176+ पीपल के पेड़ पर शायरी pipal ke ped par shayari
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दोस्त पीपल का पेड काफी उपयोगी पेड होता है । क्योकी एक पीपल का पेड लगभग 200 से 300 साल तक जीवित रहता है। इसलिए यदि पीपल का पेड लगाते है, तो इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है।
दूसरा की हिंदू धर्म में पीपल के पेड को देववृक्ष कहा गया है। इसलिए इस पेड की अक्सर पूजा की जाती है। और इसी के कारण से बहुत से लोग पीपल के पेड पर शायरी पढना पसंद करते है।
खैर आज के इस लेख में हम पीपल के पेड पर शायरी पढने वाले है, और पीपल के पेड पर शायरी इसकी खासियत, और हिंदू धर्म में इसकी मान्यताओं के आधार पर हो सकती है।
तो आइए पीपल के पेड पर शायरी पढे,
176+ पीपल के पेड़ पर शायरी pipal ke ped par shayari

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जो दिलों को छाव देता है
वो पेड पीपल का होता है।
अरे होता है इसमें त्रिदेवों का वास
तभी तो यह पूजा जाता है।
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जीवन का साथी बनकर
पीछे रह जाता है।
वही पीपल का पेड
जो इतना पूजा जाता है।
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अपने हाथों से जिसे लगाते है
वो कई पीढियों को छांव देता है।
पूजते है लोग उन्हे देववृक्ष समझकर
तभी तो यह पुण्य फल देता है।
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तपती धूप को दिनभर सहता है
पर फिर भी पीपल का पेड खिलता है।
देता है राहगीरों को ठंडक वो
जिसे देववृक्ष समझा जाता है।
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पानी की छोटी सी बूंद से
पीपल का पेड खडा होता है।
देता है उम्र भर शीतल छायां
तभी तो यह दिल के पास होता है।
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खुशियां भी दरवाजे पर आती है
जब पीपल के पेड पूजा जाता है।
मिलता है देवताओ का आशीर्वाद
जब पेडों लगाया जाता है।
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पीपल का एक छोटा सा पेड
शीतल छाया उम्र भर देता है।
करता है वातावरण को शुद्ध
फिर भी इसे काटा जाता है।
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सांस बनकर दिल में बसता है
जब पीपल का पेड उगता है।
करता है दिलों को दर्द से मुक्त
जब पेड को ईश्वर समझा जाता है।
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शिव भी जिसमें वास करते है
वो पीपल का पेड होता है।
तभी तो इसे कब्रिस्तान मे
लगाया जाता है।
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सूरज की तपती धूप में
दिन भर पीपल जलता है।
पर फिर भी पीपल का पेड
रहागीरों को शीतल ठंडक देता है।
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जिसमे त्रिदेवों का वास हो
उसका कोई क्या बिगाड पाएगा।
अगर काटेगा पीपल को
तो नाश उसका हो जाएगा।

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पीपल के पेड को काटना
मुर्खता से कम नही होता।
जो करता है यह कुकर्म
उसका फिर भला नही होता।
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जिसमें ब्रह्मा जी का वास होता है
ऐसा पीपल का पेड होता है।
तभी तो इसे काटना
महापाप माना जाता है।
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पीपल का पेड तो
सूजर से प्यार करता है।
तभी तो सूरज की रोशनी में
यह ओर ज्यादा चमकता है।
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सूरज की तेज धूप भी
जिसका बाल बांका न कर पाया।
आखिर वही पीपल का पेड
शीतल ठंडक का अहसास दे पाया।
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पीपल का पेड तो
खुदा को भी प्यारा होता है।
तभी तो इसमें
त्रिदेवों का वास होता है।
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काली अंधेरी रातों मे
जिसे डर भूतों से लगता है।
आखिर उसी पीपल का पेड में
ईश्वर का वास मिलता है।
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अंधेरी रात जब होती है
पीपल का पेड भी सांस लेता है।
अरे देता है जो दिन में ऑक्सीजन
वो रात को खुद ऑक्सीजन लेता है।
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पीपल के पेड की परिक्रमा करने से
जन्मों जन्मान्तर के पाप मिटते है।
तभी तो पीपल के पेड
इतने ज्यादा पूजे जाते है।
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जो लगाता है पीपल का पेड
वो धर्म का काम करता है।
अरे मिटते है उसके सारे पाप
जो पूजा पीपल की करता है।

