153+ Dushman Dost Shayari (दुश्मन दोस्त के लिए दो अल्फाज)
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दोस्त, आपका स्वागत है हमारे शायरी के ब्लॉग padhakushayari.in में, और आज हम आपके लिए dushman dost shayari लेकर आए है, जहां पर हम केवल दुश्मन दोस्त के लिए शायरी जानेगे ।
दोस्ती वो रिश्ता है जो की सभी रिश्तों से अलग होता है। जब जरूरत होती है , जब दुख होता है तब दोस्ती का रिश्ता ही पहले काम में आता है। मगर दोस्ती में भी कुछ दुश्मन होते है । जिन्हे दोस्त ही दुश्मन कहा जाता है।
और आज के इस समय में इस प्रकार के दोस्त ही दुश्मन बहुत सारे है । अभी आप जिस दोस्त के साथ रहते हो, क्या पता आगे जाकर वही दुश्मन बन जाए । क्योकी किसी के दिल में क्या चल रहा है यह तो हम पता लगा नही सकते है।
आपने आस्तीन के सांप का नाम सुना होगा, यह उन्ही को कहा जाता है जो की दोस्त ही दुश्मन होता है। और सच कहे तो ऐसा हर किसी के साथ होता है। हम जिसके साथ रहते है, वही किसी दूसरे के साथ हमारी बुराईयां करता है । तो यह दोस्त दुश्मन से ज्यादा खतरनाक होता है। क्योकी इस दुश्मन को हमारे बारे में सब कुछ पता होता है।
और आज इस लेख में हम दश्मन दोस्त पर शायरी लेकर आए है, तो आइए शायरी पढे,
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अगर दोस्ती किसी से करने का मन हो,
तो अपने दुश्मन से राय लेनी चाहिए ।
क्योकी कुछ दोस्ती ही दुश्मन होते है,
उनका पता पहले ही लगाना चाहिए ।

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दोस्त बनाने से पहले
उन्हे आजमाना होता है।
यह जमाना ही ऐसा है यारो,
अक्सर दोस्त ही दुश्मन होता है ।
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अपने दोस्त पर भरोषा कर कर
राज दिल का मत खोलना,
होते है अक्सर दोस्त ही दुश्मन
जो है दिल में उसे छिपाकर ही रखना ।
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दुश्मन पर भरोषा कर लेना
पर दोस्त पर नही करना ।
क्योकी दुश्मन सामने से वार करता है,
और दोस्त पीठ पर वार करता है।
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दुश्मनों से खतरना तो दोस्त होते है,
जो अपने पास रह कर भी पराय होते है।
न जाने क्या बिगाडा होता है हमने उनका,
जो दोस्ती में ही दोस्त दुश्मन होते है।
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दिल जिसे अपना समझता है,
वो किसी ओर का निकलता है।
जिसे मानते है जमाने में दोस्त,
आखिर वही दुश्मन क्यों निकलता है।
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एक लड़की के लिए
दोस्त ही दुश्मन बन गया ।
जो जानता था हर राज मेरा,
उन्ही को खोलने वाला दरवाजा बन गया ।

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जो रहता है साथ हमेशा मेरे,
वो दोस्त मेरा निराला था ।
मुझे क्या पता था कि,
दोस्ती के भेष में वो मेरा दुश्मन था ।
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जो कभी बैठकर साथ मेरे,
दिल से मुस्कुराता था,
वही सच्चा दोस्त मेरा,
आज मुझ पर वार करता है।
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कई दुश्मन है इस जमाने में मेरे,
पर उनसे डर नही लगता है।
क्योंकी वो सामने से वार करते है,
डर तो पीठ पर वार करने वाले दोस्त से लगता है।
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खुदा की कसम
उन सभी दोस्तो का हिसाब होगा,
जो दोस्त के भेष में
असली दुश्मन होगा ।
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इस जहां को मैंने सिधा समझा,
दोस्त को भी अपना समझा ।
जब जाना दोस्त के दिल का राज,
दोस्त को ही दुश्मन मैंने समझा ।

