Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

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मिर्ची या मिर्च एक प्रकार की सब्जी है, जो की अपने ​तीखें स्वाद के कारण से जानी जाती है। पहले यह मिर्च हरी होती है तो इसे हरी मिर्च कहते है। आर जब यह मिर्च सुख जाती है तो इसका पाउडर बनाया जाता है, जिसे लाल मिर्ची पाउडर कहते है। इस प्रकार मिर्च भी अलग अलग प्रकार की होती है।

खैर इस मिर्च पर आज हम कई प्रकार की शायरी आपके लिए लेकर आए है। यदि आप भी​ भी मिर्च पर शायरी पढना पसंद करते है, तो आइए मिर्च या मिर्ची पर शायरी पढे।

Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

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स्वाद हर सब्जी का बढ जाता है

जब लाल मीर्ची का तडका लग जाता है।

अरे जीभ खुश हो जाती है

जब मीर्ची का स्वाद जीभ पर चढ जाता है।

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लाल मीर्च भी कमाल होती है

छूकर जीभ को बेहार करती है।

अरे बन जाती है वो सब्जी भी खास

जिस सब्जी में लाल मीर्ची गिरती है।

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मिर्ची के तीखेपन नें

हंगामा बाजार में मचा दिया।

फैलाकर अपनी खुशबू का जादू

सारे ग्राहक को भगा दिया।

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हरी मिर्ची भी दिल पर राज करने लग जाती है।

जब यह गोबी के संग दिखने लग जाती है।

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मीठे रसगुल्लों से जब दिल भर जाता है।

तब खा कर मिर्ची वाला समौसा मजा आ जाता है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

पानीपूरी खाने की

ऐसी लत लगी है।

जैसे 100 मिर्ची खा कर

बिल्ली हगने चली है।

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किसान की चमडी से

पसीना टपकने लग जाता है।

जब मिट्टी में मिर्ची का पौधा

हंसने लग जाता है।

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खेतों मे जब मीर्ची मुस्कुराती है

खुदा कसम की धरती भी खिल उठती है।

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मिट्टी में पनप पर

मिर्ची का पौधा गुलाब बनता है।

और जिसे देख देखकर

किसान का दिल खिलता है।

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सूरज की तेज धूप ने

हरी मिर्ची को लाल बना दिया।

और खिलाकर किसान ने मिर्ची

सभी को खुशी से नचा दिया।

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जलाकर मिर्ची को तुने तपती

धूप में लालम लाल बनाया है।

रहकर धरती से कौसो दूर

किसान को खुशी से नचाया है।

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मिट्टी की खुशबू ने

किसान को बडा महकाया है।

और लगाकर किसान ने मिर्ची का पौधा

लोगो को मिर्ची का स्वाद चखाया है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

मिर्ची का तिखा स्वाद भी

फिका लगने लग जाता है।

मिर्ची के साथ

आलू बैठने लग जाता है।

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हरी हो या लाल मिर्ची

दोनो में बडा दम होता है।

अगर सब्जी स्वादष्टि बनानी है

तो मिर्ची को कम डालना होता है।

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मिर्ची का लाल स्वाद भी

हरा दिखने लग जाता है।

जब मिर्ची के साथ

हर टमाटर बैठने लग जाता है।

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मिर्ची का स्वाद तो

दिलों पर वार करता है।

जो खाता है हरी मिर्ची

उसका बेहाल करता है।

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लाल मिर्ची की खुशबू ने

जादू तोते पर किया है।

पिलाकर अपना तीखा रस

तोते का बुरा हाल किया है।

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सब्जी का स्वाद भी बढने लग जाता है

जब मिर्ची का तड़का लगने लग जाता है।

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जो खाता था दिन रात मिर्ची

वो तोता आज बीमार हो गया।

न खा रहा है खाना पीना

इतना बुरा हाल हो गया।

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चांद को भी बडी हंसी

आने लग जाती है।

जब मिर्ची को सूरज की धूप

जलाने लग जाती है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

रहकर सूरज की धूप में

दिन रात पौधा खिलता है।

न ​जाने फिर क्यों

मिर्ची का पौधा बोना रहता है।

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बात कडवी होती है पर सच होती है

