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मटर एक प्रकार की सब्जी होती है, और यह अक्सर पनीर में डाली जाती है और मटर पनीर की सब्जी बनाई जाती है। यह मटर कई अन्य सब्जियों के साथ मिलकर भी सब्जी को अलग स्वाद देने के लिए जानी जाती है।
और जिन लोगो को मटर खाना पसंद है वे अक्सर मटर पनीर पर शायरी पढना पसंद करते है। और आज हम आपके लिए मटर पर कई बेहतरीन शायरी लेकर आए है। जहां पर आप कई प्रकार की मटर पर शायरी पढेगे।
तो आइए दोस्त, मटर पर शायरी पढे,
मटर पर 204+ शायरी matar par shayari (मटर पर दो अल्फाज)

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मटर पनीर की खुशबू ने
दिल के दरवाजे को खटखटाया है।
और पिलाकर तुने अपने होठो का रस
दिल को इश्क करना सिखाया है।
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आलू मटर की सब्जी ने
खुशबू चारो और फैलाई है।
खिलाने के लिए मीठी सब्जी
दिल की धडकन तक बढाई है।
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हवा भी इश्क की बातें करने लग जाती है
जब मटर की खुशबू फैलने लग जाती है।
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मटर के दाने भी VIP बन जाते है
जब आलू की सब्जी में मटर गिर जाते है।
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मटर पनीर की सब्जी खाकर
दिल मेरा खुश हो जाता है।
तभी तो शरीर मेरा
इतना मोटा हो जाता है।
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सब्जियों की दुनिया में
मटर का ही नाम होता है।
तभी तो बिना मटर के
पनीर भी बेकार होता है।
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किसान की किस्मत भी
गले मिलने लग जाती है।
जब खेतों मे मटर
पकने लग जाती है।
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सूरज की धूप में
पसीना दिन रात बहता है।
तब जाकर खेतों मे
मटर पक पाता है।
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किसान की किस्मत भी
गुलाब सी महक उठती है
जब बारिश में
मटर की खुशबू बढ जाती है।
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मटर के एक एक दाने को
गिन गिनकर निकालने हम लगते है।
तब जाकर बाजार में
मटर के भाव अच्छे मिलते है।
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मटर का हर एक दाना
किसान की मेहनत का गुण गाता है।
कैसा तपता रहा किसान सूरज की धूप में
वो दुख भरी गाथा गाता है।
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जीवन के दुखों को
गिन गिनकर काटते है।
और जब लगती है भूख मुझे
तो मटर छिलकर खाते है।
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आलू की खुशबू ने
मटर को दिवाना बना दिया।
धड़कता रहे दिल मटर का
इतना बुरा हाल कर दिया।
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मटर की खूबसूरती पर
आलू भी दिल हार बैठा।
जो था आलू के पास मीठास
उसे भी मटर पर लूटा बैठा।
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मटर के गोल गोल दानों ने
आलू को अमृत बनाया है।
पिलाकर मटर ने अपना मीठा रस
आलू को इश्क करना सिखाया है।
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मटर पनीर की खुशबू ने
चांद को भी दिवाना बना लिया।
चखाने के लिए अपना मीठा स्वाद
चांद को धरती पर मिलने बुला लिया।
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चांद के चेहरे पर भी हंसी छा जाती है।
जब मटर पनीर की खुशबू आ जाती है।
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हवा भी
बादलों से पूछने लग गई
मगर फिर भी मटर की
खुशबू का राज न जान पाई।
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आलू मटर की दोस्ती भी टूटने लग गई।
जब मटर पनीर के साथ उठने बैठने लग गई।
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आलू की आंखो में जब आंसू आते है
मटर पनीर भी देखने पास आते है।
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पनीर अगर सस्ता हो जाए
तो बाजार में मटर भी ज्यादा बिक जाए।
अरे महक जाए गरीब के घर की थाली
जब मटर पनीर बनने लग जाए।
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मटर की हर एक अदाओ पर
दिल आलूका धडकने लग गया।
मगर देखकर मटर को पनीर के साथ
आलू का दिल आग सा जल गया।
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दुनिया भी इश्क की बातें करने लग गई
जब मटर की दोस्ती आलू से हो गई।
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मटर की किमत भी आसमान छूने लग जाती है
जब पनीर की किमत घटने लग जाती है।
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जब पनीर की किमत ने
आसमान को चुमना शुरु किया।
तब मटर की खुशबू ने
आलू के साथ बैठना शुरु किया।
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हर गली में सजकर वो दिखने लग गई
जब मटर सस्ती होकर बिकने लग गई।
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वो गली भी गुलाब सी महक उठती है
जहां पर मटर की सब्जी बनती है।
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मटर की हर एक बात
निराली लगती है।
जब पहनकर मटर
जींस टॉप चलती है।
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जब मटर ने साडी बांधना शुरु किया
मंडी में भी मटने उधम माचा दिया।
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मटर की पतली कमर पर
टमाटर का दिल आ गया।
तभी तो चुमने मटर को
टमाटर सस्ता हो गया।
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मटर की खुशबू ने
