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दोस्त, होंठ पर तिल शायरी शायरी पढने के लिए आपने padhakushayari.in ब्लॉग का चुनाव सही किया है। क्योंकी इस लेख में हम होंठ पर तिल शायरी hotho par til shayari पढने वाले है।
दोस्त, होंठ पर तिल काफी महोब्बत भरा होता है, क्योकी यह होंठ पर जो तिल होता है वह मुस्कान के साथ खिलता है और आशिकों के दिल पर वार करता है। साथ ही होंठ पर होने वाला तिल काफी खुबसूरत भी होता है। इसी के कारण से हर आशिक होंठ के तिल को छूना चाहता है।
यदि आपकी महब्बूबा के होंठ पर तिल है, या फिर आपके महब्बूब के होठ पर तिल है, तो दोनो ही स्थिति में यह तिल काफी प्यारा लगता है। और यह तिल चेहरे पर चार चांद लगाने का काम करता है।
इसलिए इस होंठ पर मौजूद तिल की तारिफ करना तो बनाता ही है। मगर होंठ पर जो तिल होता है उसकी तारिफ कुछ अलग तरह से हो, इसलिए शायरी की सहारा लिया जाता है। और होठ पर मौजूद तिल पर कुछ शायरियां इस प्रकार हो सकती है,
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होठ पर तिल तेरा
दिल मेरा छिन बैठा।
रातों की नींदे उडाने के लिए
चेहरा तेरा चांद सा बन बैठा।

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काजू कतली जैसा बदन है तेरा,
पर दिल मेरा तेरे होठों पर फिदा है।
अरे है तेरे होठों पर जो तिल
उसे देखकर दिल का बुरा हाल है।
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तेरे होंठ के तिल को देखकर
दिल मेरा धड़कता है।
जब चुमती हो तुम तिल को,
दिल मेरा खुब जलता है।
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तेरे होंठ के तिल को देखकर
मेरा दिल जलता खुब है।
जब मुस्कुराती हो तुम
यह तिल मुझ पर हंसता खुब है।
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तेरे होंठ के तिल ने,
मेरे दिल का बुरा हाल कर रखा है।
लिपटकर तेले होंठो से
मेरा जीना बेहाल कर रखा है।

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गुलाबी होंठों से जब तु मुस्कुराती है,
तिल भी इश्क की खुशबू फैलाता है।
देखकर खूबसूरती इस तिल की,
दिल में तेरी ओर खिचा चला आता है।
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उस रब ने भी
तुझे चांद सा मुखड़ा दिया।
देकर तेरे होंठो पर तिल,
आशिकों को मार दिया।
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तेरे होंठ के तिल को देखकर,
मेरा दिल घायल हो गया ।
देखकर तेरी प्यारी मुस्कान,
दिल मेरा चोरी हो गया ।
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जो है तेरे होंठों पर तिल,
ऐसा तिल मैंने आज तक न देखा।
जो है तेरे होठो की लाली
उसे मैंने आज तक न देखा।

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तेरे गुलाबी होंठो पर आशिक कई मरते है।
पर तेरे होंठ पर जो तिल है उससे जलते है।
क्योकी लिपट जाता है यह तेरे होंठ से,
देखकर आशिकों के दिल तक जलते है।
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तेरे होंठो पर तिल
मेरे दिल को प्यारा लगा।
तभी तो दिल मेरा दिवाना
तेरा होने लगा ।
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तेरे होंठ के तिल ने
गुन्हा बडा किया है।
चुरा कर मेरे दिल को,
मेरा बुरा हाल किया है।
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जो लिपटा है तेरे होंठ से
वो होठ का तिल तेरा है।
जो धड़कता है मेरे सिने में दिल
वो दिल आशिक तेरा है।
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तेरी मुस्कान की पहरेदारी
तेरे होठ का तिल करता है।
जब देखता है तुझे दिल मेरा ,
मेरे दिल का बुरा हाल करता है।
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तेरी मुस्कान में खिला वो होंठ का तिल,
मेरे दिल को अपना दिवाना बना लिया।
देखकर तुने प्यार से मुझे,
मेरी धड़कनों को भी चुरा लिया।

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होती है वो छोरिया बडी कातिल,
जिनके होंठो पर तिल होता है।
कर देती है आशिक का जीना बेहाल,
जिनकी हर बात में इश्क छिपा होता है।
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इश्क की बातें वो होंठ से करती है,
पर होंठ का तिल पास अपने बुलाता है।
न जाने क्या करेगा मेरे दिल का,
जो दिल को खुशबूदार तिल बनाता है।
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तेरे होंठ के तिल ने,
मेरे दिल में खुशबू बसाई है।
जो छिपे है तेरे दिल में इश्क के राज,
वो सारी बाते तिल ने बताई है।
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तेरे होंठ के तिल को देखकर
मेरा दिल धड़कता है।
जब देखती है तु मुझे,
दिल मेरा लूट जाता है।
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जो है तेरे होंठो पर तिल,
वो मेरी कमजोरी बन गया।
जो खिलता है हर मुस्कान के साथ,
वो तिल मेरे दिल की धड़कन बन गया।
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जो है तेरे होंठो पर तिल
उसने तुझे हसिन बनाया है।
जो था मेरा दिल स्वस्थ
उसे तिल ने इश्क का रोगी बनाया है।

