Top 206+ khajur par shayari, खजूर पर शायरी (खजूर की मीठी मीठी बातें)
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खजूर एक ऐसा फल होता है, जो की मानव के लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी होता है। क्योकी खजूर में फाइबर, पोटैशियम और आयरन का बेहतरीन स्रोत है, जो की मानव के स्वास्थ्य के लिए काफी उपयोगी होता है।
डॉक्टर भी कहते है कि जो व्यक्ति खजूर खाता है वह पाचन की समसया से मुक्त रहता है, हड्डियों को मजबूत बनी रहती है, और एनीमिया (खून की कमी) से छूटकारा मिलता है। इसलिए बहुत से लोग खजूर खाने के शोकिन होते है।
मगर जिस भी व्यक्ति को खजूर खाना अच्छा लगता है वह सही मायने में खजूर पर शायरी पढने का बडा शौकिन होता है। और यदि आप भी खजूर पर शायरी पढना चाहते है, तो इस लेख मेंआपको कई प्रकार की खजूर पर शायरी मिलेगी। तो आइए खजूर पर शायरी पढे —
Top 206+ khajur par shayari, खजूर पर शायरी (खजूर की मीठी मीठी बातें)

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खजूर की खुशबू के सामने
काजू बादाम भी हार जाते है।
जब सुनते है खजूर का भाव
तो खुश काजू बादाम हो जाते है।
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काजू की मीठास भी फिकी पड जाती है
जब खजूर की खुशबू आ जाती है।
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आम की मीठास भी
फिकी लगने लग गई।
जब बाजार में खजूर की
खुशबू बिकने लग गई।
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सेब की लाली भी
फिकी पड जाती है।
जब खजूर पकने की
खुशबू आ जाती है।
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दुकानों मे ग्राहकों की भीड बढ गई।
जब खजूर की खुशबू बाजार में फैल गई।
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ग्राहकों के दिल को भी सकुन मिलता है
जब बाजारों मे खजूर सस्ता मिलता है।
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पिस्ता भी सजकर रहने लगा
जब खजूर के साथ बिकने लगा।
अरे आने लगा मजा ग्राहक को भी
जब खजूर के साथ पिस्ता फ्रि मिलने लगा।
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खजूर का भाव भी आसामन छूने लगा
जब खजूर अंदर से मीठा निकलने लगा।
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खजूर की मीठास के समाने
आम भी फिके पड जाते है।
तभी तो खाने के लिए खजूर
ईश्वर भी धरती पर आ जाते है।
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अंगूर का खट्टा मीठा
रस भी फिका पड गया ।
जब खजूर अंदर से
लाल मीठा निकल गया।
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चीनी से भी मीठा खजूर होता है
तभी तो खा कर खजूर दिल खुश होता है।
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तेरे लाल होठो की मीठास मुझे
खजूर की याद दिलाती है।
अरे महकती है तु इसकदर
जैसे खजूर तु दिन रात खाती है।
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गोरे मुखडे वाली ने
सितम ढा रखा है।
खा खा कर खजूर
खुदको महका रखा है।
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उसका दिल भी
गुलाब सा महकने लगा ।
जो छत पर खडा होकर
खजूर अकेला खाने लगा।
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चाय की प्याली के साथ
खजूर वो खाती रहती है।
और देख देखकर मुझे
होठो से मुस्कुराती रहती है।
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नीले आसमान के नीचे
खजूर कई लग जाते है।
तभी तो देखकर खजूर को
तारे टिमटिमाने लग जाते है।
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खजूर की खुशबू ने
चांद को भी दिवाना बना लिया।
फैलाकर अपनी खुशबू का जादू
धरती पर चांद को मिलने बुला लिया।
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चांद भी खजूर की
खुशबू का दिवाना हो गया ।
तभी तो खाने के लिए खजूर
चांद धरती पर आ गया।
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ईश्वर के दिल को भी
सकून मिल जाता है।
जब धरती पर खजूर
महकने लग जाता है।
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सजकर दुल्हन सी वो
प्यार से मुस्कुराने लगी।
भर कर प्यारी खजूर से
वो जब अकेली खाने लगी।
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खजूर जैसी उसकी
मीठी बोली लगती है।
तभी तो देखकर उसे
दिल की धडकन खुश होती है।
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खजूर भी बादाम से
मुकाबला करने लगा।
जब खजूर अंदर से
मीठा लाल निकलने लगा।
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वो गली भी महक उठती है
जहां पर खजूर की खुशबू फैलती है।
अरे बढ जाते है ग्राहक तुरन्त
जब खजूर मीठी निकलती है।
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खजूर की मीठास ने
दिल को पागल कर रखा है।
खिलाने के लिए खजूर उसने मुझे
पास अपने बुला रखा है।
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तेरे गुलाबी होठो की कसम
तु खजूर जैसी मीठी लगती है।
अरे चूम लू तरे गुलाबी होठो को
ऐसी मीठे रस की प्याली तु लगती है।
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हाथ में दस का नोट हो
तो भी खजूर कई मिलते है।
अरे आता है स्वाद जीभ को
और मजे दिल को मिलते है।
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किसान का चेहरा भी खिल जाता है।
जब खजूर पक कर महकने लग जाता है।