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जिसे माना था अपना
उसी दोस्त ने धोका है दिया,
मेरा इश्क छिन्ने के लिए
वार मुझ पर किया ।
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खुदा की कसम दुश्मन को गले लगा लेते है,
पर जो होते है दोस्ती में दुश्मन,
उनके गले तक काट देते है।
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पास रहकर धोका मुझे देना नही आता,
हु दोस्त तेरा सच्चा वाला ।
कभी दोस्ती में दुश्मन बनना नही आता ।
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हमे तो अपनो ने लूट लिया,
जो कुछ था वह सब छिन लिया ।
माना था जिसे दोस्त मैंने,
उस दुश्मन ने ही वार कर दिया ।
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दोस्त वो मेरा सच्चा था,
तभी तो राज की बात मैंने उसे बताई।
क्या पता था वही दुश्मन निकलेगा,
जिसे मैंने कभी रोटी तक खिलाई।
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जिसे दोस्त मैंने दिल से माना
उसका घर अपने दिल में बनाया ।
पर उस हराम खौर ने
धोका भी दुश्मन बनकर दिया ।

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हम दुश्मनों से लडते रहे,
और दोस्तों को पालते रहे ।
जब निकला दोस्त ही अपना दुश्मन,
तो दोस्त को भी निपटाते रहे ।
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यदि दोस्त मेरा दुश्मन निकले,
तो पल भर में उसे काट दे ।
अगर हो दुश्मन में भी थाडा सा दिल,
तो उसे भी पल भर में माफ कर दे ।
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जिसे माना था खुदा से पहले,
वो अपनो की भेष मे पराय निकले ।
अब क्या दोस्त दे इस जहां को,
जब अपने ही खोटो सिक्के निकले ।
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अगर हमे गुस्सा आता
तो शांत मेरा दोस्त करता,
अब दोस्त ही दुश्मन है,
जिसे शांत मेरा गुस्सा करता ।
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मुस्कुराने वाले दोस्तो पर भरोषा न करो,
अक्सर ऐसे दोस्त ही दुश्मन होते है।
जो करते है हमेशा पीठ पर वार,
वही तो दुश्मन दोस्त होते है।

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दिल में खंजर उनके छीपा था,
जिन्हे दोस्त मैंने बना रखा था ।
जब किया मुझ पर वार पर वार,
जब जाकर दुश्मनों को पहचान सका था ।
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जिस पर मैंने भोषा किया,
वो दोस्त ही दुश्मन बन गया ।
जिसे माना रिश्तों से पहले,
वही आखिर ऐसा क्यों बन गया ।
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दोस्ती का नाम लेकर
दोस्त ही वार करता है।
फिर भी मेरा दिल न जाने
क्यों उसे प्यार करता है।
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अक्सर दिखने वाले चेहरे के
पीछे कुछ ओर होता है,
जिसे मानते हो तुम अपना दोस्त,
आखिर वही दिल से दुश्मन होता है।
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एक दोस्ती का और दुसरा दुश्मनी का
दोस्त के ऐसे दो चेहरे होते है।
मत करना इतना भी यकिन उन दोस्तो पर,
जो दोस्त के भेष में चोर होते है।
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दुश्मनों से मुझे प्यार हो गया,
जब अपना ही दोस्त दुश्मन हो गया ।
अब किस पर भरोषा करु यारो,
जब अपना ही सिक्का खोटा हो गया ।

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न जाने क्यों उसने दोस्ती का नकाब पहना,
पीठ पर वार पर वार उसने किया।
फिर भी दिल उसे दोस्त कहता,
यह कैसा मेरा हाल उसने किया ।
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खुदा कसम उस दोस्त को भी कुछ गम होगा,
तभी तो वो दोस्त के रुप में दुश्मन होगा ।
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जब निकला अपना खास दोस्त ही दुश्मन,
दिल मेरा टूट कर बिखर गया ।
पता था उस दोस्त को हर राज मेरा,
तभी तो सब कुछ मेरा वह लूट गया ।
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दोस्तों को राज न बताना यारो,
अक्सर मैंने दोस्त को धोकेबाज पाया है।
जिसे लगाया बर्सों तक गले,
उसी दोस्त को दुश्मन पाया है।
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चाय पीने के लिए हम दोस्त के
साथ बैठा करते थे,
मुझे क्या पता था वे दोस्त ही,
बातों मे जहर मिलाते थे ।
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दोस्ती के लिबास में दुश्मन मेरा छिपा था,
न जाने मैं क्यो उसे पहचान न सका था ।
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दुश्मन पर हमेशा नजर मैंने रखी,
दोस्तो पर खुदा से ज्यादा भरोषा किया ।
तभी शायद दुश्मन ही दोस्त पाया,
जिसने खंजर से वार दिल पर किया ।

