177+ नमक हराम लोगो पर शायरी namak haram par shayari
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दोस्त, padhakushayari.in ब्लॉग में आपका स्वागत है, आज के इस लेख में हम namak haram par shayari लेकर आए है, जहां पर हम केवल नमक हराम पर शायरी जानेगे ।
दोस्त, नमक हराम का अर्थ होता है बेवफा, विश्वासघाती या गद्दार व्यक्ति । यानि कोई ऐसा व्यक्ति जो की बेवफा निकता है, विश्वासघात करता है या फिर गद्दारी करता है उस व्यक्ति को नमक हराम कहा जाता है।
और सच कहे तो ऐसे लोग आपको कई मिलते है। क्योकी हम जिस पर विश्वास करते है वही न जाने क्यो विश्वासघाती बन जाता है। इसलिए दोस्त कहते है की कभी किसी पर भारोषा करने से पहले लाख बार सोचना चाहिए । क्योकी जिस पर हम भरोषा करते है वही भरोषा तोड़ता है।
और ऐसे लोग आपके पास और हमारे पास जरूर है और बहुत बार ऐसे लोग धोका दे ही देते है। और आज का यह लेख आपके लिए उपयोगी रहेगा । क्योकी आज हम नमक हरामों पर शायरी लेकर आए है।
दोस्त, नकम हरामों पर शायरी सच में काफी मजेदार होने वाली है। तो यदि आपका कोई अपना नमक हरामी करता है तो उन लोगो को यह शायरी टैग करने के लिए बिल्कुल सही है।
तो आइए नमक हरामों पर शायरी पढे,
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हमने तो उसे अपना समझा,
नमक उसे दिन रात खिलाना अच्छा समझा ।
हमे क्या पता था इसका यह अंजाम होगा ।
जिसे खिलाया नमक वही आखिर नमक हराम होगा ।
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वफादारी की बात वो खूब करता था,
मैं भी उसकी बातो पर भरोषा करता था ।
जब जब होता उससे दूर मैं,
खुदा कसम पीछे पीछे नमक हरामी वो करता था ।
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जिसे टुकड़ो पर पाला
वही नमक हरामी निकला,
जिसे समझा अपना
वो ही गद्दार निकला ।
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जिसे अपना समझा वो पराया निकला,
दोस्त ही दोस्ती में गद्दार निकला ।
निकाल तो जीवन से उन दास्तो को
जो दोस्त ही नमक हराम निकला ।
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दुकानों मे नमक बिकता है,
और मेरे पास नमक हराम निकलते है।
अब तो किसी पर भरोषा तक नही रहा,
जब हर कोई गद्दार निकलता है।
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खुदा से पहले कोई न अपना था,
जो था वह सब पराय बन गए ।
जिनको समझा था अपना खास
वे तो नमक हराम निकल गए ।

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बरसों तक साथ दिया जिसका,
वो दोस्त ही गद्दार निकाला ।
जिसे समझा था अपना खास मित्र
वही नमक हराम निकला ।
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लगता है खुदा ने उसे
गलती से बनाया,
जो हर किसी के जीवन में
नमक हराम पाया ।
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उसके लिए घर वालों को छोड़ दिया,
जिसे चहा था उसे गले तक लगा लिया ।
पर फिर भी न जाने क्यों उसने
मुझे नमक हराम कह दिया ।
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जिसे जीवन भर साथ रखा
वह मेरा सच्चा दोस्त था ।
जिसने पास रहकर पीठ में छूरा डाला
वह नमक हराम मेरा दोस्त था ।
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इश्क उससे बहुत करता था,
तभी तो उसे पाने को दिल करता था ।
उसे हासिल करने के लिए घर को मैंने छोड,
पर वह पीछे पीछे नमक हरामी करता था ।
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जिन्हे बरसों तक पाला
वो दोस्त अपने थे ।
जिन्हे जान से भी ज्यादा प्यार किया,
वो नमक हराम भी अपने थे ।
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नमक मेरा खा कर दिल मेरा दुखा दिया ।
न जाने दोस्त तु क्यो नमक हराम बन गया ।
तु तो था मेरा सबसे प्यारा और अच्छा दोस्त,
फिर भी आखिर क्यो तो धोक मुझे दे गया ।

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जो किए थे अहसान तुझ पर
वो नमक समझ कर तुने खा लिया ।
खुद से ज्यादा यकित तुझ पर कर कर
नमक हराम तुझे मैंने बना लिया ।
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जो वक्त देखकर वार करे
वो दुश्मन होते है,
और जा पीठ पीछे वार करे
ऐसे नमक हराम अपने होते है।
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मैंने गिने चुने यार बनाए थे जमाने में,
खुद से ज्यादा यकिन किया वो दोस्त मेरे थे ।
पर पीठ पीछे वार जिसने किया
वो ओर नही यारो, नमक हराम दोस्त हमारे थे ।
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नमक हरामी करने पर भी तु शर्मीदा न हुआ,
दगा करने के बाद भी मुस्कुरा कर मुझे मिला ।
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जो चेहरे पर मुस्कुराते है उनसे बचना यारो,
अक्सर वही नमक हरामी करते है जमाने में यारो ।
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कभी उठाता था खुद गिरकर मुझे,
आज दूर वो हो गया ।
न जाने ऐसा क्या हुआ,
जो नमक हराम वो बन गया ।
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इश्क तुझसे किया था किसी ओर से नही,
पर तुने मुझे अपना प्यार न समझा ।
जिसके लिए अपनो को छोडा वह तु थी,
पर तुने तो मुझे नमक हराम तक समझा ।

