205+ आम के पेड़ पर शायरी (Shayari on Mango Tree In Hindi)
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आम के पेड पर शायरी बहुत ही शानदार होती है। क्योकी यह आम के पेड की खूबसूरती को दर्शाती है ओर इस पर लगने वाले रसीले फल आम का जीक्र करती है। दूसरा कि आम के पेड के फलों को तोडने के लिए बहुत से लोग पत्थर मारते है, तो इस बात को दर्शाने के लिए आम पर शायरी खास बन जाती है।
इतना ही नही जिस कदर से आज पेडों को काटा जा रहा है ठीक ऐसे ही आम के पेड को भी काटा जाता है। और आम के पेड पर शायरी इसे न कटाने की सलाह दे सकते है।
तो आइए इन तमाम तरह की आम के पेड पर शायरी पढे,
205+ आम के पेड़ पर शायरी (Shayari on Mango Tree In Hindi)

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एक छोटा सा आम का पेड हूं मैं
मुझे पत्थरों से मत मारो।
देता हूं रसीले आम तुम्हे
मुझे कुल्हारी से मत काटो।
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आम के पेड को भी आंसू आते है
जब कोई पत्थर उन्हे माने आते है।
अरे लगती है चोट पेड को
जब कुल्हाडी से वार उनपर करते है।
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आम के पेडो की खुशबू ने
पास मुझे अपने बुलाया है।
पीले पीले रसीले फलो का रस
मेरे दिल को पिलाया था।
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आम का पेड हूं
फिर भी खास मैं नही।
देता हूं रसीले फल सभी को
पर फिर भी मीठा मैं नही ।
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जब आम के पेड को देखते है
जीभ भी ललचा उठती है।
लेते है सरीले आम का रस
तब दिल की धडकन भी खिल उठती है।
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आम का पेड तो
स्वर्ग में उगता है।
तभी तो धरती को
शास्त्र स्वर्ग जैसा बताता है।
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कच्चे आम की वो डाली
मुझे आज भी याद आती है।
देते थे पत्थर से उसपर
तब आम की खटास हाथ आती है।
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एक पत्थर की चोट ने
आम को घायल कर दिया।
देकर उसे दिल का दर्द
बुरा हाल उसका कर दिया।
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कच्चे आम को खाने के लिए
गुल्लेल पर पत्थर बांधते थे।
बनाते थे निशाना जिस आम को
वो खट्टे निकल जाते थे।
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जिस डाली को काटा था हाथों से
वहां आज एक नया आम है खिला।
देता है दिल को मीठा रस
तभी तो दिल महक कर खिला।
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वो पेड भी बडे याद आते थे
जो खिडकी से नजर आते थे।
जब जाते थे आम चुराने
इतने में मालिक दोडकर आते थे।
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वो आम का पेड भी खास था
जो मेरे घर के पास था।
देता था हर रोज एक नया आम
तभी तो उसका दिल में वास था।
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आम के पेड से सिखो
कितने दुख वो सहता है।
देता है मिठे आम वो
फिर भी पत्थर की मार सहता है।
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दिल का दर्द भी छोटा पड गया
जब आम के पेड के दर्द को जाना।
अरे मिट गया मेरे दिल का दर्द
जब आम के स्वाद को जाना।
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जब जब आम का पेड देखता हूं
जीभ बडी ललचाती है।
देखती है आंखे पीले पक्के आमों को
तब फिर से जीभ गीली हो जाती है।
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बचपन के वो दिन
आज भी याद आते है ।
जब पुरा दिन हम
आम के पेड के निचे बिताते थे ।
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एक छोटे से आम के खातीर
पूरे पेड को पत्थरों से मारते थे।
गिरते थे जो आम
वो खट्टे निकल जाते थे।
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जब देखता था पाली आम के पेड के पास
दोडकर वो पास आता था।
पकडता था कान ओर फिर दर्द करता था
मगर फिर भी रोज मैं वही जाता था।
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कडी धूप से बचने के लिए
आम का पेड काम है आया।
जब लगी पेट में भूख
तो वो आम का स्वाद काम है आया।
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पत्थर कई खाता है
पर फिर भी मीठा फल वो देता है।
अरे है आम का पेड ही ऐसा
जो जीने का सबक देता है।
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खुदा ने तो आम के पेड को एसी है बनाया।
तभी तो आम का पेड इतना ठंडा है पाया।
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आम के पेड के निचे
जब दिल बैठता है।
शीतल लहर पाकर
दिल भी खिल जाता है।