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जब चोट मुझे लगती है,
तो दोस्त दवा लगाता है।
पर आज वही दोस्त दुश्मन है,
जो खुद चोट मुझे लगाता है।
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मुझे बर्बाद करने के लिए
दुश्मन दोस्त ने कई चाले चली।
हरपल वार पर वार मुझ पर हो,
ऐसी बाते लोगो के दिल मे डाली ।
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जो दोस्त साथ होता था कभी,
आज वही छुरी से काटना चाहता है।
अरे है वहो तो दुश्मन दोस्त,
जो मुझे पल भर में मारना चाहता है।
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सफलता हासिल कर लेता मैं भी,
पर मेरे अपने ही दुश्मन निकले ।
जिसे समझा था अपना सच्चा दोस्त,
वे दोस्त ही दुश्मन निकले ।
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दुश्मन की मदद हमने की थी,
दोस्त को राजा हमने बनाया था ।
आज है उसके पास लाखो का धन,
तभी तो उसने खुदको दुश्मन दोस्त बनाया था ।
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दोस्त मेरा ऐसा जो चेहरे पर मुस्कान
और दिल में जहर छुपा कर चलता है।
जो होते है दोस्त ही दुश्मन,
उन्ही से आखिर दिल मेरा जलता है।
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हमे तो अपनों ने धोका दिया,
दोस्ती के नाम का जाम खुब पिया ।
जब निकला दोस्त ही दुश्मन
छिप छिप कर खुब रोया ।
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वो दोस्ती को मजाक समझते है,
हमे भी दोस्ती का श्राप समझते है।
है हम उनके लिए वफादार आज भी,
मगर फिर भी वो हमे दुश्मन दोस्त समझते है।

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दुश्मनों ने घाव मुझ पर किया,
सिने पर जखमों का वार तक किया ।
नही है दुश्मन दोस्त मेरा,
जिसने उम्र भी साथ मेरा दिया ।
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वो दोस्त भी क्या खुब होता है,
जो दोस्ती मे खुदा से कम न होता है।
मिलते है आज दोस्त ही ऐसे,
जो दोस्त कम दुश्मन ज्यादा होता है।
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दुश्मन की वो ओकात तक नही,
जो हमे चोट पहुंचा सके ।
हमने जिस पर भरोषा है किया,
वह दुश्मन दोस्त ही वार कर सके ।
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दोस्त भी अपने मतलब के रह गए,
दोस्तों की भीड़ मे सब चोर रह गए ।
माना था जिसे खुदा से ज्यादा मैंने,
वे बस आज दुश्मन दोस्त रह गए ।
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दुश्मन दोस्त पीछे वार करता है,
मेरी खुशी से ज्यादा दुख पर खुश होता है।
अरे है यह तो दुश्मन दोस्त ,
तभी तो चोट पर चोट मुझे पहुंचाता है।
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दोस्त वो मेरे साथ हमेशा खुश रहता था।
दिल के वो सबसे करीब रहता था ।
फिर भी न जाने क्यों वो दुश्मन बन गया,
शायद पहले से उसके दिल में जहर रहता था ।
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पीठ पीछे जहर वो घोलते है,
मेरे रितशों को दूर तक करते है।
है दुश्मन दोस्त मेरे वो,
जो वार सीधे दिल पर करते है।
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दिल उस चोर ने चुराया,
पर दिल तो मेरे यार ने तोडा है।
जिसे समझा मैंने अपना सबकुछ,
वह दुश्मन दोस्त तक निकला है।

