181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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दोस्त, आपका स्वागत है हमारे शायरी के ब्लॉग padhakushayari.in में, और आज हम आपके लिए  gaal ke til par shayari लेकर आए है, जहां पर हम केवल गाल के तिल पर शायरी जानेगे ।

गाल हमारे शरीर का सबसे खूबसूरत अंग है, और एक महिला का गाल तो उसकी सुंदरता का घर है। क्योकी खूबसूरती हमेशा गलों से शुरु होती है। और कहते है कि यदि गालों पर तिल हो, तो ओर भी खूबसूरत लगता है।

इसलिए हर उस गाल पर तिल खूबसूरती से खिलता है, जिसे निगहे आपकी प्यार से देखती है। और यदि आपके महिला मित्र के गाल पर तिल है, या फिर आपके पुरुष मित्र के गाल पर तिल है। तो उस तिल की तारिफ में कुछ शायरी हमने लिखी है। जिन्हे आप पढ सकते है।

तो आइए दोस्त, गाल पर तिल पर शायरी पढे और शायरी के माध्यम से तिल की तारिफ करे,

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तेरे गाल का तिल भी

मेरे दिल पर वार करता है।

चुमकर तेरे गाल को,

तुझसे प्यार तिल करता है।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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तेरे गाल पर जो प्यारा सा तिल है,

वह मुझे देखकर खुब हंसता है।

छु कर तेरे गालों को प्यार से,

मेरे दिल तक को जलाता है।

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तेरे मुस्कुराने पर

तेरे गाल का तिल महकता है।

जैसे चमकता हो आसमान में चांद,

उसका रखवाला तिल तेरा लगता है।

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तेरे चांद से मुखड़े पर

तिल दाग सा लगता है।

मगर जब मुस्कुराती हो तुम

यह तिल बडा महकता है।

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तेरे चेहरे पर जो यह तिल है,

उसे देखकर तुझे चुमने को मन करता है।

लगती है तु इतनी ज्यादा खुबसूरत,

कि तुझे पाने को दिल मेरा करता है।

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गाल पर तेरे जो तिल है,

उसी से धड़कन मेरी है।

जब चलती है तु साड़ी पहनकर,

दिल कहे यह तो दिवानी तेरी है।

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तेरी खूशबू के पीछे पीछे,

तेरे घर तक हम आ गए ।

जब देखा तेरे गाल पर तिल,

तुझे पसंद हम कर गए ।

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तेरे गाल पर जो यह तिल है

उसने बर्बाद मुझे ​खुब किया है।

लिपटकर तेरे गालों से,

मेरे दिल को खुब जलाया है।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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तेरी कातिल आंखो से बच सके

ऐसा आशि​क तेरी कोई नही ।

जो तेरे गाल के तिल की तारिफ ने करे,

ऐसा दिल मेरा तक नही ।

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मेरे दिल में बस तेरा ही घर है,

तभी तो तेरे गाल पर प्यारा सा तिल है।

न जाने देगे तुझे अपने से दूर कभी,

क्योकी तेरे महल के पास ही तो मेरा महल है।

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एक कदम रखकर तु मायके चली जाएगी,

दूसरे कदम में तु ससुराल आ जाएगी।

जब मुस्कुराएगी तु प्यार से,

तेरे गाल के तिल की रोनक बढ जाएगी ।

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तेरे गाल पर जो तिल है

उस पर लाखो धड़कने मरती है।

जब मुस्कुराती है तु प्यार से,

धड़कने तक खिल उठती है।

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तेरे गाल के तिल ने

कई आखिक तेरे बना रखे है।

जिधर से निकले तु,

उधर तुने अपने घर बना रखे है।

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हम तो तुझ पर फिदा हुए

तेरे गालों पर तिल देखकर।

मर मिटने को तैयार तक हुए,

तेरे हुस्न की झलक देखकर ।

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तुझे पाने के लिए सागर को पार कर ले,

अगर तु बसा ले मुझे अपने दिल में,

तो तेरे गालों केा हम चूम ले ।

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तेरे गालों का तिल

एक छोटी चिंगारी है।

तेरे दिल में जो आग लगा दे,

वो आशकि हमारी है।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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तेरे ​गालों के तिल का असर,