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सूरज की तेज धूप में
खजूर का पेड जलता रहा।
आखिर तब जाकर खजूर
अंदर से मीठा बनता रहा।
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बाजार में भी हंगामा हो गया
जब खजूर की थैली में सोना मिल गया।
अरे बढने लगे ग्राहक बाजार में
इतने में सरा खजूर ही खत्म हो गया।
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तेरे हुस्न के जादू ने
खजूर को भी दिवाना बना दिया।
और खिलाकर खजूर तुने मुझे
दिल का बुरा हाल कर दिया।
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तेरे होठो की मीठास के सामने
खजूर की मीठास भी फिकी पड जाती है।
और चूम कर तेरे होठो को
दिल की धडकन बढ जाती है।
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इश्क तेरा
खजूर जैसा मीठा लगता है।
तभी तो बाते करकर तुझसे
दिल को अच्छा लगता है।
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होठो पर लाली लगाकर
वो खजूर चुम चुमकर खाती है।
अरे लगती है वो दिल को बडी मस्त
जो आंखो पर चश्मा काला लगाती है।
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दिल की धडकन भी
इश्क का गीत गाने लग जाती है।
जब खजूर पकने की
खुशबू आने लग जाती है।
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पिस्ते का हरा रंग भी
फिका पडने लग जाता है।
जब खजूर रात में भी
चमकने लग जाता है।
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जिसे समझा था खजूर मैंने
वो सुखा बादाम निकला।
और जीसे पिया था पानी समझकर
वो दुध का गिलाश निकला।
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सुबह उठते ही
4 खजूर रोज खाना चाहिए ।
जो है तुम्हारा शरीर कमजोर
उसे ताक्तवर बनाना चाहिए ।
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खजूर की मुस्कान देखकर
केला भी दिल अपना हार गया ।
जब निकला खजूर अंदर से लाल
तो खजूर के पीछे केला पड गया।
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खजूर की मीठी खुशबू
जब बाजार में छाने लगी ।
ग्राहकों के दिल की धडकन भी
खजूर खाने को कहने लगी।
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भरकर प्याल खजूर की
वो अकेली खा जाती है।
जो लाल साडी पहनकर
घर से निकल जाती है।
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मीठे खजूर की प्यारी ने
इश्क का रस पिलाया है।
करके तेरे हुस्न की तारिफ
दिवाना मुझे तेरा बनाया है।
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संतरे को छिलने में
दिन सारा गुजर जाता है।
इतने में खजूर खा कर
दिल खुश हो जाता है।
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फलो की महफिल में भी
डर का माहौल बन गया ।
जब खजूर महंगा होकर
बाजार में ज्यादा बिक गया।
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काजू महंगा होता गया
तभी तो यह कम बिकता गया।
जो आता गरीब बाजार में
वो तो सस्ता खजूर ही खरीदता गया।
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गरीबों के चेहरे पर भी हंसी छा जाती है
जब खजूर पकने की खुशबू आ जाती है।
और जब खाता है खजूर गरीब
तो दिल की धडकन उसकी बढ जाती है।
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बचपन का वो दिन याद आता रहा
जब एक खजूर के लिए मैं चिल्लाता रहा।
अरे नही आया किसी को मुझ पर तरस
तभी तो खजूर आज महंगा होता रहा।
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बचपन में खजूर कई खाते थे
जब मिलने मामा घर आते थे।
अरे आता था स्वाद खजूर खाने में
जब अंदर से यह मीठे निकल जाते थे।
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चंद सिक्कों मे जो मिल जाए
वो खजूर की मीठास हूं।
करती हूं बच्चो को खुश मैं
ऐसी दिल की प्यास हूं।
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अनार के दाने गिनने में
दिन सरा गुजर जाता है।
तभी तो खजूर खा कर
दिल खुश हो जाता है।
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अखरोट तोडने में
पसीना आ जाता है।
और खा कर खजूर
मजा दिल को आ जाता है।
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अंजीर भी सूरज की धूप में सुकने लग गई।
जब बाजार में खजूर की खुशबू बिकने लग गई।
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केसर का भी खूजर के साथ
मुकाबला हो जाता है।
जब केसर के सामने
खजूर ज्यादा बिक जाता है।
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नाशपाती का स्वाद तो
दिल को बडा पसंद आता है।
मगर खजूर हो जब सामने
तो नाशपाती कोन खाता है।
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दूध में डालकर वो खजूर रोज खाता है।
जो है कमजोर शरीर उसे ताक्तवर वो बनाता है।
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थैली भर भरकर लोग ले जाने लगे
जब खजूर मीठे निकलने लगे।
अरे बढ गई भीड बाजार में
जब महंगे खजूर सस्ते मिलने लगे।
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बाजार में भी अफवाह फैल गई
कि खजूर के सामने केरी बिक गई।
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व्यापारी के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है
जब खजूर कि बिक्री ज्यादा हो जाती है।
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छोटा हो या बडा
सभी को खजूर पसंद आता है।
