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गुलमोहर एक सजावटी वृक्ष है, जिस पर लाल रंग के फूल लगते है जो की देखने में ऐसे लगते है जैसे की वृक्ष ने लाल चादर ओढ रखी हो। और इन फूलो को गुलमोहर का फूल कहा जाता है।
आपको बता दे की इस पेड को ‘फ्लेम ट्री’ के नाम से भी जाना जाता है। और इसके फूल काफी प्रसिद्ध है। क्योकी यह अधिकर उन जगहों पर खिलते है जहां की जलवायु अधिक गर्म होती है। और इसी के कारण से गुलमोहर का फूल काफी प्रसिद्ध है।
और आज के इस लेख में हम इन्ही गुलमोहर के फूलो पर शायरी लेकर आए है, तो आइए शायरी पढे।
गुलमोहर के फूल पर 182+ शायरी gulmohar par shayari

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तपती धरती पर भी
गुलमोहर का फूल खिल गया।
देखकर सुरज की चमक को
फूल आग सा तप गया।
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गुलमोहर की छांव मे बैठा
तो तन शीतल हो गया।
अरे आती रही खुशबू की महक
तभी दिल मेरा महक गया।
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तन्हाई भी खिल उठती है
जब गुलमोहर का फूल खिलता है।
अरे देता है छाव इसका पेड बडा
तभी तो दिल ठंडा रहता है।
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लाल लाल गुलमोहर के फूलों ने
तपती धरती को भी महकाया है।
सजाकर गुलमोहर के पेड को
दुल्हन सा बनाया है।
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गुलमोहर के लाल लाल फूलो ने
वृक्ष को दुल्हन सा सजा रखा है।
महकती रहे यह तपती धूप
इसलिए फूलों ने खुशबू का जादू चला रखा है।
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गुलमोहर के फूलों को
सूरज भी तपा न सका।
खिलते रहे तपती धुप में यह
ओर सुरज तक सुका न सका।
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गुलमोहर की डाली पर
जब लाल फूलों की छाव आती है।
देखकर दिल की धडकन भी
खुशी से खिल उठती है।
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गुलमोहर के फूल ने
दिलों को महकाया है।
फैलाकर खुशबू का जादू इसने
सूरज को भी दिवाना बनाया है।

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जब गुलमोहर का फूल खिलता है
सूजर पर भी खुद पर हंसता है।
अरे बिगाड सकता नही वह कुछ
तभी तो बादलों मे छिपता रहता है।
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सूरज की तेज धूप में
गुलमोहर का फूल जलता है।
फिर भी खिलकर यह
दिलों को महकाता है।
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गुलमोहर के फूलों ने
बडा सितम ढाया है।
तपती धरती पर रहकर
चांद को भी तरसाया है।
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गुलमोहर का फूल जब खिलता है
धरती भी दूल्हन सी महकती है।
अरे देखता है गुस्से से सूरज इसे
फिर भी फूलों की खुशबू बडी महकती है।
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मोगरा का फूल भी
चांद से इश्क करता है।
तभी तो तपती धुप में
गुलमोहर का फूल खिलता है।
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गुलमोहर के फूल सी
तुम दिन रात महकती हो ।
देती हो दिल को खुशबू इश्क की
जब पास तुम मेरे आती हो।
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तेरा हुस्न भी मुझे
गुलमोहर का फूल लगता है।
तभी तो देखकर इसे
मेरे दिल बडा तेज धडकता है।
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सूरज की तपती धुप का
गुलमोहर श्रृंगार करता है।
आखिर तभी तो गुलमोहर का फूल
इतना खूबसूरत खिलता है।