मेरे दिन पर इसकर छाया है।

कि तुझे दूर देखकर भी ,

तुझे अपने घर में बसाया है।

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रहती है तु मुझसे दूर,

तेरे गाल के ​तिल को कैसे देखू।

करता हूं तुमसे इश्क इतना सारा,

कि तेरे बिना मैं कैसे जीना सिखू ।

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जबसे मुझे इश्क तेरे गाल के तिल से हुआ है,

मेरे दिल का बडा बुरा हाल तक हुआ ।

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जब जब तेरे ​गाल के तिल को देखता हूं,

कसम से जान मेरा दिल जोर से धड़कता है।

लिपटा रहता है तेरी गालों से तिल,

देखकर मेरा दिल भी खुब जलता है।

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तेरे गालों के तिल का असर,

गली के हर छोरे पर हो रहा है।

देखकर तेरे तिल को,

हर किसी का बुरा हाल हो रहा है।

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तेरे गाल के तिल की खूशबू,

वहा के साथ मेरे घर तक आ गई।

सो रहा था मैं चेन से

तभी तेरी याद मुझे तड़पा गई।

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तेरे गालों का तिल किस्मत का घर है।

जिधर निकले तु उधर तेरे आशिक का घर है।

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घर से निकलोगी तो सामने मेरा घर होगा,

करेगे तुम्हे दिन रात प्यार मेरी जान,

जब तेरे गालों पर प्यारा सा तिल हमारा होगा ।

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मेरे नाम का तिल तुने,

गालों पर बसा रखा है।

लेकर मेरे इश्क जाम तुने,

होठो पर मुझे सजा रखा है।

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तेरे चेहरे की खूबसूरती पर

चार चांद तेरे गाल का तिल लगाता है।

जब निकलती हो तुम घर से,

तुझे खूशबूदार यही तिल बनाता है।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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तेरे गाल पर जो तिल है

उसकी खुशबू ने मुझे मदहोश कर दिया।

तेरी प्यारी सी मुस्कान ने,

मुझे आशिक तेरा बना लिया।

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तेरे चेहरे पर जो तिल है

वो चांद की तरह चमकता है।

जब मुस्कुराती है तु,

तेरे गाल का तिल खूशबू फैलाता है।

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गुलाब का फूल हो तुम

सपनों मे देखा वो नूर हो तुम।

है तुम्हारे गालों पर प्यारा सा तिल,

तभी खूशबू का घर हो तुम।

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तेरे गालों पर जो तिल है

उसने मेरे दिल को खूशबूदार कर दिया।

लिपटकर तेरे गालों से तिल ने

मुझे बर्बाद तक कर दिया।

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जब देखता हूं तुझे दूर से,

तेरे गाला का तिल नजर आता है।

लगती है तु चांद उसे उतरी रानी,

तभी तो तेरा यही तिल खुशबू फैलाता है।

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मेरे दिल को जिसने अपनाया,

वो दिल तेरा है।

जिसने मेरे दिल को जलाया

वो गालों पर तिल तेरा है।

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तेरे गाल के तिल की खूबसूरती ने,

मेरे दिल को अपना दिवाना बना लिया।

और तेरे होठो की मुस्कान ने,

तेरे गाल के तिल को चमका दिया ।

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जब देखते है तेरे गालों के तिल को,

तेरे ख्वाबों मे हम खो जाते है।

जब आती है तेरे इश्क की याद मुझे,

तुरन्त रोने हम लग जाते है।

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मेरा दिल कमजोर है जानम,

इसे तुम न तरसाया करो।

है जो तेरे गालों पर तिल,

उसे इतना न सजाया करो।

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तेरी चांद सी सुरत ने

मेरे दिल को धड़कना तक सिखाया।

ओर है जो तेरे गाल पर तिल,

उसने मुझे दिवाना तेरा है बनाया ।

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तेरी तस्वीर को जब जब मैं देखू,

