पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

ped katne ki shayari, पेड़ कटाई पर शायरी, ped katne par shayari, पेड़ काटने पर शायरी,

दोस्त, पेड को लगाना काफी मुश्किल है और इसे काटना बहुत आसान है। आज लोग बडे आराम से एक पेड काट देत है, मगर उसे लगाने में कई साल लगते है। वैसे ही रास्तों को फैलाने के नाम पर कई पेडो को काटा जाता है। इतना ही नही बहुत से जंगलो को नाश कर दिया जाता है। और यह सब कुछ अच्छा नही होता है।

और जब पेड को काटा जाता है, तो पेड को भी कष्ट होता है और इस स्थिति पर हमने कई प्रकार की शायरी लिखी है। इतना ही नही पेड काटने से बचने का संदेश देने वाली शायरी लिखी है। दूसरा की कुल्हाडी के पीछे अपने ही लगकर पेड काटते है इस प्रकार की शायरी लिखी है।

तो आइए दोस्त पेड काटने पर शायरी पढे,

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

जिसे उम्र भर मैंने छाया दी

आज वही काटने को आया है।

है उसके हाटा में कुल्हाडी

जिससे वार मुझ पर बार बार किया है।

======================

दुसरों से डर नही लगता

पर अपने ही घातक होते है।

लगते है कुल्हाडी के पीछे

ओर फिर पेड को काट देते है।

======================

किसी पेड को

काटने का दम न होता।

यदि कुल्हाडी के पीछे

लडकी का साथ न होता।

======================

जो देता था कभी रसीले आम

आज उसे भी काट दिया।

देकर लोहे के ओजार का साथ

अपनों ने ही वार कर दिया।

======================

दिल को भी दर्द बडा होता है

जब अपना कोई वार करता है।

सुख जाता मैं खडा खडा

पर पहले ही अपना काट देता है।

======================

जब चली पेड पर कुल्हाडी

दर्द बडा तेज हुआ।

जब रोने लगा पेड जोर से

जब जंगल को भी दर्द का अहसास हुआ।

======================

हर एक वार पर

पेड चिल्लाता रहा।

पर फिर भी लालची मानव

वार पर वार करता रहा।

======================

जो छायां देता था दिनभर

उस पेड को मानव काटने लगा।

अरे जब आने लगे खून के आंसू

मानव जोर जोर से वार करने लगा।

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

चंद पैसो के लिए उसने

हरे भरे पेड को काट दिया है।

जो देता था शीतल छाया

उसे अपने हाथो से मिटा दिया है।

======================

जब कुल्हाडी से वार पेड पर हुआ

जड़ें कांपीं, पत्ते रोए और तने का बुरा हाल हुआ।

चिल्लाता रहा पेड बचाओ बचाओ

फिर भी कोई अपना न हुआ।

======================

देता था वो ​मीठे फल

फिर भी पत्थरों से वार हुआ।

जब न लगे फल पेड में

तो फिर कुल्हाडी से वार हुआ।

======================

हर एक पेड में जान होती है

तभी तो पेड को दर्द होता है।

करता है जब कोई कुल्हाडी से वार

तो खुन का आंसू पेड रोता है।

======================

पेड कट गया तो बारिश रुक जाएगी

इंसान की भूख बढ जाएगी।

अरे तडपेगा तु बडा

जब फसल भी तुझसे रूठ जाएगी।

======================

पेड को काटा तो हवा खोने लगी।

विकास की होड में जिंदगी रोने लगी।

======================

विकास के नाम पर

जंगलों को साफ कर दिया।

जो देता था ओक्सिजन

उन पेडों को ही काट दिया।

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

बिना पेड के जीवन भी

नरक बन जाता है

धरती जो स्वर्ग होती है

उसका बुरा हाल हो जाता है।

======================

तपते सूरज की धूप में

शीतल छाया पेड देता है।

पर फिर भी मानव इसे

चंद पैसो के लिए काट देता है।

======================

घर बनाने के नाम पर

कई पेडों को काट दिया।

करकर ऐसा काम तुने

भविष्य को बेघर बना दिया।

======================

पेड पर कुल्हाडी से वार नही होगा

जब अपनो का साथ नही होगा।

======================

कुल्हाडी वार पर वार करती है

जब उसके साथ अपने होते है।

काट देते है पेड जडों से

क्योकी पीछे उनके अपने खास होते है।

======================

पेड की टहनियों का साथ

कुल्हाडी को जब मिला।

एक एक पेड कटकर

जमीन पर आ पडा।

======================

अपने ही धोका देते है

तभी तो पेड कटते है।

अरे न होता दूख मुझे भी

जब कुल्हाडी के पीछे अपने न होते है।

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

पेडों को कटने से बचाकर

अपने जीवन की सांस बचाई है।

करकर तुने यह बडा काम

अपनी आने वाली पीढी बचाई है।

======================

खुदा को भी गुस्सा आता होगा

जब हरे भरे पेड को काटा जाता होगा।

======================

जो काटता है हरे पेड को

उसका भी हिसाब होगा।

मिलेगा उसे भी नरक का द्वार

जब वो धरती से पार होगा।

