184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

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दोस्त, बरगद के पेड पर शायरी की बात करे तो यह कई प्रकार की हो सकती है। खासकर बरगद की दीर्घायु वृक्ष को ध्यान में रख पर इस पर कई शायरियां लिखी जा सकती है। दूसरा की गरगद का पेड हिंदू धर्म में शिव जैसे देवता से जुडा है। इ​सलिए इसे काटना अशुभ माना जाता है। और इस बात पर हम शायरी लिख सकते है और शायरी के माध्यम से बरगद के पेड को काटने से मना कर सकते है।

वैसे पेड के काटने की बात करे तो यह आज बहुत अधिक होता है। तो बरगद की यह शायरिया एक संदेश के रुप मे काम कर सकती है। साथ ही बरगद का यही पेड कई बीमारियों को दूर कर देता है और इसकी इसी विशेषता को ध्यान में रख कर कई शायरी लिखी जाती है।

तो आइए बरगद के पेड पर तमाम तरह की शायरी पढे ।

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी bargad shayari in hindi

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

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जहां दिल लग जाता है

वहां बरगद का पेड बन जाते है।

तभी तो उम्र भर वही पर

खडे हम हो जाते है।

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बरगद का बडा पुराना पेड हूं

बुढ़ा मुझे मत समझना ।

खडे कर सकता हूं आज भी कई पेड

मुझे कमजोर तुम मत समझना।

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दादाजी ने अपने हाथों से

बरगद का पेड उगाया था।

आज इसी पेड ने

लोगो को ठंडक का अहसास दिलाया था।

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वो बरगद का पेड

मुझे अपनों की याद दिलाता है।

कैसे खेलता था मैं उस पर चढकर

वो बचपन की बातें याद दिलाता है।

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बरगद का पेड भी

बडा मुस्कुराता है।

रहता है खडा एक जगह पर

फिर भी यह नही थकता है।

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बरगद का पेड हूं

हर डाली से नई जड बनाता हूं।

तु क्या उखाड पाएगा मुझे

जो तुफानों से भी मैं बच जाता हूं।

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बरगद के पेड को काटना

हर किसी के बस की बात नही होती।

अरे जिसे तुफान भी न हिला सका

उसे मिटाने की हिम्मत नही होती।

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

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वो छोटा सा गांव मुझे

बडा याद आता है।

जहां पर बरगद का पेड

आज भी मुस्कुराता है।

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बचपन में पिता की तरह पाला था

आज वही बरगद का पेड कट गया।

जिसे हिला न सका तुफान भी

उस बरगद को सरकार ने काट दिया।

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बरगद के पेड के निचे बैठकर

वो गांव की समस्या सुलझाते थे।

थे हमारे बडे बुर्जुग ऐसे

जो हर परिस्थिति सये लड जाते थे ।

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एक बरगद के पेड को

दादा जी ने पानी पिलाया था।

आज वही बरगद का पेड

उम्र भर साथ दे रहा है।

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कूलर एसी सब फेल हो जाती है

जब बरगद के पेड की शीतल लहर आती है।

अरे मिलती है दिलों को ठंडक बडी

जब बरगद की छांव मिलती है।

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तुफान भी उसका कुछ बिगाड नही सकता

आज उसे मनुष्य ने उखाड दिया।

लेकर पैसो का सहारा

बरगद के पेड को ही काट दिया।

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जब पानी की कई बुंदे मिलती है

तब जाकर बरगद का पेड बनता है।

अरे देता है यह उम्र भर छांव

फिर भी मानव इसे काट देता है।

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जडों मे गहराई होती है

ओर डालिया आसामन को देखती है।

जब चमकता है सूरज तेज रोशनी में

यही बरगद का पेड छांव देता है।

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

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अकेला रहकर भी हंसता है

जब बरगद का पेड खिलता है।

देता है शीतल छाया यह

फिर भी दिन रात कटता है।

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चांद की चमक भी

फिकी पड जाती है।

जब बरगद के पेड को

हंसी आती है।

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वक्त की धूप भी

बरगद के पेड को हराती है।

पर फिर भी बरगद को

हंसी बडी आती है।

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सूरज की तेज धूप भी

बरगद को जला न सकती ।

रहता है बरगद उम्र भी हसंता

इसकी हंसी को बारिश भी मिटा न सकती।

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जिस गाव में बरगद का पेड होता है