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गुलमोहर का फूल जब खिला
तो मोसम भी तपने लगा ।
अरे निकला सुरज धरती पर
ओर धरती को जलाने लगा ।
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गुलमोहर की डाली पर
इश्क की छांव मिलती है।
तभी तो तेरे हुस्न से
फूल की खुशबू आती है।
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गुलमोहर का फूल भी
इश्क की कहानी लिखता है।
अगर बिछड जाए आशिक
तो महोब्बत का कष्ट सहता है।
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गुलमोहर के फूलों जैसा
मेरा दिल हो गया ।
तभी तो देखकर इसे
दुश्मन जल गया ।
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गुलमोहर का जब फूल खिलता है
सूरज की रोशनी बडी तपती है।
फिर भी बिडता नही कुछ भी फूल का
तभी तो सूरज पर दुनिया हसंती है।
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जब होंठो पर लाल तुम लगाती हो
गुलमोहर का फूल तुम लगती हो।
करता है इश्क तुझे चांद भी
जब अंधेरी रात में निकलती हो।
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काली काली आंखो से
जादू तुने फैलाया है।
महक कर गुलमोहर सा
इश्क का रह पिलाया है।
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गुलमोहर का फूल भी
चांद पर हंसता होगा ।
जब तपती धुप में
फूल इतना ज्यादा महकता होगा।
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गुलमोहर के फूलों से रास्ते कई सजते है।
तभी तो इश्क के साथ दिल को मिलते है।
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गुलमोहर के फूलों ने
घर को बाग बना रखा है।
महका कर पूरे घर को
खुशबूदार बना रखा है।
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गुलमोहर के फूलों ने
दिल में सपने कई सजाया है।
रहकर बुरी परिस्थति में
सफल होने का राज बताया है।
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उसके घर में गुलमोहर का फूल खिलता है
तभी तो आशिक उसे दिन रात देखता है।

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गुलमोहर के फूलों सा
चमकता उसका चेहरा है।
तभी तो दिल कहे ,
वो प्यारा मुखडा मेरा है।
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गुलमोहर का फूल भी
चांद को दिवाना बनता है।
तपता है सूरज की धूप में
फिर भी सूजर को जलाता है।
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सूरज को जलाने के लिए
गुलमोहर ने चांद से इश्क है किया।
न बिगाड सके सूजर भी उसका
इसलिए तपती धुप मे खिलना शुरु किया।
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जब गुलमोहर का फूल खिलता है
राहो मे भी छांव मिलती है।
अरे मिलता है दिल को बडा सकुन
जब चारों ओर धरती महकती है।
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वो काजल आंखो में लगाती है
तभी तो गुलमोहर का फूल लगती है।
चमकती है चांद जैसी वो
जब सूरज को देखती है।
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मोगरे के फूल उसके बालों मे सजते है
जब गुलमोहर के फूल बरसते है।
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गुलमोहर के फूलों ने
उसका स्वागत किया है।
बनाकर उसे स्वर्ग की रानी
उसके दिल को खुश किया है।
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जब आओगी मिलने हमसे
गुलमोहर का फूल स्वागत करेगा।
बरसेगा फूल तुझ पर
ओर तुझे रानी का अहसास देगा।
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गुलमोहर का फूल भी
इश्क का साथी बन जाता ।
यदि वह गुलदस्ता बनकर सज जाता ।
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जब गुलमोहर का फूल खिलता है
धरती भी सूरज सी चमकती है।
देखता है सूरज जब धरती को
तो धडकन उसकी बढती है।
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गुलाब का फूल भी बडा महकता है।
पर उसकी खुशबू भी फिकी पड जाती है।
जब तपती धूप में भी
गुलमोहर के फूल को हंसी आ जाती है।