======================

कुल्हाडी के एक एक वार का हिसाब होगा

जब धरती पर पडो का ही राज होगा ।

======================

पेड को काटने के लिए

कुल्हाडी को त्याग दो।

ले लो हाथ में बिच

ओर धरती को हरा बना दो।

======================

एक पेड तो सो बच्चो को पातला है।

फिर भी मनुष्य इसे चाव से काटता है।

======================

सूरज की तेज धूप से

हरे भरे पेड भी जलने लगते है।

देते है शीतल छाया वो

फिर भी कटने लगते है।

======================

मत काटों इन हरे भरे पेडो को

यह पराए नही अपने दोस्त है।

जो देते है शीतल छाया

ऐसे जंगलो के फरिश्ते है।

======================

जो कभी लगाता था मुझे

आज वही काटने आया है।

देता था शीतल छाया ओर फल मैं

फिर भी कुल्हाडी से वार किया है।

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

जब तक मीठे आम देता रहा

लोग मुझे बडे पूजते रहे।

आज नही देता आम मैं

तो कुल्हाडी से वार करते रहे।

======================

दोस्त बनकर जो पास खडा होता था

वह कुल्हाडी के पीछे लगा है।

करता है जब जब वार मुझ पर

कष्ट बडा मुझे होने लगा है।

======================

खुदा को भी गुस्सा आता है

जब कोई हरा पेड काटता है।

देता है उसे जीवन में कष्ट बडा

तभी तो उसका बुरा हाल होता है।

======================

हर एक जंगल में

राजा शेर होता है।

तभी तो पेडो को काटना

आसान नही होता है।

======================

जंगल में भी आग लग जाती है

जब पेड सारे सूख जाते है।

करते है लोग कुल्हाडियों से वार

जब चंद पैसे उछाले जाते है।

======================

चंद पैसो के लिए

वो अपने सारे पेड काटने लगा।

जो देता था प्राण वायु उसे

उन्हे खुद अपने हाथों से उखाडने लगा।

======================

जब कट जाएगे सारे पेड

तो हाल बुरा हो जाएगा ।

लटक जाएगा कंधे पर ऑक्सीजन का सिलेंडर

तब पता तुझे भी चल जाएगा।

======================

जिप पेडों को अपने हाथो से उगाया था

आज उन्हे काटना पड रहा है।

लडने की मुझे हिम्मत नही

तभी तो यह बुरा काम करना पड रहा है।

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

विकास का नाम लेकर वो

सडके चोडी करने लगे ।

जो आया पेड बिच में

उन्हे काटने वो लगे।

======================

जो कभी फल मेरे खाता था

आज वो कातिल बन गया।

तभी तो लेकर कुल्हाडी हाथ में

वो वार मुझ पर कर गया।

======================

जिनको मीठा देते है

वो दर्द कडवा देते है।

करते है वार कुल्हाडी से

आरे जमीन पर गिरा देते है।

======================

एक छोटे से पेड को काटने के लिए

वो कुल्हाडी की धार तेज कर रहा है।

देखकर उस कुल्हाडी को

पेड भी जान की भिख मागते हुए रो रहा है।

======================

आज जो वार करता है

कल उसका भी बुरा हाल होगा ।

काटेगा जो हरे पेडो को

उनका भी हिसाब होगा ।

======================

जो जंगल के पेडो को काटते है

उन्हे पहले हमे काटना होगा।

पहल देने देगे पेडो को कष्ट

पहले हमे कष्ट देना होगा।

======================

जो पेडो को बचाने के लिए

सिर अपने कटवा देते थे।

यह वही धरती है जो

दुश्मनों को भी मार देते थे।

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

एक पेड को काटने से बचाने के लिए

एक आदमी सिर यहां कटता है।

तभी तो प्रसासन आकर यहां

उल्टे पैर भाग जाता है।

======================

मुखडे पर भी मुस्कान आती है

जब अपने भी साथ होते है।

पर होता है बडा कष्ट

पर कुल्हाडी के पीछे अपने होते है।

======================

दर्द पेड का कोई समझता नही है

चंद पैसो के लिए वार कई करता है।

अरे काट देता है उस पेड को भी

जो फल रसीले मीठे दिया करता है।

======================

आज फिर वो दिन है आया

जब एक पेड बचाने के लिए

सिर अपना कटाया।

======================

वो दिन भी जल्दी आएगा

जब जमीन के लिए पेड को कोई काट जाएगा।

अगर हो जाएगा मुनष्य समझदार

तो फिर से सिर अपना कटाएगा।

======================

जब पेडो पर वार पर वार हुआ

तो जंगल को भी बडा कष्ट हुआ।

पर करता रहा इंसान क्रुरता

उसे इस दर्द का अहसास न हुआ।

======================

जब वार कोई पेड पर करता है

तो पेड भी भर भर कर रोता है।

पर सुनता नही है कोई पुकार उसकी

तभी तो उसे काटा दिया जाता है।

======================

कुल्हाडी के हर एक वार में

पेड जोर जोर से चिखता रहा।

और मनुष्य अपने कानों मे

रूई को दाबता रहा ।

======================

जब पेड को कोई काटता है

तो उसे भी बडा दर्द होता है।

जब होता है कुल्हाडी के पीछे अपना कोई