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यह कैसा दुश्मन है मेरा,
जो दिल पर सिधा वार करता है।
अरे है यह तो दोस्त ही दुश्मन,
जो छिप छिप कर बदनाम करता है।
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दोस्त ने ही दोस्त को बदनाम कर दिया,
हर गली में मुझे चोर बना दिया ।
क्या कहे उस दुश्मन दोस्त का,
जिसने मुझे जीना तक भुला दिया ।
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झुती बाते मेरी वो करता है,
लोगो के दिल मे जहर घोलता है।
दोस्त ही दुश्मन मेरा,
जो बदनाम मुझे करता है।
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हमने तो दोस्त को ही घर बना लिया,
पर दोस्त तो दुश्मन निकला,
जिसने मेरा सब कुछ लूट लिया ।
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इस जहां पर मुझे किसी पर भरोषा नही,
यहां पर तो सब के सब चोर है।
जब दोस्त ही मेरा दुश्मन निकले,
तो दुनिया वाले क्या अपने है।
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वर्षों तक पास वो मेरे रहा,
दिल पर वार पर वार किया ।
अरे है वो दोस्त ही दुश्मन,
जिसने ही मुझे बदनाम है किया ।

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सब कुछ दोस्ती में दान मैंने किया,
फिर भी मेरे दोस्त को कुछ कम ही लगा ।
जो बन गया दोस्ती दुश्मन मेरा,
ऐसा न जाने उसे क्या जख्म लगा ।
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दूर रहने वाले मेरा क्या बिगाडेगे,
उन्हे खुल की होली मैंने खिलाई है।
जो है मेरे दुश्मन ही दोस्त उनसे डर लगता है,
क्योकी उन्हे मैंने कई राज की प्याली पलाई है।
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दोस्ती में जो दोस्त रुलाता है,
पीठ मे खंजर वो रखता है।
अर है वही दुश्मन दोस्त,
जो कड़वी बात तुमसे बोलता है।
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दोस्त ने ही मुझे गहरा जख्म दिया,
न जाने ऐसा मैंने दोस्त का क्या कर दिया ।
जो बन गया दोस्त ही मेरा दुश्मन,
ओर वार पर वार उसने मेरे दिल पर किया ।
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जिसने जहर का प्याला
भर भर कर मुझे पिलाया ।
उस दोस्त को दुश्मन
मैंने अपना है बनाया ।
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जरा सी बात कहने पर
वो दोस्त बहुत गुस्सा हो गया ।
जो था वर्षों तक दोस्त मेरा,
वो दोस्त वो न जाने क्यों दुश्मन बन गया ।
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खुदा से उसकी सफलता की दुवा मैंने मांगी,
उसके इश्क के लिए मैंने मन्नते खुब मांगी,
अरे है वो तो मेरा दोस्त ही दुश्मन,
उसने तो मेरे लिए कुत्ते की मोत है मांगी ।
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उसके मुस्कुराते चेहरे पर मत जाना साहब,
दिल में उसके जहर का प्यारा पड़ा है।
नही है उसके जैसा कोई दोस्त मेरा,
क्योंकी वो खुद दुश्मन दोस्त पड़ा है।
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हमे तो इश्क ने लुट लिया,
औरों मे क्या दम था ।
जिसने दिल पर वार किया,
वह दुश्मन ही दोस्त अपना था ।
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तेरे दिल में क्या है वह पढ लु,
खुशी की दो बाते तुझसे कर लु ।
अगर है तु मेरा दुश्मन दोस्त,
तो आ फिर तुझे दोस्त बना लु ।
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तेरे से मिलने की दुवा खुदा से मैंने कि है,
लोग कहते है तुम्हे दुश्मन दोस्त,
फिर भी मैंने तेरी दोस्ती की मांग कि है।
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दुश्मनों से ही अपनी
कमजोरी का पता चलता है,
जब करता है दोस्त दुश्मन जैसा बर्ताव,
तभी तो दोस्त का पता चलता है।
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तो इस तरह से दोस्त, यह जो शायरी है वह दुश्मन दोस्त पर शायरी है। यदि आपको यह शायरी पसंद आई है तो कमेंट में जरूर बताना ।