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आज भी तेरी यादों मे दिन बिताता हूं,
चाहता हूं इतना की तुझे माफ कर देता हूं ।
याद है मुझे तुने नमक हरामी वाला काम है किया ।
फिर भी तुझे अपना बनाने के लिए तैयार मैं होता हूं ।
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जीसके मन में नमक हरामी हो,
वो जीवन में सफल नही होते,
जो जानता नही निभाना रिश्ता,
वो किसी के अपने तक नही होते ।
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जो करते है नमक हरामी,
वो अपनो के भी क्या अपने होगे ।
जो करते है ऐसे लोगो पर भरोषा,
वो खुद भी नमक हराम ही होगे ।
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कमजोर वक्त में साथ मैंने उसका दिया,
हर बुरे समय में उसके खडा हुआ ।
मगर जब मिला मोका उसको
नमक हराम वो बना खडा हुआ ।
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दुश्मनों से डर मुझे नही लगता,
चीर कर सिना वो रख देते है।
डर मुझे उनसे लगता है
जो नमक हरामी तक उतर जाते है।
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नमक हरामों से लाख अच्छा दुश्मन होता है,
जो पीठ पीछे वार तो नही करता ।
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हम उसके लिए जान देने को तैयार थे,
पर देना था जब साथ उसको मेरा,
नमक हरामी पर वो उतरे थे।
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जिन्हे टूकड़ो पर पाला वो खास मेरे अपने थे ।
जिन्होने वक्त देख कर किया वार मुझ पर,
वो नमक हराम भी अपने थे ।

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नमक हरामो से अच्छे तो कुत्ते होते है,
जो धोका तक तो नही देते है।
लाख बुरा कर लो चाहे उनके साथ,
फिर भी तैयार खड़े होते है।
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जिसका साथ दिया जीवन भर,
उसने भी आज अपनी असलियत दिखा दी ।
पीठ पीछे कर कर वार,
उसने भी नमक हरामी कर कर दिखा दी ।
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हमने नमक तेरा खाया है,
तुझे धोका कैसे देगे ।
किया है तुझे अपने से उपर हमेशा,
तुझे नमक हराम कैसे कहेगे ।
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पीछे पीछे वार करे ऐसा नमक हराम होता है,
ओर जो करे नमक हरामी वाला काम,
ऐसे लोगो का न कोई मजहब होता है।
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जिसने तेरा जीवन भर साथ दिया,
उसी को तुने धोका दे दिया ।
जो समझता था तुझे अपना खास,
उसी के लिए तु नमक हराम बन लिया ।
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नमक हराम भी
क्या खुब अदाए करते है,
जब मिलता है मोका उनको,
पीठ पीछे वारा वो करते है।
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जो अपने होते है उनको दिल से खुशी होती है,
और नमक हराम की हर बात झूठी होती है।

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जो हर जगह मिलते है ऐसे नमक हराम है,
जो ढूंढने को भी न मिले ऐसे दोस्त आप है।
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नमक हराम की मुस्कान पर यकिन मत करना,
उनकी हर एक मुस्कान नकली होती है।
दिखता है उनका दिल बिल्कुल साफ,
पर उनके दिल में जलन की आग होती है।
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जिनकी सामने बोलने की हिम्मत न हो,
वो लोग ही नमक हरामी करते है।
होते है ऐसे लोग बहुत कायर,
तभी पीठ पीछे वार वो करते है।
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जिसे मैंने अपना बचपन का साथी समझा,
वो ही नमक हरामी दोस्त निकला ।
जिस पर किया था सबसे ज्यादा भरोषा,
वही आखिर चोर निकला ।
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दिल को लूटने वाले लूटेरे होते है,
और अपनो को धोक दे
ऐसे नमक हरामी होते है।
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जिसने मुझे धोका दिया
उसे सारे संसार में ढूंढा,
जब देखा अपने आस पास के लोगो को,
वही पर मुझे नमक हरामी मिला ।
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जो मीठे बोलते है
उनसे मुझे हमेशा डर लगता है,
जो करते है नमक हरामी
उनके दिल में खंजर छूपा होता है।
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जीनका जमीर मर चुका हो
वो नमक हरामी ही करेगे,
जिसने समझा कभी अपना न हो,
वही तो पीठ पीछे वार करेगे ।

