मांग में सिंदूर पर 176+ शायरी, maang ka sindoor shayari
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दोस्त, आपका स्वागत है हमारे शायरी के ब्लॉग padhakushayari.in में, और आज हम आपके लिए maang ka sindoor shayari लेकर आए है, जहां पर हम केवल मांग में सिन्दूर शायरी जानेगे ।
जब किसी महिला का विवाह होता है, तो उसका जो पति होता है वह उसकी मांग में लाल रंग लगाता है, जिसे सिंदूर कहा जाता है। और इसे मांग का सिंदूर भी कहा जाता है।
हिंदू धर्म मे इस मांग के सिंदूर को पति की लंबी उम्र से जोडा जाता है। दूसरा की ऐसा कहते है कि केवल वही महिलाए मांग में सिंदूर लगा सकती है जिनका पति जीवित है। मतलब जिनका पति इस दुनिया में नही रहा है वे मांग में सिंदूर लगाने का हंक नही रखती है। और इसी मान्यता को आज हिंदू धर्म में अपनाया गया है ।
मगर सबसे पहले तो विवाह के समय में ही मांग मे सिंदूर लगाया जाता है। और उसी के बाद में सिंदूर लगाना शुरु होता है। और आज के इस विडियों मे हम मांग पर सिंदूर शायरी लेकर आए हैं तो आइए दोस्त मांग पर सिंदूर शायरी पढे,
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तेरे चेहरे पर भी मेरे इश्क का नूर होगा,
जब होगा पास तु मेरे दिल भी खुश तेरा होगा ।
न जा पाएगा तु कभी मुझसे दूर,
जब मेरी मांग मे सिंदूर तेरे नाम का होगा ।

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मांग मे सिंदूर मैं भी भर देता,
पर उसे जीवन भर खुश रखना जरूरी था ।
इश्क करता था उससे सबसे ज्यादा,
पर पहले कामयाब होना जरूरी था ।
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अभी कुछ समय रुक जाओ जान,
तुम्हे अपना भी बना लेगे ।
भर देगे तेरी मांग में सिंदूर,
ओर तुम्हे अपना भी बना लेगे ।
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तु मेरे दिल का रखवाला है,
तभी तो मांग मे सिंदूर तेरे नाम का है।
कैसे जाने दुगी तुझे विदेश मैं,
आखिर मेरे दिल में तेरे इश्क का नाम है।
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चुटकी भर सिंदूर मेरी मांग में भरा,
जो था पराया उसे मैंने अपना बनाया ।
ले गया वो घर के लोगो के सामने मुझे,
जिसे मुझे अपनी पत्नी है बनाया ।
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दिल को मेरे धड़काने वाला,
मांग में सिंदूर न जाने कब भरेगा ।
जो है मेरे से दूर अभी तक,
न जाने पास कब मेरे आएगा ।

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मेरा भी वो सपना आज पूरा होगा,
जब मेरी मांग मे सिंदूर उसके नाम का होगा ।
बन जाउगी उसकी प्यारी सी पत्नी,
जो जीवन भर मेरा हमफसर होगा ।
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जब तेरी मांग में सिंदूर चमकता है,
तेरे माथे की बिंदिया फिकी पड़ती है।
लगाकर तु होठो पर लाली,
दिल का बुरा हाल करती है।
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तेरे चांद से मुखड़े का दिवाना
मेरा प्यारा सा दिल हो गया ।
जब लगा तेरी मांग मे सिंदूर,
इसका रखवाला मैं हो गया ।
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उसके नाम का मांग मे सिंदूर लगाती हूं,
दिलो जान से उसे चाहती हूं ।
न जाने दूगी उसे कभी मेरे से दूर,
जिसके लिए मैं श्रृंगार करती हूं ।
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मांग के सिंदूर के आगे,
सारे श्रृंगार फिके पड़ गए ।
और सिंदूर को देखकर
वो मेरे प्यार मे गिर गए ।
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जो है मेरी प्रेमिका
उसकी मांग पे सिंदूर मैं लगाउगा ।
आ गया है आज वो दिन,
जब प्रेमिका को पत्नी मैं बनाउगा ।

