mushroom par shayari, मशरूम पर शायरी, mushroom shayari in hindi, मशरूम की शायरी, mushroom shayari
मशरुम असल में एक प्रकार की सब्जी होती है, जो की भारत में सबसे महंगी बिकने वाली सब्जी के रुप में जानी जाती है। इस सब्जी को खाना भारत के प्रत्येक व्यक्ति को पसंद होता है। मगर यह मिलती ही नही है, इसलिए बहुत से लोग तो ऐसे है जिन्होने आज तक मशरुम की सब्जी नही खाई है।
खैर यदि आपने कभी मशरुम की सब्जी बनाकर खाई है, तो जरूर आप इसके दिवाने होगे। और इसलिए आप मशरुम पर शायरी पढना पसंद करते है। वैसे आज के इस लेख में हम आपको मशरुम पर कई प्रकार की शायरी लेकर आए है, जो की आपको पसंद जरूर आएगी। इसलिए आइए दोस्त मशरुम पर शायरी पढे —
Top 213+ mushroom par shayari, मशरूम पर शायरी

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बारिश की छोटी छोटी बूंदो ने
प्यार का रस पिलाया है।
तभी तो मिट्टी की गोद में
मशरुम जन्म पाया है।
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मिट्टी की गोद में
मशरूम खिलने लग गया।
जब आसमान से बादल
पानी बरसाने लग गया।
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खुदा के बारे मे सुना था
आज देख मैंने लिया।
मशरुम जैसे दोस्त को
पास अपने रख लिया।
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मशरुम की तरह जमीन पर रहकर
उपर हम उठ जाते है।
जैसे रहकर किचड में
कमल के फूल खिल जाते है।
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पहनकर सफेद पोशाक
मशरुम महफिल में आया है।
और देखकर पनीर को
बडा शर्माया है।
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आलू के गोल चेहरे ने
जादू इश्क का चलाया है।
बुलाकर मशरुम को पास अपने
जाम होठो से पिलाया है।
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मशरूम के गोल मुखडे पर
पनीर का दिल आ गया।
तभी तो मिलने पनीर से
मशरूम घर पर आ गया।
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मशरूम की प्यारी मुस्कान ने
जादू चलाना शुरु कर दिया।
देखो महंगा होकर मशरूम
बिकना शुरु कर दिया।
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लाल गुलाबी होठो पर
चांद भी दिल हार बैठता है।
पर जब देखता है मशरूम की पतली कमर
लाल गुलाबी होठो को भी चांद भूल बैठता है।
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मशरूम की पतली कमर ने
हंगमा बाजार में मचा दिया।
बना कर रूतबा तगडा
खुदको महंगा बिका दिया।
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पहनकर सिर पर लाल पगडी
मशरूम विवाह करने चला गया।
और देखकर दुल्हन पनीर को
खुश मशरूम का दिल हो गया।
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आलू गोबी की महक ने
रसोई को बडा महकाया है।
पर मशरूम के सामने
कोन टिक पाया है।
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मटर के नन्हे नन्हे दानों पर
दिल मशरूम का आ गया।
तभी तो मटर के साथ
मशरूम कढाई में गिर गया।
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आसमान में जब बिजली चमकती है
तो चांद को पहली बार हंसी आती है।
अरे लेती है धरती भी अंगडाई
तब फिर मशरूम मिट्टी में पनपती है।
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आसमान की गर्जन के साथ
धरती हिलने लगती है।
और धरती की प्यारी मिट्टी से
मशरूम निकलने लगती है।
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पहनकर गुलाबी साड़ी
मशरूम मटक कर चलने लग गई।
और देखकर सामने आलू को
इश्क की बातें करने लग गई।
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बैंगन के बैंगनी रंग पर
दिल मशरूम का आ गया।
और खा कर मशरूम की सब्जी
मजा मुझको आ गया।
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तपती कढाई में
जब मशरूम गिरती है।
खुदा कसम की
रसोई सबसे ज्यादा महकती है।
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पहनकर सिर पर टॉपी
बडी अदाओ से बैठती है।
जब आता है ग्राहक खरीदने
तो मशरूम महंगी बिकती है।