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जो खुद को मासूब बताते है,
वे नमक हरामी खुब करते है।
होता नही है अब किसी पर भी यकिन मुझे,
जब नमक हरामी दोस्त अपने होते है।
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जो खाता है मेरे घर का,
ऐसा घर रखवाला होता है।
पर जो खा कर हमरा धोका हमे दे
ऐसा नमक हराम ही होता है।
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नमक हराम न जाने तु कब बन गया,
बेवफाई तेरा पहचान पत्र तक बन गया ।
जिस पर किया था कभी खूद से ज्यादा भरोषा,
आज वही अपना नमक हराम तक बन गया ।
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कभी साथ रहता था मेरे,
आज घर को मेरे तोड रहा है,
ऐसा नमक हराम मेरा दोस्त है
जो पीठ पीछे वार कर रहा है।
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जिसकी इंसानियत गिर गई
वो नमक हराम बन गया ।
जिसे माना था सबसे करीब,
वही खंजर देने वाला बन गया ।
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लोगो की मुस्कान पर मत जाना,
वो पीठ पीछे वार न जाने कब कर दे।
ऐसे दोस्तो को पास तक न रखना,
जो आगे चलकर नमक हरामी कर दे।
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गंदगी में रहने पर
दाग हम पर भी लगते है।
नमक हरामी के साथ रहने पर,
नमक हरामी हम भी बन जाते है।

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जो कभी मुझे खुद गिरकर उठाता था,
आज वही न जाने क्यो मुझे गिरा रहा है,
वो नही है नमक हराम दोस्त मेरा,
जो मुझे अपना खास बता रहा है।
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नमक हरामों के पास वफा न होती है,
उनको किसी बात की शर्म तक न होती है।
ऐसे लोगो से दूर रहना ही अच्छा है,
क्योकी इनसे दोस्ती अच्छी न होती है।
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खुदा ने जिसे अपना समझा,
वही पराया हो गया ।
दुनिया की भीड़ में
अपना ही नमक हराम हो गया ।
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जिसके साथ था बचपन से
उसी ने घाव गहरा कर दिया ।
रहता था जिसके दिन भर साथ,
उसी दोस्त ने नमक हराम मुूझे कह दिया ।
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अपने दोस्त को फिर से
अपना बना लू ऐसी दवा ला दो,
जो न रहे दोस्त मेरा नमक हराम
ऐसा कोई राज मुझे बता दो ।

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मुझे तो दुनिया की भीड़ में सारे पराय मिले,
जिससे रखा था जीवन का खास रिश्ता
वही आखिर नमक हराम मिले ।
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छोड दिया मैंने साथ उनका,
जो नमक हरामी करते थे,
फैंक दिया उन्हे कचरों मे,
जो पीठ पीछे वार करते थे ।
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सफलता का राज मैं भी बता दू,
पर तुम नमक हरामी न कर दो,
बस यही सोच सोच कर मैं डरता हूं ।
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खुदा से ज्यादा तुझे चहा था जान,
पर तुने मुझे आज पराया कर दिया,
बता कर मेरे दिल के राज,
खुद को तुने नमक हराम कर दिया ।
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चोट पर चोट वो पहुंचाता गया,
नजर अंजाद मैं करता गया,
अब नही होता बरदाश्त मुझसे,
नमक हराम तो सिर पर चढ गया ।
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तेरी गलतियों को नजर अंदाज कर दिया,
किया था जो तुने बुरा हाल वो मैं भूल गया,
आज फिर एक नमक हराम को सुधरने का मोका दिया,
मगर न जाने क्यो फिर वह गद्दारी कर गया ।

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जीसे अपना समझा
वो दूसरी के साथ रिश्ता निभाता है,
जिसे समझा ईश्वर से भी ज्यादा,
आखिर वही नमक हराम निकलता है।
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जो बुरे समय में काम में आता है,
ऐसे दोस्त हमारे होते है।
पर दोस्त को भी मैं राज न बताता,
क्योकी कुछ दोस्त ही नमक हराम होते है।
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जब पता चला मेरी सफलता का राज
दोस्त ही सबसे पहले नमक हराम बन गया ।
जिसने दिया था हर कदम पर मैने साथ,
आज वही मेरा जान दुश्मन बन गया ।
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रिश्तों मे राज होना जरूरी है,
क्योकी राज खुलने पर
न जाने कौन नमक हराम बनता है।
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इंस्टा की दुनिया सही है,
ना धोका ना दुख होता है।
असल में जिसे अपना मानो,
वही नमक हराम होता है।
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किताओं के पन्ने जैसा उसका जीवन है,
नमक हराम बनकर वो गंदा कर देता है।
जिसे समझा था जीवन में अनमोल,
वही नमक हराम खुद बन जाता है।

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रिश्तो पर भरोषा तक न रहा,
जिधर देखो उधर धोका है मुझे मिला ।
निभाया था जिससे दिलोंजान से रिश्ता,
वही नमक हराम आखिर मुझे मिला ।
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मैंने खुदा से तेरी दोस्ती को मांगा था,
जीवन भर साथ तेरा दिया था ।
पर तु निकला नमक हराम दोस्त,
अब तुझे ही जीवन से निकाल फैंका था ।
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तो इस तरह से दोस्त नमक हराम दोस्त पर शायरी होती है । आशा है की आपको शायरी पसंद आई होगी । यहां पर हम ऐसी ही शायरी लेकर आते है तो आप अन्य शायरी भी पढ सकते है।