169+ दुश्मन की औकात शायरी dushman ki aukat shayari
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दोस्त, आपका स्वागत है हमारे शायरी के ब्लॉग padhakushayari.in में, और आज हम आपके लिए dushman ki aukat shayari लेकर आए है, जहां पर हम केवल दुश्मन की औकात शायरी जानेगे ।
दोस्त, दुश्मन जीवन में हमेशा एक होना चाहिए, क्योकी दुश्मनों के बिना जीवन का वो मजा नही रहता है। क्योकी दुश्मन होने के कई फायदे होते है । एक तो वह हमे हमारी कमजोरियों के बारे में बताता है। दूसरा की जब हम उंचाईयों पर होते है तो वह देख कर खुब जलता है। और इसी जलन की जो खुशी हमको होती है वह खुब अच्छी होती है।
हर दुश्मन को जालाने का हर किसी का एक सपना होता है। और दुश्मन यदि आपका भी है तो आप जरूर उसे जलाना चाहते है। इसलिए दुश्मन होना चाहिए ।
हालाकी दुश्मन भी कुछ ऐसे होते है जो की हमारा कुछ बिगाड तक नही सकते है मगर फिर भी हमसे दुश्मनी वो खुब निभाते है। और कुछ दुश्मन तो दोस्त के भेष में भी होते है, अपनो के छाय में भी दुश्मन होते है।
और इन दुश्मनों की औकात इतनी भी नही होती है यह हमारा कुछ बिगाड़ सके । और इसी बात को ध्यान में रख कर आज हम दुश्मन की औकात पर शायरी लेकर आए है, तो आइए शायरी पढे ।
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दुश्मन की औकात तक नही,
मुझ पर वार करने की ।
अरे हिम्मत तक नही है उसकी,
मेरे सामने खड़े होने की ।

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दुश्मनी मेरे दोस्त ने कि है,
उसे निभाएगे हम ।
अरे दुश्मन की औकात क्या है,
उसे मिटाएगे तो हम।
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दुश्मन की औकात क्या होगी,
जब साथ मेरे हिरे जैसा भाई है।
खड़ा तक नही हो सकता सामने मेरे,
जब साथ मेरे अपना भाई है।
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जब दोस्त साथ होता है,
दुश्मन की औकात फिकी होती है।
जब होता है दुश्मन ही दोस्त,
तो फिर दुख भरी जिंदगी होती है।
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खुदा ने हमे नाज से पाला था,
पर हमने भी दुश्मन को पाला था ।
अरे क्या है उस दुश्मन की औकात,
जिसे हमने कई बार मिट्टी का स्वाद चखाया था ।
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नमक खाने वाले ही नमक हराम बन गए,
जो थे मेरे अपने वो ही दुश्मन बन गए ।
मगर आज भी उन दुश्मनों की औकात नही,
क्योकी वो ताक्त मेरी देखकर कमजोर बन गए ।

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सफलता हासिल करने पर
मजा तभी आता है जब कोई दुश्मन हो,
और जब तरक्की मेरी देखकर ,
खुब जलता दुश्मन हो ।
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हमे जिसने चोट पहुंचाई वो अपने थे,
दुश्मनों की औकात जरा कमी थी ।
हम मानते थे जिसे हमेशा दोस्त,
उसी की दोस्ती में जरा कमी थी ।
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चोट मुझे पहुंचाने चले थे,
जमाने की भीड़ में खो वो गए थे ।
अरे है हमारा दुश्मन ही ऐसा,
जो दुश्मन की औकात भुल गए थे ।
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दुश्मन की औकात पैरो में होती है,
और दोस्त की हमारे दिल में होती है।
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लाख वार करने पर
एक वार सफल उनका हो गया,
और दुश्मन औकात अपनी
भुलकर खुश खुब हो गया ।
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100 वार करने पर
एक वार उनका सफल हुआ,
अरे है दुश्मन की औकात ऐसी,
जो हर बार असफल वो हुआ ।
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हमे सफलता हासिल करने का क्या डर,
जब सफलता आस पास फिरती है।
है दुश्मन की ऐसी औकात,
जिनके आस पास असफलता फिरती है।