और सच सुनकर हमेशा मिर्ची लगती है।

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छोटी सी तो बात थी

पर तुने दिल पर ले लिया।

मैंने तो कहा था बाद में करुगा बात

पर तुने तो मिर्ची अपने लगा लिया।

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फोन तेरा आया था

जब मैं काम करने बैठा था।

जब नही कि मैंने बात तुमसे

तब मिर्ची तु खुदको लगा बैठा था।

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वहा रे दोस्त तु भी बडा अजीब निकला।

बिना गलती के खुद को मिर्ची लगा निकला।

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मेरी सच्ची बातें सुनकर

उसे बुरा लगने लग गया।

तब मैंने भी कहा वहां भाई

तुने तो मिर्ची लगा लिया।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

आलू तो गरीबो का राजा होता है

मगर बिना​ मिर्ची के यह अधूरा होता है।

कैसे खरीदेगे वो गरीब लोग मिर्ची को

जिसका महंगा भाव होता है।

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मिर्ची का तीखा स्वाद भी

फिका पड जाता है।

जब सस्ता होकर प्याज

बाजार में ज्यादा बिक जाता है।

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टमाटर का लाल रंग

ख्वाब कई लेने लगता है।

मिर्ची के साथ रहने का

सपना देखने लगता है।

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टमाटर के चैहरे पर भी हंसी आ जाती है

जब मिर्ची की तीखी खुशबू पास आ जाती है।

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प्याज को काटने पर

आंसू आंखो से कई टपकते है।

और जब खाते है मिर्ची हम

मुंह के दांत भी जलते है।

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गोभी का फिका स्वाद भी

खास बन गया।

जब मिर्ची का तडका

गोभी में लग गया।

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बैंगन भी मिर्ची को देखकर

हंसने लग जाता है।

जैसे देखकर मिर्ची को

दिल बैंगन का धडकने लग जाता है।

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भिंडी का दिल भी

हंसने लग जाता है ।

जब मिर्ची का महंगा भाव

घटने लग जाता है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

तेरे होठो का जादू

मुझे पास अपने बुलाता है।

और चुमकर मेरे होठो को

मिर्ची सा जलता है।

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आंखो में आंसू लेकर

वो डरामे कई करने लग जाती है।

और पास आकर मुझे

मिर्ची खिलाने लग जाती है।

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जब आसान में तारे टिमटिमाते है

खुदा कसम हम तुमको ही याद करते है।

आते है ख्वाब तेरे ही रात भर

पर मिर्ची जैसा तिखा यह मुझे लगते है।

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तेरी बातों में पहले वाला मीठास नही रहा

जैसे लाल मीर्ची में तीखापन न रहा ।

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तेरे मिर्ची जैसे होठो को

चुमना मेरा दिल चाहता है।

और जब पहनती है तु साडी

दिल मेरा जोर से धडकता है।

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तू मिर्ची जैसी

​तीखी लगने लग गई।

तभी तो पास रहकर

तु दिल को जलाने लग गई।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

तेरा चांद सा मुखडा भी

मिर्ची जैसा तीखा लगने लग गया।

तभी पास मुझे तु रखकर

तडपाने लग गया।

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रसोई में भी खुशबू फैल जाती है

जब मीर्ची तिखी निकल जाती है।

अरे बनती है वो सब्जी भी बडी स्वादिष्ट

जिसमें मीची ज्यादा पड जाती है।

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गर्म तेल मे गिरने पर

मिर्ची को भी दर्द होता है।

फैल जाती है खुशबू चारो ओर

जब मिर्ची ज्यादा तिखी निकलती है।

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तेरी तीखी खुशबू से

प्यार मुझे होने लग गया।

तभी तो देखकर तेरे लाल रंग को

दिल मेरा धडक गया।

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जिंदगी भी मिर्ची जैसे होने लग गई