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पुण्य फल की चाह में
पीपल के पेड कई लगाए है।
देते है आज यह छांव राहगीरों को
ऐसे शीतल महल मैने सजाए है।
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रात को जिसे मैंने देखा
वो डरावना साया निकला ।
जिसे पूजा दिन भर
पीपल का पेड नही बर्गद निकला।
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बर्गद का पेड भी
पीपल के पेड से जलता होगा ।
तभी तो देवताओ का वास
बर्गद खुद में रखता होगा ।
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पीपल का पेड भी
हंसकर गले मिलता है ।
जब जडों मे ब्रह्मा जी
का सृजन बसता है।
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एक ही वृक्ष में
त्रिदेवों का वास होता है।
आखिर तभी तो पीपल का पेड
देववृक्ष होता है।
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पीपल के पेड में
ब्रह्मा विष्णु शिव का वास होता है।
तभी तो पीपल का पेड
दिन रात पूजा जाता है।
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जब पीपल का पेड खिलता है
सूरज भी हंसकर गले मिलता है।
देता है छाव पीपल का पेड़
जब सूरज आग बरसता है।
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पीपल की छांव में
जब मन ठहर जाता है।
सूरज भी देखकर
बदालों मे छीप जाता है।
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इंसान बदल गया है
पर पीपल का पेड न बदला पाया था।
अरे खडा रहा आज भी वहा पर
जिसे बरसों पहले उगाया था।

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पीपल का पत्ता भी
पीपल के जीवन की कहानी बताता है।
कैसा गुजरता है तपती धरती में जीवन
उन पलो की गाथा गाता है।
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पीपल की शाखाओं में
शिव का वास होता है।
तभी तो पीपल का पेड
पूजा जाता है।
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पीपल की छाया में
देवताओं का अशीर्वाद छिपा है।
तभी तो पीपल का पेड
तपती धरती पर खडा है।
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मंदिरों मे पीपल का पेड होता है
क्योकी इसमें त्रिदेवों का वास होता है।
जब पूजा जाता है पीपल का पेड
तब जाकर देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
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पीपल के पेड की छांव ने
दिल को भी ठंडक पहुंचाई है।
करकर मेरे दिल से बातें इसने
दिल कों अपनी कहानी सुनाई है।
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पीपल का पेड भी
कष्ट बडा सहता है।
रहकर जीवित 300 साल तक
सुरज की रोशनी में रोज जलता है।
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पीपल का पेड भी गजब होता है।
रहता है जीवित 300 साल तक
फिर भी सुरज कुछ बिगाड न पाता है।
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जब हवाओं का झोका आता है
तब पीपल के पेड को मजा आता है।
जब जलता है सूरज पूरे दिन भर
तब पीपल ठंड का जादू फैलाता है।
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पीपल के पेड को
सूरज भी जला न सकता ।
रहता है जीवित 300 साल तक
फिर भी इसका कुछ बिगाड न सकता ।

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वो खडा रहता है शांत होकर
क्योंकी मुश्बितों से उसे डर न लगता है।
तपता है दिन भर सूरज की किरणों मे
फिर भी वो मुस्कुराता रहता है।
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जब चलती है तेज हवा
पीपल का पेड भी महकता है।
क्योंकी होता है पीपल में वास विष्णु का
तभी तो पीपल खुश रहता है।
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जिस रास्ते में पीपल खडा हो जाता है
वहां आकर ईश्वर खुद बस जाता है।
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पीपल के पेड को पूजने
कुंडली का शनिदोष शांत होता है।
क्योकी पीपल के पेड में
शनिदेव का वास होता है।
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पीपल के पेड में वास मां लक्ष्मी का होता है।
तभी तो पीपल धन धान्य का आशीर्वाद देता है।
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पीपल का पेड छांव देकर
दिल के दर्द को दूर करता है।
रखता है ख्याल हर किसी का
जैसे मां का वास इसमें होता है।
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जब पीपल के पेड के नीचे
सिर झूकाया जाता है।
तो दिल का हर दर्द
दूर हो जाता है।
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पीपल में तो देवताओं का वास होता है
तभी तो यह दिन भर पूजा जाता है।
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एक पीपल का पेड
कई पीढियों को जीवन दान देता है।
तभी तो पीपल का पेड
खुश रहने का वरदान देता है।
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त्रिदेवों का भी जिसमें वास हो
वो पेड पीपल का होता है।
अरे देता है दिलों को ठंडक
जब सूरज तेज चमकता है।
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चांद भी पीपल के पेड का दिवाना होगा ।
तभी तो चांद का बसेरा पेड में होगा ।

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पीपल के पेड की जड
जहां जहा जाती है।
उस स्थान में
ब्रह्मा जी की कृपा बसती है।
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जब पीपल के पत्ते बोलते है
तो दिल का दर्द दूर हो जाता है।
मिलता है दिल को सकून बडा
जैसे कोई अपना मिल जाता है।
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पीपल के पेड के नीचे
साधु बैठकर तपस्या करते है।
तभी तो पीपल के पेड
देववृक्ष के रुप मे पूजे जाते है।
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पीपल का पेड
सूरज की रोशनी में जलता है।
देकर ठंडक की छांव
खुब मुस्कुराता है।
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पीपल का हर एक पत्ता सांस लेता है।
तभी तो इसे काटा नही जाता है।
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पीपल के पेड ने
ईश्वर के करीब पहुंचाया है।
बनाकर मुझे सच्चा भक्त
ईश्वर के चरणों मे बैठाया है।
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पीपल के पेड की पूजा करने पर
पितृ दोष दूर होता है।
आखिर तभी तो पीपल में
पानी डाला जाता है।
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पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट होते है
जब पीपल के पेड को पूजे जाते है।
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पीपल का पेड भी
भगवान शिव की तपस्या करता है।
तभी तो इसमें शिव भगवान का
पीपल में वास होता है।

