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चीकू खाने में स्वादिष्ट लगने वाला एक फल होता है, और इसका रस इतना मीठा होता है कि बताते हुए भी मुंह में पानी आ जाता है। और यही कारण है कि आपकी ओर मैरी तरह सभी को चीकू बडा पसंद आता है।
जब चींकू मीठा होता है तो ऐसे में चीकू की खुशबू बडी प्यारी आती है और यह खुशबू दिल में एक अलग ही प्यास जगाती है । जो की चीकू खाने के बाद ही मीटती है।
और आज के इस लेख में हम चीकू पर शायरी लेकर आए है, तो यदि आप चीकू खाना पसंद करते है, तो आइए चीकू पर शायरी पढे,
Top 202+ चीकू पर शायरी, chiku par shayari (चीकू की मीठास पर दो अल्फाज)

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तेरे खुबसूरत बालों ने
मेरे दिल को उलझा रखा है।
और खिलाकर तुने चीकू मुझे
दिल का बुरा हाल कर रखा है।
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चीकू जैसी मीठी तेरी मुस्कान होती है।
जिसे देखकर मेरे दिल की धडकन बढ जाती है।
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चीकू की खुशबू ने
सेब का दिल धडकाया है।
करकर मदहोश सेब को
बाजार में बिकने न दिया है।
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आम की मीठास भी फिकी लगने लगती है
जब चीकू की खुशबू आने लगती है।
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आम का रंग भी फिका पड जाता है
जब चीकू बाजार में आ जाता है।
अरे खरीदते है हर ग्राहक चीकू को
तभी तो चीकू सारा का सरा बिक जाता है।
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चीकू की चमक पर
ग्राहक का दिल आ गया ।
तभी चीकू खा कर
ग्राहक को मजा आ गया ।
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अंगूर की खुशबू भी बुरी लगने लगी।
जब बाजार में चीकू की खुशबू बिखरने लगी।
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केला भी फिका लगने लगता है
जब चीकू मीठा निकलने लगता है।
जो खा दिवाना केले का
वो खा कर चीकू केले को भूल जाता है।
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अनार के हर एक दाने में
मीठा स्वाद बसा होता है।
पर चीकू की मीठास के आगे
अनार भी फिका पड जाता है।
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चीकू की हर कोर में
मीठास इश्क की छीपी होती है।
तभी तो चीकू देखकर
महबूबा की याद आती है।
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चीकू जब पहली बार मैंने खाया था
जीभ को भी बडा स्वाद आया था।
और चीकू की मीठास ने
दिल के दर्द को दूर किया था।