मंडी में जादू फैला रखा है।
होकर सस्ती मंडी में
ग्राहकों को पास बुला रखा है।
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दुध के गिलाश में
मक्खी गिर जाती है।
जब मटर की खुशबू
बाजार में ज्यादा छा जाती है।
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मटर का हर एक दाना
इश्क की बातें करता है।
देखता है पनीर को दिन रात
और इश्क पनीर से करता है।
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पनीर की ममी को
मटर पसंद आ गई।
तभी तो रिश्ता लेकर पनीर की ममी
मटर के घर आ गई।
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मटर की पतली कमर पर
दिल चांद का भी आ गया।
देखकर मटर की खुबसूरती को
चांद धरती पर मिलने आ गया।
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मटर की खुशबू ने
जादू बाजार में फैलाया है।
बुलाकर पास मुझे अपने
इश्क का मीठा रस पिलाया है।
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तेरे गुलाबी होठो की कसम जान
तु मटर जैसी मीठी लगती है।
जब तु पास मेरे आकर
किस होठो पर करती है।
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तेरी अदाओं का
दिल मेरा दिवाना हो गया ।
और देखकर तेरी मटर सी आंख को
दिल का बुरा हाल हो गया।
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तेरी मटक सी आंखो ने
दिल पर इश्क का तीर चलाया है।
बुलाकर मुझे पास अपने
तुने अपने होठो का रस पिलाया है।
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तेरे बिना यह जीवन भी
अधूरा लगने लग गया।
जैसे मटर के बिना
पनीर बेकार बन गया।
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काली काली मटर सी आंखो ने
दिल के दरवाजे को खटखटाया है।
करकर श्रृंगार तुने
मिलने घर अपने बुलाया है।
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तेरे गुलाबी होठो की मुस्कान ने
दिल को घायल कर रखा है।
और खिला खिलाकर मटर पनीर तुने
पेट मेरा पूरा भर रखा है।
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जब भी घर में
मटर की खुशबू आती है।
छिलके उतारने की ड्यूटी
मेरी लग जाती है।
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मटर के एक एक दाने ने
दिल को बडा महकाया है।
करकर इश्क की बातें तुने
दिल को इश्क में धडकाया है।
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आलू की आंखो में आंसू देखकर
मटर का दिल भी उदास हो गया।
तभी तो आलू के साथ आजकल
मटर दिखने लग गया।
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मटर पनीर खाना मेरा दिल चाहता है
मगर छिलके उतारने से हाथों को डर लगता है।
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मटर की पतली कमर
हमको भी पसंद होती है।
मगर देखकर मटर के छिलके को
दिल की धडकन भी दूर होती है।
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मटर की एंट्री जब सब्जी में होती है
वो सब्जी भी बडी खास बन जाती है।
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आलू की कडाही में
मटर गीरकर खुश हो गई ।
जैसे कि मटर हीरों की कहानी में
हिरोईन बन गई।
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गाजर मटर की सब्जी ने
रसोई में उधम मचा दी।
फैलाकर खुशबू चारो ओर
दिल की धडकर बढा दी।
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मटर की महंगी किमत ने
बैंगन को भी किमती बनाया है।
रखकर बैंगन को अपने साथ
मटर ने खुब बिकवाया है।
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चने की दाल दिवाना यह दिल हो गया।
और खा कर मटर मैं खुश हो गया।
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मटर के हर एक पौधे पर
मटर कई लगती है।
और देखकर मटर को
किसान की खुशी बढती है।
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मटर भी सस्ता
बिकने लग गया।
जब पनीर मंडी में
बदनाम हो गया।
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पसीने से जिसे सिचा था किसान ने
आखिर उसी पौधे ने मटर का स्वाद दिया है।
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सुनहरी धरती भी हरियाली से चमक उठती है
जब मटर की फसल खेत में लहराती है।
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मटर पुलाव की खुशबू
जब रसोई से आने लगती है।
तब दिल की धडकन भी
भूख से तडपने लगती है।
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बाजार में मटर की खुशबू छाने लग गई,
और देखकर पनीर को भी हंसी आने लग गई।
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मटर का हर एक दाना
इश्क की बातें करता है
जब पनीर आंखो पर
काला चश्मा लगाता है।
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मटर का हर एक दाना बिक जाता है।
जब पनीर का भाव सस्ता हो जाता है।
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मटर के गुलाबी होठो ने
पनीर को बडा तरसाया है।
फैलाकर खुशबू का जादू मटर ने
पनीर को मिलने पास अपने बुलाया है।
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मटर की हरियाली
जब खेतों मे छाती है।
किसान के दिल की धडकन भी
इश्क का गीत गाती है।
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राजा की रानी बनकर
जब मटर महफिल में आती है।
देखकर मटर को
आलू के दिल की धडकन बढ जाती है।
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मटर की खुशबू
जब बाजारों में फैलती है।
ग्राहकों के दिल की धडकन भी
मटर को देखकर हंसती है।
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इश्क में तेरी हर एक अदा