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सड़क पर चलने कि दुश्मन की औकात है,
और वो भिड़ने हमसे चले थे ।
नही है उसमें चलने का भी दम,
ओर वार मुझ पर करने चले थे ।
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दुश्मनों की औकात नही,
मेरे खिलाफ जाने की ।
जब नाम सुनते है मेरा,
तो बात से पलट जाते है।
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मेरे खिलाफ कोई जा न सके,
ऐसी दुश्मनों की औकात मैंने बनाई।
थे वो पहले बड़े मशहुर,
उनकी इज्जत की निलामी हमने लगाई।
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हमेसे निचे गिराने वालो,
पहले खुद तो उठ लो ।
नही है तुम दुश्मनो की औकात,
जाओ पहले हार का पानी तो पी लो ।
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जब बोलने लगे हम खुलकर,
दुश्मन को अपनी औकात याद आ गई।
जो करते थे हम पर वार पर वार,
आज उनको भी अपनी पहचान याद आ गई।
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वार करने वाले दुश्मनों को,
अब औकात उनकी दिखाएगे।
क्या है वो हमारे समाने,
बनाकर उन्हे दिखाएगे ।
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दुश्मन की औकात अच्छे से जानते है,
नही कर सकता वो पीठ पर वार यह जानते ।
किया है जो ऐसा काम वो दुश्मन नही,
कोई अपना ही है यह तक जानते ।

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हम खामोश रहे तो दुश्मनों ने
हमें कमजोर तक समझा,
जब किया पलट के वार
तो दुश्मनों ने अपनी औकात को समझा ।
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दुश्मनों की औकात
हमारी पहचान के साथ समाप्त होती है।
अरे क्या बिगाड़ सकते है वो हमारा,
जब दुश्मनों की हर नजर पास होती है।
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समाने से वार करे
ऐसी दुश्मन की औकात नही ।
जो बिगाड़ सके मेरा कुछ,
ऐसी दुश्मनों की पहचान नही ।
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मुझे गिराने के लिए
कई दवा दुश्मन ने चले थे,
पर मेरे एक वार ने
दुश्मन की औकात दिखा दी ।
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हमारा रुतबा ही ऐसा है कि
दुश्मनों की औकात याद आती है।
जब करते है दुश्मन बात हमसे,
तो हिम्मत उनकी हिल जाती है।
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खुदा से ज्यादा जिसे चाहा था,
वो दुश्मन हमारा बन गया ।
नही दुश्मन की औकात ऐसी,
जो हमारा हाल बुरा कर गया।
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जब दोस्त साथ हो मेरे,
तो दुश्मन की हिम्मत तक कांपती है।।
जब नही हो दोस्त साथ मेरे,
तब भी दुश्मनो को औकात अपनी याद आती है।

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कई दुश्मनों को मैंने पाला जमाने में,
हर किसी को मिट्टी का स्वाद चखाया लड़ाई में।
है दुश्मनों को अपनी औकात का पता तभी तो
कुछ नही बिगाड़ सकते मेरा इस जमाने में,
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दुश्मनों को भी दोस्त
बनने का मोका हमने दिया,
क्या है दुश्मनों की औकात
यह एक वार करके हमने दिखा दिया ।
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खुदा से ज्यादा जिस दोस्त को चहा था
वो दुश्मन मेरा बन गया ।
आज किया है उसने वार मुझ पर,
लगता है दुश्मन ने औकात को अपनी भुल दिया ।
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पानी तक नसीब न होने देगे,
ऐसा वार हम करेगे ।
जब जब भुलोगो औकात अपनी,
यात तुम्हे हम खुब करेगे ।
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अगर किया तुमने पीठ पर वार,
इस जीवन में तुझे जीने नही देगे।
करेगे वार तुझ पर
तो तुझे औकात तेरी दिखा देगे ।
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नसीब से मिलते है मेरे जैसे दुश्मन,
जो करते है वार सामने से,
और एक मेरे दुश्मन की औकात तो देखे,
वार करते है हमेशा पीछे से

