Top 183+ Papita par shayari पपीते की तारीफ में जबरदस्त शायरी
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पपीता एक ऐसा फल होता है जो की लोगो को खाने में बडा पसंद आता है। और यही कारण रहता है कि बहुत से लोग पपीता दिन रात खाते रहते है। यदि आप भी पपीते के दिवाने है, तो मेरे दोस्त आप पपीते पर शायरी पढना पसंद करते होगे।
और आज के इस लेख में हम पपीते पर कई मजेदार शायरियां लिखने वाले है, जिन्हे पढ कर आप कहोगे की वहां मजा आ गया । असल में पपीते पर कई प्रकार से शायरियां लिखी जा सकती है जो कुछ ऐसे है —
Top 183+ Papita par shayari पपीते की तारीफ में जबरदस्त शायरी

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पपीते का पीला रंग
दिलों को भा जाता है।
तभी तो पपीता खा कर
हर कोई कहे मजा आ जाता है।
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जो खाता है पपीता चाव से
उसका दिल भी मीठा मिलता है।
अरे रहता है सजकर बाजारों मे
तभी तो पपीता खुब बिकता है।
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तेरे होठो की मीठास मुझे
पीपते जैसी लगती है।
हो जाए फिदा जिस पर दिल मेरा
ऐसी कातिल तेरी आंखे लगती है।
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अंगूर भी बाजरों मे खुब बिकते है
पर जब मिलता हो पपीता
अंगूर भी चूप हो जाते है।
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तरबूज का पानी भी फिका लगता है
जब पपीता खाने को मिलता है।
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पपीते की खुशबू ने
दिलों को महका रखा है।
तभी तो ग्राहकों को
अपने पास बुला रखा है।
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जब जब पपीता खाते है
खुदा कसम की तुझे याद करते है।
लगती है तु भी पपीते जैसी मीठी
जब तेरे गाल हम चुमते है।
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पपीता भी फिका पड जाता है
जब तेरे होठो का जाम मिल जाता है।
आता है स्वाद दिल को बडा
जब तेरा साथ मेरे दिल को मिल जाता है।
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अनार के एक एक दानें को
गिन गिनकर हम खाते है।
पर जब आती है बात पपीते की
तो फिर बिज निकालकर खाते है।

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जब बाजार में पपीता मिलने लगा
तो सेब अनार भी कम बिकने लगा।
अरे आता है स्वाद पपीता खाने में
तभी तो यह इतना ज्यादा बिकने लगा।
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जब हुआ करते थे बचपन में
मां भी हाथो से पपीता खिलाती थी।
जब न खाते थे खाना हम
डाट वो प्यार से लगाती थी।
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बचपने के वो दिन याद आते है
जब मां के हाथों से पपीता खाते थे।
बुलाती थी जब मां हमको
दोडकर पास उसके जाया करते थे।
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तेरे हुस्न की खुशबू ने
दिल को बहकाया है।
बुलाकर तुने पास अपने
पपीते का जूस पिलाया है।
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पपीता खा कर वो बडा खुश हो जाता है
फिर मां के आंचल में लिपट जाता है।
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पपीते के पीले फल ने
खुशबू अपनी फैला रखी है।
बुला कर ग्राहकों को पास अपने
भीड बहुत ज्यादा बढा रखी है।
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जब पहनती है तु पीली साडी
पपीते जैसी महकने लगती है।
लगती है मीठी मुझे तु
जब गाल मेरा चुमने लगती है।
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केला सस्ते पर सस्ता होता गया
मगर फिर भी पपीता
खुशबू फैलाकर बिकता गया ।
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पपीते की खुशबू ने
उधम मचा रखी है।
जो आता है ग्राहक
उसके दिल धडकन बढा रखी है।

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पपीते को देखकर
खुदा भी धरती पर आता होगा ।
चुनता है पपीता अपने हाथों से
फिर प्यार से उसे खाता होगा ।
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पपीते के पीले रंग पर
चांद भी दिवाना हो जाता है।
देखता है रात भर पपीते को
फिर खाने को उतावला हो जाता है।
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जब पकता है पपीता
खुशबू चांद तक जाती है।
महक जाता है चांद का दिल
और धडकन उसकी बढ जाती है।
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एक छोटा सा पपीता
कई लोगो का पेट भर गया।
जो दिखता था पीला पीला
वो दिल को खुश कर गया।
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तेरे होठो की मुस्कान भी
पपीते जैसी खुशबू फैलाती है।
बुलाकर मुझे अपने पास
प्यार का रस जो तु पीलाती है।
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पपीते की मीठास ने
दिलों को दिवाना बनाया है।
सजकर बाजार में इसने
ग्राहकों को पास अपने बुलाया है।
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जब मिलता है पपीता सस्ता
तो सेब कोन खरीदेगा।
अगर हो पपीता मीठा
तो दिल यही खुश करेगा ।
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पपीता खाने से सेहत बन जाती है
और तुझे देखकर दिल की धडकन बढ जाती है।
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उसकी काजल लगी आंखो में
अजीब सा नशा नजर आता है।
खाती है वो पपीता दिन रात
उस खुशबू का अहसास आता है।
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जब पक जाए खेतों मे पपीता
किसान का दिल भी खुश होता है।
अरे आता है पसंद खुदा को भी
जब पपीता भेट में चढाया जाता है।
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बनकर पीला फल यह
गुलाब सा महकने लगा।
उतर कर बाजार में
पपीता कहलाने लगा।
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अमरूद भी कम बिकते है
जब बाजारों मे पपीते मिलते है।
अरे खाते है ग्राहक पपीता चाव से
जब प्लेट भरक यह मिलते है।
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खरबूजा फिका होकर भी
बाजार में दिन रात बिक गया।
पर जब आया पपीता मैंदान में
तो खरबूजा भी पीछे हट गया।
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पपीते की चमक देखकर
बजार में तलहका मच गया।
आने लगे ग्राहक बहुत ज्यादा
जब पपीता अंदर से मीठा निकल गया।
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पपीते की मीठास का
दिवाना चांद भी होता है।
तभी तो पपीता खाने के लिए
धरती पर आता है।
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एक छोटा हाथी
पपीते के पेड को हिलाता रहा।
मगर फिर भी पपीता
पेड से चिपका रहा।
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उसका चांद सा
मुखडा भी प्यारा लगता है
जब वो पपीते का
टूकडा खाने लगता है।
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छत पर आकर वो पपीता खाती है
पास बुलाकर वो गाल चुम जाती है।
धडता है दिल भी बडा तेज
जब वो पपीता मुझे खिला जाती है।

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एक पपीता हम दोनो
बैठकर खाते थे
जब था बचपन हमारा
दोनो साथ रहा करते थे।
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सफलता ही होड में
पपीता खाना ही भूल गया।
जो लगता था बचपन में मीठा
उस पसंदीदा फल को ही आज भूल गयां
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अनानाश बाहर से सख्त
पर अंदर से मीठा मिलता है।
मगर फिर भी बाजरों मे
पपीता ज्यादा बिकता है।
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नारियल मंदिरों मे दिन रात चढते है
मगर फिर भी ईश्वर को पसंद पपीते आते है।
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तेरे होठो की मुस्कान ने
दिल को घायल कर रखा है।
लेकर हाथों मे मीठा पपीता
पास मुझे अपने बुला रखा है।
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एक पपीता खिलाने के लिए
वो छत पर रोज आया करती थी।
देखता था मेरा दिल उसे प्यार से
जब होठो पर लाली लगाया करती थी।
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जो खिलाती थी अपने हाथों से पपीता मुझे
इश्क के दुश्मनों ने शादी उसकी कर दी।
चाहता था दिन रात मैं उसे
फिर भी उसने बर्बादी मेरे दिल कर दी।
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घर क बाहर एक पपीते का पेड होता था
जिसे देखकर दिल बार बार खाने को करता था।
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नानाजी के घर जाने पर
पपीते का जूस मिलता था।
तभी तो पपीता हमे
अपना खास लगता था।
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जब पेट खाली होता है
तो पपीता ही पेट भरता है।
आता है स्वाद बडा
जब पपते का रस मीठा मिलता है।

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पपीता खाने के लिए
वो पास अपने बुलाती थी।
करती थी फिर प्यार की बातें
और दिल लूट ले जाती थी।
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एक पपीता खाने के लिए
कई बागो में जाना पडता था
तब जाकर एक पपीता
मुझे मिलता था।
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खा कर पपीता वो मस्त हो जाता है ।
जो स्कूल से घर दोपहर में आ जाता है।
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जो खाता है पपीता
उसकी सेहत बन जाती है।
रहता है रोगो से दूर
और शरीर में ताक्त बढ जाती है।
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पपीते की मीठी बातों में
मेरा दिल आ गया।
खा कर पपीता
दिल कहे मजा आ गया।
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पपीते की एक कौर से ही
पेट पुरा भर जाता था।
जो पुरा पपीता खाने की
जिद कर जाता था।
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दिल को भी सुकून मिलता है
जब पपीता पेट में जाता है।
अरे आता है स्वाद पपीता खाने में
जब पपीता कटाकटाया मिल जाता है।
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बाजारों मे कई पपीते मिलते है
उनमें कुछ मीठे तो कुछ खारे मिलते है।
अरे आता है स्वाद पपीता खाने में
जब अंदर से मीठे यह मिलते है।
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सेब की मीठास भी फिकी रह जाती है
जब पपीते की खुशबू दिल में जाती है।

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कानों मे बाली पहनकर
वो आंखो से इशारा कर गई।
खिलाने के लिए मुझे पपीता
वो मेरे घर पर आ गई।
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इश्क भी कितना पागल होता है
पपीता खिलाने का जब मन होता है
आता है स्वाद पपीता खाने में
जब साथ महबूबा का होता है।
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महबूबा के साथ पपीता खाने का
अलग ही मजा होता है।
तभी तो पपीता खाने से
दिल बहुत खुश होता है।
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पपीता खाने की होड में
वो 10 पपीता खा गया।
पर फुटने लगा पेट
तब जाकर वो हार मान गया।
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काश कोई ऐसा भी घर होता
जिसके बाहर पपीतों का बगीचा होता।
खाते तोड तोडकर पपीता चाव से
तब जाकर दिल मेरा खुश होता।
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पपीते के जूस का दिवाना
हर कोई मिल जाता है।
तभी तो बाजारों मे जूस
40 का एक ग्लास मिल जाता है।

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आसमान में उगने वाला
सुरज भी तरसता होगा।
जब धरती पर लगने वाले
पीले पपीते को देखता होगा ।
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पपीते की खुशबू ने
जादू अपना चलाया है।
फैलाकर खुशबू चांद तारों तक
दिवाना खुदा को भी बनाया है।
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पपीते की खुशबू का दिवाना
स्वर्ग लोक भी हो गया।
तभी तो धरती पर उतर कर
ईश्वर ने स्वाद पपीते का चख लिया।
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पपीता खाने के लिए
ईश्वर बच्चे का रुप लेकर आते है।
खाते है पपती बडे चाव से
ओर फिर वापस चले जाते है।
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माली के खेत में
पपीतो की बरसता हो गई।
तभी तो माली कि किस्मत
इतनी ज्यादा चमक गई।
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जो उगता था पपीते के पेड
उसके भी अच्छे दिन आ गए।
जब लगने वाला हरा पपीता
पककर पीले हो गए।
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पपीते के मीठे स्वाद पर
ईश्वर भी अपना दिल हार बैठे।
तभी तो खाने के लिए पपीता
धरती पर जन्म ले बैठे।
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पपीते की मीठास ने
बाजार को खुशबूदार बना रखा है।
खरीदने आते रहे ग्राहक
इसलिए खुशबू बा जादू चला रखा है।

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सूरज की तेज धूप में निकले से
शरीर को गर्मी लग जाती है।
तभी पास के खेत से
पपीते की खुशबू आ जाती है।
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पपीते की खुशबू ने
सूरज की गर्मी को भी कम किया है।
पिलाकर पपीते के मीठे जूस को
दिल को भी खुश किया है।
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तेरे पपीते जैसे पीले बदन पर
दिल हम अपना हार बैठे ।
खाया पपीता प्यार से
ओर तुझे गले लगा बैठे।
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पपीते जैसा तेरा खूबसूरत बदन लगता है
जब देखते तुझे पीली साडी में
दिल को भी कुछ कुछ होने लगता है।
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खुदा को भी धरती पर आना पडता है
जब पपीते का जूस पीना पडता है।
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सेब हो या अनार
सबसे खास पपीता होता है।
जो दिलों को अच्छा लगे
ऐसा इसका स्वाद होता है ।
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सुना है माली के खेतों में
फल कई तरह के उगते है।
पर देता है जो स्वाद दिलों को
ऐसे पपीते ही होते है।
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पपीता जो कोई खाता है
उसका दिल भी मीठा बोलता है।
अरे आता है स्वाद भी तगडा
कि दिल को भी मजा आ जाता है।
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पपीते के मीठे स्वाद पर
बच्चो का दिल आ जाता है ।
तभी तो खा कर पपीता
मजा आ जाता है।
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जो कोई खाता है पपीता
उसका दिल मीठा होता है।
करता है वो भी प्यार सबसे
ऐसा उसका मन होता है।
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दिल की वो खास बन गई
खा कर पपीता मुस्कुराकर चली गई।
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चाकू के एक वार ने
पपीते के कई टूकडे कर दिए।
जब खाया पपीता तो दिल ने कहा
क्या खूब फल है दिए।
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फलो की महफिल में
पपीते का ही नाम है।
बिकता है यह दिन रात
इतना तगडा इसका स्वाद है।
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फलो की महफिल मे
कई प्रसिद्ध फल होते है।
मगर फिर भी ग्राहकों को
पपीते ही पसंद आते है।
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पपीते जब सूरज की रोशनी में चमकता है
देखकर ग्राहक का दिल खाने को करता है।
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खुदा करे
पपीता हर घर में बस जाए।
जो खाए पपीता दिन में
उसके सारे रोग दूर हो जाए।
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पपीता जो कोई खाता है
वो बीमारी कई दुर भगाता है।
आता है स्वाद जीभ को भी
जब कोई जूस बनाकर पीता है।
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बागो मे भी रोनक आ गई
जब पपीते की खुशबू छा गई।
अरे हो गया चांद भी इसका दिवाना
और धडकन चांद के दिल की बढ गई।
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जब खाओ पपीता तुम
तो दिल खुश तुम्हारा हो जाए।
अरे है यह इतना मीठा
कि खाने का तेरा फिर से मन कर जाए।
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