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दोस्त, कान के कच्चे लोग शायरी पढने के लिए आपने padhakushayari.in ब्लॉग का चुनाव सही किया है। क्योंकी इस लेख में हम कान के कच्चे लोग शायरी kan ke kacche log shayari पढने वाले है।
कान का कच्चा — “सुनी-सुनाई बातों पर आसानी से यकीन करना”
दोस्त, कान के कच्चे वे लोग होते है जो की दूसरों की बतों को सुनते है, और उन बातों पर बिना सोचे समझे सही मान लेते है और अपने दिल दिमाग में उन बातों को बेठा लेते है।
मतलब जो लोग सुनी सुनाई बातों पर आसानी से यकीन कर लेते है, ऐसे लोग कान के कच्चे होते है। और सही कहे तो ऐसे लोग एक नही बल्की अनेक होते है। यदि आप अपने आस पास भी देखते है, तो आपको बहुत से लोग ऐसे मिल जाएगे जो की कान के कच्चे होते है।
क्योकी ऐसे लोग दूसरो की बातों पर यकिन कर लेते है और उन बातों को आगे की ओर भेज देते है। यदि आप जानना चाहते है कि कोन कान के कच्चे है, तो आप एक झूंठी बात कई लोगो को कहों, और जो लोग बिना सोचे समझे उस पर यकिन करे वो लोग कान के कच्चे है।
और आज के इस लेख में हम उन ही कान के कच्चे लोगा पर शायरी लेकर आए है, तो आइए कान के कच्चे लोगो पर शायरी पढे ।
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सुनी सुनाई बातों पर जो लोग जीते है,
वही बातें दूसरों पर जमकर ठोकते रहते है।
अरे होते है ऐसे लोग कान के कच्चे,
जो बिना सोचे समझे यकिन करते है।

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अरे यह अफवाह जरूर
कान के कच्चों ने बढाई है,
तभी तो हाथी के
तीन पैर की बात बताई है।
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बढते है जो अफवाह की बातें,
वो अक्सर कान के कच्चे होते है।
अरे करते है जो हर बात पर यकिन,
वो दुनिया में सबसे बडे मुर्ख होते है।
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कान के कच्चों ने
अफवाह को बढाकर,
अपनों का साथ छोड़ दिया
झूंठ पर यकीन करकर ।
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झूंठ पर तुम यकीन करते हो,
जो सुनते हो वो सच मानते हो।
अरे हो तुम तो कान के कच्चे,
तभी तो सुनी सुनाई बात को मानते हो।
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जो होते है कान के कच्चे,
उनका दिमाग बंद रहता है।
करते है दिन रात अफवाह की बातें,
तभी तो वो खुद मंद रहते है।
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अरे तुम तो कान के कच्चे निकले,
जो मेरी बातों पर यकिन कर बैठे।
फंस गए तुम मेरी बातों के जाल में,
जो मेरी हर एक बात मान बैठे।
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जो होते है कान के कच्चे,
वो लोग अपनों से दूर होते है।
करते है वो दुसरो की बातों पर यकिन,
तभी तो उनके बुरे हाल होते है।
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अपनों को बुद्धिमान मानने वालो,
आज तुम भी कान के कच्चे निकले,
कर कर तुने सुनी सुनाई बातों पर यकिन,
राहुल गांधी को भी पप्पू मान निकले।

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जो होते है कान के कच्चे,
उनका दिमाग भी गिरवी होता है।
तभी तो करते है वो बिना पैर की बातें,
क्योंकी नका दिमाग उनके पास न होता है।
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हवा में सुनी बातों पर,
तुम तुरन्त यकीन करते हो।
अरे हो तुम कान के कच्चे,
तभी तो आदमी को बंदर बताते हो।
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अफवाहों का असर चारो ओर तेज रहता है
क्योंकी चारों ओर कान के कच्चे यहां रहते है,
कर लेते है जो सुनी सुनाई बातों पर यकिन,
अक्सर वो ही इनके पीछे निकलते है।
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सुनी बातों को उसने सच समझ लिया,
अपना रिश्ता भी झूंठ के सहार तोड दिया।
अरे है तु तो कान का कच्चा,
तभी तो तुने अपना ही घर उजाड़ लिया।
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सुनकर झूंठी बातों को,
तुने रिश्तों में जहर घोला है।
है आखिर तु ही कान का कच्चा,
आज तुने यह साबित किया है।
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मां को ही बुरा कहने वाले,
तुम तो कान के कच्चे हो ।
जो देते हो अपनी मां को दोष,
ऐसे कैसे तुम उसके बेटे हो।
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करते हो दुसरों पर भरोषा तुम,
तभी तो दुश्मन तुम्हारे अपने है।
अरे हो तुम तो कान के कच्चे,
तभी तो तुझ पर यकिन कोई न करते है।

