Best 177+ Ganna Par Shayari, गन्ना पर शायरी
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गन्ना असल में एक प्रकार की फसल होती है, जो की पुरी मीठे रस से भरी होती है। और इसके रस को गन्ने का जूस कहा जाता है। गर्मी के समय में गन्ने का जूस बहुत ही अधिक पिया जाता है।
इसके अलावा गन्ने के मीठे रस का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है । क्योकी इस गन्ने से चीनी और गुड बना लिया जाता है और इसलिए गन्ने की खेती कि जाती है। और वर्तमान में कुछ चुनिदा नेतों की वजह से गन्ना पेट्रोल का भी हिससा बना हुआ है।
खैर जैसे भी हो गन्ना हमारे लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी रहता है। इसलिए गन्ने पर शायरी तो बनती है। और आज के इस लेख में हम आपके लिए गन्ना पर शायरी लेकर आए है, तो आइए गन्ने पर शायरी पढे,
Best 177+ Ganna Par Shayari, गन्ना पर शायरी

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बर्फ के टूकडों के साथ
गन्ने का जूस मिल जाता है।
तभी तो पी कर जूस
दिल को मजा आ जाता है।
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गन्ना भी बाजार में
ज्यादा बिकने लग गया
जब गन्ना अंदर से
मीठा निकलने लग गया।
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पपीते का मुकाबला
गन्ने से क्या होगा।
जब पपीते से ज्यादा
गन्ना मीठा होगा।
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थकी हुई रुह में भी जान आ जाती है
जब गन्ने की खुशबू पास आ जाती है।
और जब पीते है गन्ने का जूस
दिल की धडकन भी शांत हो जाती है।
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प्याली भरकर वो गन्ने का जूस पी गया।
जो गर्मी में तडपता हुआ घर मेरे आ गया।
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गन्ने की मीठास ने
दिल को बडा हंसाया है।
पिलाकर अपना मीठा रस
दिल का दर्द मिटाया है।
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सडक किनारे ठेला लगने लग गया
जब सूरज आग सा तपने लग गया।
अरे आते जाते ग्राहक खरीदने लगे
जब गन्ना बाजार से सस्ता सडक पर मिल गया।
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सडक के किनारों पर
गन्ने के ठेल लग जातेहै।
जब गर्मी के दिन
पास आ जाते है।
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गरीब हो या अमीर
सबके दिलों को भाता है।
जो खेतो में उगकर
गन्ना कहलाता है।
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किसान की चमडी भी
जलने लग जाती है।
तब जाकर गन्ने की
फसल पकने लग जाती है।
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गन्ने की मीठास पर
दिल सब का आज जाता है।
तभी तो खा कर गन्ना
मजा दिल को आ जाता है।
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खेतो में भी हरियाली की
खुशबू आने लग जाती है।
जब गन्ने की फसल
पकने लग जाती है।
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शक्कर और गुड की
मीठास भी फिकी पड जाती है
जब गन्ने की खुशबू
पास आ जाती है।
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हर डंठल में मीठास की
कहानी छिपी होती है।
तभी तो गन्ने की खुशबू
इतनी प्यारी होती है।
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हवा भी लहराती हुई गीत
गाने लग जाती है।
जब गन्ने की फसल
खेतों मे पकने लग जाती है।
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कड़वाहट को भी
बुरा लग जाता है
जब गन्ने का मीठा रस
पीने को मिल जाता है।
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वो खेत भी गुलाब सा महक उठा
जहां पर गन्ने का पौधा लहरा उठा।
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मिट्टी की खुशबू में
गन्ने का पौधा लगता है।
तभी तो गन्ना इतना
ज्यादा मीठा होता है।
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गन्ने की खुशबू ने
चांद को भी बडा महकाया है।
करकर इश्क की बात
धरती पर मिलने बुलाया है।
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इंद्र भी गन्ने की
खुशबू का दिवाना हो गया ।
तभी तो गन्ना खाने
इंद्र धरती पर आ गया।
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तेरे गोरे बदन से
इश्क की खुशबू आती रहती है।
और खिलाकर तु गन्ना मुझे
प्यार में तडपाती रहती है।
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चांद जैसे हुस्न पर
दाग कोई लगा नही सकता ।
खिलाती है तु गन्ना दिन रात मुझे
तभी तो दूर तुझसे मैं जा नही सकता।
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तेरे लाल होठो की कसम
तु आज गन्ने जैसी मीठी लगती है।
पी जाउ भरकर प्याली मैं
ऐसी रसमलाई तु लगती है।
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तेरे होठो का स्वाद मुझे
गन्ने का रस लगता है।
तभी तो चुमकर तुझे
दिल मीठा हो जाता है।
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तेरी इश्क भरी बातें भी
गन्ने जैसी मीठी लगने लगी।
तभी तो यह मेरे दिल के
दर्द को दूर करने लगी।
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तेरे होठो की मुस्कान ने
मेरे दिल को बडा तडपाया है।
पिलाने के लिए गन्ने का रस मुझे
मिलने छत पर तुने बुलाया है।
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आम का मीठा रस भी
फिका लगने लग जाता है।
जब गन्ने का मीठा रस
बाजरों मे बिकने लग जाता है।
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सेब की सफेदी भी
