान टमाटर उगा पाया था।
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लोकी की सब्जी भी
फिकी लगने लग जाती है।
जब यह बिना टमाटर के
बनने लग जाती है।
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प्यासे गले को
जो मीठास देता है।
वही टमाटर तो
अंदर से लाल निकलता है।
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आलू के साथ जिसकी जोडी खुब लगती है।
वही लाल टमाटर तु ज्यादा खाती है।
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अंगूर की मीठी खुशबू भी
बाजार में उदास होकर बैठ गई।
जब लाल टमाटर की खुशबू
बाजार में ज्यादा बिक गई।
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भिंडी के साथ
तेरा इश्क चलता है।
और देखकर तुम दोनो को
आलू बडा जलता है।
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आलू को भी
गुस्सा आने लग जाता है।
जब लाल टमाटर तु
भिंडी के साथ दिखने लग जाता है।
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प्याज तो आंखो से
आंसू निकालता रहता है।
और एक टमाटर तु है
जो दिल को खुश करता रहता है।
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करेले का कडवापन भी
दूर होने लग जाता है
जब करेले के साथ
टमाटर बैठने लग जाता है।
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इश्क की शुरुआत
तेरे लाल होठो से होगी ।
और खाएगी जो टमाटर अकेली
तो वो काली भैंस होगी।
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तरे काले चेहरे को देखकर
तुझे रंग लगाने को मन करता है।
कैसे न खेलू तेरे साथ होली
तुझे छूने को दिल करता है।
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वो भरकर टमाटर की कटोरी
लेकर छत पर आ जाती है।
और देखकर मुझे अकेला
चुमा गाल पर दे जाती है।
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टमाटर खिलाने के बहाने से
वो मिलने छत पर आई थी।
जब नही थी पास ममी मेरे
कमबख्त गालों को चूम गई थी।
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तेरी गालो की खटास भी
मीठी लगने लग जाती है।
जब तु गालों पर टमाटर का रस
लगाने लग जाती है।
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टमाटर भी महंगा होकर
गरीबों को लूटता रहता है।
और फिर लोग उन गरीबो को ही
अमीर बाताने लग जाता है।
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महंगे भाव के टमाटर को
जो गरीब खरीद लेता है।
वो भी गरीब भी
अमीर समझा जाता है।
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तु सलाद में
टमाटर मीठास लगती है
और लगाती है जब होठो पर लाली
तो बडी कातिल तु लगती है।
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शिमला मिर्च भी
मीठी लगने लग जाती है।
जब टमाटर की खुशबू
शिमला मिर्च मे आने लग जाती है।
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दाल हो या मटर पनीर
तु हर किसी में खास होता है।
और तेरे बिना
हर सब्जी बेकार होता है।
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जिस सब्जी में टमाटर
तेरी सुरत नही मिलती है।
खुदा कसम वो सब्जी भी
बडी बेकार लगती है।
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चना भी खिल उठता है
जब इसे टमाटर के साथ भुना जाता है।
अरे आता है स्वाद दिलों को
जब टमाटर काटकर खाया जाता है।
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इस तरह से दोस्त, टमाटर पर शायरी कैसी लगी कमेंट में जरूर बताना ।
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