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मांग मे सिंदूर कितना प्यारा लगता है,
आंखो में नमी इश्क की बोतल लगती है।
जब देखता हूं तेरी चांद सी सुरत को,
कसम से तु परियों की रानी लगती है।
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बेंड बाजों के साथ वो आएगे,
मांग में सिंदूर मेरे भर जाएगे ।
ले जाएगे मुझे अपनी पत्नी बनाकर,
जो मेरे लिए बारात लेकर आएगे ।
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उसके आने का इंजार अभी से है,
मांग भी उसके लिए तैयार है।
न जाने वो कब बारात लेकर आएगे,
ओर मांग में सिंदूर लगाएगे ।
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एक चुटकी सिंदूर ने ,
दो दिलों को धड़कन बना दिया ।
जो रहते थे दूर दूर,
उन्हे एकदम पास ला दिया ।
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तेरी मांग पर सिंदूर मैं सजाउगा,
तुझे दुल्हन तक बनाउगा ।
बस थोडा सा इंतजार कर लो जान,
तुम्हे ढोल बाजें के साथ लेजाउगा ।
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इश्क उससे बहुत ज्यादा करता हूं,
तभी तो दिन रात उसकी फिकर करता हूं ।
जीवन साथ बनाने के लिए,
उसकी मांग मे सिंदूर मैं आज भरता हूं ।
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जीवन के एक साथी को पाने के लिए,
उसकी मांग में सिंदूर मैंने लगाया ।
जो थी कभी मेरे से पराई,
उसे घरवानी मैंने अपनी बनाया ।

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उसकी मांग मे सिंदर भरकर,
जीवन मैंने उसका बदल दिया ।
जो थी कभी मां की बेटी,
उसे आज बहू मैंने बना दिया ।
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तेरे मांग मे सिंदूर भरते ही,
जींदगी मेरी खिल गई।
जो छिपी थी दिल मे बात,
वो तक तेरे साथ बंट गई।
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तेरी मांग में सिंदूर मेरे नाम का है,
तभी तो दिल को मेरे सुकून है।
अरे है तु मेरे दिल की रखवाली,
तभी तो मेरे दिल की मोज है।
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एक छोटी सी लकीर पे,
पति तु मेरा बन गया ।
पर लगाया मांग मे सिंदूर तुने,
घरवारा तु मेरा तुरन्त बन गया ।
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शादी के लिए मांग में
सिंदूर लगाना जरूरी है,
और इश्क के लिए महब्बूब को
सोपिंग करना जरूरी है ।
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मेरी मांग में सिंदूर की एक लकीर ने,
मुझे सुहागन है बनाया ।
जो था कभी पायारा,
उसे इस सिंदूर ने पति मेरा है बनाया ।

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इश्क की बातें करने का मन मेरा होता है,
जब पास तु मेरे होता है।
जब लगाया मांग में सिंदूर तुने,
दिल भी तेरे नाम का गाना गाता है।
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जिस मांग मे सिंदूर लगा हो,
उस पति को विश्वास हमेशा रहता है।
जब पत्नी का प्यार सच्चा हो,
तो सिंदूर तक महकता रहता है।
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जब बारात लेकर वो आ गए,
मांग मे सिंदूर तक भर गए ।
मिल गया मुझे वो जीवन साथी,
जो मुझे पत्नी बनाकर ले गए ।
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जो लगाती है मांग मे सिंदूर मेरे नाम का
वो दिल के हमेशा करीब रहती है।
जो मानती है मुझे पति प्रमेश्वर,
वही तो मेरी दिल कि धड़कन बनकर रहती है।
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मेरे दिल के करीब वो रहता है,
जो मांग मे सिंदूर मेरे लगाता है।
नही है वो कोई ऐसा वैसा बल्की
चोरों को जेल तक वो पहुंचाता है।
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पति मेरा पुलिस में काम करता है,
पर दिल मे हमेशा वो मेरे रहता है।
जब जाता है घर से नोकरी करने,
मांग मे सिंदूर मेरे वो हमेशा लगाता है।
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मेरी मांग मे सिंदूर उसने भर दिया,
जीवन साथी मुझे उसने अपना बना लिया ।
अब कैसे रहुगी उसके बिना मैं ,
जिसने मुझे घर अपने बसा लिया ।

