Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

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लीची एक गुलाबी लाल रंग वाला फल होता है, जो की आकार में छोटी होती है। यह चमकिले फलों मे से एक होता है। और दूसरा की इसकी खुशबू भी काफी हर दिल को अच्छी लगती है। और यही कारण है कि लीची हम सभी को पसंद आती है।

यदि आप भी लीची खाना पसंद करते है, तो इसकी गुलाबी ला रंग पर जरूर ध्यान जाता होगा, क्योकी यही रंग है जो हमे अपनी ओर खिचलता है। और दूसरा  की इसकी खुशबू की बात ही अलग है, क्योकी खुशबू दिल को वश में कर लेती है और फिर हम मजबूरन लीची खरीद लेते है।

खैर यदि आप लीची को पसंद करते है, तो आज हम लीची पर कई प्रकार की शायरी लेकर आए है, तो आइए लीची पर शायरी पढे,

Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

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मुजफ्फरपुर की लीची ने

दिल बडा चुराया था।

पीलाकर मुझे मीठा रस

गुलाम अपना बनाया था।

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मुजफ्फरपुर की लीची ने

गजब ढा रखा है।

फैलाकर खुशबू का जादू

मुझे मिलने बुला रखा है।

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लीची की मीठास ने

दिल को गुलाम बना रखा है।

फैलाकर अपनी खुशबू का जादू

दिल को वश में कर रखा है।

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लीची की मीठास के सामने

आम भी फिका लगता है।

जब होती है मंडी में लीची,

तो आम कहा बिकता है।

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सेब की मीठास भी शर्मा जाती है

जब ग्राहक को लीची की खुशबू आ जाती है।

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लीची के साथ रहकर

अंगूर भी मीठा हो गया।

खरिदने लगे लोग जब लीची को

अंगूर देखकर बेहोश हो गया।

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देखकर लीची की चमक को

केला भी सलाम करता है।

रहती है लीची मंडी में इसकदर

जैसे इसका राज मंडी में होता है।

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Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

लीची की चमक के सामने

केला भी फिका लगने लगता है।

तभी तो लीची के सामने

केला इतना कम बिकता है।

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आम की रानी भी दिवानीहो जाती है ।

जब लीची अंदर से मीठी निकल जाती है।

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तरबूज के लाल मीठास को भी बुरा लग गया।

जब लीची का मोसम आ गया।

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किसान के हाथों की

मेहतन भी रंग लाती है।

जब बागों मे

लीची खुशबू अपनी फैलाती है।

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पसीने को जिस खेत को सींचा था

उसी खेत ने मुझे अपना समझा था।

देने लगा वो लीची भर भर थैले

जिस पेड को मैंने अपने हाथों से लगाया था।

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लीची के पेड को

पसीने से सींचा था।

तभी तो इस पेड ने

लीची जैसा मीठा फल दिया था।

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मिट्टी भी खुशबू से महकने लगी।

जहां पर लीची पेडो पर लगने लगी।

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मेहनत का भी बडा इनाम होता है

जिसका लीची जैसा मीठा स्वाद होता है।

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लीची के पेड पर

कई लीची लग जाती है।

तभी तो किसान के चेहरे पर

मुस्कान आ जाती है।

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लीची की खुशबू इतनी प्यारी लगती है

जैसे महबूबा के होठो की लाली लगती है।

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सावन के महिनों मे

शिव को याद करते है।

खाते है लीची प्यार से

ओर शिव को भेट चढाते है।

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लीची की खुशबू ने

शिव के दिल को महकाया है।

पीलाने के लिए अपना मीठा रस

शिव को मिलने धरती पर बुलाया है।

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लीची की खुशबू ने

दिल का बुरा हाल कर रखा है।

तडपता रहूं दिन रात मैं

इसकदर दिवाना मुझे बना रखा है।

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Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

