Laddu par shayari, लड्डू पर शायरी, laddu ki shayari, लड्डू शायरी, laddu shayari hindi
लड्डू असल में एक प्रकार की मीठाई होती है, और यह अपने भारत में अधिक बिकने वाली मिठाईयों की श्रेणी में आती है। और ग्राहक इन्हे खाना पसंद करते है। 🥮😋
दूसरा की भगवान गणेश जी की प्रिय मिठाई के रुप में लड्डू को जाना जाता है। इसलिए जो भक्त गणेश जी की पूजा करने वाला होता है, वह पहले लड्डू खरीदता है और फिर गणेश जी की पूजा करता है। 🐘🙏
यदि आप भी गणेश भक्त है और आपको लड्डू खाना पसंद है, तो आज के इस लेख में हम लड्डू पर शायरी लेकर आए है, जिन्हे पढने पर आपको काफी अच्छा महसूस होगा। तो आइए लड्डू पर शायरी पढे — 📖👇
🙏 1 – भक्ति रस (गणेश जी और देवताओं के लिए Laddu par shayari )
✍️ शायरी 1
गणेश जी की पूजा में
भक्त ने लड्डू का भोग चढाया है।
तभी तो आज गणेश जी का चेहरा
गुलाब सा खिल पाया है।
🐘🌹😊

✍️ शायरी 2
गणेश जी का दिल भी खुश हो जाता है।
जब भक्त लड्डू का भोग लगा जाता है।
💓🙏🥮
✍ शायरी 3
लेकर हाथों मे गुलाब का फूल
वो मिलने हमसे आते है।
क्या कहे जनाब उनके बारे में
वो लड्डू का डिब्बा चूरा ले आते है।
🌹📦🥮
✍️ शायरी 4
कब जवानी के दिन पास आएगे
और हम भर पेट शादी के लड्डू खाएंगे।
🎉🥮😋
✍️ शायरी 5
मेरा नाम तो गुड्डू है
जो खिलाता सबको लड्डू है।
😊🥮
✍️ शायरी 6
मोती चूर के लड्डू का भोग
तुने हनुमान जी को लगाया है।
तभी तो अपने जीवन के
संकटों से छूटकारा तुने पाया है।
🙊✨🥮
✍️ शायरी 7
मंदिर में भी खुशबू छा जाती है
जब भक्त लेकर लड्डू की थाली आ जाती है।
🛕👃✨
✍️ शायरी 8
देखकर लड्डू की चमक को
कृष्ण जी का दिल भी ललचाने लग गया।
तभी तो छोड़कर माखन को
कृष्ण जी लड्डू खाने लग गया।
💙🧈❌🥮✅
✍️ शायरी 9
देवताओं के चेहरे पर
चमक नजर आती है।
जब भक्त
लड्डू का भोग लगाती है।
👼✨🥮
✍️ शायरी 10
लड्डू का छोटा सा टुकड़ा भी
जीवन के संकटों को दूर करता है।
जब प्रसाद में यह लड्डू का
टुकड़ा खाने को मिलता है।
🥮🙏✨