दिल को घायल कर देती है।
और जब खाती है मटर तु छिलकर
तो पनीर को बदनाम कर देती है।
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तेरी पतली कमर ने
दिल को धडकने से रोका है।
और खिलाकर तुने मटर पनीर
दिल को अपना दिवाना बनाया है।
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चांद जैसे सुंदर बदन पर
जब तु हरी साडी पहनती है।
खुदा कसम तब तु
मटर की फल लगती है।
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पनीर के साथ मटर खाकर
आई है VIP वाली फिलींग
तभी तो दिल आज
इतना तेज धड़किंग
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आलू की सब्जी में
मटर धडाम से गिर जाती है।
तभी तो आलू की सब्जी
इतनी ज्यादा अच्छी बन जाती है।
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भिंडी के साथ रहकर
मटर को खुदपर घमंड हो गया।
पर खा कर मटर भिंडी
आज दिल भी खुश हो गया।
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गर्म कढाई में
मटर उछती बहुत तेज है।
और रहकर मटर मीर्ची के साथ
लगती बडी तिखी है।
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मसालों की कढाई में
मटर की खुशबू इसकदर छाने लगी।
जैसे गंदे पानी में
गुलाब की खुशबू आने लगी।
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मिट्टी से निकलर
शहरों मे आज आई है।
किसान ने कि है कितनी मेहनत
वो कहानी खुशबू फैलाकर बताई है।
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मटर की फसल
खेत में खुशबू फैलाने लगी।
जो थी उदास किसान के
दिल की धडकन उसे बढाने लगी।
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बादलों मे छिपकर
चांद भी रोने लग जाता है।
जब मटर पनीर के साथ
दिखने लग जाता है।
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किसान के पसीने की खुशबू
चारो ओर छाने लग गई।
जब पनीर की कढाई में
मटर आकर गिर गई।
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सूरज की तेज चमक ने
मटर को दिन रात तडपाया था।
जिसकदर किसान ने मटर को
अपनी मेहनत का रस पिलाया था।
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बादलों मे छिपकर
चांद भी रोने लग जाता है।
जब मटर कि फसल को
सूरज जलाने लग जाता है।
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हाथ जोड़े और पैर भी जोड़ दिए
पर न जाने फिर भी पनीर ने धोका क्यों दिया।
करता था जिसे मटर दिन रात प्यार
उस पनीर ने साथ मटर का न जाने क्यों छोड दिया।
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देखो देखो मटर
पतली कमर मटकाने आई है।
लगाकर होठो पर लाली
हरी साडी पहन आई है।
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मटर की हरी साडी ने
पागल पनीर को बना दिया।
और पिलार मटर ने मीठा रस अपना
पनीर को दिवाना बना लिया।
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आलू के चेहरे पर भी
खुशी झलकने लग जाती है
जब कढाई में मटर
आकर गिरने लग जाती है।
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वो दिन भी त्योहार बन जाता है
जब घर मे मटर पनीर बन जाता है।
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मटर पनीर के स्वाद ने
सादे दिन को भी खास बनाया है।
दिलाकर मुझे तेरे होठो की याद
प्यार का रस पिलाया है।
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पटर पुलाव की खुशबू भी
जग में निराली लगती है।
जैसे भूखों के घरों मे
आई दिवाली लगती है।
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मंडी में जब भाव मटर का बढ जाता है।
पनीर भी सडकों पर सड़ने लग जाता है।
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पनीर की खुशबू ने
दिवाना दिलों को बनया है।
जैसे तुने होठो पर लाली लगाकर
मेरे गलों को चुम लिया है।
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हवा भी बादलों मे छिपकर रहने लग जाती है।
जब मटर की फसल खेतों मे पकने लग जाती है।
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मटर की खुशबू ने
ग्राहकों को पास बुलाया है।
करकर मीठी बातें ग्राहक से
खुदको खुब बिकवाया है।
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आज बाजार में भी हंगामा होगा
जब मेरा मटर सबसे ज्यादा बिकेगा।
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अरे देखने वालों
तु आखिर जाएगा किधर।
मटर है मेरे पास मीठी
तो फिर तु खरीदेगा किधर ।
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आंखो पर चश्मा लगाने वाले बाबू
जरा पास तु मेरे आ जा।
है मेरे पास मीठे मटर
तु एक बार खरीदकर तो ले जा।
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काली आंखो पर चश्मा मैंने लगाया था।
तभी तो मटर की पतली कमर देख न पाया था।
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हरी साडी पहनकर
वो मिलने घर पर आती है।
देखता हूं जब उसकी मतली कमर को
मटर की याद मुझे आती है।
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मटर की पतली कमर ने
आलू को बडा तडपाया है।
और करकर मीठी बातें ग्राहक से
पास ग्राहकों को अपने बुलाया है।
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इस तरह से दोस्त, मटर पर शायरी कैसी लगी कमेंट में जरुर बताना।
Gobhi Par Shayari, गोभी पर 183+ शायरी
Top 192+ Mirchi Par Shayari, मिर्च पर शायरी (मिर्ची के तीखेपन पर दो अल्फाज)
Best 171+ Pyaj Par Shayari, प्याज पर शायरी
टमाटर पर 200+ शायरी Tamatar Par Shayari (लाल टमाटर की जादुई बातें)