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जब लगाती हूं मांग मे सिंदूर मैं,
मेरे पति पर मुश्बिते न आती है।
जब करती हो उनके नाम का चोथ का व्रत,
उनकी उम्र तक लंबी होती है।
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मेरी मांग मे सिंदूर जो है,
उसमें मेरे पति का प्यार छिपा है।
है यह सिंदूर आस्था का प्रतीक,
तभी तो मेरी मांग में यह लिपटा है।
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मेरी मांग मे सिंदूर एक चुटकी उसने भरा,
बदले में लाखों वादो का सहारा उसने लिया ।
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मेरी मांग में जो सिंदूर है,
उसमें पति का वास रहता है।
जब जाते है वो दूर मुझसे,
दिल उसी को याद करता है।
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जबसे तुने मेरी मांग मे सिंदूर भरा है,
तेरे बिना रहने का मन नही करता जान ।
क्यों चले गए तुम मुझे छोड़कर दूर,
तेरे बिना दिल तक न धड़कता जान ।
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आज वो दिन है,
जब मांग मे सिंदूर वो मेरे भरेगा ।
हू मैं अभी तक मां बाप की बेटी,
जिसे आज वो अपनी पत्नी बनाएगा ।
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मेरी मांग मे जो सिंदूर है,
उसमें मेरे पति का प्यार बसता है।
जो है दिल में मेरे छोटा सा घर,
उसमें मेरा पति खुद बसता है।

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मेरी मांग का सिंदूर,
उसकी हर वादे को मानता है।
जो कहती हूं बाते मैं,
वो मेरे सिंदूर का रखवाला मानता है।
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तेरी मुस्कान को देखकर
दिल मेरा दिवाना तेरा हो गया।
देखकर तेरी मांग मे सिंदूर,
फिदा मैं तुझपर हो गया ।
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कहते है कि दिल में एक घर होता है,
जिसमें महब्बूब मेरा बसा होता है।
जो लगाती है मांग मे सिंदूर तु,
उसी से हमारा रिश्ता पक्का होता है।
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तेरी मांग मे सिंदूर खुब चमकता है,
इसकी चमक के आगे चांद फिका लगता है।
जब निकलती है तु अंधेरी रात में,
अंधेरा तक दूर भागने लगता है।
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तेरे मांग के सिंदूर ने,
दुख दर्द मेरे दुर किए है।
जो करती है तु चौथ का व्रत,
उसी ने मेरे प्राण आज बचाए है।
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सिंदूर तेरी मांग पर जो लगा है,
वो मेरे इश्क की निशानी है।
जिसने बसाया है मेरे दिल में अपना घर,
वो नाम तेरे खुद की निशानी है।
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जब तेरी मांग में सिंदूर लगा होता है,
दुश्मन भी तेरे से खुब डरता है।
जब जानता है कि किसकी पत्नी हो तुम,
हर बुरा व्यक्ति कांपने लगता है।

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तेरे नाम का सिंदूर
मेरी मांग मे सजा है।
देखकर इसकी चमक को,
दिल कहे मजा ही मजा है।
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मांग मेरी तेरे सिंदूर का
इंतजार करती है,
कब आओगे बारात लेकर
दुल्हन तेरी इंतजार करती है।
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तुझसे मिलने के लिए हम आ रहे है,
रास्तो को पार करकरे आ रहे है।
रहना तुम तैयार मेरी जान,
मांग में सिंदूर लगाने हम आ रहे है।
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जंगल को काटकर रास्ता बनाना है,
तेरे बात को भी तो मनाना है।
तभी लगेगा तेरी मांग मे सिंदूर,
जब घर वालों को मुझे मनाना है।
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जब होता है तेरी मांग में सिंदूर,
घर में मेरे सौभाग्य का वास होता है।
जब करती हो तुम प्यार से बाते,
घर में खुशियों का पल होता है।
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उसकी मांग मे सिंदूर लगा है,
दिल भी उसका मेरे से लगा है।
अरे नही करती हो वो मांग के सिंदूर की कदर,
तभी तो पति उसका बीमार पडा है।
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जब मांग में सिंदूर मैं लगाती हूं,
दिल खुश पति का होता है।
जब करती हूं इश्क की बाते,
रोम रोम खड़ा उनका होता है।
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सिंदूर तेरी मांग मे लगा दिया,
आज से तुझे अर्धांगिनी बना लिया ।
अब ले जाएगे तुझे अपने घर,
क्योकी विवाह मैंने तुझसे कर लिया ।