✍️ शायरी 11
अगर एक बार तुम लड्डू ले जाओगे
तो पास मेरे बार बार आओगे।
होगे तुम पर ईश्वर भी मेहरबान
यदि तुम लड्डू का भोग उन्हे लगाओगे।
🥮🙏✨
✍️ शायरी 12
लड्डू का स्वाद जब भक्ति में घुलता है
ईश्वर भी फिर चाव से खाता है।
🥮🙏😋
✍️ शायरी 13
जटाओं से बहती गंगा ने
जादू अपना चलाया है।
बुलाकर शिव को पास अपने
भक्त ने लड्डू प्यार से खिलाया है।
🔱🌊🥮
✍️ शायरी 14
स्वर्ग के देवता भी
धरती पर आने लग जाते है।
जब लड्डू में बादाम लगाकर
भक्त चढ़ाने लग जाते है।
😇🌍🥮
✍️ शायरी 15
काजू कतली की महक ने
ईश्वर को धरती पर बुलाया है।
पर खिलाकर लड्डू भक्तों ने
पेट ईश्वर का भर दिया है।
🥜🙏🥮
✍️ शायरी 16
राम जी का चेहरा भी खिल उठता है।
जब मोती चूर का लड्डू भक्त चढ़ा जाता है।
🏹😊🥮
✍️ शायरी 17
शेर की सवारी लेकर
वो धरती पर आ जाती है।
जब भक्त लड्डू का भोग
मां को चढ़ाकर जाती है।
🐅🙏🥮
✍️ शायरी 18
माखन चोर ने भी
एक बार लड्डू का भोग खाया था।
जब भक्त ने बता कर माखन
लड्डू धोखे से खिलाया था।
💙🧈➡️🥮
✍️ शायरी 19
गणेश जी के चूहे को
बड़ा पसंद आता है।
जो भक्त गणेश जी को
लड्डू का भोग लगाकर जाता है।
🐭🥮😊
✍️ शायरी 20
देखकर रुपयो की ताकत को
वो भी धन कमाने में लग गया।
जो खाता था दिन रात लड्डू
वो लड्डू बनाकर बेचने लग गया।
💰➡️👨🍳🥮
❁ • ❁ • ❁

💕 2 – इश्किया अंदाज़ (महबूबा वाली Laddu par shayari)
✍️ शायरी 1
तेरे लड्डू जैसे गालों को देखकर
दिल मेरा बेकाबू हो जाता है।
खाने के लिए तुझे
पास आने लग जाता है।
💓😍🥮
✍️ शायरी 2
तेरे लड्डू जैसे गालों में
रसगुल्ले का रस भरा है।
तभी तो चूमकर तेरे गालों को
मेरा मन न भरा है।
😘🍬🥮
✍️ शायरी 3
चेहरा तेरा गोल मटोल हो गया
और खा कर लड्डू तु खुश हो गया।
😊🥮
✍️ शायरी 4
तेरे गुलाबी होठो की मुस्कान ने
आशिक कईयों को बनाया है।
और खिला खिलाकर लड्डू तुने
उन्हे सूगर का मरीज बनाया है।
💋😷🥮
✍️ शायरी 5
पहनकर नारंगी साड़ी तुम
जब जब छत पर आती हो।
खुदा कसम तुम लड्डू जैसी
मीठी लग जाती हो।
🟠👗😍🥮
✍️ शायरी 6
तेरे गोल मटोल चेहरे ने
तुझे लड्डू जैसे बनाया है।
तड़पता रहे आशिक देखकर तुझे
खुदा ने इतना कातिल तुझे बनाया है।
💀😍🥮
✍️ शायरी 7
तेरे हुस्न की तारीफ में
शायरी मैं कई लिख देता।
पर है जो तेरा लड्डू जैसा चेहरा
वह मुझे कुछ और देखने न देता।
😵💫🥮
✍️ शायरी 8
कानों मे सोने की बाली पहनने वाली
तु तो बड़ी मतलवाली लगती है।
और खाती है लड्डू जब तु
आशिकों को बड़ी कातिल लगती है।
💍😍🥮
✍️ शायरी 9
तेरे होठो की मीठास ने
लड्डू को भी फिका बनाया है।
और करकर तुने इश्क भरी बातें
मेरा दिल जोरों से धड़काया है।
💋💓🥮
✍️ शायरी 10
जब तु पास मेरे होती है
दर्द शरीर का दूर हो जाता है।
और देखकर तेरे चांद से चेहरे को
दिल लड्डू जैसा मीठा बन जाता है।
🌙💓🥮