वहां पर बुर्जुग भी हंसकर गले मिलते है।

रखते है सभी के साथ भाई जैसे

तभी तो बरगद के निचे मिलते है।

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देखो बरगद का हौसला

यह तुफानों से लडने चला है।

जल रहा है सूरज तपती अग्नि से

फिर भी बरगद शीलत छाया देने चला है।

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बरगद का पेड भी

चांद को देखकर हंसता है।

बुलाता है चाद को धरती पर

ओर फिर शिव से मिलाता है।

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न फल देता है न फूल

फिर भी बरगद का पेड

दिलों को देता है सकुन ।

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बरदग के पेड की छांव ने

हरियाली का तज पहना है।

बैठा कर मुझे अपनी छांव में

मुझे अपना खास समझा है।

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

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बरगद का एक पेड

उंचा बडा उठता है।

मगर फिर भी वह

जमीन से जुड रहता है।

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बरगद के पेड की डाली से भी

तना बन जाता है।

तभी तो बरगद का पेड

सूरज को देखकर खिल जाता है।

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लाल किरणे जब बरगद पर पडती है

खुद को भी बडी खुशी मिलती है।

अरे देता है बरगद तेज धुप में छांव

तब जाकर दिलों को ठंडक मिलती है ।

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बरगद का हरे पत्ते

तारों से बात करने लगे।

देखते है चांद को

ओर उससे प्यार करने लगे।

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गांव मे एक छोटा सा डेरा है

जहां पर बरगद का पेड खिला है।

देता है छांव हम सभी को

तभी तो वहां पर खुशी का मेला है।

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कागज भी फट जाते है

जब तुफान आते है।

पर न हिलता है बरगद का पेड

फिर भी मनुष्य काट देते है।

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

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एक बरगद का पेड ​

उम्र भर छांव देता है।

मगर फिर भी मनुष्य इसे

धरती पर रहने न देता है।

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कई तुफान मिलकर भी जिसे हला न सके ।

वही ​बरगद का पेड दिलों पर राज कर सके।

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कान में जो बाली पहनती है

वो भी बरगद के पेड की पूजा करती है।

करती है दिन भर याद शिव को

जैसे शिव भक्ती वो करती है।

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माथे पर चंदन का टीका लगाती है

जो बरगद के पेड की पूजा करती है।

अरे चमकती है वो चांद जैसी

जब आंखो में काजल लगाती है।

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एक लोहे के टूकडे ने

बरदग के पेड को काटा है।

फिर भी बरगद ने

बुरा न माना है।

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वो पेड भी कभी बुढ़ा नही होता

जो बरगद के पास होता है।

अरे मिलता है उसे छांव का सहारा

तभी तो वो खुब हंसता है।

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बरगद का पेड तो

दिन रात हंसता है।

देता है दिलों को छांव बडी

जैसे प्यार दिल से करता है।

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बरगद का पेड

सूरज से न जलता है।

रहता है वही का वही

वह तुफान से भी न हिलता है।

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

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पत्ते पत्ते पर

शिव का नाम लिखा है।

चमका कर बरगद के पेड को

शिव का धाम बना है।

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बरगद की हर डाली पर

पक्षी का बसेरा होता है।

तभी तो बरगद का पेड

शाम को बडी आवाज करता है।

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बरगद का पेड भी हंसता है

जब पक्षी का बसेरा होता है।

मिलती है चांद की चमक

तब बरगद भी खिलता है।

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ब्रह्मा, विष्णु और महेश

का जहां पर वास होता है।

आखिर वही पेड तो

बरगद का होता है।

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रात को भी डर लगता नही है

जब शिव का साथ मिलता है।

खिलता है वो पेड का पेड

खुश पक्षियों का राज होता है।

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पक्षियों को भी बडा पसद आता है

जब बरगद का पेड बुढा हो जाता है।

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अकेला वो खडा रहता है

मगर फिर भी चांद पर हंसता है।

तपता है दिन भर सूरज से

फिर भी ठंडक का अहसास देता है।

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वो पंचायतों का डेरा होता था

जो बरगद के पेड का बसेरा होता था।

देता था लोगो को छांव वो

जब तपता सूरज होता था।

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कुदरत का अनमोल तोहफा

धरती को मिला है।

तभी तो धरती पर

बरगद का पेड खिला है।

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बरगद के पेड पर

पक्षियों का बसेरा होता है।

खेलती है गिलहरियां यहां

जैसे घर गिलहरियों का होता है।

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184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

शहर की भीड में भी

सकुन न मिल पाया।

खिलता रहा बरगद का पेड

वो गांव पास न रह पाया।

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जहां खिलता था बरगद का पेड

वो गांव मुझसे छूट गया।

होने के लिए सफल जीवन में

अपनो का साथ भी छूट गया।

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बरगद के पेड के निचे

अपने बैठा करते थे।

करते थे सुख दूख की बातें वो

तभी तो दिल उनके मिलते थे।

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बरगद के पेड से

रिश्ता बडा पुराना है।

तभी तो इसके निचे

अपनों का बसेरा है।

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गांव से शहर बदल गए

पर वो बरगद का पेड नही बदला।

बिताते थे जिसके निचे जीवन अपना

वो खुशियो का डरा नही बदला।

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शरीर की थकवाट तक दूर हो जाती है