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बाजार में भी हंगामा मच जाता है
जब मशरूम खरीदने ग्राहक अमीर आ जाता है।
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मशरुम के महंगी किमत ने
गरीबों को बडा सताया है।
बुलाकर पास गरीबों को
आलू का फिका स्वाद चखाया है।
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पहनकर कोट पैंट
मशरूम पहफिल में जाता है।
और मिर्ची जैसी छोरी को
गुलाब का फूल दे आता है।
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मिर्ची और मशरूम की जोडी ने
हंगामा मंडी में मचा दिया।
बिककर मिर्ची सस्ती
मशरूम को महंगा बता दिया।
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लेकर हाथ में आई फोन
वो मटक कर चलती है।
पर जब आती है मशरूम खरीदने की बारी
तो खुदको गरीब बताती है।
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जिसे पास होता है आई फोन
वो भी गरीब से कम नही होता ।
और जो न खाया हो कभी मशरूम
वो धरती पर बोझ होता।
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जो लगता था सभी को महंगा
आज वो सस्ता मिलने लग गया।
देखो सफेद गोल मशरूम
आज सबसे ज्यादा बिकने लग गया।
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लेकर हाथ में शराब की बोतल
आंखो से बात करते है।
जब आती है महोब्बत की बात
तो मशरूम की सब्जी से डिनर करते है।
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जब आलू की मुलाकात मशरूम से होती है
खुदा कसम बारिश भी जोर से होती है।
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जब आसमान में बादल गर्जते है,
तो धरती भी अंगडाई लेती है।
और देखकर चारो ओर के माहोल को
मशरूम भी चुपके से खिल जाती है।
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मशरूम की बस छोटी सी कहानी होती है
तभी तो मशरूम की इतनी मस्त जवानी होती है।
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कड़वे करेले के साथ रहकर
मशरूम भी बदनाम हो गई।
जो देती है मशरूम मीठा स्वाद
उसके कड़वी होने की बात उड गई।
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लेकर पैसो की गड्डी
आज मशरूम खरीदने गया था।
सुनकर मशरूम के महंगे भाव को
खाली हाथ वापस आ गया था।
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ना पेड़ होता है न पौधा होता है
फिर भी मशरूम किसी से कम न होता है।
आता है जब थाली में सजकर मशरूम
तो फिर खाने में बडा मजा आता है।
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आसमान में जब बिजली चमकती है
धरती भी अंगडाई लेती है।
और चुपके से धरती की गोद में
मशरुम अपनी दुनिया बसा लेती है।
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खाने की थाली में
पकवान सजकर आते है।
पर जब आता है मशरुम
तो फिर खाना खाने में भी मजे आते है।
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छोटी सी जमीन पर
बडा सा काम कर गया।
खिलकर मिट्टी की गोद में
मशरुम आसमान में उड गया।
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कम समय में जीकर
मशरुम बडा मशहूर हो गया।
बेचकर अपना शरीर महंगे भाव में
मीठा स्वाद ग्राहक को दे गया।
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आलू प्याज खाते खाते
दिल ग्राहक का भरने लग गया।
और देखकर मशरूम की किमत को
पसीना ग्राहक को आने लग गया।
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पहनकर सिर पर ताज
मशरुम महफिल में जाता है।
और देखकर मशरुम की किमत को
सलाम हर कोई कर जाता है।
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आम का मीठा स्वाद भी
फिका लगने लग जाता है।
जब मशरुम का स्वाद
खाने को मिल जाता है।
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भिंडी बैंगन की सब्जी को
खरीदना ग्राहक भुलने लग गया।
जब मंडी में मशरुम
सस्ता मिलने लग गया।
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गरीबों की थाली से
दूर हमेशा रहता है।
पर अमीरों के यहां
मशरुम रोज बनता है।