तेरे गाल का तीन नजर मुझे आता है।

है इतना खूबसूरत तेरा यह तिल,

तभी तो आशिकों को इसे देखने में मजा आता है।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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तेरे गाल पर जो तिल है

वह देखने में कितना क्यूट लगता है।

देखता रहूं इसे दिन रात मैं,

ऐसा हमसफर यह मेरे इश्क का लगता है।

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जब तु मस्कुराती है,

गाल का तिल ओर खूबसूरत बनता है।

देखकर तेरे हुस्न की अदाओं को,

आशिकों का दिन बनता है।

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तुझे देखने के लिए मैं

छत पर आता हूं,

तेरे गाल के तिल को

अपना बनाना मैं चाहता हूं।

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जब तु मुस्कुराती है,

गालों मे डिंपल पड़ता है।

ओर उपर से तेरे गाल का यह तिल,

मेरे दिल  के पीछे पड़ता है।

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तेरे गाल का तिल

मुझे छिप छिपक कर देखता है।

तुझसे ज्यादा तो इश्क मुझसे,

तेरे गाल का यह तिल करता है।

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तेरे तिल की अदाओं ने,

दिल मेरा जीत लिया ।

जो था कभी तेरे हुस्न का दिवाना,

उसे तेरे गाल ने अपना बना लिया।

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तेरे गाल के तिल को जो देखता है

उसकी नजरे वही ठहर जाती है।

देखकर तेरी नशीली आंखो को,

दुनिया उनकी पलट जाती है।

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तेरे नाक मे नथनी मेरे नाम की हो,

जो गाल पर तिल है उसमें खूशबू मेरी हो।

कर सके न तुझे कोई भी बदतमीजी,

जब जान तुम मेरी अपनी हो ।

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तेरे गाल के तिल को देखकर

हर छोरा तेरा दिवाना हुआ है।

देखकर तेरी मुस्कान को,

उन्हे इश्क तुझसे हुआ है।

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ना लगाया करो होठो पर लाली,

देखकर इन्हे दिल मेरा तड़ता है।

कम नही है तेरे गाल का यह तिल,

जो ​मुझे छिप छिपकरक देखता है।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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तेरे गाल पर तिल छोटा है,

तभी तो यह इश्क मे मोटा है।

रहता है हमेशा मुस्कुराता यह

लगता है इसका तुझे बडा नाता है।

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तेरे गाल के तिल ने

मुझसे प्यार है किया ।

जब नही देखती तु मुझे,

इसने मुझे देखना शुरु है किया।

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तेरे गाल का यह तिल

मेरी खूशबू का साथी बन गया।

करकर इसने इश्क का इजहार मुझसे,

मेरे जीवन का इकलोता साथी बन गया।

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जान तेरे गाल पर जो तिल है

वह भी इश्क की बाते खूब करता है।

नही करता है यह मुझसे बाते,

बल्की यह तिल भी नखरे करता है।

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तेरे सारे नखरे बेकार है

तेरे गाल के तिल के सामने ।

लगती ही क्या होगी तेरी खुशबू,

तेरे गाल के तिल की खूशबू के सामने।

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जब तु पास नही होती है,

तेरे गाल का तिल बहुत याद आता है।

किया था जो तुने प्यार का इजहार,

वो पल मुझे खूब याद आता है।

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तेरे चांद से मुखड़े पर,

काला गाल पे तिल है।

हो गया मुझे इससे खूब प्यार,

तभी तो मेरे पास तेरा दिल है।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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जिस दिन तेरे गाल के तिल को न देखू

मेरा दिन बेकार गुजरता है।

देखकर तेरे गाल के तिल को,

मेरा दिन गुलाब की तरह महकता है।

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तेरे गाल पर जो तिल है

उसने तुझे गुलाब बना रखा है।

नही लगता है यह गाल पर बुरा,

बल्की इसी ने तुझे खूशबूदार बना रखा है।

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जब देखता हूं तेरे गाल के तिल को,

मेरे दिल को न जाने क्या सकून मिलता है।

जब छू लू मैं इस तिल को अपने हाथों से,

इसकी खूशबू का रंग मेरे रंग मे मिलता है।

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तेरी आंखे भी किसी नशे से कम नही,