जब बरगद के पेड की छांव मिल जाती है।

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बरगद के पेड के डेरे ने

दिलों को छांव दी है।

फैलाकर खुशबू का जादू इसने

जगह दिलों मे बना ली है।

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जब नही थी फिकर

तब बरगद का पेड डेरा होता था ।

खेलते थे दिन भर कई खेल

उनका ठिकाना बरगद होता था।

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बरगद का पेड उम्र भर बढता है

देकर साथ जीवन का

खुशियों से दिल महकाता है।

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184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

बरगद के पेड की जडे

जब जब फैलती है।

तपती धरती में

​शीतल छाया मिलती है।

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सूरज की तपती किरणों ने

जिसका कुछ बिगाड नही पाए।

आखिर वही तो

बरगद का पेड कहलाए।

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जब बारिश बादलों से होती है

तब बरगद का पेड हंसता है।

मिलती है तपती धूप से राहत

तभी तो बरगद ठंडा होता है।

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बरगद की हर एक डाली ने

जलते सूरज का सामना किया है।

देकर शीतल छाया का फरमान

राहगिरों की थकान को दूर किया है।

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जिस रहा में बरगद का पेड होता है

उस रास्ते से गुजरने वालो को

शीतल छाया का झोका मिलता है।

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वक्त ने बहुत परखा था

फिर भी बरगद का पेड हंसता था।

देखता था खुले आसामन को

ओर मुश्बितों से न डरता था।

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बरदग की शाखाए फैलकर

धरती पर कब्जा करने लगी।

तभी तो धरती

गुलाब सी महकले लगी।

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जब गर्मी तेज पडती है

बरगद के पेड की याद आती है।

देता है जो छांव हमको

उस की शीतल छाया की लहर आती है।

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बरगद के एक पेड ने

लाखों दिलो को खुश किया है।

देकर शीतल छाया को

तपते सूरज से बचाया है ।

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184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

काले बादल ही पानी लेकर आते है

जिनसे बरगद के पेड खिलते है।

जब चमकता है सूरज चांद बनकर

बदगर के दिल भी उछलते है।

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माथे पर राख का तीलक लगाकर

वो बरगद की पूजा करती है।

जपती है दिनभर शिव शिव

जैसे शिव का नाम जपती है।

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जो काटते है बरगद को

उनका भी हिसाब होगा।

जब छोडेगे भौतिक शरीर को

कष्टो का साया शुरु होगा।

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यह बरगद का पेड नही

बुर्जुगो की पहचान है।

बसती है इसमें आत्मा उनकी

इसे काटना मुर्खता की पहचान है।

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बरगद के पेड को जो काटता है

उनका नाम मिट्टी में मिल जाता है।

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कुल्हाडी से जब जब वार होता है

बरगद के पेड को बडा कष्ट होता है।

अरे होती है तकलीफ बडी

जब इसे कोई उखाडता है।

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जडों मे इसके देवताओ का वास होता है

तभी तो बरगद का पेड काटना नही होता है।

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जिसकी जोडो मे बसी है देवताओ की जान

वो बरगद का पेड होता है।

अरे जो काटते है इस पेड को

उससे नाराज तो देवता होता है।

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चंद सिक्कों के खातिर तुने

बरगद के पेट को काट दिया।

खडा था जो बुर्जुगों की यादों के साथ

उसे तुने आज मिटा दिया।

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एक एक बरगद के पेड में

पूर्वजों की आत्मा बसती है।

तभी तो इन्हे काटना

मुर्खता समझी जाती है।

184+ बरगद के पेड़ पर शायरी Bargad Shayari In Hindi

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बरगद की लटाओ में

मन्नते हजार छिपी होती है।

मत करना इस पर प्रहार तुम

इसमें जान ईश्वर की छिपी होती है।

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धूप सहकर दूसरो को छांव देता है

उस पेड को तुने काट दिया।

मिला है चंद पैसो का साथ

फिर भी तुने कुल्हाडी से वार किया।

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जो काटता है बरगद का पेड

उसका भी नाश होता है।

अरे होता है बडा कष्ट उसे

जब कुल्हाडी से वार करता है।

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एक बरगद के पेड में

कई पखियों का आशियाना होता है।

तभी तो चंद पैसो के लिए

इसे काटना नही होता है।

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आंखो से भी आंसू आते है

जब बरगद के पेड काटे जाते है।

अरे होता है दिलो को भी कष्ट बडा

जब इस पर वार पर वार किए जाते है।

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तो इस तरह से दोस्त, बरगद के पेड पर शायरी  कई प्रकार की हो सकती है । ध्यान रहे ​कि बरगद के पेड पर कई अन्य शायरिया भी हो सकती है । तो यदि आपको कोई खास शायरी लिखवानी है, तो उसके लिए एक अलग से कमेंट करे हम आपके लिए अलग शायरी लिखेगे।

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