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आंखे तुम्हारे है नही क्या,
जो तुम कान की बातें मानते हो।
अरे हो तुम कान के कच्चे,
तभी तो झूंठ को सच मानते हो।
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कानों से सुनकर बत तुने,
दुश्मन अपने दोस्त को मान लिया।
जो देता था तुम्हारा साथ हमेशा,
उसी को तुने दुश्मन अपना बना लिया।
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वो अफवाहों पर यकिन खुब करते है,
तभी तो कान के कच्चे वो बनते है।
कर लेते है वो हर बात पर यकिन,
तभी तो अफवाहों मे वो फंसते है।
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अरे कान के कच्च लोगो,
कानों से सुनना छोड दो।
जो देता है सुनाई तुझे,
उसे सच मानना तक छोड दो।
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हर झूंठ को वो सच मानते है,
जो दिखता है आंख से उसे झूंठ मानते है।
अरे है वो कान के कच्चे,
तभी तो अपनों को बुरा मनते है।
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जो होते है कान के कच्चे,
वो दिल के सच्चे होते है।
करते है जो हर बात पर यकिन,
उनके दिमाग जरा कमजोर होते है।
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सुनी सुनाई बातों पर तुम चलते हो,
जो होता है झूंठ उसे सच मानते हो।
कहते है लोग तुम्हे कान के कच्चे,
क्योकी अफवाह तुम ही फैलाते हो।
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जिनके दिमाग में अंधेरा होता है
वो कान से समझते है।
करते है जो हर बात पर यकीन,
वो कान के कच्चे होते है।
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सच बोलने पर बुरा तुझे लगा,
जो था झूंठ उसपर यकिन तुने किया।
अरे है तु तो कान का कच्चा,
तभी तो अफवाहों को सच मान लिया।
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जो फैलाया था अफवाहों का जल
उन सभी का आज हाल बुरा होगा ।
करेगे कान के कच्चों को नंगा,
जिनको हर बात पर यकिन होगा।
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बिना सोचे समझे तुने,
अपनी राय गलत बना रखी है।
अरे हो तुम कान के कच्चे,
तभी तो यह अफवाह फैला रखी है।

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अरे नही है वो भरोषे के लायक,
जो करते है हर बात पर यकिन करते है।
है वो तो कान के कच्चे लोग,
जो बिना सिर पैर की बतों पर यकिन करते है।
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अपनी अफवाहों को हथियार उन्होने बना रखा है,
सुनी सुनाई बातों पर यकिन कर रखा है।
अरे कैसे है यह कान के कच्चे लोग,
जिन्होनें बेतुक की बतों पर यकिन कर रखा है।
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हर कही बात सच नही होती है,
पर ये कान के कच्चों को समझ नही होती ।
तभी होता है उनका बुरा हाल,
क्योकी उनके पास कुद की सोच नही होती ।
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होते है जो कान के कच्चे,
वो अफवाहों को सच मानते है।
जों मान लेते है आलू से सोना बनाने को सच,
वही तो कान के कच्चे कहलाते है।
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एक छोटी सी गलती ने,
कान का कच्चा तुझे बना दिया।
कर कर तुने झूंठी बातों पर यकिन,
अपने आप को बिना दिमाग का बना दिया।
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तुम तो दुश्मन पर भी भरोषा कर लेती हो,
अपनों को धोका तुम देती हो।
अरे हो तुम तो कान की कच्ची,
तभी अफवाहों सच मान लेती हो।

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अफवाहों को मिलकार तुने हथियार बनाया,
जो दे समय पर धोका ऐसा दोश्त तुने बनाया।
अरे है तु तो कान का कच्चा,
तभी तो तुने हर बात पर यकिन किया।
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जो सुनकर फैसला करता है
ऐसा आखिर तु निकला।
जो करता है हर बात पर भरोषा,
ऐसा कान का कच्चा तु निकला।
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चोर की बात पर भी तुने सच मानी,
अपनों ने कि चोरी तुने मानी।
तभी कहते है लोग तुझे कान का कच्चा,
क्योकी तुने हर किसी की बात तक मानी।

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जो होते है कान के कच्चे,
उनके रिश्ते टूट जाते है।
जो मानते है झूंठ को सच,
उनसे सच भी रूठ जाते है।
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जिसे समझा था अपना मुझे
आज वही पराया निकला ।
जो करता था मेरी हर बात पर यकिन,
आखिर वही कान का कच्चा निकला ।
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सच झूंठ का पता करने के लिए
हर बात को परखना जरूरी होता है।
जो मानता है कानों सुनी बतों को,
आखिर वही कान का कच्चा होता है।
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सुनी हुई बात को आगे बढाना,
जो झूंठ है उसे सच बनाना।
होता है कान के कच्चों का ऐसा काम,
कि अफवाहों को भी सच बनाना।
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जो होते है कान के कच्चे,
वो समझदार खुद को मानते है।
करते है झूंठी बातों पर यकिन,
और दुश्मन अपनों को मानते है।
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जो सुनकर सवाल न करे,
जिसे जवाब की जरूरत न हो।
ऐसा ही तो होता है कान का कच्चा,
जिसे हर बात पर यकिन तुरन्त हो।
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दिवार के भी कान होते है,
तभी तो लोग कान के कच्चे होते है।
करते है बिन सिर पैर की बाते,
ऐसे हाल उनके दिमाग के होते है।

