इमली पर 198+ शायरी, Imli Par Shayari (इमली की खट्टी मीठी बातें)
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दोस्त, इमली मानव के लिए बहुत ही उपयोगी होती है। क्येाकी इमली के अंदर पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनोइड जैसे यौगिक पाए जाते है, जो की हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते है। इसके अलावा फाइबर भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो की शरीर की कई प्रकार से मदद करता है। मतलब इमली खाना फायदेमंद है।
वही पर इमली अपने खट्टे मीठे स्वाद के कारण से जानी जाती है। और इसलिए बहुत से लोग इमली खाना पसंद करते है। यदि आप भी इमली खाने के शौकिन है, तो आपको जरूर इमली पर शायरी पसंद आती होगी ।
और आज के इस लेख में हम इमली पर कई प्रकार की शायरी लेकर आए है। जिन्हे पढकर आपको ऐसा लगेगा जैसे की आप स्वयं इमली खा रहे है। तो आइए दोस्त, इमली पर शायरी पढे ।
इमली पर 198+ शायरी, Imli Par Shayari (इमली की खट्टी मीठी बातें)

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इमली के मीठे स्वाद ने
दिन रात मुझे तडपाया था।
दिलाकर तेरी याद मुझे
रात भर रुलाया था।
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तेरे इमली जैसे बदन पर
दिल मेरा आ जाता है।
और देखकर तेरी अदाओं को
दर्द शरीर का भूल जाता है।
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जुगनू की चमक में
इमली का पेड खुब चमकता है।
और देखकर पेड पर इमली को
किसान का दिल धडकता है।
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सावन के महिने में
नारियल शिव चाव से खाते है।
पर जब मिलती है इमली भेट में
तो नारियल को भूल जाते है।
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इमली की मीठास से बनी मिठाईयां भी
गणेश जी चाव से खाने लग जाते है।
जब भक्त इमली की बनी
मिठाईयां चढाने लग जाते है।
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उदास चेहरा भी गुलाब सा खिल जाता है।
जब इमली का मीठास जीभ पर छा जाता है।
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काली आंखो से देखने वाली ने
कई इशारे मुझे किए थे।
जब खाने के लिए इमली
मैंने दुकान से खरीदे थे।
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प्याली भरकर इमली की
वो अकेली खाने लग जाती है।
और देखकर मुझे सामने
इमली छिपाने लग जाती है।
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लाल होठो के पीछे
कई दिल घायल हो जाते है।
तभी तो खा कर इमली
दिल नए हो जाते है।
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इमली की खट्टी मीठी खुशबू ने
बागों को सजा रखा है।
फैलाकर खुशबू का जादू अपना
गणेश जी को धरती पर बुला रखा है।
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इमली की मीठास ने
दिल के दर्द को मिटा दिया।
पिलाकर प्याली रस की
दिल को गुलाब सा महका दिया।
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चाय भी मुस्कुराने लग जाती है
जब इमली की खुशबू आने लग जाती है।
अरे महक जाते है वो बाजार भी
जहां पर इमली बिकने लग जाती है।
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तेरी फली में
खुशियों का खजाना छिपा है।
और जो है तेरा मीठा रस
उसमें इश्क का जादू छिपा है।
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इमली के मीछे स्वाद ने
जिस जिसको चखा है।
उसके दिल का
बुरा हाल हुआ है।
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वो धरती भी गुलाब सी महकने लग गई
जहां पर इमली पकने लग गई।
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तेरे बिना समौसे का स्वाद भी
बेकार लगने लग जाता है।
और खा कर तेरे साथ सामेसा
दिल को मजा आ जाता है।
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तेरे स्वाद के बिना
हर थाली अधुरी लगती है।
और बैठती है तु जिस थाली में
वो थाली भी गुलाब सी महकती है।
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सूरज की धूप में
तु दिन रात जलती रही।
तब जाकर इमली तु
मिठी बनती रही।
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आम को भी अपनी मीठास पर
घमंड होने लग गया।
मगर देखकर इमली को
आम भी पीछे हटने लग गया।
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आम की मीठास भी
फिकी पड जाती है।
जब इमली अंदर से
मीठी लाल निकल जाती है।
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अंगूर के मीठे रस ने
ग्राहक को पास अपने बुलाया था।
पर देखकर इमली को
ग्राहक अंगूर के पास न गया था ।
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सूरज की तेज गर्मी में
नींबू दिन रात बिकता है।
पर जब मिलती है बाजार में इमली
तब नींबू कोन खरीदता है।
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तरबूज की ठंडक भी
दिन घायल कर देती है।
और खिलाकर इमली मुझे
वो गाल चुम लेती है।
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हजारों फल लगे होते है बाग में
मगर फिर भी इमली पसंद आती है।
अरे महकती है इमली गुलाब सी
तभी तो यह मीठा रस पिलाती है।
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इमली की खट्टी मीठी खुशबू ने
पास मुझे अपने बुलाया था।
पिलाकर मीठा रस
मेरे दिल को बहलाया था।
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चांद भी इमली की