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अपने दुश्मनों की औकात को मैं कम नही समझता,
क्या वो कर सकते है यह तक मैं समझता ।
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दुश्मनों को हल्के मे मुझे नही लेना
उनसे झगड़ा तक मुझे नही करना ।
अगर करेगे फिर भी वार मुझ पर,
तो दुश्मनों को उनकी औकात मुझे दिखा देना ।
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रास्ते में चलते है तो कुत्ते खुब भौकते है,
और जमाने की भीड़ में दुश्मन ही पैर खिचते है।
मगर जब दुश्मनों को औकात हमने दिखाई,
तब वो समाने क्या पीछे तक न बोलते है।
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दुश्मनों का हाल बुरा हो गया,
जब हमने सासन करना शुरु किया ।
अगर क्या बिगाड़ेगे दुश्मन हमारा,
जब उनको औकात हमने दिखा दिया ।
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एक वार करने पर तुम जमीन पर पड़ोगे,
काट देगे ऐसा जैसे रेत बनकर पड़ोगे ।
मत भुलना दुश्मन तु तेरी औकात को,
वरना भारी तेरे पर हम खुब पड़ेगे ।
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हम दुश्मनों की बातो में नही आते,
दुश्मनो की चाल तक को पहचानते ।
अगर करेगे दुश्मन अपनी औकात भुलकर वार,
तो फिर उसे नकी औकात याद हम दलाते ।
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जब हम खड़े होते है,
तो दुश्मनों की औकात छोटी पड़ती है।
जब करते है हमे नाराज दुश्मन,
तो जींदगी छोटी उनकी पड़ती है।

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अगर पैर खिचोगे हमारा,
तो तुम्ही पर आकर गिरेगे,
जब लगेगी चोट भारी तुझ पर
तो फिर कभी अपनी औकात नही भुलोगे ।
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हमे तो जिसने हराया
वह दुश्मनों की चाल थी,
वरना सामने से वार करने की
दुश्मनो की न औकात थी ।
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दुश्मनों को चुप रहना हमने सिखाया ।
और दुश्मन किसे कहते है यह तक बताया ।
जब किया दुश्मन ने वार मुझ पर,
तो दुश्मनों को कुत्ते की तरह भौकना सिखाया ।
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दुश्मन मेरा दोस्ती के लायक नही
बार बार वह अपनी औकात को भुल जाता ।
जब करता है मुझ पर वार
तो दुश्मन अपनी औकात फिर याद कर जाता ।
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अरे इश्क नही वो दुश्मनों का जाल था,
जिसे मैंने दिल दिया वो दुश्मनों का प्यार था ।
जब लगी सीधे चोट मेरे दिल पर,
तो फिर दुश्मनों को औकात उनकी बताया था ।
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हम किसी नशे में नही रहते,
सोते है तो क्या चल रहा है यह पता रहता है।
अगर फिर भी तुम वार मुझ पर करोगे,
तो क्या दुश्मन तेरी औकात है यह पता तुझे रहता है।
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हमे गिराने की कोशिश दुश्मन ने खुब की,
दुनिया की भीड़ में अपनो ने चोरी की ।
जब दुश्मन को हम इश्क दर्द में लगे
तो फिर उन्होने औकात अपनी दिखा दी ।

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हमने खुद अपनी किमत बनाई है,
कष्ट सह सहकर मंजिल यह पाई है।
आज है अगर हम सफल,
तो दुश्मन भी अपनी औकात पहचान पाई है।
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हमारी सफलता की कहानी
दुश्मन अपना जानता है।
क्या है उनकी खुद की औकात,
यह दुश्मन अच्छे से जानता है।
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एक छोटी सी गलती ने
दुश्मनों की औकात बता दी ।
पड़े रहे जो दिन भर नशे में,
उनके अपनों ने ही कहानी बता दी ।
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दुश्मन की औकात बडी कमजोर है,
तभी तो उनके हर अपने चोर है।
अरे क्या ही कर लेगे वो हमारा,
जब उनके अपने ही हमारी ओर है।
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जीवन की कहानी दुश्मन को बनाएगे,
क्या है उनकी औकात अच्छे से समझाएगे।
अगर करेगे वो सामना हमारा,
तो कैसा है मिट्टी का स्वाद यह तक चखाएगे ।
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कल दुनिया बदल जाएगी,
पर दुश्मनी तुम्हारी याद मुझे रहेगी ।
क्या खुब है दुश्मन तेरी औकात,
यह सोच कर भी हंसी खुब आएगी ।