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खेतों मे जो बिजली चमकने से उगता है

वही तो मशरुम खाने में मजा दिल को आता है।
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जिसने खाया मशरुम
वो दिवाना इसका हो गया।
और देखकर मशरुम की किमत को
ग्राहक रोने लग गया।
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मशरुम के प्यारे स्वाद ने
दिलों को धडकाया है।
बुलाकर पास ग्राहको को अपने
मीठा स्वाद चखाया है।
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छोटे से मशरुम की
किमत बडी तेज होती है।
तभी तो मशरुम की
पनीर दिवानी होती है।
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पहनकर सिर पर ताज
मशरुम थाली में सजकर बैठा है।
अरे है यह अमीर लोगो का घर
तभी तो यहां मशरुम बैठा है।
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लगाकर पैसो का पंख
मशरुम आसमान में उड़ जाता है।
तभी तो देखकर मशरुम को
गरीब खरीद नही पाता है।
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मशरुम की महंगी किमत ने
राजा इसे बनाया है।
खरीद सके अमीर ही इसे
इतना खास खुदा ने बनाया है।
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किसान की महेनत का
यह फल महंगा होता है।
तभी तो मशरुम
अमीर लोगो का होता है।
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मिट्टी की खुशबू ने

रंग अपना दिखाया है।
खिलाकर मशरुम को
महंगा किसान ने बनाया है।
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किसान के पसीने की बूंदो ने
जिसे जन्म दिया है।
वही तो मशरुम
मंडी में महंगा बिका है।
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छोटे से बीज से निकलर
मिट्टी की गोद में खिलता है।
तब जाकर किसान के चेहरे पर
खुशी का महोल बनता है।
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मिट्टी में रहकर मशरुम ने
खुद को किमती बनाया है।
लेकर मिट्टी के पौषक तत्वों को
ताक्तवर मशरुम ने खुदको बनाया है।
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छोटे से बीज ने
मिट्टी में मिलकर कमाल कर दिया।
जो बिकता है बाजार में सबसे महंगा
उस मशरुम को जन्म दे दिया।
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मशरुम के साथ जो रहता है
वो किमती बनकर बिकता है।
तभी तो मशरुम के साथ रहने के लिए
मंडी में हर कोई लडता है।
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लगा कर चश्मा आंखो पर
मशरुम देखो घूमने चला है।
जो रहता था महंगा हमेशा
आज वो आसमान में उडने लगा है।
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ना लंबी उम्र है इसकी,
ना है कोई बड़ा आकार।
फिर भी मशरूम रहता है,
कुदरत का अनमोल उपहार।
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बारिश की एक बूंद ने
जिसे जन्म दिया है।
उसी मशरुम ने
आज अलग स्वाद दिया है।
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हम भी उग जाते किसी न किसी ख्वाब में,
मगर मशरुम की तरह बिक न पाते हिसाब में।
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मशरुम बनने के लिए
न जाने कितने बडे काम किए है।
मगर फिर भी जमाने ने
महंगी किमत हमे न दिए है।
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बारिश आई तो दिल मेरा मचल गया।
देखकर तेरे लाल होठो को
मशरुम भी इश्क तुझसे करने लग गया।
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गुलाबी चेहरे पर
काले काले तिल है।
हो जैसे कोई मशरुम तुम
क्योकी सफेद तेरा हर अंग है।
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टूट गया वो अरमान दिल का
जो ख्वाबों मे देखा था।
कैसे बनता है मशरुम असल जीवन में
वो टूटकर मैंने समझा था।
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जिसे चाहा था मैंने दिल से
वो साथ मेरे न रह पाया।
मिट्टी में खिलकर मशरुम
मिट्टी में ही मिल पाया।
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जुगनू की चमक में
मशरुम बडा हंसता है।
देखता है चांद को छिपकर अंधेरे में
जैसे इश्क चांद से करता है।