फिकी पडने लग गई।
जब गन्ने की खुशबू
चारो ओर छाने लग गई।
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अनार की लाली भी गन्ने पर फिदा हो गई।
जब गन्ने के मीठे रस को अनार अकेली पी गई।
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मौसम्बी की किमत भी
बाजार में घटने लग गई।
जब गन्ने की खुशबू
चारो ओर छाने लग गई।
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गन्ने का मीठा रस भी
पैकेट में बिकने लग गया।
जब यह महंगा होकर
बाजार में मिलने लग गया।
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सूरज की तपती धूप में
किसान पसीना दिन भर बहाता है।
तब जाकर गन्ना
गुड़ जैसा मीठा बनता है।
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सूरत की तपती धूप भी
किसान को हरा न पाई।
तभी तो खेतों में
गन्ने की फसल लहराई।
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किसान की मेहनत भी रंग लाती है
जब खेतों मे गन्ने की फसल लहराती है।
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पानी की एक एक बूंद पीकर
गन्ने का पेड बडा हुआ है।
और दिन भर तपकर सूरज की धूप में
यह गुड जैसा मीठा हुआ है।
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किसान के हाथों की लकीर भी मिट गई।
जब जाकर गन्ने की फसल खेतों मे पक गई।
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गन्ने के रस ने
धूप को भी फिका बना दिया।
और पिलाकर जूस अपना
दिवाना मुझे बना लिया।
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मीठे गन्ने का जूस भी
दिल को भाने लग जाता है।
तब जाकर खेतों मे गन्ना
पकने लग जाता है।
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चारो ओर हंगामा हो गया
जब गन्ना सस्ता मिल गया।
अरे आने लगे ग्राहक बाजार में दिन रात
तभी तो गन्ना आज ज्यादा बिक गया।
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चींटी को भी जब गर्मी लगती है।
गन्ने का जूस पीने के लिए
खेतों मे जाने लगती है।
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आंखो पर चश्मा लगाकर
वो सान से आकर बैठ गया।
पिया गन्ने का जूस
ओर 500 का नोंट निकालकर दे गया।
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पसीने की बूंद
जब माथे पर चमकने लगती है।
गन्ने की मीठास
पास अपने बुलाने लगती है।
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थकान की हर लकीर मिटा देती है
पिलाकर गन्ना जो गालो पर पप्पी दे जाती है।
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तेरे गुलाबी होठो की मुस्कान ने
दिल को बडा तडपाया है।
और खिलाकर तुने गन्ना मुझे
दिवाना अपना बनाया है।
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गन्ने को चबाने में जो मजा आता है
वो गन्ने का जूस पीने में कहा आता है।
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गन्ने के मीठे रस को
चूस चूसकर निकालते थे।
अरे क्या ही वो बचपन था
जब एक गन्ने के लिए तरसते थे।
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इत्र लगाकर जब वो घर से निकलती है।
खुदा कसम गन्ने जैसी महक उठती है।
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चांद तारों का दिल भी
धडकने लग जाता है।
जब आसामन में गन्ने की
खुशबू छाने लग जाती है।
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तेरा साथ जब हो
तो हर पल खास लगता है।
और पिते है जब गन्ना हम
तो वो भी लाजवाब लगता है।
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नीले अंबर के निचे
कई फूल खिल जाते है।
तभी तो खेतों मे
गन्ने के पौधे लग जाते है।
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गन्ने के मीठे रस ने
खुदा को भी तडपाया है।
पिलाने के लिए रस अपना
धरती पर बुलाया है।
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जिसकी जटाओं मे गंगा बहती है
वो भी धरती पर आने लग गया।
जब खेतों मे गन्ना
मीठा निकलने लग गया।
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गन्ने की मीठास से बनी मिठाईयां भी
बडी स्वादिष्ट लगती है।
तभी तो खा कर मीठाईयां
दिल की धडकन खुश होती है।
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सूरज की तपती धूप में
चमडी शरीर की जल जाती है।
तभी तो खेतों से
गन्ने की खुशबू पास आ जाती है।
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गन्ने के मीठे रस ने
मुझे गर्मी से बचाया है।
पिलाकर अपना मीठा रस
दिल को ठंडक का अहसास दिलाया है।
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सूरज की तपती किरणे
जब तन को सताने लग जाती है।
तब गन्ने की मीठास छांव बनकर
दिल को ठंडा करने लग जाती है।
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जून की धूप में
तन बदन जलने लग गया।
ओर पी कर गन्ने का जूस
सुकून दिल को मिल गया।
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गन्ने का जूस भी
दिल पर वार करने लग गया।
जब सर्दी में गन्ने का जूस
पीने मैं लग गया।
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आम का मीठास भी
बुरा मानने लग गया।
जब गन्ना गर्मी में
मैं पीने लग गया।
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संतरे का खटास भी
दिल को बडा पसंद आता है।
मगर फिर भी गन्ने के सामने
संतरा कहा टीक पाता है।
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पपीते की खुशबू ने