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चीकू की मीठास ने
मुझे खुद को भूला दिया।
खिलाकर उसने प्यार से चीकू
दिल के दर्द को मीटा दिया।
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चीकू की मीठी खुशबू ने
दर्द मेरा मिटा दिया।
देकर मीठा अहसास जीभ को
दिवाना अपना बना लिया।
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चीकू की मीठास ने
याद तेरी दिलाई है।
देकर इश्क का मीठा स्वाद इसने
दिल की लंका जलाई है।
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चीकू की खुशबू ने
दिल को बाग बना दिया।
करकर तेरी तारिफ इसने
दिवाना मुझे तेरा बना दिया।
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चीकू की खुशबू ने
बाग को भी महकाया है।
लिपटकर तेरे लाल होठो से
इश्क का रस तुझे पिलाया है।
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तेरे गोरे बदन से
चीकू जैसी खुशबू आती है।
तभी तो देखकर तुझे
दिल की धडकन बढ जाती है।
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तेरे हुस्न की तारिफ में
कई गजल हम लिख देते।
अगर खाती तु चीकू
तो टॉकरी भर कर लाकर तुझे देते।
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बाजार में भी चीकू दिन रात बिकने लगा
जब चीकू अंदर से आम जैसा मीठा निकलने लगा।
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चीकू की खुशबू ने
जीना बेहाल कर रखा है।
दिलाकर याद तेरी
मेरे दिल का बुरा हाल कर रखा है।
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काली आंखो पर चश्मा लगाकर
वो चीकू बडे प्यार से खाती है।
जब लगाती है होठो पर लाली
गाल मेरा चुमकर जाती है।
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उसके काले काले बालों मे
इश्क का जादू छिपा है।
देता है चीकू जैसी खुशबू
न जाने ऐसा क्या राज छीपा है।
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उसके लंबे लंबे बालों से
चीकू जैसी खुशबू आती है।
अरे खाती है वो दिल भ चीकू
ओर मुस्कुराकर फिर जाती है।
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चीकू की खुशबू ने
चांद को भी दिवाना बना रखा है।
पिलाकर चांद को मीठा रस
पीछे अपने बैठा रखा है।
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पसीने से सीच कर
जिस पेड को पाला था
उसी ने आज मीठा
चीकू का रस पिलाया था।
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सूरज की तपती धूप में
चीकू का पेड लगाया था।
तभी तो चीकू ने
मीठा जूस मुझे पीलाया था।
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माली की मेहनत भी रंग लाती है
जब चीकू की फसल पक आती है।
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चीकू की खुशबू ने
बाग को स्वर्ग बनया है।
फैलाकर अपनी खुशबू का जादू
ग्राहाकों को पास अपने बुलाया है।
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धरती मां भी खुश हो जाती है
जब चीकू के पेड की खुशबू आ जाती है।
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किसान का उदास चेहरा भी खिल जाता है
जब चीकू का पेड मीठा फल देता है।
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चीकू के मीठे रस ने
किसान को भी खुश किया है।
पिलाकर मीठा जूस किसान को
दिवाना अपना बनाया है।
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तेरे लाल होठ मुझे
चीकू जैसे मीठे लगते है।
पी लू रस इनका दिन रात मैं
इतने ज्यादा खास लगते है।
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होठो पर लाली लगाकर
वो चीकू कई खाती है।
लगती है वो बडी मस्त
जब होठो से मुस्कुराती है।
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तेरे इश्क की याद ने
मुझे रात भर सोने न दिया।
खिलाती रही तु चीकू मुझे
पर होठो को तुने चुमने न दिया।
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चीकू से भरी टोकरी लेकर
वो मिलने घर आती है।
खिलाती है चीकू प्यार से
फिर गाल चुमकर जाती है।
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चांद की चमक भी फिकी पड जाती है
जब चीकू की खुशबू तेरे बालो से आ जाती है।
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तेरी होठो की मुस्कान ने
दिल को घायल कर दिया।
खिलाकर तुने चीकू मुझे
प्यार में पागल बना दिया।
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माथे पर बिंदी लगाकर
वो होठो से मुस्कुराती है।
जब आता है चीकू बाजार में
होठो पर लाली लगाकर खाती है।
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तेरे चीकू जैसे हुस्न ने
दिन भर मुझ तडपाया था।
करकर तुने इश्क की बात मुझसे
मिलने अपने घर बुलाया था।
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स्कूल में पढने वाली के
चीकू पर दिल फिसल जाता है।
तभी तो देखकर उनकी आदाओं को
दिल धडकना भूल जाता है।
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बाजार में भी हलचल मच गई
जब चीकू की खुशबू फैल गई।
अरे बिकने लगे चीकू दिन रात
इतने में चीकू की खुशबू बदल गई।
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चीकू की मीठी याद ने
ग्राहकों को बडा सताया था।
फैलाकर खुशबू इसने
पास ग्रहको को बुलाया था।
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आम की मीठास भी फिकी लगने लगी
जब चीकू की खुशबू
ग्राहक के दिल मे उतरने लगी।
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काली आंखो वाली ने
रात भर जादू अपना किया था।
खिलाकर चीकू उसने
मेरे दिल को घायल किया था।
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चीकू के मीठास की
गजब की कहानी होती है।
कर दे दिल के दर्द को दूर
ऐसी इसकी मस्त जवानी होती है।
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चीकू की खुबसूरती पर
चांद भी मरने लगता है।
जब चीकू खाकर
मीठा स्वाद आने लगता है।
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चीकू की खुशबू ने
रात भर मुझे सताया है।
दिलाकर तेरे खुबसूरत चेहरे की याद
दिल को रात भर धडकाया है।
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चीकू की मीठास ने
बाजार में उधम मचा रखी है।
न बिक सके कोई भी फल
इतनी तगडी खुशबू फैला रखी है।
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चीकू की मीठास ने
शरीर के रोगों को दूर कर दिया।
तभी तो देखकर चीकू को
दिल मेरा खुश हो गया।

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चीकू जैसे मीठे फल पर
दिल मेरा आ गया ।
और खा कर चीकू
मजा दिल को आ गया।
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संतरा अपनी खटास पर मरता है
तभी तो यह बाजार में नही बिकता है।
अरे दिखता है जब बाजार में चीकू
संतरा चीकू की मीठास पर मरता है।
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संतरा भी चीकू से प्यार करने लगा
जब चीकू संतरे के साथ बिकने लगा।
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फलो की महफिल में
सेब ही राजा होता है।
मगर फिर भी चीकू के सामने
छिपकर सेब बिकता है।
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आम ओर सेब भी दिन रात बिकने लगे
जब चीकू बाजार में कम दिखने लगे ।
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चीकू की मस्त जवानी पर
केला भी दिल हार बैठा।
जब बिक गया चीकू सारा
केला भी शराब पी बैठा।
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केले की मीठी खुशबू ने
ग्राहक को बडा सताया था।
खिलाने के लिए चीकू को
पास अपने बुलाया था।