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मशरुम की तरह
दिल भी महंगा मिलता है।
जब करना हो विवाह किसी से
तो रिश्ता न मिलता है।

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अंधरे में रहकर
जो जुगनू की तरह चमकता है।
वही तो मशरुम
मंडी में सबसे महंगा बिकता है।
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हालात दिल के बुरे हो गए
हमने तुम्हे देखा ओर तुम्हारी आंखो में खो गए।
मिली थी तुम मुझे मशरुम बनकर
और आज हम दोनो मशरुम बन गए।
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मुश्किलों से लड़ते लड़ते
हाथ पैर जवाब देने लग जाते है।
तभी बनकर बारिश की बूंदे
मिट्टी में मशरुम उग जाते है।
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समय की इस दौड में
तुम मशरुम बन जाओ।
जब हंसो तुम प्यार से
दिल के दर्द दूर भगाओ।
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हम मशरुम है जनाब
हर जगह छा जाते है।
जहां पर रुकते है लोग
हम वही से आगे बढ जाते है।
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ना कोई मुकाबला
ना कोई टक्कर होती है।
हम दोस्तो की तो
मशरुम जैसी मुलाकात होती है।
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जमीन पर रहकर
उपर हम उठ जाते है।
जैसे मशरुम जमीन में रहकर
महंगे बिक जाते है।
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लोगो की बातों पर
कभी ध्यान हमने दिया नही।
रहते है मशरुम जैसे किमती
मटर पनीर जैसे लोगो को हमने देखा तक नही।
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चंद पैसो में बिक जाए
ऐसी आलू की थैली नही है।
है यह मशरूम की थैली
इसे खरीदने की हर किसी की औकात नही है।
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एक छोटे से कमरे में
लाखो की मशरूम होती है।
पर उगाने के लिए मशरूम
कठिनाई बडी होती है।
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दिल की धडकने
इश्क का गीत गाती है।
जब मशरूम की मुलाकात
पनीर से हो जाती है।
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लेकर मशरूम हाथ मे कट्टा
वो अकड कर खडा हो गया।
जब पनीर का विवाह
आलू से होने लग गया।
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पनीर और मशरूम की प्रेम कहानी ने
हंगामा मंडी में मचा रखा है।
और बुलाकर ग्राहकों को पास अपने
मीठा रस पिला रखा है।
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ब्रोकली के हरे रंग पर
मशरूम का दिल आ गया।
तभी तो लेकर गुलाब का फूल
मशरूम ब्रोकली के पास आ गया।
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लेकर हाथ में आई फोन
मशरूम भी महफिल में जाता है।
जब देखता है कोई मशरूम को
तो अपनी अमीरी दिखाता है।
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पनीर की पतली कमर ने
न जाने कितने आशिक बनाए है।
और देखकर मशरूम की चम को
पनीर का दिल धड़क आए है।

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मिर्ची को घमंड खुद पर होने लग गया।
पर मशरूम मिर्ची के साथ दिखने लग गया।
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अंगूर के मीठे रस ने
ग्राहकों के दिल को खुश किया है।
और बुलाकर पास मशरूम ने
ग्राहक का बुरा हाल किया है।
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आलू की संगत में
टमाटर भी बुरा बनने लग गया।
जो रहता था हमेशा मशरूम के साथ
आज वो पनीर से मिलने लग गया।
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मटर पनीर की खुशबू ने
रसोई को बडा महकाया है।
और मशरूम की सब्जी ने
मटर पनीर से मीठा रस पिलाया है।
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गन्ने के जूस को
गर्मी में दिन रात पिया जाता है।
पर खरीदकर मशरूम को
एक बार भी नही खाया जाता है।
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इस तरह से दोस्त, मशरूम पर शायरी आपको कैसी लगी, कमेंट में जरूर बतना।
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