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नानी के घर जब हम जाते थे
आम के पेड रास्ते में आते थे।
उठाते थे पत्थर को ओर मारते थे आम पर
तभी तो मीठे आम हम खाते थे ।
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खुदा भी स्वर्ग में आम का पेड लगाता है
तभी तो आम का पेड इतना खास होता है।
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आम खाने के लिए
इसके पेड को लगाना होता है।
करनी होती है सेवा इसकी
तभी तो मीठे आम यह देता है।
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आम का पेड भी मनुष्य से प्यार करता है।
तभी तो यह आम का स्वाद मीठा रखता है।
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चंद पैसो के लिए उसने
बरसों से खडे आम के पेड को काट दिया।
देता था जो रोज रसीले फल
उसे धरती से अलग कर दिया।
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सडक फैलाने के नाम पर
आम के कई पेड काटे जाते है।
होता है किसान को बडा दूख
जब आम के पेड जमीन पर गिर जाते है।
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किसान ने जिन्हे अपने हाथों से उगाया है।
आज उन आम के पेडों को भी किसी ने कटाया है।
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मुसाफिर के दिल को ठंडक मिल जाती है ।
जब आम के पेड की छांव मिल जाती है।
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आम का पेड जब खिलता है
खुशबू का अहसास दिल को देता है।
अरे चमकता है आम का पेड दिन रात
तभी तो यह इतना प्यार होता है।
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आम का पेड जब खिलता है
खुदा भी उतरकर रस पीता है।
आता है आम पंसद खुदा को भी
तभी तो यह इतना बिकता है।
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हर एक आम के पेड के पीछे
कहानी दर्द भरी होती है।
कैसे देता है वो रसीले आम
वो कहानी पुरानी होती है।

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सूरज की तपती धूप में
खुद को दिनभर जलाता है।
देता है ठंडक का सकुन दिलों को
तभी तो इसका फल मीठा लगता है।
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आम के एक छोटे से पेड ने
जीने का सलिका सिखाया हैं।
जलकर सूरज की धूप में
दूसरो को खुशिया देना सिखाया है।
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बचपन के वो दिन
आज भी याद आते है।
जब एक आम के लिए
कई पेडों को पत्थर मारते थे।
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जब स्कूल की छूट्टी होती थी
आम के पेड नजर आते थे।
जाते थे उनके पास हम
तभी तो आम के रस पीते थे।
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कच्चे आम को खाने पर
खट्टा वो लगता है।
देता है जब मीठा रस वो
आम का पेड भी प्यारा लगता है।
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एक आम के पेड ने
लाखो लोगो को खुश किया है।
पीलाकर आम का रस
उनके दिल को मीठा बनाया है।
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एक लोहे की कुल्हाडी ने
आम के पेड को काट दिया।
जो देता था रसीले फल हमेशा
उस पेड को ही नष्ट कर दिया।
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सडक पर पेड होने की बात कहकर
आम के पेड को काटा है।
देता था जा रसीले फल सभी को
उसी को तुने उखाडा है।
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जब पास कोई साधन नही होता था
तो आम का पेड छांव देता था।
मिलती थी दिल को भी ठंडक
जब आम का पेड रसीला रस देता था।
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आम का पेड तो
दिलों का राजा होता है।
देता है यह मीठे मीठे आम
तभी तो दिल के पास होता है।
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जब छोटे हम हुआ करते थे
आम के पेड भी पास हुआ करते थे।
तोडते थे रोज नया आम हम
ओर रसीले रस भर भर पीया करते थे।

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जब अंधेरी रात होती है
चांद भी आम के पेड के पास आता है ।
पीता है आम के रस को
तब दिल चांद का मुस्कुराता है।
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आम के रस के स्वाद ने
चांद को भी धरती पर बुलाया है।
पिलाकर अपने रसीले रस को
दिवाना चांद को बनाया है।
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जब चांद का पेड चमकता है
अंधेरी रात में भी उजाला होता है।
देखकते है टिमटिमाते तारे इसे
पर रस इसका पी नही पाता है।
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जब सूरज की किरण पडती है
आम के पेड पर बैठी चिडिया बोलती है।
पक गए है आम खा लो इन्हे
कहकर किसानो को पास बुलाती है।
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शिव भी आम का पेड
कैलाश में लगाता है।
तभी तो आम का पेड
इतना खास लगता है।
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जब तुफान तेज आता है
आम के पेड भी हिल जाते है।
जो पक्क चुके आम
वो सारे जमीन पर गिर जाते है।
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जब बचपन मेरा हुआ करता था
मैं भी आम चुराया करता था।
जब आता था माली देखकर मुझे
नंगे पैर भाग जाता था।
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आम का पेड तो
सूरज को भी प्यारा होता है।
तभी तो आम का रंग
पीला होता है।