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गुलमोहर का फूल जब खिलता है
तो बाकी फूल फिके लगते है।
अरे तपती है धरती इतनी तेज
कि फुल पानी को तरसते है।
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सूरज की तेज धूप ने
फूलो का बुरा हाल कर रखा है।
तभी तो मैंदान में
गुलमोहर के फूल ने कदम रखा है।
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जब तपती है धरती सूरज से
तो पानी को फूल तरसते है।
मगर फिर भी गुलमोहर के फूल
हंसकर खिलते है।
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गुलमोहर का फूल जब खिलता है
सूरज भी रुककर देखता है।
अरे चमकता है इसका लाल फूल
जैसे सूरज की रोशनी भर भरकर पीता है।
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गुलमोहर का फूल तो
सूरज की रोशनी का दिवाना है।
पीता है भर भर प्याले यह
जैसे तपती धूप का प्यासा है।
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जब चारों ओर तपती धूप होती है
तब गुलमोहर के फूल की हंसी गुंजती है।
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तेरी बातें भी गुलमोहर सी लगती है,
जैसे सूरज की किरणों मे तु खिलती है।
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जब होता है चारों ओर ठंडा मोसम
गुलमोहर का फूल मुर्झा जाता है।
जब तपती है धरती सूरज की किरणों से
तब जाकर गुलमोहर खिल उठता है।
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तपती सडकों का श्रृंगार
गुलमोहर का फूल करता है।
तभी तो सडकों से गुजरनें
वालो को बडा मजा आता है।

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तपती धूप में गुलमोहर ठंडक देता है।
ओर महकाता है दिल को बडे प्यार से
जब दिल को सकुन प्यार का देता है।
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मुश्किलों मे भी जो हार न मानें
आखिर वही तो गुलमोहर का फूल बने।
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गुलमोहर की लाली ने
गुलाब को भी फिका बनाया है।
सजाकर सडकों को
बाग बगीचा बनाया है।
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गुलमोहर के फूलों ने
बाग बीचों को सजाया है।
तपती धूप में खिलकर इसने
ठंडक का अहसास दिलाया है।

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गुलमोहर का फूल तो
दिलों को खिलाता है।
देकर इश्क की ठंडक
प्यार का रस पिलाता है।
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जब गुलमोहर का फूल खिलता है
हर दिल बडा मुस्कुराता है।
तपती धूप में मिलती है ठंडक
जब गुलमोहर के नीचे बैठता है।
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गुलमोहर के फूल में
ना कोई खुशबू होती है।
मगर फिर भी तपती धूप में इससे
राहगीरों को छाव मिलती है।
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गुलमोहर की छांव मे
राहगीरों को सकुन मिलता है।
तभी तो गुलमोहर का फूल
दिन की तपती धूप में खिलता है।
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तपती धूप में भी ठंडक का अहसास जो देता है
आखिर वही तो गुलमोहर का फूल बनता है।
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लाल फूलो की बारिश ने
राहगीरों का स्वागत किया है।
सजाकर सडकों को बगीचे जैसा
ठंडक का अहसास दिलाया है।
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गुलमोहर का हर एक फूल
राहगीरों के दिल में बसता है।
देता है ठंडक का अहसास दिल में
तभी तो फूल ज्यादा खिलता है।
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जो गुजरते है सडकों से
उनका मन बडा लगता है।
जब सडको पर
गुलमोहर का फूल खिलता है।
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गुलमोहर भी लाल चुनडी ओढता है
जब फूल इससे निकलता है।
अरे महकता है हर दिल
जब फूल स्वागत उनका करता है।
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जिस घर में गुलमोहर का फूल खिलता है
वह घर सूरज से तेज चमकता है।