रहकर खुद तीखी खुदको जलाने लग गई।

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मिर्ची का तिखापन भी

कभी कभी बुरा लगता है।

जब स्वाद यह

सब्जी का बिगाड देता है।

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खून पसीना बहने लग जाता है

तब मीर्ची का रंग छाने लग जाता है।

अरे फैल जाती है खुशबू चारो ओर

तब दिल हर किसी का धडकने लग जाता है।

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शिमला मिर्ची भी गोल बनने लग गई

जबसे दुनिया आपस में लडने लग गई।

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आंखो से आंसू पानी बनकर

टपकने लग जाता है।

जब सब्जी में मिर्ची का तिखा

ज्यादा मिल जाता है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

मिर्ची का तिखा स्वाद होता है

तभी तो यह लाजवाब होता है।

अरे करता है दिलों को खुश

जब मिर्ची का पकोडा बनता है।

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नमक मिर्च लगाकर

वो कच्ची कैरी खाने लग जाता है।

जो आम समझकर

कच्ची कैरी घर ले जाता है।

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सुरज की तेज धूप में

चमडी भी जलने लग जाती है।

और पी कर पसीने की बूंदे

मिर्ची भी लाल हो जाती है।

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पसीने की एक एक बूंद

किसान ने मिर्ची को पिलाई है।

तभी तो हरी मिर्ची

आज लाल हो पाई है।

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हरी मिर्ची भी बाजार में खुब बिकने लग गई।

जब यह टमाटर से ज्यादा सस्ती हो गई।

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लाल टमाटर के लाल स्वाद ने

दिल को बडा तडपाया है।

पिलाकर तुने मिर्ची का तिखा रस

मेरे मुंह को जलाया है।

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चांद सी सुरत लेकर

वो हाथों मे मिर्ची छिपाकर लाती है।

बैठाती है प्यार से अपने पास मुझे

फिर तीखी मिर्ची खिलाकर जाती है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

साली जी की सरारत ने

आज मुंह को जलाकर रख दिया।

जब गुलाबजामुन में छिपकार मिर्ची 

मुझे धिरे से खिला दिया।

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मीर्ची का तिखा स्वाद भी

फिका पड जाता है।

जब जलते हुए मुंह पर

तेरा होठा आ जाता है।

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जीभ पर लगते ही जल जाती है

ऐसा तीखा स्वाद है इसका

जो हर दिल को भा जाती है।

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मिर्ची तेरा भी बडा नाम हो गया

तेरे बिना आलू बदनाम हो गया।

अरे रहता था उदास अकेला आलू

और तेरा साथ पाकर आलू खुश हो गया।

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मिर्ची का तीखा स्वाद होता है

पर फिर भी यह दिल के पास होता है।

और फैलती है खुशबू जब रसोई में

महौल बडा खास होता है।

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मिर्ची तु भी कमाल करती है

थोडी रहकर दिल को खुश करती है।

और जब हो जाती है ज्यादा

तब दिल को बडा बवाल करती है।

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मिर्ची का तिखा स्वाद भी

दिल को भाने लग जाता है।

जब पानीपुरी का पानी

​गले से उतर जाता है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

हर सब्जी का स्वाद होता है मिर्च

तभी तो खा कर दिल खुश होता है मिर्च।

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जो न खाए

वो बडा पछताता है।

और खा कर मिर्ची ज्यादा

मुंह अपना जलाता है।

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तीखी है पर प्यारी है

तभी तो हर रसोई की दुलारी है।

करता है हर दिल पसंद इसे

जैसे यह दिल की घरवाली है।

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कडवी बातें सुनकर

तुमको मिर्ची लग जाती है।

और देखकर मुझे

फिर भी मुस्कुरा जाती है।

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तेरी सुंदरता की ताफिर की

तु खुश हो गई।

और सुनकर मेरे कडवे वचन

तुमको मिर्ची लग गई।

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हवा भी पल भर ठहरकर देखती है

जब हरी मिर्ची लाल होती है।

अरे बन जाती है तीखी हवा भी

जब मिर्ची को छूकर जाती है।

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सच सुनकर तुम्हे मिर्ची लग जाती है