मंडी में जब भीड बढी

तो लीची भी महक उठी।

खरीदने लगे लोग लीची पर लीची

तब जाकर लीची भी चांद सी चमक उठी।

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लीची की खुशबू ने

हर दिल को धडकाया है।

कैसा होता है इश्क का नशा

मीठा रस पिलाकर मुझे बताया है।

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जब जब लीची की खुशबू आती है

खुदा कसम मुझे तेरी याद आती है।

जब सोता हूं रात को आराम से

तो सपनों मे तु मिलने आती है।

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लीची जैसी खुशबू

तेरे गोरे बदन से आती है।

खा जाउ तुझे होठो से

जब तु परफ्युम लगाती है।

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तेरे हुस्न की खुशबू ने

मुझे रात भर सोने नही दिया।

खिलाती रही लीची तु दिन भर मुझे

तो अपने होठो को चुमने न दिया।

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लीची की खुशबू ने

मन को हल्का बना रखा है।

करता रहूं मैं याद तुझे

ऐसा हाल मेरा बना रखा है।

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लीची की मीठास

जब दिल में उतरती है।

दिल में बसे दर्द को

पल भर में दूर कर देती है।

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लीची के मीठे स्वाद ने

मन को बहलाया है।

खिलाती रहे लीची तु मुझे

इसलिए पास तुझे बुलाया है।

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लीची की मीठास में

खुशियों की बारिश बसी होती है।

तभी तो लीची खाने पर

चेहरे पर खुशी झलक जाती है।

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लीची के मीठास का दिवाना

मेरा दिल हो गया ।

तभी तो लीची खाकर दिल कहे

वाह मजा आ गया।

Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

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लीची के मीठास का दिवाना

किसान भी हो गया ।

तभी तो एक एक करकर

वो सारी लीची खा गया ।

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बंदर भी लीची खाने के लिए

बागों मे आ जाते है।

और देखकर माली को

बंदर तुरन्त भाग जाते है।

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वो बचपन के दिन याद आते है

जब ​लीची चुराकर हमे खाते थे ।

अरे लगती थी लीची बडी मीठी

जब शहद लगाकर खाते थे।

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लाल चमक वाला फल तो

टमाटर भी होता है।

मगर यह लीची जैसा

मीठा न होता है।

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लीची की मीठास ने

जीभ को दिवाना बना लिया।

खिला खिलाकर लीची

उसने बुरा हाल कर दिया।

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हर एक हरी डाली पर

कई लीची लगी होती है।

देखकर लीची की चमक को

किसान के दिल की धडकन बढ जाती है।

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लीची खाने का वो सोकिन था

तभी तो वो माली बन गया।

लगने लगी जब लीची पेड पर

तो वो सारी लीची एक साथ खा गया।

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Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

जीभ को आम भी फिका लगने लगा

जब लीची का स्वाद जीभ चखने लगा।

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होठो पर लाली लगार

वो लीची खाने लगी।

ओर देखकर उसकी अदाओं को

मेरे दिल की धडकन बढने लगी।

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तेरा प्यार मुझे

लीची जैसा मीठा लगता है।

चुमकर तेरे लाल होठो को

लीची खाने का अहसास मिलता है।

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होठ तेरे लीची जैसे लाल लगते है।

चुमता हू जब मैं इसे

खुदा कसम बवाल लगते है।

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तेरी मुस्कान का जादू

मेरे दिल पर इसकदर चला है।

जैसे लीची के मौसम में

आम बाजरों मे बिका है।

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जब बाजार में लीची मिलती है

तो ग्राहकों की कतार बडी लंबी लगती है।

अरे खरीदते है सब लोग लीची को

जब यह अंदर से मीठी निकलती है।

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दुकानों में सान से बैठती है

तभी तो लीची महंगी मिलती है।

अरे होती है यह मीठी बहुत

तभी तो ग्राहकों के दिल में बसती है।

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मंडी में भी अमरुद का नाम छाने लगा