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एक बूंद जल की
जीवन की प्राण वायु देता है।
तभी तो पीपल के पेड में
जल डाला जाता है।
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जब पीपल में पानी डाला जाता है
तब देवताओ की भी कृपा मिलती है।
देता है पेड प्राण वायु बदले में
तभी तो जीवन में खुशी मिलती है।
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पानी की बूंदे लेकर
प्राण वायु बदले में देता है।
तभी तो पीपल का पेड
पूजा जाता है।
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चुपचाप खडा होकर भी
दिल को छू जाता है।
देकर ऑक्सीजन
यह शरीर में बस जाता है।
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पीपल का पेड भी
बडा सितम ढाता है।
तपकर सूजर से दिन भर
चांद को पास अपने बुलाता है।
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पीपल का हर पत्ता
राम राम नाम को जपता है।
तभी तो पीपल का पत्ता
इतना प्यारा लगता है।
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त्रिदेवों ने जिसे अपना वास स्थान बनाया है ।
आखिर वही तो पीपल का पेड कहलाया है।
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पीपल के पेड की पूजा करने से
पुण्य के द्वारा खुल जाते है।
जब देखा जाए सच्चे मन से
तो पीपल में भी शिव दिख जाते है।
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पीपल का पेड तो
राहगीरों को छाया देता है।
तभी तो पीपल का पेड
कोई काटने न देता है।

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कानों मे बाली पहनने वाली
तु पीपल को क्या पुजेगी।
अरे है यह संतो का डेरा
यहां रहकर तु क्या करेगी ।
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सुना है तु पीपल के पेड की पूजा करती है
शायद तभी तु शिव के करीब रहती है।
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पीपल के पेड की जो पूजा करता है
वो दिल हमेशा शिव के पास रहता है।
अरे बसता है त्रिदेवों के दिल में
इतना तगडा भक्त वह होता है।
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जो पीपल के पेड के पास
तपस्या दिन रात करता है।
वो माथे पर भस्म की राख लगाता है
शायद तभी वो शिव के बरीब होता है।
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भस्म से नहाने वाले
पीपल के पेड के पास रहते है।
अरे पूजते है पीपल को शिव समझकर
तभी तो शिव के करीब वो रहते है।
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भस्म मे लिपटकर वो
पीपल के पास जाकर बैठ गया।
जपने लगा शिव के नाम को
जब तपस्या वो करने लगा।
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पीपल का पेड तो
भक्ती का गीत गाता है।
बसते है उसमें त्रिदेव
उनका नाम बताता है।
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पीपल के पेड की पूजा करने वाले
शिव के प्रिय भक्त होते है।
अरे डालते है पीपल में पानी
तभी तो वो खुश बडे रहते है।

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पीपल की जडों मे
ब्रह्मा जी का वास होता है।
अरे पूजता है जो पीपल को
उसपर आशीर्वाद त्रिदेव का होता है।
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पीपल की पूजा करने वाले
धार्मिक बडे होते है।
शायद तभी तो वो
पीपल में पानी डालते है।
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जो पीपल की पूजा करता है
शनिदेव उसका कुछ बिगाड सकता नही है।
अरे होता है वो त्रिदेवों का प्रिय
तभी तो मुश्बितों से वो डरता नही है।
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पीपल के एक एक पत्तें मे
विष्णु का वास होता है।
जब पूजता है भक्त पीपल को
खुश विष्णु का दिल होता है।
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पीपल के पेड की एक एक परिक्रमा से
जन्मों जन्मान्तरों के पाप मिट गए।
जो न किए थे अच्छे कर्म
उनको पुण्य के फल मिल गए।
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अरे होते है वो लोग मुर्ख
जो पीपल के पेड को काटते है।
देते है जो सबसे ज्यादा आक्सिजन,
उन्हे अपने हाथों से उखाडते है।
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जो पीपल का पेड लगाता है
उस पर आशीर्वाद त्रिदेवों का होता है।
शायद तभी तो वह व्यक्ति
जिंदगी में खुश बडा होता है।
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जब आते है जीवन में कष्ट
तो शिव की कृपा काम आती है।
अरे पूजते है हम पीपल को
तभी तो त्रिदेवों को याद मेरी आती है।
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लक्ष्मी भी उनके भाग्य में बसती है
जो पीपल के पेड की पूजा करते है।
अरे मिलती है सफलता भी उनको
जो ईश्वर में विश्वास रखते है।
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तो यह शायरी पीपल के पेड पर शायरी है, अगर आपको इस प्रकार की शायरी ओर चाहिए तो हमें कमेंट में बताए । हम आपके लिए एक खास प्रकार की शायरी लिखने वाले है।
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