✍️ शायरी 11
तेरा साथ जब न मिले
तो जीवन भी फिका लगता है।
जैसे बिना चाशनी के
लड्डू का स्वाद लगता है।
😢🥮❌
✍️ शायरी 12
तु मेरे दिल को धड़काती है प्यार से
और देखकर मुझे खिलाती है लड्डू अपने हाथों से।
💓🥮😊
✍️ शायरी 13
लगा कर काला चश्मा आंखो पर
वो सितम ढाने लग जाती है।
और देखकर मुझे सामने
लड्डू जैसे चेहरे से मुस्कुरा जाती है।
🕶️😊🥮
✍️ शायरी 14
तेरे गुलाबी होठो की मुस्कान ने
दिल को घायल कर दिया।
और खिलाकर तुने मीठा लड्डू
मुझे प्यार में पागल कर दिया।
💋🤪🥮
✍️ शायरी 15
तेरी गालो पर जो काला तिल है
उसमें बसता मेरा दिल है।
खाती है जब तु लड्डू अकेली
देख देखकर तड़पता मेरा दिल है।
◼️💓😢🥮
✍️ शायरी 16
तेरी यादों का स्वाद सबसे निराला होता है।
जैसे लड्डू का हर एक निवाला होता है।
💭🥮✨
✍️ शायरी 17
लगा कर हाथों पर महंदी
वो दुल्हन सी चमक गई।
और खिलाकर विवाह के लड्डू
वो विवाह करकर चली गई।
🤎👰♀️🥮
✍️ शायरी 18
तेरे होठो की मीठास ने
लड्डू का स्वाद भूला दिया।
जो था दिवाना मैं लड्डू खाने का
आज वो लड्डू ही भूल गया।
💋🥮❌
✍️ शायरी 19
जब चूमता हूं तेरे होठो को
तो मजा दिल को आता है।
खा रहा हूं जैसे लड्डू मैं
एहसास ऐसा हो जाता है।
💋🥮😊
✍️ शायरी 20
तेरी बातें भी
लड्डू जैसी मीठी होती है।
जैसे डूबकर चाशनी में
तेरी बातें मुंह से बाहर आती है।
💬🍯🥮

✍️ शायरी 21
जब तेरा साथ मेरे दिल को मिलता है
तब दिल मेरा लड्डू जैसा महकता है।
💓👃🥮
✍️ शायरी 22
देखकर तेरे लड्डू जैसे चेहरे को
दिल मेरा धड़कना भूल गया।
जो रहता था हमेशा उदास
आज वो तुझे देखकर खुश हो गया।
😊💓🥮
✍️ शायरी 23
तेरी चांद सी सूरत पर
दिल मेरा घायल हो गया।
खाया लड्डू मैंने
तो पागल मैं तेरे प्यार में हो गया।
🌙🤪🥮
✍️ शायरी 24
तेरी मेरी शादी का लड्डू
खाने का दिल मेरा करने लग गया।
तभी तो लेकर रिश्ता मैं
तेरे बाप के पास आ गया।
💍👨👧🥮
✍ शायरी 25
जब होगी तेरी शादी
ढोल बजाकर नाचूंगा।
आएगा मजा दिल को भी
जब लड्डू पेट भरकर खाऊंगा।
🥁💃🥮
✍️ शायरी 26
लड्डू की प्यारी सूरत ने
दिल को घायल कर दिया।
और पिलाकर तुने अपने होठो का रस
दिल का होश उड़ा दिया।
💋😵🥮
✍️ शायरी 27
तेरे लड्डू जैसे बदन को
चोर बनकर चुरा लेता।
यदि बाप तेरा
पुलिसवाला न होता।
👮♂️😈🥮
✍️ शायरी 28
गुलाब लेकर हम भी पास तेरे आ जाते
और उठाकर तेरा लड्डू हम खा जाते।
मगर है तेरा बाप पुलिस वाला
वरना हम तेरा गाल चूम जाते।
🌹👮♂️😘
✍️ शायरी 29
हाथों मे प्रेम की रेखा नजर आने लग गई।
जब पड़ोसन मेरी लड्डू जैसी दिख गई।
✋😍🥮
✍️ शायरी 30
चर्बी की वो दुकान है
तभी तो वो लड्डू सी मुस्कान है।
खा जाऊं पल भर में उसे
ऐसी वो मिठाई की खान है।
😋😍🥮