अरे खाते है खजूद चाव से
जब खजूर मीठा लाल निकल आता है।
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डिब्बों मे सजकर खजूर बिकने चले जाते है।
जब बाजार में खजूर कम पड जाते है।
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खजूर की खुशबू ने
दिल को बडा महकाया है।
करके तेरी तारिफ इसने
दिवाना मुझे तेरा बनाया है।
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गणेश चतुर्थी के दिन
लड्डू में खजूर मिलकर बिकते है।
तभी तो खा कर खजूर वाले लड्डू
गणेश जी खुश हो जाते है।
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गुलाब का फुल भी
इश्क की बातें करना भूल गया।
जब खजूर की खुशबू ने
गुलाब का दिल महका दिया।
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आशिकों की दुनिया में
खजूर का भी नाम होता।
अगर गुलाब के साथ
खजूर फ्रि में मिल जाता।
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खजूर के मीठे रस ने
दिल कईयों का बहलाया है।
करकर इश्क की बात
गुलाब को मिलने बुलाया है।
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खजूर की खुशबू ने
दिन को भी त्योहार बना दिया।
पिलाया मुझे अपना मीठा रस
और मेरे दिल को खुश कर दिया।
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चीनी और गुड की मीठास भी
फिकी रह जाती है।
जब खजूर की मीठास
जीभ पर चढ जाती है।
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हर निवाले पर
खजूर की याद आती रही।
रहकर पास तु मेरे
दिन भर मुझे रुलाती रही।
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हाथ में दस का नोट लेकर
वो दुकान में चला जाता है।
जो खजूर खाने का
शौकिन बन जाता है।
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खजूर की खुशबू ने
दिल को महका दिया है।
पिलाकर अपना मीठा रस
दिल के दर्द को दूर किया है।
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तेरे लाल होठो की कसम
तु आज पटका लगती है।
और खाती है जब खजूर तु
मीठी रसमलाई लगती है।
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बादाम पीस्ता भी बुरा मानने लगे ।
जब खजूर ग्राहकों को सस्ते मिलने लगे।
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गरीबों के हाथों मे
छाले कई पड जाते है।
तब जाकर खजूर
बागों मे पक जाते है।
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पसीने से सींचा था जिसे मैंने
वो पेड आज छांव देना भूल गया।
जो देता था मीठा खजूर हमेशा
आज वो खजूर देना ही भूल गया।
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सूरज की तेज धूप में
तन बदन जलता रहा।
तब जाकर खजूर का पेड
मीठा खजूर बनाता रहा।
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नीले आसमान के नीचे
कई पेड लगे होते है।
देता है जो मीठा फल
वो खजूर के पेड होते है।
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स्वर्ग तक महक उठता है
जब खजूर बागो में पक जाता है।
उतर आते है देवता भी धरती पर
जब खजूर खाने को दिल कर जाता है।
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तेरे गोर बदन से
खजूर की खुशबू आती रही।
देखकर मुझे अकेला
पास आकर तु खजूर खिलाती रही।
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अकेला देखकर वो
छत पर आ जाती है
जो खजूर की भरकर
प्याली अकेली खा जाती है।
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खजूर की मीठी खुशबू ने
बाजार को बडा महकाया है।
बुला कर ग्राहक अपने पास
खजूर ने मीठा रस पिलाया है।
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जिसे चाहता था दिन रात मैं
वो अकेली खजूर खाने लग गई।
और देखकर मुझे सामने
खजूर छिपाने लग गई।
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खजूर का बडा दिवाना हुआ करता था।
जब बचपन में मैं हुआ करता था।
अरे आता था मजा खजूर खाने में
जब पैसे देना मुझे न हुआ करता था।
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तेरी नशील आंखो ने
न जाने कौनसा नशा मुझे करा दिया।
और खिलाकर तुने मीठा खजूर
दिल का दर्द दूर कर दिया।
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हाथ में खजूर की प्याली लेकर
मिलने वो घर आ जाती है।
देखकर मुझे अकेला घर में
गालों को चुमकर चली जाती है।
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आंखो पर काला चश्मा लगाकर
वो बाइक पर सवार हो गई।
देखकर खजूर की प्याली को
तुरन्त खाने वो लग गई।
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काजू कतली भी
मीठी लगने लग गई।
जब खजूर की खुशबू
काजू कतली में आने लग गई।
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मिठाईयों की दुकान में
खजूर सान से सजकर बैठते है।
जब आते है ग्राहक दुकान में
बडे उदास होकर बैठते है।
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होली के त्योहार पर
मिठाईयां कई मिलती है।
पर हो जिसमें खजूर
वो मिठाईयां कंहा मिलती है।
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जब पकते है बागों मे खजूर
तो शिव के चरणों मे चढाए जाते है।
अरे खाते है शिव खजूर चाव से
जब अंदर से मीठे निकल जाते है।
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इस तरह से दोस्त, खजूर पर शायरी कैसी लगी कमेंट में जरूर बताना।
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