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मक्का एक प्रकार का बीज होता है, जिसे फल भी कहा जा सकता है। और मक्के के बिच के गुच्छे को भुट्टा कहा जाता है। जिसे अक्सर लोग आग में जला कर खाना पसंद करते है। और इस स्थिति में मक्का पर बडी अच्छी शायरी बन जाती है।
इसके अलावा मक्का को जब तेल की कम मात्रा के साथ गर्म किया जाता है, तो ऐसे में पोपकोन बनते है, जिसे बडे चाव के साथ खाया जाता है।
यदि आपको भी मक्का पसंद है, तो आज के इस लेख में हम आपके लिए मक्का पर शायरी लेकर आए है। जो की आपको बडी पसंद आने वाली है, इसलिए दोस्त, यदि आप भी मक्का पर शायरी पढना पसंद करते है, तो आइए शायरी पढे,
175+ मक्का पर शायरीmakka par shayari (मक्के का भुट्टा और पॉपकॉर्न की मीठी बातें)

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किमत बढाने के लिए
मक्का भी आग में जलता है।
तभी तो 5 रुपय का मक्का
20 रुपय में आसानी से बिकता है।
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कद्र खुद की बढाने के लिए
मक्का आग में जलने लग गया।
जो था 5 रुपय का मक्का का भुट्टा
जलकर आग में वो 20 रुपय का बन गया।
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इज्जत के लिए मक्के का भुट्टा भी
आग में तपने लग गया।
तभी तो आजकल
मक्का ज्यादा बिकने लग गया।
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आग में जलकर भी
मक्के का भुट्टा बडा हंसता है।
जैसे इंसान दर्द से लड़कर
मजे जिंदगी के लेता है।
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चांद के दिल की धडकने
इश्क का गीत गाने लगती है।
जब देखती है मक्का को
पास अपने बुलाने लगती है।
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उड़ती हुई हवा के साथ
अजीब सी खुशबू आने लग गई।
जब आया मंडी में मक्का का भुट्टा
तो ग्राहक की भीड तुरन्त बढने लग गई।
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बादलों मे छिपकर
चांद भी रोने लग जाता है।
जब मक्के के खेत में
खराब मक्के निकल जाते है।
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तेरे कान की बाली ने
दिल को धड़कने न दिया।
और एक मक्के की खुशबू ने
रात भर मुझे सोने न दिया।
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खाली पेट में भी चूहे कुदने लग जाते है
जब शहर में मक्के के भुट्टे मिलने लग जाते है।
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काली साडी तु पहनकर
छत पर मिलने आती है।
और देखकर मुझे सामने
मक्के का भुट्टा अकेली खाने लगती है।

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सुना है बागों मे भी
फूल हंसने लग जाते है।
जब निकलते है खेत में मक्के के भुट्टे
ग्राहक खेतों मे आने लग जाते है।
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डिजिटल दुनिया में,
पीएम भी डिजिटल बनने लग गया।
देखो कैसा जमाना आया है,
आजकल मक्के का भुट्टा भी,
Online बिकने लग गया।
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सुनकर तेरे दिल की धड़कन
दौडकर पास मैं तेरे आ जाता हू।
जब आता है सिजन मक्के का
तो भुट्टा खरीदकर ले आता हूं।
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जिसे समझा था दिल की धड़कन
वो इश्क का गीत गाने लग जाती है।
देखो कैसी मुस्कान है तेरे लाल होठो की
जिनसे तु अकेली मक्का खाने लग जाती है।
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मक्के के नन्हे नन्हे दानों ने
दिल पर इश्क का तीर चलाया है।
और करकर तेरे होठो की तारिफ
मेरे दिल को बडा तरसाया है।
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तेरी नसीली आंखो ने
रात भर मुझे सोने न दिया।
और खिलाती रही तु मक्का मुझे
पर गाल अपना चुमने न दिया।
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चांदनी रात में
तेरी सुरत प्यारी लगती है।
और जब खाती है तु मक्के का भुट्टा
आसामन से उतरी परी लगती है।
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आसमान में चमकने वाले तारे भी
तुझे देखकर हंसने लगते है।
जब खाती है तु मक्के का भुट्टा
देखकर भुट्टे को तरसने लगते है।
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कानों मे बाली पहनने वाली
मक्के का स्वाद क्या जानती है।
अरे खाती है वो तो पॉपकॉर्न
वो मक्के के भुट्टे को क्या जानती है।
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जो लगाता है दिल तेरी सुरत से
उसका दिल भी घायल हो जाता है।
जब खाती है तु मक्के का भुट्टा
तो पेट भी उसका खाली हो जाता है।
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मेहनत दिन रात करता है
मगर फिर भी चंद पैसे पाता है।
जब बेचता है खेत से मक्का
तो फिर भी किसान भी रोता है।
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लाल पीली आंखो ने
घायल दिल को किया है।
चलाकर मक्के के दाने का तीर
दिवाना मेरे दिल को किया है।
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मक्का बेचने के बहाने से
मिलने वो मुझे आता था।
करता था प्यार मुझे बहुतसारा
मगर फिर भी मक्के का भाव महंगा लगाता था।
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चंद पैसे लेकर
वो खेत की मक्के की फसल बेच गया।
जो बहता था पसीना सुरज की धूप में
वो फिर भी खुश हो गया।
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मक्के की फसल ने
किसान को भी खुश कर दिया।
होकर बिघा की पांच सौ किलो
धनवान किसान को बना दिया।
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हरी हरी फसल ने
किसान को बडा तरसाया था।
और बनाकर मक्के के भुट्टे अच्छे
किसान को मालामाल किया था।
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जब मक्के का भुट्टा
आग में जलने लग जाता है।
तब मक्का भी दर्द में
चिल्लाने लग जाता है।
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जो जलकर स्वाद इंसान को देता है
वो मक्का भी आग में जलकर दर्द बडा सहता है।
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जली हुई मक्के की खुशबू ने
ग्राहकों को पास अपने बुलाया है।
और खिलाकर दुकानदार मक्का
खुश ग्राहकों को किया है।
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आग से गुजरकर जो निकलता है बाहर
आखिर वही तो मक्का होता है सबसे खास।