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तेरी मांग के सिंदूर को जब देखता हूं,
दिल मेरा मुस्कुराने लगता है।
जब देखता हूं तुझे लाल साडी मे,
दिल तेरी ओर खिचा चला आता है।
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मेरी मांग मे जो सिंदूर है,
उसकी लकीर बडी लंबी है।
शायद यही कारण है कि,
तभी मेरे पति की उम्र लंबी है।
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रोज नहा धौकर सिंदूर मांग में लगाती हूं,
पति के नाम को प्रेम से जाती हूं ।
भूलकर भी भूल नही सकती,
इतना ज्यादा इश्क उनसे मैं करती हूं ।
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सुना है मांग के सिंदूर
लंबी लकीर में लगाना पसंद है।
नही रह सकती हमारे बिना तुम,
तुम्हे तो हमारे साथ रहना पसंद है।
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मेरे संसार को तुने घर बनाया,
मांग मे सिंदूर लगाकर मेरे नाम को सजाया ।
करती हो तुम मुझसे इतना इश्क,
कि कष्ट होने पर मुझे एकबार भी न बताया ।
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तेरी मांग के सिंदूर में,
लाल चमक दिखती है।
जब लिपटती हो गले से मेरे,
महोब्बत तेरी साफ दिखती है।
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लाखों हसिना है तेरे से खुबसूरत,
पर तेरी मांग में सिंदूर मेरा है।
तभी तु खास है मेरे लिए,
क्योंकी मेरे दिल में घर तेरा है।

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सूंदरता की तुम मुरत हो,
दिल मे बस जाओ ऐसी हसीना हो ।
जब लगाती हो मांग मे सिंदूर,
दिल को संभालने वाली दिलरुबा हो ।
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मेरे दिल में तुने घर,
मांग मे सिंदूर लगा कर बनया।
चहता था तुझे दिलों जान से,
पर तुन्हे मंगलसूत्र पहकर मुझे अपना बनाया ।
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तेरी मांग मे सिंदूर जो है,
उसमें मेरा प्यार तक छिपा है।
अरे है पता मुझे कि,
तेरे दिल में मेरे सिवा कोई न छिपा है।
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तेरे दिल में घर मुझे बनाना है,
साथ तेरे जीवन अपना बिताना है।
अगर हो जाओ राजी तुम तो बताना,
क्योकी तेरी मांग में सिंदूर मुझे लगाना है।
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दिल जिस पर फिदा हुआ,
वो इश्क की कली तुम हो ।
जिसने मेरे नाम को मांग मे सजाया,
ऐसी हसिना आखिर तुम हो ।
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मेरे नाम को इश्क बनाकर
उसने मांग में सिंदूर के साथ सजाया।
जब था दूर मैं उससे,
इश्क की बातें कर कर पास अपने मुझे बुलाया ।
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लाखों मिलती है छोरियां,
पर तैरे जैसी कोई ओर न है।
जो मांग मे सिंदूर मेरे नाम का लगाए,
ऐसी घरवाली तेरे अलावा कोई न है।
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तेरी मांग में सिंदूर देखता हूं,
तो तुम मुझे चांद से उतरी परी लगती हो।
जब छूता हूं तेरे गोरे गाल को,
बडी कोमल तुम लगती हो ।
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तो इस तरह से दोस्त, मांग मे सिंदूर शायरी आपको पसंद आई हो तो कमेंट में जरूर बताना ।