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बिना सच जाने उसने मुंह अपना खोला,
झूंठी बातों को सच बताना समझा।
अरे होते है वो कान के कच्चे,
जिसने खुद को सबसे होसियार तक समझा।
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अफवाहों की नाव पर सवार
कान के कच्चें होते है।
जो करते है अटपटी बातें,
आखिर वही बुद्धि से कमजोर होते है।
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जो करते है खुद की बढाई दिन रात,
ऐसे होशियार लड़के वो होते है।
जो सच झूंठ को समझ न सके,
ऐसे कान के कच्चे होते है।
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सुनी बातों को सच मान लेना
और फिर उन्हे चारों ओर फैलाना।
अरे होते है जो कान के कच्चे,
वो फिर कहते है “मुझे क्या पता था”।
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खुद से वो लोग धोक करते है,
जो सुनी बातों पर यकिन करते है।
होते है वो कान के कच्चे लोग,
पर फिर भी खुद का दिमगा तेज बताते है।
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सुनी हुई बातों को
उसने सच तक मान लिया।
देकर अफवाहों को सहारा,
खुद को कान का कच्चा बना लिया।

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झूंठी बातों पर यकिन करकर
खुदके रिश्तों को बर्बाद उसने किया।
है वो तो कान का कच्चा,
तभी तो ऐसा निच काम उसने किया है।
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कान में आने वाली
हर आवाज सच नही होती है।
जो होते है कान के कच्चे,
सच जानने की उनकी हिम्मत नही होती।
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सुनी बातों पर यकिन करकर
अपनों को ही धोकेबाज मान ले,
होते है ऐसे कान के कच्चे,
जो अपनों को ही दुश्मन तक मान ले।
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जो आंखो से दिखे वो सच होता है
जो कानों से सुने वो झूंठ हो सकता है।
परखना चाहिए हर एक बात को,
ताकी कान के कच्चे कोई न होता है।
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झूंठ पर यकिन करने वालों,
झूंठ का साथ आखिर तुम ही देते हो।
अरे होते हो कान के कच्चे तुम,
जो दुश्मन पर भी यकिन करते हो।
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दुसरों की बातों को मानकर,
दोस्त को तुने पराया समझ लिया
हो तुम कान के कच्चे,
यह तक साबित कर दिया।
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दोस्ती में हर दोस्त गद्दार नही होता,
जो करते है सुनी सुनाई बातों पर यकिन,
वो हर कान का कच्चा नही होता है।
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कानों से सुनी बातों पर
यकिन तुने किया है।
सरकार को गलत बताकर
कान का कच्चा खुद को किया।
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बिक गई वो झूंठी बाते
जिन पर यकिन हर कोई करता था।
आ गए वो चेहरे भी सामने,
जो कान का कच्चा बनता था ।

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कान के कच्चों ने
दोस्तों को ही चोर समझा,
जिसने दिया था साथ जीवन भर,
उसी को दुश्मन अपना समझा।
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होते है जो कान के कच्चे
वो दुश्मन की बात को भी मान लेते है।
करते है नही है जो अपनों पर भरोषा,
ऐसे इंसान वो बन जाते है।
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आकर दुसरो को की बातों मे,
अपनों को गलत मानते है।
जो होते है कान के कच्चे,
वो अपनों को ही हरामी मानते है।
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कान के कच्चे जो लोग होते है
सच मे अफवाहों के बडे ढोल होते है।
जो सुन लेते है बात को,
उन्ही को सच मानने वाले होते है।
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सुनी सुनाई बातों पर जीने वालो,
लोग तुम्हे कान का कच्चा कहते है।
मत करा करो हर बात पर यकिन
लोग तुम्हे मुर्ख तक कहते है।
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अपने दिमाग के दरवाजों को खोलो
हर बात को परखना सिखो।
कर कर हर बात पर यकिन तुम
कान के कच्चे तुम बनना मत खिखो।
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जो होते है कान के कच्चे,
वो झूंठ के जाल मे फंसते है।
जो करते है हर बात पर यकिन,
वो एक दिन झूंठी बातों में फंस जाते है।

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न तोलते है और न सोचते है
बस कान मे तेल डाला ओर सोते है।
करते है हर अटपटी बात पर यकिन,
तभी तो कान के कच्चे वो होते है।
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आज बाजार में एक अफवाह उड़ी,
जिस पर यकिन सबसे पहले तुने किया।
आखिर बनकर कान का कच्चा तुम
यकिन अफवाह पर खुब किया ।
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तो इस तरह से दोस्त, कान के कच्चे लोगो पर शायरी आपको कैसी लगी। कमेंट में जरूर बताना ।