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खुदा को भी
आम के पेड पर नाज होगा ।
तभी तो आम का पेड
इतना खास होगा ।
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बित गया वो बचपन
जिसमें आम के पेड होते थे।
रहते थे हमेशा उनके पास
तभी तो दिल मीठे होते थे।
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मेरे गांव मे एक आम का पेड होता था
जिसके पास लोगो का बसेरा होता था।
अरे लेते थे वो आम के रस का स्वाद
तभी तो उनका दिल मीठा होता था।
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आम के पेड के निचे
मुझे अपना खास दोस्त है मिला ।
तभी तो यह दोस्त
मेरे साथ शहर है चला।
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जब आम के पेड गांव मे होता है
खुशबू का बसेरा चारो ओर होता है।
मिलता है मीठी बातों का साथ
जब हाथ मे आम मीठा होता है।
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गांव के हर चोराहे पर
आम का पेड खिलता है।
तभी तो आम का पेड
दिलों मे राज करता है।
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एक आम के पेड को
मैं अपने हाथों से लगाउगा।
देगा सभी को रसीले आम
फिर भी उनका रस पिलाउगा।

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अरे खास होते है वो आम के पेड
जिन्हे किसान अपनी आत्मा मानते है।
देते है जब वो फल मीठे
तो किसान के दिल भी खुश होते है।
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एक एक करकर उसने
आम के पेड को काट दिया।
न जाने उसने चंद पैसो के लिए
कितने दिलों को उजाड दिया।
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आम के पेड पर
चढना मैंने सिखा था।
कैसे मिलती है सफलता
उस राज को जाना था।
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जब तपता है सूरज दिनभर
आम के पेड को भी कष्ट होता है।
देता है फिर भी रसीला फल
तब जाकर यह खुश होता है।
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आम का पेड मीठा बनना सिखाता है।
खा कर पत्थर की चोट को
दूसरो को मीठास देना सिखाता है।
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आम के पेड पर जब आम पकने लगे।
तो देवता भी धरती पर उतरने लगे।
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आम के पेड को देखकर
ईश्वर भी खुश हो जाते है।
क्योकी पकते ही पहले आम
उन्हे भेट चढाए जाते है।
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वो मेरा गांव भी अजीब था
जहां पर आम के पेड को काटा न जाता था।
देता था जब आम का पेड फल
प्यार उससे बडा किया जाता था।
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जलते सूरज की धूप में
आम का पेड छांव देता है।
जब होता है कडवा मुंह
आम मीठा रस देता है।
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आम का पेड मैं हूं
मुझे बुड्डा मत समझना।
देता हूं मीठे मीठे आम मैं
मुझे कडवा तु मत समझना।
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आम का पेड भी
चांद से इश्क करता है।
फैलाकर खुशबू अपनी
चांद को धरती पर बुलाता है।
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जब आम का पेड खिलता है
खुदा भी धरती पर उतरता है।
लेता है आम के पेड की खुशबू
तब जाकर दिल को सकुन मिलता है।
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आम के पेड को देखकर
जीभ ललचाने लग जाती है।
जब दिखता है सरीला आम
भूख मुझे लग जाती है।
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गांव के वो दिन भी याद आते है
जब आम के पेड के निचे बैठते थे ।
जब लगती थी पेट में भूख
आम तोडकर हम खाते थे।
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वो दिन भी बित चुके है
जब आम के पेड खिलते थे।
देते थे मीठे मीठे आम वो
तब जाकर दिल खुश होते थे।
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ब्रह्मा जी भी किसान से प्रसन्न होते है ।
जब आम के पेड से आम तोडकर खाते है।
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आम के पेड के बिना
पुरा गांव फिका लगता है ।
अरे दिखती है चमक इसमें
तभी तो यह इतना प्यारा लगता है।

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आम का पेड तो बडा खास होता है।
तभी तो यह दिलों के पास होता है।
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अंधेरी रात में आम के
पेड की खुशबू आती है।
जब सोते है रात को सपनों मे
आम मिलने आती है।
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आम के पेडों ने खुशबू का
जादू चारो ओर फैलाया है।
तभी तो रात को सपनों मे
आम का साया आया है।
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जब अंधेरा चारो ओर होता है
आम का पेड भी बडा महकता है।
फैलाता है खुशबू चांद तारो तक
जैसे मिलने उन्हे बुलता है।
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स्वर्ग भी खुशबू से महकने लगता है
जब आम के पेड में आम पक जाता है।
हो जाते है ईश्वर मदहोश
तब धरती पर आम खाने आते है।
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इस तरह से दोस्त, आम के पेड पर शायरी होती है, जो की आपको पसंद आई होगी, अगर आपको आम के पेड पर यह शायरी अच्छी लगी हो तो कमेंट में जरूर बताना।
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