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मीठास की दुनिया में
चीकू का ही राज होता है।
अरे खाता है जो चीकू को
वो खुद महान होता है।
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आम का मीठा स्वाद भी
बाजार में छिपने लगा ।
जब चीकू अंदर से
मीठा निकलने लगा।
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फलो की महफिल का
राजा चीकू होता है।
तभी तो यह अंदर से
इतना मीठा होता है।
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आम भी बुरा मान गया
जब चीकू आम से मीठा निकल गया।
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अंगूर का खट्टा मीठा स्वाद भी
फिका लगने लगता है।
जब चीकू कोई खाने लगता है।
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आसमान के तारे भी दिन रात टिमटिमाने लगे,
जब चीकू अंदर से मीठे निकलने लगे।
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फलो की महफिल में
राज चीकू करता है।
अरे रहता है हर ग्राहक के दिल में
जब अंदर से मीठा निकलता है।
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चीकू की मस्त जवानी पर
खुदा भी दिल हार बैठा।
खाया चीकू काटकर
और खुदा गम सरा भूल बैठा।
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वो गली भी महकने लगी
जहां पर चीकू की खुशबू बसने लगी।
आते रहे ग्राहक दिन रात
जब चीकू की जवानी दिखने लगी।
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जो थे उसके चीकू
वो आज आम बन गए।
देखा उसके चांद से मुखडे को
ओर दिवाना हम उसके हो गए।
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उसके चीकू का दिवाना तो
हर लडका हुआ करता था।
देखता था उसके चांद से मुखडे को
और प्यार उससे करता था।
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चीकू भी बाजार में
टॉकरी में सजकर बिनक लगे।
जब चीकू अंदर से
रसगुल्ले से मीठे निकलने लगे।
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गुलाब जामुन की चमक भी
फिकी पड जाती है।
जब चीकू की खुशबू
दुकान में छा जाती है।
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गुलाब जामुन के मीठे स्वाद पर
दिल अपना मैं हरा बैठा।
जब खाया चीकू को पहली बार
तो गुलाब जामुन को भूल बैठा।
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मेहनत का फल मीठा होता है
जिसका नाम चीकू होता है।
अरे फैलाता है जो खुशबू दिन रात
ऐसा खुशबूदार चीकू होता है।
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चीकू के मीठे स्वाद पर
किसान का दिल भी आ गया।
खाया चीकू तोडकर
तो किसान को भी मजा आ गया।
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खेतों मे रहने वाली परी को
चीकू की खुशबू पसंद आती है।
तभी तो आसामन से उतरकर परी
धरती पर चीकू खाने आती है।
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हर एक बूंद में
अमृत का स्वाद होता है।
जो खाता है चीकू को
स्वास्थ्य उसका अच्छा होता है।
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किसान का चेहरा भी
हंसी से खिल गया।
जब चीकू बाजार में
अच्छी किमत में बिक गया।
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किसान के होठो पर भी हंसी आ जाती है।
जब चीकू पकने की खुशबू बागों मे छा जाती है।
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माली का दिन भी खुशी से उछलने लगा
जब बाग में चीकू पकने लगा।
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किवी भी देखने को तरसने लगी
जब खुशबू चीकू की चारो ओर छाने लगी।
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चीकू की खुशबू का
गजब का अहसास होता है।
तभी तो बाजार में
ग्राहको का जोर होता है।
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वो मीट्टी भी गुलाब सी महकने लगी
जहां पर चीकू की की खुशबू छाने लगी।
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वो खुद चीकू जैस महकती है
जो गुलदस्ते में चीकू का पेड लगाती है।
अरे हंसती है जब वो लाल होठो से
दिल की धडकन तक मेरी बढने लगती है।
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धरती की गोद में खिलकर
चीकू का पेड बनता है।
जब पीलाता है किसान पसीना अपना
तब जाकर मीठा फल चीकू लगता है।
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सूरज की तेज धूप में
चीकू के पेड को पसीना पिलया था।
तभी तो इस पर इतना मीठा
चीकू लग पाया था।
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दिल को भी तेरी हुस्न की
आदत लग गई।
खाया तुने मीठा चीकू
और तु होठो से मुस्कुरा गई।
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जो थे तेरे चीकू
आज वो आम बन गए।
देखकर तेरे हुस्न को
छोरो के दिल धडक गए।
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चुन चुनकर वो चीकू खाने लगी
ओर देखकर मुझे वो होठो से मुस्कुराने लगी।
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दिल मे बसने वाली महबूबा भी जगब होती है।
खाती है चीकू खुद और दिल मेरा धडकाती है।

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चीकू खिलाने के बहाने
वो मिलने मुझे आई थी।
देखकर मुझे अकेला
होठो को चुम गई थी।
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चीकू की खुशबू से
ग्राहकों का बूरा हाल हो गया।
और तेरे चीकू जैसे बदन को देखकर
दिल मेरा दिवाना तेरा हो गया।
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चीकू भी खास लगने लगा
जब बालों मे यह तेरे सजने लगा।
अरे महकने लगा दिल भी मेरा
जब होठ तेरा गाल मेरे छूने लगा।
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खा कर वो चीकू
इतराकर चलने लगी।
और देखकर मुझे छत पर
चीकू खिलाने पास मेरे लगी।
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तेरे गोरे मुखडे का दिवाना
सरा जग होने लगा ।
जब तु चीकू खाकर
मीठा बनने लगा।
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किसान का भी चेहरा खुशी से खिल गया ।
जब बाग में लगा चीकू मीठा निकल गया।
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इस तरह से दोस्त, चीकू पर शायरी कैसी लगी, कमेंट में जरूर बताना।
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