लगता है लीची का काम तमाम होने लगा।

Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

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मंडी में दिन रात बिकने लगी

जब लीची अंदर से मीठी निकलने लगी।

अरे खरीदने लगे ग्राहक ​लीची को

जब यह सस्ती मिलने लगी।

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हर दिल की रानी लीची होती है

तभी तो लीची की एक कहानी होती है।

करता है पसंद ग्राहक ​इसे

इतनी मस्त लीची जवानी होती है।

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लीची की मस्त जवानी पर

दिल ग्राहक का आ गया।

तभी तो महंगी होकर भी

लीची सारा का सारा बीक गया।

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लीची की दुनिया में

किसान का ही राज होता है।

बनाता है जो इतना मीठा फल

वह किसान ही खुदा होता है।

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संतरे को भी अपनी

खट्टास पर घमंड हो गया।

जब लाल चीनी का स्वाद

अंदर से मीठा निकल गया।

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लीची की खुशबू ने

संतरे को बडा महकाया है।

रखकर संतरे को अपने साथ

इसे आज खुब बिकाया है।

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हजारों फल भी फिके लगते है

जब लीची के पेड पर लीची मीठे लगते है।

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सेब की चमक भी

फिकी पड जाती है।

जब लीची लाल होकर

मीठी निकल जाती है।

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लीची भी टोकरी में

सजकर बिकने लगी।

जब आम की मीठास

ज्यादा अच्छी लगने लगी।

Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

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अंगूर की बेल पर

लीची लग जाती है।

तभी तो लीची खाकर

दिल की धडकन बढ जाती है।

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लीची के पेड पर अंगूर लगने लगे।

तभी तो आजकर अंगूर

लीची जीतने मीठे होने लगे।

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सूरज की तेज धूप में

किसान दिन रात जलता है।

तब जाकर लीची का पेड

लीची मीठी देता है।

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खेतों में सपने सजने लगे

बनकर लीची पेड पनपने लगे।

फैलती रही बाजरों मे खुशबू

तो लीची भी खुब बिकने लगे।

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किसान का चेहरा भी खिल जाता है

जब लीची बागों मे पकने लग जाता है।

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किसान की मेहनत भी रंग लाती है

जब हर डाली पर लीची पक आती है।

अरे फैलती है खुशबू दूर दूर तक

तभी तो दौडकर लक्ष्मी धरती पर आती है।

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Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

वो किसान भी खुश होने लगा

जिसके बागों मे लीची का पेड उगने लगा।

खिल गया किसान का भी मन

जब लीची लाल मीठा होने लगा।

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लीची की खुशबू ने

दिल को बडा महकाया है।

सजाकर टोकरी में खुदको

मिलने इसने बागों में बुलाया है।

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वो धरती भी महकने लगती है

जहां पर लीची पकने लगती है।

आती है खुशबू चारों ओर से

जहां पर लीची लाल मीठी लगती है।

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हवा भी झूमकर नाचने लगती है

जब लीची कि खुशबू फैलने लगती है। 

खाता है ग्राहक इसे चाव से

जब लीची मीठी निकलने लगती है।

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चारो ओर गजब की खुशबू आती है

जब बागों मे लीची पक जाती है।

अरे खाते है लीची को चाव से

जब महबूबा पास मिलने आती है।

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खुशबू से भरी टोकरी पास आ गई

जिसमें सजकर लीची आ गई।

खाने लगा लीची को प्यार से

इतने में पीछे से ममी आ गई।

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Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

लीची का मीठा स्वाद

मन को भा जाता है।

तभी तो खा कर लीची

मजा आ जाता है।

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लीची की मीठी मीठी बातों ने

मुझे बडा तडपाया है।

करकर तेरी तारिफ इसने

तेरा दिवाना मुझे बनाया है।

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लीची की मीठास पर

दुनिया भी दिल हार बैठती है।

खाने के लिए लीची को

मुंह अपना फूलाकर बैठती है।

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जीभ को तो लीची का स्वाद चाहिए