खुशबू का दिवाना हो गया।
तभी तो खाने के लिए इमली
चांद धरती पर उतर गया ।
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इमली का खट्टा मीठा स्वाद भी
गजब का लगने लग जाता है।
जब कोई समोसे में
इमली का रस खाने लग जाता है।
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चाट पकोडों मे इमली का रस जब मिलता है।
खा कर चाट पकोडे दिल भी खुश होता है।
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उसके लाल होठो ने
दिल को बडा धकाया है।
और खिलाकर इमली का रस
दिवाना मुझे अपना बनाया है।
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हाथों मे चुडिया पहनने वाली
इमली खाने की शौकिन बन गई।
जब इमली की खट्टी मीठी खुशबू
समोसे में जाकर मिल गई।
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बचपन भी बडा दिवाना होता था
जब इमली तोडकर मैं खाता था।
अरे लगती थी इमली खट्टी मीठी
तभी तो बार बार इमली खाता था।
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सावन के महिने में
शिव को धरती पर आना पडता है।
जब मीठी इमली का रस
खाने को मन करता है।
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मन की बगिया में
कई फूल खिल जाते है।
पर देखकर इमली को
फूल खुशबू से महक जाते है।
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इमली की खुशबू ने
शरीर की थकावट मिटा दी।
पिलाकर मीठा रस मुझे
ख्वाबों की परी बना दी।
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पहले इमली के खट्टे रस ने
दिल को तडपाया है।
फिर जाकर इमली ने
अपना मीठा रस मुझे पिलाया है।
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जिसे देखकर
जीभ भी ललचाने लगती है।
वही मीठी इमली
अपना असर दिखाने लगती है।
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इमली की खुशबू ने
रात को मुझे सोने न दिया।
करती रही तेरी तारिफ रात भर
और ख्वाब मुझे लेने न दिया।
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खट्टा मीठा उसका अंदाज है
जो बागो में पकता ताज है।
और खा कर जिसे दिल का दर्द मिट जाए
वही इमली का असली मीठा स्वाद है।
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उसकी मस्त अदाओं ने
दिल को बार बार धडकाया है।
पिलाकर इमली का मीठा रस
दिवाना अपना मुझे बनाया है।
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तेरा प्यार भी दिल को
चटपटा लगने लग गया ।
जब खा कर इमली
मैंने गाल तेरा चुम लिया।
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दिल भी इश्क का गीत गाने लग जाता है।
जब इमली का रस जीभ खाने लग जाता है।
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तेरे लाल होठ मुझे
इमली जैसे मीठे लगते है।
तभी तो देखकर तुझे
आशिकों के दिल धडकने लगते है।
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इमली की मीठी खुशबू ने
बाजार को महका रखा है।
पिलाकर मीठा रस अपना
दिल का बुरा हाल कर रखा है।
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कचोरी की मीठास भी
पास अपने बुलाने लग जाती है।
जब इमली पककर
बाजार में आने लग जाती है।
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हर मौसम में इमली की बडी चर्चा होती है।
तभी तो इमली बाजार में इतनी बिकती है।
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धूप में तपकर जिसने फल बनाया है।
उसी किसान ने इमली को मीठा बनाया है।
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सूरज की तेज धूप में
चमडी किसान की जलती रहती है।
तब जाकर बागों मे
इमली खट्टी मीठी बनती है।
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मिट्टी की खुशबू ने
किसान को जीना सिखाया है।
कैसे लगाते है इमली का पेड
वो ख्वाब मे आकर बताया है।
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मेहनत के पसीने की एक एक बूंद ने
इमली के पेड को पानी पिलाया है।
तप कर खुद सूरज की धूप में
इमली को मीठा बनाया है।
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हर फली में इमली की मीठी खुशबू होती है।
जिसमें बसती किसान की तकदिर होती है।
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किसान की आंखो में भी
आंसू आ जाते है
जब इमली के पेड
पल भर में उजड जाते है।
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इमली की खुशबू ने
चमकना इमली को सिखा दिया।
कैसे करते है बाजार में राज
वो राज बता दिया।
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इमली का खट्टापन भी
दिल को प्यारा लगने लग गया।
तभी तो आजकल इमली का मीठा रस
कम मिलने लग गया।
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समोसे के साथ जब तक
इमली की चटनी न मिलती है।
तब तक दुकान में
समोसे की बिक्री न होती है।
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हर मौसम में इमली की चर्चा होती है।
तभी तो इमली गुड से मीठी होती है।
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तेरा मीठा स्वाद भी
इश्क का गीत गाने लग जाता है।
जब आशिक तुझे गिफ्ट में
महबूबा को देने लग जाता है।
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इमली को सजाकर टॉकरी में
गिफ्ट में दिया जाने लग गया।
जब इमली का मीठा स्वाद
इश्क का गीत गाने लग गया।