✍️ शायरी 31
हमको भी इश्क होने लग गया।
जब पड़ोसी मुझे लड्डू जैसा गोल मिल गया।
💑😊🥮
❁ • ❁ • ❁
😂 3 – हास्य-विनोद (मजेदार Laddu par shayari)
✍️ शायरी 1
जलेबी जैसा बदन तेरा
पर तु लड्डू खाती है।
देख देखकर मुझे
दिन रात तु शर्माती है।
🌀😊🥮
✍️ शायरी 2
शादी का लड्डू खाने का
मन हर किसी का करता है।
पर देखकर उनके चेहरे को
दुल्हन का बाप भी डरता है।
🎉😨👨👧
✍ी शायरी 3
ग्राहक भी दुकान में दिन रात आने लग जाते है।
जब दुकानदार लड्डू देशी घी के बनाने लग जाते है।
🏪👨🍳🥮
✍️ शायरी 4
महंगा होकर भी
ग्राहकों का खास हो गया।
तभी तो डूबकर चाशनी में
लड्डू खुश हो गया।
💰😊🥮
✍️ शायरी 5
लगा कर सिर पर टोपी
लड्डू घोड़ी पर चढ़ गया।
देखो आज वो समय आया है,
जब लड्डू का भी विवाह हो गया।
🎩🐎💍🥮

✍️ शायरी 6
सुन बे लड्डू जैसे गोल मटोल मुंह वाली
कैसा हाल है तेरा मेरे दिल की दिवानी।
😊💓
✍️ शायरी 7
हमको भी इश्क होने लग गया।
जब पड़ोसी मुझे लड्डू जैसा गोल मिल गया।
🏠😍🥮
✍ शायरी 8
डीजे पर हम दिन रात नाचेंगे।
जब विवाह तेरा होगा।
खाएंगे तेरी शादी का लड्डू
जब लड्डू में बादाम कई पड़ेंगे।
🎧💃🥮✨
🤣 • 😂 • 🥲
🎭 4 – मिश्रित Laddu par shayari (अनोखी और क्रिएटिव)
✍️ शायरी 1
जलेबी की गोल गोल उलझन में
दिल ग्राहक का उलझने लग गया।
खाया जब मैंने लड्डू शादी का
तो मजा आ गया।
🌀😋🥮

✍️ शायरी 2
रसगुल्ले के रस ने
दिल को दिन रात सताया था।
और बुलाकर महबूबा ने छत पर
लड्डू का स्वाद चखाया था।
🍬💓🥮
✍ शायरी 3
लड्डू खाने की औकात में
काजू कतली खाने की सोच रहा था।
लगता है आज वो सपने
सो कर देख रहा था।
🥮😴💭
✍️ शायरी 4
जलेबी और लड्डू की भी
लड़ाई होने लग गई।
जब ग्राहक जलेबी बोलकर
लड्डू की कटोरी खरीद गई।
🌀⚔️🥮
✍️ शायरी 5
गुलाब जामुन ने
गुलाब का रस मुझे पिलाया था।
मगर फिर भी लड्डू के सामने
गुलाब जामुन बिक न पाया था।
🍬❌🥮✅
✍️ शायरी 6
जलेबी का मीठा स्वाद भी
दिल को घायल करता है।
पर खिलाकर दुकानदार लड्डू
दिल का कौनसा भला करता है।
🌀😵🥮
✍️ शायरी 7
काजू कतली हो या लड्डू
सभी शरीर के दुश्मन होते है।
कर दे शरीर को बीमार
ऐसे इनके अरमान होते है।
🥜🥮😷