तभी तो इसे अपना कोई चाहिए ।

अरे खिलाती रहे लीची वो मुझे

ऐसी दिल की महबूबा चाहिए।

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सुना है लीची के स्वाद पर

तुम बडे मरते हो।

खाते हो लीची को चाव से

जब चुराकर तुम लाते हो।

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लीची की मीठास ने इसे

मीठास की रानी बना रखा है।

खरिदता रहे ग्राहक इसे दिनभर

इसलिए चमकदार खुदको रखा है।

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तेरे लाल होठो की खुशबू ने

मेरे दिल का बुरा हाल कर दिया।

और चुमकर तेरे होठो ने मुझे

लीची का स्वाद मुझे दे दिया।

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Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

तेरे साथ जीवन का

हर पल हसीन लगता है।

खाता हूं जब लीची मैं

दिल मेरा तुझे याद करता है।

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पडोसन के प्यार में

दिल आवारा बन गया।

खाया लीची प्यार से

तभी तो दिन बिमार हो गया।

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लीची की मस्त जवानी देखकर

​जीभ भी ललचाने लगी।

अरे खाई लीची काटकर मैंने

तो दिल की धडकन बढने लगी।

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तेरे हुस्न की खुबसूरती मुझे

इश्क की मस्त जवानी लगती है।

जब खाती है तु लीची लाल होठो से

महलों की कोई रानी लगती है।

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आसमान से उतरने वाली

धरती का हाल क्या जानती है।

खाती है वो लाल मीठी लीची

और वापस चली जाती है।

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तेरे नाम में इतनी मीठास है

कि लीची भी इसके सामने फिकी लगती है।

पर जब खाती है तु लीची को

इश्क से भरी मीठी बोतल तु लगती है।

Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

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मंडी में भी उधम मचाने लगी

जब लीची अंदर से लाल मीठी निकलने लगी।

खाई लीची को तो याद तेरी आई

इतने में तु सामने आ गई।

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बाजार भी लीची की तारिफ करने लगे

जब एक ही दिन में लीची क्विंटल में बिकने लगे ।

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जिसे दिन रात मैंने चाहा था

वो सपनो की रानी है तु।

खाती है जो दिन रात लीची

ऐसी इश्क की कहानी है तु।

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लीची के नाम पर

महबूबा को याद करते है।

खाती है जो लीची को

ऐसी लडकी से प्यार करते है।

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लीची जिसकी पसंद हो

वो प्यार हमारा होगा ।

अरे खाती हो जो दिन रात लीची

ऐसा घरवाला हमारा होगा ।

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लीची की दुनिया में

कई महंगे फल मिलते है।

मगर फिर भी उनसे ज्यादा

लीची ही लोग खरीदते है।

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कीवी को भी दुख बडा होता है

जब महंगी लीची को कोई खरीदता है।

Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

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चीकू के रस पर

दिल हर कोई हार जाता है।

जब देखता है लीची को

चीकू को ही भूल जाता है।

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मीठे स्वाद की दुनिया में

लीची ही रानी होती है।

करते है लोग इससे प्यार

ऐसी लीची की इश्क की कहानी होती है।

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लीची की खुबसूरती पर

मेरा दिल फिदा हो गया ।

ओर खा कर लीची को

दिल को भी मजा आ गया।

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आज जामुन भी अंदर से खट्टा निकल गया।

तभी तो लीची आज बाजार में इतना बिक गया।

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Top 190+ लीची पर शायरी lichi par shayari (लीची की मीठी बातें)

लीची का दुश्मन तो अनार होता है

तभी तो देखकर लीची को

अनार इतना जलता है।

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तो इस तरह से दोस्त, लीची पर शायरी कैसी लगी कमेंट में जरूर बताना।

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