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जीवन भर तुमने मुझे तोड़ने की कोशिश की,
आज अपनी औकात पर तुम आ गए ।
कर सकते हो पीठ पर वार तुम,
वही दिन तुम्हारे आ गए ।
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पीठ पर वार उन्होने खुब किए,
जिनकी औकात बडी खुब थी ।
हमने न दिया एक भी उत्तर उनको,
क्योकी हमारी सफलता उन्हे जलाती खुब थी ।
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अरे दुश्मन तुम अपनी
औकात मत भुलना,
हमे गिरा भी नही पाओगे
यह मत भुलना ।
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हमसे दुश्मनी का खेल खेलना आसान नही होता,
हम दुश्मनों को उनकी औकात याद दिला देते है।
जब खेलते है वो खेल हमारे साथ,
अब उस खेल को ही बदल देते है।
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दुश्मनी दास्तों ने हमसे कि है,
पर उनकी क्या औकात है हम बताएगे ।
बाल तक उठाकर नही ले जा सकते हमारा,
कुछ ऐसा हाल उनका करकर दिखाएगे ।
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आज दुश्मनों को उनकी
औकात याद दिलानी है,
क्या है हम और क्या कर सकते है
यह बात उनको बतानी है।

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अरे लाला हमने तो दोस्तो को भाई माना था,
पर दोस्तो को दुश्मन बनकर औकात पर आना था ।
उन्हे तो पीठ पीछे वार मेरे करना ही था ।
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दिखने में बहुत खास है मेरे दुश्मन,
पर जरा सा दिमाग उनमें कम है।
ऐसे तो बहुत है जान उनमें,
पर मेरे से लड़ने क औकात उनकी कम है।
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सपनों में भी दुश्मनो को मारते है,
क्या है उनकी ओकात यह बताते है।
कुछ बिागड़ तक सकते नही मेरा,
यह हाल उनका कर कर उठ जाते है।
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जब सोते है तो दुश्मनों से युद्ध होता है,
बताते है उनको मिट्टी का स्वाद कैसा होता है ।
जब आते है दुश्मन अपनी औकात पर,
तो सपनों में भी दर्द उनके होता है।
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सपनों मे इश्क की बाते होती है,
और ऐसा इश्क हमारा दुश्मन होता है।
जिसका दिलाई उसकी औकात,
वही मेरा सपनों का दुश्मन होता है।
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मारने की बात तुम करते हो,
सपनों में भी तुम हरा मुझे नही पाते ।
हे दुश्मन क्या है तेरी औकात,
यह तक समझ नही पाते ।
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हमे हराने को चले थे,
समंदर से पानी मिटाने को चले थे ।
पर भुल गए दुश्मन मेरे तुम,
कि हम दुश्मनो की औकात दिखाने चले थे ।

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एक वार पर दुश्मन तुम्हे
औकात अपनी दिखाएगे ।
क्या हाल कर सकते है तुम्हारा
यह सपनों मे आकर बताएगे ।
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हम उन दुश्मनों को औकात उनकी बताते है,
जो हमे कभी मेरे सपनों मे मिलते है।
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लहू भी नही निकला
और दुश्मन भी कमजोर हो गया,
हम उसकी इतनी सी औकात
कि एक वार से वो डर गया ।
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तो इस तरह से दोस्त, यह जो शायरी है वह दुश्मन की औकात पर शायरी है। यदि आपको पसंद आई हो तो कमेंट में जरूर बताइए ।