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गुलमोहर के फूल ने
जादुई बगीचा बनया है।
न पहुंचा सके सूरज हानि
इसलिए ठंडक का जाल बनाया है।
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तेरे लाल गुलाबी गाल
गुलमोहर के फूल लगते है।
देखते है इनहे हम दिन रात
क्योकी महब्बू हम तेरे लगते है।
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तेरे लाल होठ भी फिके रह जाते है।
जब गुलमोहर के फूल खिल जाते है।
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जब करती हो तुम लाल होठ
गुलमोहर का फूल लगती हो।
देती हो दिल को ठंडक का अहसास
इस कदर तुम AC की दुकान लगती हो।
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AC भी गर्म हो जाती है
जब सुरज की रोशनी आती है।
पर महकता है गुलमोहर का फूल
जब जब तेज धूप आती है।
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जब घर में गुलमोहर का फूल खिल जाता है।
घर का हर एक कोना महक जाता है।
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जब गुलमोहर का फूल खिलात है
सूरज भी आग फैलाता है।
पर मिलती है ठंडक बडी
जब गुलमोहर के निचे कोई बैठता है।
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लाल फूलों से जादू फैलाकर
गुलमोहर ने बेकाबू दिलों को किया है।
न मिल सके छांव कही पर
ऐसा हाल सूरज ने किया है।
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लाल फूलो के जादू से
गुलमोहर ने दिल का बुरा हाल किया है।
फैलाकर इश्क का जादू चांद तक
चांद को भी दिवाना बनाया है।
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जब गुलमोहर का फूल खिलता है
हर दिल से प्यार यह करता है।
देता है छांव का सकुन बडा
जब सूरज तेज चमकता है।
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गुलमोहर के फूल ने
लाल फूलों से राहों को सजाया है।
तपती धूप में भी इसने
बडा खुब इश्क का रंग जमाया है।

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जो गुजर जाता है वक्त
उसे याद नही रखता है।
तभी तो गुलमोहर का फूल
दिल रात खिलता है।
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जो होता है कठीन वक्त
उसकी परवाह नही करता है।
जब गुलमोहर का फूल
लाल चुनडी ओढता है।
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तपती धूप में जल जाता है
मगर फिर भी गुलमोहर खिल जाता है।
करता है राहगीरों का स्वागत फूलों से
तभी तो फूल सूरज से तेज चमकता है।
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बालों मे गुलमोहर का फूल लगाकर
आशिकों का बुरा हाल कर दिया।
चमकर कर उसने चांद जैसा
चांद को भी फैल कर दिया।
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लाल साडी जब वो पहनती है
गुलमोहर की फूल लगती है।
करकर मेरे दिल से बातें
वो रोग इश्क का देती है।
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गुलमोहर का फूल जब खिलता है
जान मेरी श्रृंगार के लिए तरसती है।
लगाती है फूलों को अपने बालों मे
तब जाकर वो खूबसूरत लगती है।
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गुलमोहर के फूलो का ताज
सिर पर पहन लिया।
लगा कर होंठो पर लाली
दिल का बुरा हाल कर दिया।

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आशिक मेरा गुलमोहर का फूल बन गया।
खुद तपती धूप में खिलकर
दूसरों को ठंडक का अहसास दे गया।
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सुना है गुलमोहर का फूल
तु बालों मे सजाती है।
चमकती है तु चांद जैसी
तभी तो चांद को दिवाना बनती है।
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गुलमोहर की खुशबू ने
चांद के दिल का बुरा हाल किया है।
बनाकर चांद को दिवाना
फूल ने इससे प्यार रात भर किया है।
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गुलमोहर की छाव में
रहकर हम जीवन बिताएगे।
अगर आएगा संकट गुलमोहर पर
तो हंसते हंसते जान अपनी लुटाएगे।
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गुलमोहर के फूल ने
दिल का राज खोला है।
अरे खिलता है तपती धरती में
फिर भी चारो ओर खुशबू का रोला है।
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जब गुलमोहर का फूल
आंगन में खिलता है।
घर का मोहल भी
खिल उठता है।
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गुलमोहर का फूल भी गजब ढाता है।
देकर छाव दिल में सकुन फैलाता है।
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गुलमोहर के फूलों जैसा
तेरा दिल लगता है।
तभी तो इसकी छाव में
मेरा दिल छिपकर रहता है।

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सुरज के निकलने पर
गुलमोहर का फूल तपता है।
मगर फिर भी फैलाता है खुशबू तेज
शायद तभी यह इतना बिकता है।
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इस तरह से दोस्त, गुलमोहर के फूल पर शायरी कैसी लगी, कमेंट में जरूर बताना ।
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