तो फिर वो फूट फूटकर रोता है।

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

हरा भरा जिस्म उसका था

फिर भी चंद पैसो के लिए काट दिया।

जो देता था सांस दिलों को

उसे भी अपने हाथो से मार दिया।

======================

लेकर ​कुल्हाडी हाथ में

वो विनाश की ओर बढता गया।

जो आता रास्ते में पेड

उसे अपने हाथो से काटता गया।

======================

हर एक पेड के पीछे

सांसे कई मिटती है।

अरे देता है यह प्राण वायु

तभी तो जिंदगी छोटी होती है।

======================

वो दिन रात पेड को काटता रहा।

जब तपने लगा सूरज आग सा,

तो फिर छाया के लिए तरसता रहा।

======================

पेड को काटने वालो को भी

छाया की जरूरत होती है।

अरे लेते है वो भी प्राण वायु

उनको भी पेड की जरूरत होती है।

======================

नही समझते है मुर्ख लोग

जो पेड को काट देते है।

अरे देता है यह तुम्हे भी सांस

फिर भी अपने हाथो से उखाड देते है।

======================

पेड को काटना फायदा लगता है

तभी तो इंसान बडा मुस्कुराता है।

जब बित गया झट से यह पल

तब इंसान सांस के लिए तरसता है।

======================

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

खुदा का भी नियम होना चाहिए

पेड को काटने वालो को

प्राण वायु के लिए तडपाना चाहिए ।

======================

एक एक जंगल के

सारे पेड काट दिए।

तब जाकर कुदरत ने

इंसान के बुरे हाल कर दिए।

======================

पेड काटकर वो चंद पैसे मे खुश हो जाता है।

खो चुका है वो अपने बच्चो का भविष्य

यह तक समझ नही पाता है।

======================

जिन पेडों के निचे

कभी खेला करते थे चाव से।

आज वो पेड भी कट गया है

एक कुल्हाडी के वार से।

======================

बरगद का वो पेड भी कट गया है

जिसके निचे हम झूला करते थे।

अरे मिट गई वो यादे भी

जब हम सभी एक साथ खेलते थे।

======================

जो पेड मैंने अपने

दादा के नाम पर लगाया था

दुश्मनों ने उस पेड को भी

कुल्हाडी से काट दिया।

======================

जिस पेड को दादाजी ने

लगाया था अपने हाथों से।

गांवे के मुर्खों ने

उसे काट दिया है बडे चाव से।

======================

जिस पेड की छाल पर

हमने अपने प्रेम का नाम लिखा था।

जब कटने लगा वो पेड

मेरा दिल भी बडे जोर से चिखा था।

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

======================

जिस पेड पर परिंदों का बसेरा होता था

वो पेड भी सरकार ने काट दिया।

रास्ता फैलाने के नाम पर

घर परिंदों का उजाड दिया।

======================

एक एक पेड पर वास

परिंदो का होता है।

तभी तो इन्हे काटकर

घर उजाडा नही जाता है।

======================

बाप दादाओं ने

जिसे विरासत समझा था।

उस पेड को काटना भी

हमने अच्छा समझा था।

======================

बाप दादा जिसे विरासत कहते थे

उस पेड को हम कुल्हारी से काटते है।

अरे होता है दर्द पेडो को भी

पर फिर भी हम वार करते न थकते है।

======================

पुरखों से जो पेड उगता आ रहा है

उसे पल भर में काट दिया।

करकर वार कुल्हाडी से

पुरखों का भी अपमान कर दिया।

======================

जिस पेड के निचे बैठकर

गांव के लोग पंचायत करते थे ।

उस पेड को भी आज काटकर

हम खुब खुश होते है।

======================

जिसके निचे मेरा बचपन गुजरा है

वो बरगद का पेड याद आता है।

कर दिया है कुल्हाडी ने जिसे टूकडे

वो पुराना याद सपनों मे आता है।

======================

पेड़ काटने पर 198+ शायरी, ped katne par shayari (पेड के दर्द का अहसास)

अपनी टहनियों से पकडकर

वो रसिले आम देता था।

आ उस पेड को भी

कुल्हाडी ने काट दिया।

======================

दुख बडा होता है जब पुरखों से उगे

पेड को काटा जाता है।

पर होती है कुल्हाडी बडी खुश

जब वार पर वार किया जाता है।

======================

वो दादाजी का

प्यार पेड भी आज कट गया।

जब रास्ता चोडा करने के नाम पर

कुल्हाडी से वार उस पर किया गया।

======================

तो इस तरह से दोस्त पेड काटना पर कई शायरियां है आपको पसंद जरूर आएगी होगी ।

177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

205+ आम के पेड़ पर शायरी (Shayari on Mango Tree In Hindi)

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

neem ke ped par shayari, नीम के पेड़ पर 193+ शायरी

176+ पीपल के पेड़ पर शायरी pipal ke ped par shayari

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *