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घेवर असल में एक प्रकार की मिठाई होती है, जो की खासतौर पर मकर संक्रांति के अवसर पर बनाई जाती है। यह एक स्पेशल मिठाई होती है, क्योंकि यह खासतौर पर जनवरी माह में ही बनाई जाती है, इसके बाद में इसको नहीं बनाया जाता है। 🥨🎋
यह एक तरह की जलेबी होती है, जो की ठीक जलेबी की तरह ही बनती है। इसलिए यदि आप घेवर खाना पसंद करते है, तो आज का यह लेख आपके लिए ही है। क्योंकि आज के इस लेख में हम आपके लिए घेवर पर कई प्रकार की शायरी लेकर आए है, तो आइए घेवर पर शायरी पढ़े — 📖👇
🪁 1 – मकर संक्रांति (पतंग और घेवर पर शायरी)
✍️ शायरी 1
ठंडी हवाओं के घेरे ने
हमे दिन रात सताया है।
और बुलाकर जनवरी के माह में
घेवर का रस पिलाया है।
🌬️❄️🥨

✍️ शायरी 2
जब चारों ओर धुंध का घेरा मंडराता है
तभी तो घेवर खाने को मिलता है।
🌫️🥨
✍️ शायरी 3
आसमान में भी पतंगे उड़ने लगते है।
तभी तो मिठाईयों की दुकान में
घेवर बिकने लगते है।
🪁☁️🥨
✍️ शायरी 4
ताजी घेवर के कोर ने
जीभ को बड़ा स्वाद दिया है।
और करके तूने मीठी बातें
होठो को होठ से चूम लिया है।
💋🥨
✍️ शायरी 5
तेज हवाओं के झोंके ने
पतंगों को आसमान में उड़ाया है।
और आने वाले मेहमानों ने
घेवर का मीठा निवाला हाथ से खिलाया है।
🌬️🪁🥨
✍️ शायरी 6
जनवरी का माह मुझे
बड़ा याद आता है।
क्योंकि जनवरी में ही तो
घेवर का मीठा स्वाद आता है।
📅🥨😊
✍️ शायरी 7
खा कर घेवर वो
बड़े मुस्कुरा जाते है।
जो लेकर पतंग और धागा
छत पर चढ़ जाते है।
🪁🧵😊🥨
✍️ शायरी 8
खुशी का वो दिन है आया
जब मनुष्य घेवर को चाव कर खाया।
उड़ाने लगा आसमान में खुशियों के पतंग
तभी तो मकर संक्रांति का माहौल बन पाया।
🎉🪁🥨
✍️ शायरी 9
न जाने कब वो दिन आएगा
जब तू चरखी पकड़ेगी और मैं पतंग उड़ाऊंगा।
अगर लगेगी तुझे भूख
तो घेवर अपने हाथों से खिलाऊंगा।
🧵🪁💑🥨

✍️ शायरी 10
दिल मेरा खुश हो जाता है
जब घेवर का निवाला मुंह में चला जाता है।
💓🥨😋
✍️ शायरी 11
कड़ाके की ठंड में
कोहरा छाने लग गया।
और खा कर घेवर का निवाला
मजा आ गया।
❄️🌫️🥨😊
✍️ शायरी 12
जब चारों ओर कोहरा छा जाता है
तब आसमान में पतंगे कई उड़ती है।
और मिलती है बाजार में घेवर बड़ी मीठी
जिसे खा कर ग्राहकों की धड़कन खुश होती है।
🌫️🪁🥨💓
✍️ शायरी 13
घेवर के एक निवाले ने
दिल के दर्द को मिटाया है।
और मकर संक्रांति के अवसर पर
पतंगों को आसमान में मैंने उड़ाया है।
💔➡️💓🪁🥨
✍️ शायरी 14
दिल का दर्द पतंग बनकर उड़ने लग जाता है।
जब घेवर खाने का मौसम आ जाता है।
💔🪁🥨
✍️ शायरी 15
बच्चों की खुशी के दिन है आए
तभी तो बाजार में घेवर सज के आए।
उड़ने लगे बच्चे आसमान में पतंगे
और फिर खुशी से फूले न समा पाए।
👶🪁🥨🎉

✍️ शायरी 16
कोहरा भी जिसे रोक न पाए
वो ही तो बचपन कहलाए।
अरे मिलता है उस पल घेवर भी
जिसे खा कर बचपन बड़े मुस्कुराए।
🌫️👶🥨😊
✍️ शायरी 17
हवाओं ने भी हमे दिन रात सताया था
और खिलाकर घेवर माँ बाप ने
छत पर पतंग उड़ाना सिखाया था।
👨👩👧🪁🥨
❁ • ❁ • ❁
🙏 2 – भक्ति रस (देवताओं के लिए घेवर पर शायरी)
✍️ शायरी 1
गणेश जी का दिल भी
लड्डू से भरने लग जाता है।
तभी बाजार में घेवर
मिलने लग जाता है।
🐘🥮🥨
✍️ शायरी 2
लड्डू का स्वाद भी
फीका पड़ जाता है।
जब कड़ाके की ठंड में
घेवर खाने को मिल जाता है।
🥮❌🥨✅
✍️ शायरी 3
श्री कृष्ण जी की मुरली भी
खुश हो जाती है।
जब भक्त कृष्ण जी को
घेवर का भोग लगा जाते है।
💙🪈😊🥨
✍️ शायरी 4
जिनको लगता था प्रिय नारियल
वो भी नारियल से दूर हो जाते है।
जब मकर संक्रांति पर
बाजार में घेवर मिल जाते है।
🥥❌🥨✅

✍️ शायरी 5
मां लक्ष्मी के हाथों से
धन की वर्षा होने लग जाती है।
जब भक्त मां लक्ष्मी को
घेवर हाथों से खिलाने लग जाते है।
🪷💰🥨
✍️ शायरी 6
घेवर का भोग लगाकर
वो देवताओं को खुश करते है।
हो जाए मन की इच्छा पूरी
इसलिए घेवर की रिश्वत देते है।
🙏🎁🥨
✍️ शायरी 7
क्या कहे इस मनुष्य का
यह तो भगवान को भी रिश्वत देता है।
हो जाए मन की इच्छा पूरी
तो घेवर का स्वाद चखाता है।
🙏💰🥨
✍️ शायरी 8
बिना अपने ईश्वर के
घेवर मैं कैसे खाऊंगा।
अरे लगाऊंगा पहले भोग ईश्वर को
फिर बैठकर पास मैं खाऊंगा।
🙏🥨😊
✍️ शायरी 9
जब मिलेगा घेवर बाजार में
तो शिव को पहले भोग लगाऊंगा।
फिर बांटकर सभी लोगों को
मैं शिव के पास बैठकर खाऊंगा।
🔱🥨🙏

✍️ शायरी 10
हनुमान जी का दिल भी
खुश हो जाता है।
जब मकर संक्रांति पर
भक्त घेवर चढ़ा जाता है।
🙊😊🥨
✍️ शायरी 11
मकर संक्रांति के अवसर पर
देवताओं को भी घेवर का इंतजार रहता है।
तभी तो खरीदकर भक्त लोग
देवताओं को घेवर का भोग लगाते है।
😇⏰🥨
✍️ शायरी 12
मकर संक्रांति के अवसर पर
घेवर का भोग शिव को लगाया है।
तभी तो मैंने शिव जैसा
जीवन साथी पाया है।
🔱💑🥨

✍️ शायरी 13
अगर हो जाए मन की इच्छा पूरी
तो घेवर का भोग लगाऊंगा।
करके तेरी पूजा सच्चे मन से
ढोल मैं खूब बजाऊंगा।
🙏🥁🥨
❁ • ❁ • ❁
💕 3 – इश्किया अंदाज़ (महबूबा वाली घेवर पर शायरी)
✍️ शायरी 1
तेरे हुस्न के सामने
घेवर भी फीका पड़ता है।
और चूमता हूं जब होठ तेरे
दिल मेरा जोर से धड़कता है।
💫💋💓🥨
✍️ शायरी 2
हमे तो तुमसे इश्क हुआ था
पर तूने दिल का बुरा हाल कर दिया।
और खिलाकर मुझे घेवर अपने हाथों से
तूने कमाल कर दिया।
💑🥨✨
✍️ शायरी 3
दिल तो इश्क का रोगी बन गया
खाया घेवर तेरे हाथों से
तो यह दीवाना तेरा हो गया।
💓🤪🥨
✍️ शायरी 4
इश्क में कहीं हम बर्बाद न हो जाएं
खाएं घेवर तो कहीं मीठे न बन जाएं।
💑🥨😅

✍️ शायरी 5
घेवर का मीठा स्वाद भी
फीका पड़ जाता है।
जब तेरे होठो का रस
मेरे होठो पर चढ़ जाता है।
🥨❌💋✅
✍️ शायरी 6
खा कर घेवर तेरे हाथों से
दिल मेरा खुश होता है।
और जब पहनती है तू लाल साड़ी
दिल तुझे ही देखता है।
👗❤️💓🥨
✍️ शायरी 7
लगा कर होठो पर लाली
वो घेवर का निवाला खाती है।
और देखकर आशिकों को
आंखों से तीर चलाती है।
💄👁️💘🥨
✍️ शायरी 8
उसका भी बुरा हाल होगा
जो इश्क का दुश्मन होगा।
न मिलेगा घेवर खाने को
ऐसा रोग उसको लगेगा।
💔🥨😷
✍️ शायरी 9
घेवर के मीठे स्वाद ने
विदेश से भारत बुलाया है।
और करके तूने मीठी बातें
मेरे दिल को दीवाना बनाया है।
🌍🇮🇳💓🥨
✍️ शायरी 10
तेरी काली आंखों की कसम
तू काली साड़ी में कमाल लगती है।
और खाती है जब घेवर तू
चीनी की मीठी चाशनी लगती है।
👗🖤🥨🍯
✍️ शायरी 11
तेरे गोरे गालों को
चूमकर दिल मेरा खुश हो जाता है।
जैसे घेवर का मीठा स्वाद
दिल तेरे होठों से पी जाता है।
😘💓🥨
✍️ शायरी 12
करके मीठी मीठी बातें तूने
पास मुझे अपने बुलाया है।
और लगा कर होठो पर लाली
घेवर का मीठा स्वाद चखाया है।
💬💄🥨
✍️ शायरी 13
दिल आज फिर किसी का दीवाना हो गया
जब घेवर जैसा मीठा जानम सामने आ गया।
💓😍🥨

✍️ शायरी 14
घेवर का निवाला भी फीका पड़ जाता है।
जब तेरे लाल होठो का रस मेरे होठो पर चढ़ जाता है।
🥨❌💋✅
✍️ शायरी 15
तेरे हुस्न की तारीफ में
घेवर भी फीका पड़ता है
और चूमकर तेरे होठो को
दिल बड़ा हंसता है।
💫💋😊🥨
✍️ शायरी 16
खुदा भी तेरे हुस्न पर
मरने लग जाता है।
जब घेवर जैसा मीठा बदन
चूमने को मिल जाता है।
😇💋🥨
✍️ शायरी 17
तेरी कानों की बाली ने
कईयों का दिल धड़काया है।
पर बुलाकर तूने पास मुझे
घेवर अपने होठों से खिलाया है।
💍💓🥨💋
✍️ शायरी 18
मकर संक्रांति के उस अवसर पर
शहर में कई परियाँ मिलती है।
खाती है घेवर चाव से
ऐसी महबूबा बस तू दिल में बसती है।
🧚♀️🥨💓
✍️ शायरी 19
शहर की छोरियों ने
मुझे पास अपने बुलाया था।
और खिलाकर अपने हाथों से घेवर
होठो को चूम लिया था।
💑💋🥨
✍️ शायरी 20
कॉलेज में पढ़ने वाली ने
इश्क का पाठ मुझे पढ़ाया था।
कैसे होता है घेवर का मीठा स्वाद
वो होठ चूमकर बताया था।
📚💋🥨
✍️ शायरी 21
देखकर उसकी प्यारी सूरत को
दिल जोर से धड़कने लगा।
जैसे हो सामने मीठा घेवर
और दिल खाने को करने लगा।
😍💓🥨

✍️ शायरी 22
तेरे गुलाबी गालों की कसम
आज तू आसमान से उतरी परी लगती है।
और खाती है जब घेवर तू
इश्क की बोतल लगती है।
😇🍾🥨
✍️ शायरी 23
लेकर हाथ में घेवर वो
मिलने छत पर आती है।
अरे क्या कहे उनका
वो होठों को चूमकर जाती है।
💋🥨
❁ • ❁ • ❁
🍬 4 – मिठाइयों की तुलना (कॉम्पिटिशन) घेवर पर शायरी
✍️ शायरी 1
जब आती है मकर संक्रांति
तो घेवर बड़े खूब बिकते है।
और खरीद सके गरीब लोग इसे
इसलिए तो सस्ते भाव में बिकते है।
💰🥨📉
✍️ शायरी 2
जब बाजार में घेवर मिलते है
तो फिर कलाकंद कौन खरीदते है।
🍬❌🥨✅
✍️ शायरी 3
कलाकंद का स्वाद तो
दिलों पर राज करता है।
मगर घेवर के सामने
कलाकंद कहाँ बिकता है।
🍬❌🥨✅

✍️ शायरी 4
जलेबी हो या घेवर
दोनों एक ही बात होती है।
मगर फिर भी घेवर के सामने
जलेबी नहीं बिकती है।
🍯❌🥨✅
✍️ शायरी 5
काजू कतली भी फीकी पड़ जाती है
जब घेवर बाजार में बनने लग जाती है।
🥜❌🥨✅
✍️ शायरी 6
लड्डू का मीठा स्वाद तो
दिलों को खुश करता है।
मगर फिर भी लड्डू के सामने
घेवर ग्राहक पहले खरीदता है।
🥮📉🥨📈
✍️ शायरी 7
चीनी की चाशनी में
घेवर ने गोता लगाया है।
और बुलाकर ग्राहक को पास अपने
मीठा रस पिलाया है।
🍯🏊♂️🥨
✍️ शायरी 8
जलेबी के साथ
घेवर की टक्कर हो गई।
तभी तो जलेबी के सामने
घेवर इतनी बिक पाई।
🍯⚔️🥨
✍️ शायरी 9
रसगुल्ला भी फीका पड़ने लग जाता है
जब बाजार में घेवर चाशनी में गोता लगा जाता है।
🍬❌🥨✅

✍️ शायरी 10
रसगुल्ला चाशनी में डूबता रह गया
इतने में तो घेवर ग्राहक खरीदकर चला गया।
🍬🥨📦
✍️ शायरी 11
गुलाब जामुन का मीठा स्वाद भी
फीका पड़ जाता है।
जब घेवर का निवाला
मुंह में चला जाता है।
🍬❌🥨✅
✍️ शायरी 12
गुलाब के साथ रहकर
गुलाब जामुन गुलाब सा महकता है।
मगर फिर भी घेवर के सामने
गुलाब जामुन बिक नहीं पाता है।
🌹🍬❌🥨✅
✍️ शायरी 13
हमे तो अपनों ने लूटा
गैरों में कहाँ दम था।
जिस घेवर को मुंह में डाला
उसमें चीनी का दम कम था।
😢🥨❌
✍️ शायरी 14
घेवर का हर एक निवाला
बेकार बन जाता है।
जब चाशनी में
चीनी कम पड़ जाती है।
🥨❌🍯

✍️ शायरी 15
छोटी सी कड़ाही में
वो आग में सिकता है।
और डूबकर चीनी की चाशनी में
घेवर बनकर निकलता है।
🍳🔥🍯🥨
❁ • ❁ • ❁
👶 5 – बचपन की यादें घेवर पर शायरी
✍️ शायरी 1
बचपन के उन दिनों में
घेवर माँ ने हाथों से खिलाया था।
तभी तो आज मेरा दिल
इतना मीठा बन पाया था।
👩👦💓🥨
✍️ शायरी 2
कड़वा मुझे बोलना आता नहीं
क्योंकि घेवर खाने का मैं दीवाना हूं।
करता हूं सभी से प्रेम से बातें
क्योंकि प्रेम का मैं रोगी हूं।
💓🥨😊
✍️ शायरी 3
मां के हाथों से
एक एक निवाला खाया था।
कैसा होता है मीठा घेवर
वो अहसास पहली बार पाया था।
👩🍦🥨✨

✍️ शायरी 4
सिर पर मां का हाथ होता था
तब जीवन भी बड़ा मस्त होता था।
खाता था घेवर दिन रात मैं
तभी तो मैं सबका खास होता था।
👩👦🥨✨
✍️ शायरी 5
बचपन के उन दिनों में
दोस्तों की एक टोली होती थी।
लेकर पतंगे छत पर
घेवर की पार्टी होती थी।
👫🪁🥨🎉
✍️ शायरी 6
बचपन के वो दिन भी
बड़े याद आते है।
जब घेवर के साथ
हम पतंगे उड़ाते थे।
🪁🥨💭
✍️ शायरी 7
बीत गया वो बचपन भी
जब घेवर का निवाला खाया था।
कैसा होता है पतंग उड़ाने का मजा
वो दोस्तों के साथ पाया था।
👫🪁🥨

✍️ शायरी 8
वो दोस्त भी आज विदेश चला गया
जो घेवर के साथ पतंगे उड़ाता था।
खिलाकर मुझे निवाला अपने हाथों से
दोस्ती का पाठ पढ़ाता था।
👫✈️🥨
✍️ शायरी 9
लेकर धागा और पतंग
छत पर भाग जाया करता था।
जब आता था घेवर घर पर
तो अकेला मैं खा जाया करता था।
🪁🧵🥨
✍️ शायरी 10
मकर संक्रांति पर
मामा जी अक्सर घर आते थे।
और साथ अपने घेवर और
पतंगे लेकर आते थे।
👨👧🪁🥨
❁ • ❁ • ❁
😂 6 – हास्य (मजेदार घेवर पर शायरी)
✍️ शायरी 1
डाइट वाइट जाए भाड़ में
जब घेवर आ जाए सामने।
🏃♂️🚫🥨✅
✍️ शायरी 2
डाइट के चक्कर में
मिठाइयों से साथ छोड़ दिया।
पर देखकर मीठी घेवर को
डाइट को ही भूल गया।
🥨😍

✍️ शायरी 3
बरसों तक मिठाई मैं न खाता हूं
पर घेवर देखकर रुक नहीं पाता हूं।
🥨😋
✍️ शायरी 4
घेवर का मीठा स्वाद
दिल पर वार कर गया।
जैसे हो कोई इश्क का तीर
जो दिल पर चल गया।
🏹💓🥨
✍️ शायरी 5
पेट की चर्बी दिन रात बढ़ने लग जाती है
जब घेवर की मिठाई सामने आ जाती है।
🍔📈🥨
✍️ शायरी 6
चर्बी कम करने के लिए
जिम जॉइन की थी।
पर घेवर की चमक देखकर
जिम को ही छोड़ दी थी।
🏋️♂️❌🥨✅
✍️ शायरी 7
हवाओं के साथ खुशबू का झोंका आने लग जाता है
जब शहर में घेवर बनने लग जाता है।
🌬️👃🥨

✍️ शायरी 8
क्या कहे उनका
वो तो इश्क का रोगी है।
खाता है घेवर दिन रात
ऐसा मिठाई का दीवाना है।
🤪🥨
✍️ शायरी 9
न जाने दिल का क्या हाल होगा
बिना घेवर के जीवन भी बर्बाद होगा।
💔🥨❌
✍️ शायरी 10
एक वर्ष के बाद में
खाने को जो मिलता है।
भला उस घेवर से
कौन दूर रह पाता है।
⏰🥨😋
🎯 आपकी राय जरूरी है!
तो इस तरह से दोस्त, घेवर पर शायरी कैसी लगी कमेंट में जरूर बताना।
💬👇😊
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