हर आशिक को इसने नशीला बना रखा है।

नही है कम तेरे गाल का तिल भी,

इसी ने तुझे खूशबूदार बना रखा है।

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तेरे गाल के तिल को देखकर,

हर छोरी इससे जलती है।

क्योकी इसकी खूशबू

आशिक अपने कई बनाती है।

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अगर न होता तुझसे दूर तो जान

तेरे गाल के तिल को छू लेता।

करता तेरे इस तिल कि इतनी तारफि,

कि तुझे अपने दिल की रानी बना लेता ।

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तेरे गाल के तिल की तारिफ करकर

तेरे दिल को मैंने जीत लिया।

जो है तेरे पास हिरे जैसा दिल,

उसमें घर मैंने अपना बना लिया ।

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तेरे गाल के तिल को देखने के लिए

दिन रात गिन—गिनकर मैं बिताता हूं।

अगर आ जाओ पास तुम मेरे अभी,

तो तुझे इसका असर अपने दिल पर दिखाता हूं।

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तेरे गाल के तिल ने

मेरे दिल पर बडा असर किया है।

जो धड़कता था कभी मस्ती में,

उसे बेहोश तेरे तिल किया है।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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तेरे गाल के तिल को देखकर

दिल मेरा बेहोश हो गया ।

कैसे हो सकता है इतना खूबसूरत कोई,

यह मेरा दिल कह गया ।

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सुना है तेरे गाल के तिल ने

मेरा घर तेरे दिल में बनाया है।

करकर तेरी ​तारिफे इसने,

मुझे तेरा दिवाना बनाया है।

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सुना है तुझे पानी बहुत पसंद है,

तभी दिन रात पानी में तुम रहती हो।

करती हो अपने गाल के तिल की रखवाली,

जैसे तिल की खूशबू पर तुम चलती हो।

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तेरे गाल के तिल को देखकर

कईयों की धड़कने दोडती है।

जब लगे तिल पर चोट,

तो कई धड़कने दुखी होती है।

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तेरे गाल के तिल को देखकर,

मेरे दिल ने भी एक शायरी लिख दी।

जो कभी हो नही सकती पूरी,

ऐसी प्रेम कहानी इसने तेरी मेरी लिख दी।

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तेरे गाल के तिल को देखकर,

मेरा दिल दिवाना हो गया है ।

देखकर तेरी चांद सी सूरत को,

दिल का तो बुरा हाल हो गया।

181+ गाल के तिल पर शायरी (तिल की तारिफ में दो अल्फाज)

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एक बार फिर तेरे गाल के तिल ने

मेरे दिल पर वार है किया।

करकर इश्क की बाते इसने,

मेरे दिल का बुरा हाल तक किया।

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तेरे गाल के तिल को देखना,

तो एक बहाना है जान।

आखिर मुझे तो,

दिन भर तुझे देखना है जान।

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तेरे गाल के तिल के नाम से,

दिन भर मैं तुझे देखता रहता हूं।

लेकर नाम में इसी तिल का,

तारिफें तेरे हुस्न की करता हूं।

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अगर गाल पर तिल हो,

तो हमारा दिल भी हार जाए।

अगर ऐसी महब्बूबा हमारे पास हो,

तो हमारा दिल भी इश्क में खिल जाए।

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तेरे गाल के तिल का साथ मिलने पर

मेरा दिल खुशी से फुलने तक लगा।

देखकर तेरे होठों की लाली,

इन्हे चुमने यह तक लगा ।

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सुना है तेरे गाल के तिल ने

छोरों का दिल बेहाल कर रखा है।

करकर उनसे इश्क की बाते,

उनका जीना दुश्वार कर रखा है।

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इश्क में तेरा गाल का तिल भी

बडी खुब बाते करता है।

कभी चुमता है तेरे गालों को,

ओर दिल मेरा खुब जलाता है।

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तो इस तरह से दोस्त, गाल पर तिल शायरी कैसी लगी । यदि आपको शायरी पसंद आई हो तो कमेट में जरूर बतना ।

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