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इमली भी बाजार में
सान से सजकर बैठती है
तब जाकर इमली
बाजार में इतनी बिकती है।
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फैलाकर इमली ने खुशबू अपनी
हवा को भी महका दिया।
और सजकर बाजार में
माहोल बाजार का बना दिया।
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चंदन की खुशबू भी
फिकी पड जाती है
जब हवा में इमली की
खुशबू मिल जाती है।
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देखकर केले की चमक को
इमली का दिल भी धडक गया।
तभी तो केला आजकल
इमली के साथ रहने लग गया।
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केले और इमली की
दोस्ती बडी पुरानी होती है।
रहते है साथ हमेशा यह
जैसे इनकी प्रेम कहानी होती है।
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लीची की मीठी चमक भी
फिकी पड जाती है।
जब हवाओं मे इमली की
खुशबू बिखर जाती है।
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फलो की महफिल में
आम राजा बनकर बैठा है।
पर देखकर इमली की मस्त जवानी को
दिल अपना हार बैठा है।
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वो गली भी गुलाब सी
महकने लग जाती है
जहां पर इमली
सस्ती मिलने लग जाती है।
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इमली के बाजार में
कई दुकानदार होते है।
पर जो दे सबसे मीठी इमली
ऐसे दुकानदार कम होते है।
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चांद की चांदनी को भी
शर्म आ जाती है
जब इमली की मस्त जवानी
नजर आ जाती है।
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इमली की मीठी खुशबू ने
चांद तारों को बडा तरसाया है।
पिलाने पीठा रस अपना
धरती पर मिलने बुलाया है।
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हजरों फूल मिट जाते है
जब इमली के फूल खिल जाते है।
महकने लगती है हवा भी
जब इमली पेडो पर पक जाती है।
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तेरी आंखो की खूबसूरती ने
दिल को दिवाना बना रखा है।
और खिला खिलाकर इमली तुने मुझे
मेरे दिल का बुरा हाल कर रखा है।
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आ जाओ मिलने हमसे
तुम्हे इमली का रस खिलाएगे।
कैसे लगते है समोसे इमली के साथ
यह खिलाकर तुझे बताएगे।
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तेरे गुलाबी चेहरे ने
चांद को भी दिवाना बना लिया।
और खिलाकर तुने इमली
चांद का बुरा हाल कर दिया।
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तेरे गुस्से से ज्यादा मीठी तो
तेरी इश्क वाली बाते लगती है।
और खाती है जब इमली तु
खुदा कसम लाजवाब लगती है।
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माथे पर बिंदी लगाकर
वो होठो से मुस्कुरा जाती है।
जो भरकर प्याली इमली की
अकेली खा जाती है।
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तु मेरी इमली की चटनी है
जिसे दिन रात मैं खाता हूं।
अरे लगती है तु बडी मीठी
तभी तो पास तुझे रखता हूं।
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महलों मे बैठने वाली
इमली की दिवानी निकली।
खाती है जो दिन रात इमली
ऐसी मेरी घरवाली निकली।
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न जाने क्यों वो अचानक इमली खाने लग गई।
जैसे पास कोई खुशखबरी आने लग गई।
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मेहनत का फल बडा मीठा होता है
जिसका स्वाद इमली जैसा होता है।
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धरती भी सोना उगलने लगती है
जब इमली पेड पर लगने लगती है।
आती है जिधर से हवा
वो हवा भी इमली की याद दिलाती है।
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जिसे देखा था ख्वाबों मे
वो दिल का साथी न मिला।
तरसता रहा इमली खाने को
पर वो इमली का स्वाद न मिला।
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बाजार में भी इमली
ज्यादा किबने लग जाती है।
जब इमली अंदर से
मीठी लाल निकल जाती है।
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चीकू के मीठे रस में
इमली का रस मिल गया।
तभी तो खा कर चीकू
मजा दिल को आ गया।
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फलो की महफिल में
ताज पहनकर बैठी होती है।
जब बाजारो में इमली
ज्यादा बिकती है।
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नीले आसामन के निचे
कई पेड लगे होते है।
मगर उनमें से कुछ ही पेड
इमली के होते है।
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जिसे बोया था अपने हाथों से
वो पेड इमली कई देने लग गया।
तभी तो बुढापे का सहारा
इमली का पेड बन गया।
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हंस हंसकर दिल किसान के
बितने लग गए।
जब इमली के पेड पर
इमली पकने लग गए।
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पीले फूलों के बिच में
खुशबू का ढेरा होता है।
और खा कर इमली
खुश मेरा दिल होता है।
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बच्चो के चेहरे पर भी
मुस्कान आने लग जाती है।
जब इमली की खुशबू
पास बुलाने लग जाती है।
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इस तरह से दोस्त, इमली पर शायरी कैसी लगी कमेंट में जरुर बताना।
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