तहलका बाजार में मचा दिया।
और पिलाकर गन्ने का जूस तुने
मेरे दिल को खुश कर दिया।
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ना कोई रंग ना कोई
मिलावट होती है।
फिर भी गन्ने की
खुशबू अच्छी होती है।
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किसान का पसीना दिन रात पीती है ।
तभी तो गन्ने की फसल अच्छी होती है।
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सर्दी मे गन्ने को
गलती से खा लिया ।
जो था स्वस्थ मेरा शरीर
उसे बीमार मैंने बना लिया।
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किसान की धडकन भी खुश हो जाती है
जब खेतों मे गन्ने की फसल अच्छी हो जाती है।
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जून के महिने की गर्मी ने
मुझे दिन रात सताया था।
और पिलाकर गन्ने का जूस
मेरे दिल को महकाया था।
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वो गांव भी महक उठता है
जहा पर गन्ना उगता है।
अरे फैलती है चारो ओर खुशबू
जब गन्ना खेतों मे पकता है।
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इश्क में अगर दिल खेत होता ।
तो तु गन्ना और मैं पानी होता।
अरे रहते दोनो दिन भर साथ
तभी तो गन्ना अंदर से मीठा बनता।
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तेरे गुलाबी होठो का जादू
गन्ने जैसा मीठा लगता है।
तभी तो देखकर तुझे
आशिक का दिल धडकता है।
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धूप से जलकर जब किसान
कोयला बन जाता है।
तब जाकर गन्ना
इतना मीठा बन जाता है।
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सूरज की रोशनी भी खेतों मे उतर गई।
जब गन्ने की खुशबू चारो ओर फैल गई।
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चांद की चमक में
गन्ना भी चमकने लगा।
फैलाकर खुशबू अपनी चांद तक
दिवाना चांद को बनाने लगा।
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जब ठंडी हवा भी जलने लग जाती है।
तब गन्ने की खुशबू पास अपने बुलाती है।
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दोपहर की धूप में
अंग अंग जलने लगता है।
पर पी कर गन्ने का जूस
दिल ठंडा होने लगता है।
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गुलाब कि बेल भी खुश हो जाती है।
जब गन्ने की मीठास पी जाती है।
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सूरज की गर्मी का
नींबू पानी ही इलाज होता है।
मगर न मिले जब दिल को ठंडक
तो गन्ने का जूस पास होता है।
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सूरज की तेज किरणों से बचने का
तरीका हमने भी ढूंढ लिया है।
पी पीकर गन्ने के जूस को
तपती किरणों से खुदको बचा लिया है।
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जब हवा भी आग सी तपने लगती है।
तब जाकर गन्ने की खुशबू मीठी लगने लगती है।
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सैंधा नमक मिलाकर
गन्ने का जूस पिने लग गया।
जब जून के महिने में
सूरज आग सा जलने लग गया।
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खुदा भी जमीन पर उतर जाते है
जब तपने सूरज से जल जाते है।
अरे आता है मजा खुदा को भी
जब गन्ने का जूस भरकर ग्लास पी जाते है।
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गन्ने के जूस को पीने पर
मजा दिल को आ जाता है।
और देखकर नजरा हमको
सूरज भी पीछे हट जाता है।
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जून का महिना पास आने लग गया
तभी तो सूरज आग सा जलने लग गया।
अरे बिकता है बाजार में गन्ने का जूस
तभी तो मैं गन्ने का जूस पीने लग गया।
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वो धरती भी महक उठती है
जहां पर गन्ने की फसल उगती है।
और खा कर इस गन्ने को
ग्राहक के दिल की धडकन खिल जाती है।
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सफर करते हुए जब थकते है
तब गन्ने का जूस हम पीते है।
मिट जाती है शरीर की थकावट
तो फिर दूगनी गति से हम चलते है।
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गन्ने के जूस से बनी मिठाईयां
ईश्वर को भी पसंद आने लग गई।
जब प्रसाद में ईश्वर को
गन्ने वाली मिठाईयां चढाई गई।
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हर जूस की अपनी पहचान होती है।
मगर गन्ने जैसी मीठास न होती है।
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आम के जूस में भी
विटामिन का खजाना होता है।
मगर गन्ने का जूस तो
आम से बेहतर होता है।
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बाजार में भी हंगामा मच जाता है
जब गन्ने का जूस
10 रुपय ग्लास में बिक जाता है।
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गन्ने के जूस का भी भाव बढने लग गया।
तभी तो बाजार में ग्राहक कम हो गया।
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30 रुपय गन्ने का जूस मिलता है
मगर फिर भी यह महंगा होता है।
अरे कैसे है वो लोग भी
जिन्हे गन्ने का जूस बेकार लगता है।
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कोल्ड ड्रिंक भी फैल हो जाती है
जब बाजार में गन्ने के जूस की
खुशबू छा जाती है।
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कोका कोला का मीठा सरबत भी
आजकल फिका लगने लग गया।
जबसे मैंने गन्ने का जूस
पीना शुरु कर दिया।
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