✍️ शायरी 8
महफिल में काजू का नाम गूंजने लग गया।
जब लड्डू के साथ काजू दिखने लग गया।
🥜🥮✨
✍️ शायरी 9
पहनकर सिर पर ताज
काजू कतली रानी बन गई।
और देखकर लड्डू की गोल सूरत को
काजू कतली लड्डू की दिवानी बन गई।
👑🥜😍🥮
✍️ शायरी 10
बागों मे जब फूल खिलते है
सबसे पहले मिठाईयों की दुकान मे मिलते है।
अरे महकते है दुकानों मे लड्डू
जब यह देशी घी से बनते है।
🌿👃🥮
✍️ शायरी 11
चमचम की पीली चमक ने
लड्डू को बड़ा सताया था।
मगर फिर भी यह दुकानों मे
लड्डू से ज्यादा बिक न पाया था।
🍬❌🥮✅
✍️ शायरी 12
जो आता है ग्राहक दुकान में
वो लड्डू खरीदकर जाता है।
लगता है फिर भोग गणेश जी को
तभी तो गणेश जी की कृपा पाता है।
🏪🙏🥮

✍️ शायरी 13
26 जनवरी हो या 15 अगस्त
लड्डू ताबड़तोड़ बिकते है।
मिलते है लड्डू स्कूलों मे
तभी तो बच्चों के प्यारे होते है।
🇮🇳🎒🥮
✍️ शायरी 14
देखकर लड्डू को सामने
बच्चे भी टूट पड़ते है।
आता है मजा जीभ को भी
जब लड्डू खाने को मिलते है।
👶😋🥮
✍ शायरी 15
नन्हे नन्हे हाथों ने
लड्डू को पकड़ना सीखा था।
कैसी होती है मिठाईयां
वो लड्डू खा कर देखा था।
🤲🥮😊
✍️ शायरी 16
शादी के मौके पर
लड्डू खाने को मन करता है।
पर आजकल की शादी में
लड्डू कौन बनाता है।
🎉😢🥮
✍️ शायरी 17
पहनकर आंखो पर काला चश्मा
लड्डू महफिल में जाने लग गया।
और देखकर लड्डू की सूरत को
दिवाना हर कोई होने लग गया।
🕶️😍🥮
✍️ शायरी 18
देखकर काजू की पतली कमर को
दिल लड्डू का भी धड़कने लग गया।
तभी तो आज लड्डू इतना खुश हो गया।
💓🥜🥮

✍️ शायरी 19
चीनी की चाशनी ने
रसगुल्ले को मीठा बनाया है।
मगर फिर भी लड्डू के सामने
रसगुल्ला बिक न पाया है।
🍬❌🥮✅
❁ • ❁ • ❁
💔 5 – मीठी-कड़वी (यादें और दर्द) Laddu par shayari
✍️ शायरी 1
जवानी जवानी के जोश में
न जाने कितने बड़े काम किए है।
जब न मिला शादी का लड्डू
तो छिपकर दिन रात रोए है।
😢😭🥮
✍ी शायरी 2
जो बीत गया समय
वो समय याद करके रोता हूं।
कैसे खाता था मां के हाथों से लड्डू
वो बचपन याद आज करता हूं।
👩👦😢🥮
✍️ शायरी 3
बचपन के उन दिनों मे
मां की छांव में रहा करता था।
जब लगती थी पेट में भूख
तो लड्डू मैं खाया करता था।
👩👦🏠🥮
✍ी शायरी 4
जब लगाती थी मां गणेश जी को भोग
तो दिल भी मेरा खिलता था।
क्योंकि खाने को लड्डू
प्रसाद के रुप में मुझे मिलता था।
🙏🥮😊
✍️ शायरी 5
बचपन का एक सपना था
जीवन में भर पेट लड्डू खाना था।
आज बीत गया बचपन मेरा
और वो सपना भी सपना बनकर रह गया।
💭😢🥮
✍️ शायरी 6
बचपन के उन दिनों मे
यार मेरा किसी का दिवाना था।
खाता था जो दिन रात लड्डू
ऐसा मीठाई का रखवाला था।
👫😋🥮

✍ शायरी 7
हमे तो अपनों ने लूटा
गैरों में कहाँ दम था।
जिस थाली को मैंने चुना
वहां पर लड्डू कम था।
😢💔🥮
🎯 आपकी राय जरूरी है!
तो इस तरह से दोस्त, लड्डू पर शायरी कैसी लगी कमेंट में जरूर बताना।
💬👇😊
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