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तेरे होंठ पर जो तिल है,
वो मेरे इश्क की मोहर है।
छू लेता है मेरे दिल को,
इतना तेज इसका असर है।
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तेरे होंठ के तिल को जब मैं देखता हूं
मेरी नजरे वही ठहर जाती है।
जब देखता हूं तेरे गुलाबी होठों को,
दिल की धड़कने भी रुक जाती है।
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तेरे लाल होठों पर काला तिल है
जिसे देखकर मेरा जीवन सफल है।
लगता है बडा प्यारा मुझे,
जैसे चांद पर काला बादल है।
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तेरे होठ का तिल भी
बडी सरारते करता है।
करकर इश्क की बाते,
मेरे दिल को धड़कता है।
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जो है तेरे होंठ पर तिल,
उसने मेरी रातों की नींदे उडा रखी है।
चुमकर तेरे होंठों को,
दिल में आग सी लगा रखी है।
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जो तेरे होंठ पर प्यारा सा तिल है,
उसपर पर फिदा कई धड़कन है।
लगाते है तेरे होंठ पर चार चांद
तभी तो तिल तेरे होंठों की शान है।

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तेरे होंठो के तिल ने
कई दिलों को धड़काया है।
करकर इश्क की बातें उनसे,
अपना दिवाना तक बनाया है।
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तेरे होंठ के तिल की खुशबू
हर रोज नया आशिक बनाती है।
धड़का कर हर दिल को तेरी मुस्कान
अपना दिवाना तक बनती है।
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तेरे होंठ का जो तिल है
वो आशिकों का प्यारा दिल है।
जो लिपटा रहता है तेरे होंठो से,
वो तिल भी बडा नशीबवाला है।
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तेरे होंठ के तिल में इश्क का नशा है।
तभी तो मेरा दिल इसे पीना चाहता है।
तेरे गुलाबी होंठों की मुस्कान में
मेरा दिल मिलना तक चाहता है।
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तेरे होंठ के तिल को देखकर
मेरा दिल बेकाबू हो गया।
देखकर तेरे होंठ की चमक को,
दिल का बुरा हाल हो गया।
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तेरे होंठों पर जो तिल है
वो तुझे इतना खास बनाता है।
आती है जो होंठों पर मुस्कान,
वो तिल को हसिन तक बनाता है।

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तेरे होंठ पर जो तिल है
वो इश्क का इशरा मुझे करता है।
करता है मुझसे बहुत सारा प्यार,
तभी तो पास मुझे बुलाता है।
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तेरे होंठों के तिल ने
मेरी रातों की निदे उड़ा रखी है।
लिपटकर तेरे प्यारे से होंठो को
दिल की धड़कन तक बढता रखी है।
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तेरे होंठ पर जो तिल है
वो आशिकों को खुब पसंद है।
करते है इससे इश्क की बाते वो,
तभी तो होठ तेरे पसंद है।
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आती है तेरी सुरत पर जो नजरे,
तेरे होठ का तिल छिन लेता है।
देकर इश्क की खुशबू दिल को
इसमें तिल बस जाता है।
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तेरे होंठ के तिल ने
आशिक कई तेरे बना रखे है।
करकर इश्क की बातें उनसे,
दिवाने तेरे खुब बना रखे है।
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जो देखता है तेरे होठ के तिल को
दिवाना तेरा हो जाता है।
करता है तेरे तिल की तारिफ
जैसे तिल का नशेडी हो जाता है।
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तेरे होठ के तिल ने
मेरे दिल पर सिधा वार किया।
देकर अपने इश्क की खुशबू,
दिल को अपने वश में किया।

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जिनके तिल होंठों पर होता है
वो दुनिया में बडे नशीले होते है।
फैलाते है इश्क का नशा चारो ओर,
तभी तो दिवाने उनके कई होते है।
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तेरे होठ का तिल भी बडा नशीला है
तभी शराबी तरह दिल पर असर किया है।
कर लिया दिल को अपने वश में,
इस कदर इश्क की बातों को किया है।
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तेरे होंठ के तिल ने
दिल को दिवाना बना रखा है।
अब दिल भी तेरे नाम से धड़कता है
ऐसा बुरा हाल तिल ने कर रखा है।
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मेरे दिल की धड़कनों मे
तेरे होंठ के तिल का नाम है।
तभी तो तेरे होंठो पर
मेरे इश्क का नाम है।
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तेरे होंठ के तिल ने
मुझे कई ख्वाब दिखाया है।
कर कर इश्क का वायदा
दिल को तेजी धड़काया है।
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जो है होठ पर तिल तेरे,
वो बडी सरारते करने लगा है।
चुमकर तेरे प्यारे से होंठो को,
आशिकों को जलाने लगा है।