मगर फिर भी तु पास मेरे क्यों आ जाती है।

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तिखे शब्द जब निकलते है मेरे मुंह से

मिर्ची लग जाती है न जाने तुम्हे कैसे।

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भिंडी की लार ने

दिल को बडा तडपाया है।

बुलाकर पास अपने

मिर्ची का रस पिलाया है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

लौकी और मिर्ची जब मिलाव हो जाता है।

खा कर सब्जी दिल खुश हो जाता है।

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लाल मीर्ची को गाजर समझकर

खरोगश खाने लग जाता है।

जब जलता है मुंह मिर्ची से

तो आंखो से आंसू टपकाने लग जाता है।

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बिना मिर्ची खाए भी

जलन दिल को होती है।

जब महबूबा अपनी

किसी ओर पास देखती है।

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दिल भी घायल हो जाता है

बिना मिर्ची खाए जलने लग जाता है।

अरे कैसा इश्क है यह

जिसमें दिल का बुरा हाल हो जाता है।

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जिससे प्यार करता था दिल रात

वो मिर्ची खिलाकर जलाने लग गई।

जैस समझता था मीठी रसमलाई

वो कड़वा घूंट पिलाने लग गई।

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तेरे इश्क के स्वाद ने

दिल को पागल कर रखा है।

खिला खिलाकर मिर्ची तुने

मेरा बुरा हाल कर रखा है।

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तेरे हुस्न की खुशबू ने

रात भर मुझे सोने नही दिया।

दिखाती रही तु मिर्ची जैसा तीखा बदन अपना

पर पास मुझे तुने आने नही दिया।

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आंखो पर चश्मा लगाकर

होठो पर लाली लगारक

इतराकर चलने लग जाती है।

जो देखता है आशिक तुझे प्यार से

मिर्ची का रस पिलाने लग जाती है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

मिर्ची की खुशबू ने

दिल पर तीखा तीर चलाया है।

फैलाकर अपनी तीखी खुशबू

मिलने पास अपने बुलाया है।

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मिर्ची की खुशबू जब सब्जी में आती है।

देखकर दिल की धडकन भी शर्माती है।

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जब सब्जी से

मिर्ची की खुशबू आती है।

खुदा कसम दिल की

धडकन भी झूम उठती है।

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तेरे बिना तड़का भी बेकार होता है

और जब होता है मिर्ची का साथ

वो तडका भी लाजवाब होता है।

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उस रासोई में भी रोनक छा जाती है

जहां पर मिर्ची की खुशबू फैल जाती है।

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तेरी हुस्न की तीखी खुशबू ने

आज कुछ इशारा किया है।

बुलाकर तुने पास अपने

मिर्ची का रस पिलया है।

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तेरी पतली कमर मुझे

मिर्ची जैसी तीखी लगती है।

चुम लू तुझे प्यार से

इतनी खूबसूरत तु आज दिखती है।

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वो इलाका भी रोने लग जाता है।

जहा पर मिर्ची का खेत उजडने लग जाता है।

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मिर्ची तेरे बिना सब कुछ बेस्वाद लगता है

और खाकर तुझे दिल को सकुन मिलता है।

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Top 192+  Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)

​जीभ को भी झटका लगता है

जब मिर्ची का स्वाद जीभ पर पडता है।

आता है मजा दिल को भी

जब मिर्ची का स्वाद दिल में पहुंचता है।

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चारो ओर महौल गर्म होने लग गया

जैसे आसमान से मिर्ची का पेड गिर गया।

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मिर्ची तू तो स्वाद की रानी है

तभी तो तेरी मस्त जवानीहै।

देखता है तुझे टमाटर छिप छिपकर

जैसे तु टमाटर के इश्क की कहानी है।

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इस तरह से दोस्त, मिर्ची पर शायरी कैसी लगी कमेंट में जरूर बताना।

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