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आज तेरे होंठ के तिल की भी
खुदा से शिकायते होगी।
जो किया है तिल ने काम,
उनकी बाते खुलकर होगी ।
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जब देखता हूं तेरे होंठो पर तिल
मेरे दिल की धड़कन बढती है।
देखकर इस तिल की चमक को,
दिल में भी इश्क की रोशनी होती है।
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तेरे दिल ने मेरे दिल को
धड़कना तक सिखाया।
किसे कहते है इश्क
यह तेरे होंठ के तिल ने बताया।
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दूध का तुम गिलाश हो
तभी तो पीने का मन करता है।
अरे है तेरे होंठ पर जो तिल,
उसे चुमने को दिल खुब करता है।
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हर एक आशिक की धड़कने तेज होगी,
जब तेरे होंठो के तिल से नजरे मिलेगी।
होगा दिल का बडा बुरा हाल,
जब तु होंठो के तिल को kiss करेगी ।
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सपनों मे तुम आने लगी हो,
होंठ के तिल से बात करने लगी हो।
धड़काती हो दिल को इसकदर तुम
जबसे मेरे दिल में तु बसने लगी हो।
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होठ के तिल की खुशबू ने
मेरे दिल को छिन लिया।
जब बस गई तु मेरे दिल में
दिल को ही अपना घर बना लिया।

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तेरी नशीली आंखों ने
मेरे दिल पर वार कई किए है।
चुमकर तुने अपने होंठ के तिल को
आशिकों के दिल के कत्लेआम किए है।
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जब हंसती हो तुम
तेरे होंठ का तिल प्यारा लगता है।
तभी तो यह तिल
मेरे दिल का साथी लगता है।
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जो हर तस्वीर में खुब चमकता है
वो होंठ पर चमकता तिल तेरा है।
जिस पर हर दिल फिदा हो जाए,
ऐसा हुस्न आखिर तेरा है।
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तेरा मुखड़ा भी दुध का गिलाश लगता है
तभी तो होंठ पर चमकता तिल प्यारा लगता है।
है जो तेरे होंठ पर तिल
वो दूध में पड़ा इलायची का दना लगता है।
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चाय में जैसे इलायची हो
ऐसा होठ का तिल तेरा है।
जो धड़का दे हर दिल को,
ऐसी मुस्कुराना तेरा है।
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तेरे होंठ के तिल ने
मेरे दिल को बडा तड़पाया।
चुमकर तेरे गुलाबी होंठो को
मेरे दिल को जलाया।
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चांद जैसे बदन पर
तिल काला दांग लगता है।
पर है जो तेरे होंठ पर तिल,
वो सबसे प्यारा मुझे लगता है।

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तेरे होंठ के तिल की मुस्कान ने
दिल मेरा जीत लिया।
पहना दे इसे इश्क का ताज हम
इतना खुश इश्क में मुझे कर दिया।
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तेरे होंठ पर जो तिल है
उसमें दिल चुराने का हुनर है।
बनाता है यह कईयों आशिक अपना,
इस तिल में इश्क का बडा असर है।
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तेरे प्यारे से होंठ को छूने
तेरे होंठ का तिल देता नही।
जब देखता हूं तेरे गुलाबी होंठो को,
तेरा यही तिल देखने देता नही।
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आज तो तेरे होंठ के तिल ने
मुझे परेशान बहुत खुब किया।
न देख सके तेरे गुलाबी होंठो को,
इतना बुरा हाल तक किया।
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तेरे होंठ के तिल ने
खुशबू बडी फैलाई है।
कर न सके इश्क तुझसे,
ऐसी जींदगी मेरी बनाई है।
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तेरे होंठा पर चमकता तिल,
कोहिनूर जैसा लगता है।
जब हंसती हो तुम प्यार से,
तेरे होंठ का तिल खिलता है।
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कैसे होगा हमे तुमसे इश्क
तेरे चांद सा मुखड दिखाई देता नही।
जब देखते है तेरी प्यारी सुरत को,
होठ का तिल तेरा दिल कुछ देखने देता नही।
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तेरे होंठ के तिल ने भी
रातों की नीदे उडा रखी है।
न रह पाए तेरे बिना हम
इतनी खुशबू दिल में फैला रखी है।
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चांद से उतर रानी तुम लगती हो,
तभी तो मेरी दिवानी तुम लगती हो।
है तेरे होंठ पर जो तिल
उसी से तुम इश्क की बोतल लगती हो।
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तेरे चांद सी सुरत को देखकर
दिल कई दिवाने तेरे हो गए।
देखकर तेरे होंठ पर तिल,
उनके दिल तक जल गए।
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जब चुते है तेरे होंठ को,
होंठा का तिल बिच में आता है।
लिपटकर तेरे होंठो से,
दूर तुम्हे हमसे करता है।
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जब जब तेरे होंठ के तिल को देखता हूं
मुझे कुछ अच्छा नही लगता है।
क्योंकी लिपटा है तेरे होंठो से तिल,
देखकर मेरा दिल खुब जलता है।
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