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किसान के पसीने की बूंदों ने
मिट्टी को बडा महकाया है।
तभी तो इस मिट्टी में
मक्के का भुट्टा प्यारा बन पाया है।
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खेतों मे जब
मक्के की बाली लहराती है।
किसान के दिल की धडकन भी
इश्क के गीत गाती है।
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धूप में दिन रात किसान जलता रहता है।
तब जाकर खेतों मे मक्का पकता रहता है।
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धरती की गोद में
जो सिर रखकर सोता है।
वही किसान तो
मक्के की फसल देखकर हंसता है।
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छोटे छोटे दानों ने
बडा कमाल कर दिया।
बनकर मक्के से पॉपकोर्न
खुद को मशहूर कर दिया।
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तपती कड़ाही में
जब मक्का बैठता है।
तब पॉपकोर्न बनकर
वो बाहर निकलता है।
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मक्के के बने पॉपकोर्न भी
दिन पर जादू सा करने लग गए।
आकर पास यह मुंह के
चुमकर होठो को चल गए।
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लगाकर होठो पर लाली
वो मिलने छत पर आती है।
लेकर हाथ में वो पॉपकोर्न की भरी कटोरी
साथ लेकर खिलाने मुझे लाती है।
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दबाव में आकर
मक्का भी खिल जाता है।
और बनकर पॉपकॉर्न
फिर वो दिलों को महकाता है।
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छोटा सा था मक्के का दाना प्यारा
अचानक से वो फूलने लग गया।
न जाने फिर वो क्यो
पॉपकॉर्न कहलाने लग गया।
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तेरे होठों पे मक्के सा
नमक स्वाद लगता है।
तभी तो देखकर तेरे होठों को
दिल मेरा जोर से धड़कता है।
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तू मक्का का भुट्टा,
मैं आग की लपट हूं जान,
अगर मिल जाए हम दोनो
तो फिर हम खास बन जाएगे जान।
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तेरे इश्क भरी बातों मे
मक्के के भुट्टे की खुशबू आती है।
तभी तो तेरी बातों से
मेरे दिल की धड़कन बढती है।
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बैठकर पास वो मेरे
अपने हाथों से पॉपकॉर्न खिलाती है।
और देखकर मुझे वो प्यार से
लाल होठो से मुस्कुराती है।
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तेरा प्यार मुझे
मक्के का भुट्टा लगता है।
तभी तो तेरे होठों को
चुमना मेरा दिल करता है।
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मक्के का मीठा सा स्वाद होता है।
जिसे देखकर दिल खाने को करता है।
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मक्के का मीठा स्वाद
दिलों को घायल कर गया।
करकर इश्क की बातें वो
पागल मुझे बना गया।
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मक्के के भुट्टे मे
जब नींबू नमक का स्वद लगता है।
दिल भी खाने को बार बार करता है।
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गर्म गर्म मक्के का भुट्टा
जब हाथ में होता है।
तब जिंदगी का मजा भी
साथ में होता है।
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आंखो पर चश्मा लगाकर
वो पास मेरे आ जाती है।
जो भरकर कटोरी मक्के की
अकेली खा जाती है।
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मक्के का स्वाद भी
निराला होता है।
जब मक्के में
नमक नींबू का साथ होता है।
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हवा भी बादलों मे छिप जाती है।
जब खेतों मे मक्के की फसल पक जाती है।
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मक्के की उम्र भी
बडी दिवानी होती है।
जब मक्के के भुट्टे की
नींबू से दिवानी होती है।
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नींबू का दिल भी
धड़कने लग जाता है।
जब मक्के का भुट्टा
बाजार में बिकने लग जाता है।
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खेतों मे लहराती मक्के की फसल ने
खुशबू चारो और फैलाई है।
धडकता रहे किसान का दिल
ऐसी शायरी मक्के ने सुनाई है।
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किसान के सपनों मे
जो दिन रात आता है।
वो कोई ओर नही
मक्के का भुट्टा होता है।
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आग में जलकर मक्के का भुट्टा बडा महकता है।
जैसे दर्द से लड़कर इंसान चमकता है।
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आग में जलकर
जो मक्के का भुट्टा निकलता है
आखिर वही तो मक्का
बाजार में ज्यादा बिकता है।
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गांव का मक्के का भुट्टा,
शहर के पॉपकॉर्न पर भारी पड गया।
तभी तो देखकर मक्के के भुट्टे को
शरीर की छोरी का मन खाने को कर गया।
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मक्के के भुट्टे ने
खुद को आग में तपाया है।
तभी तो मक्के का भुट्टा
इतना ज्यादा बिक पाया है।
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आग में तपकर वो काला हो गया
न जाने फिर क्यों वो इतना ज्यादा बिक गया।
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आग में जलकर मक्के का भुट्टा
खुदको निखारता रहता है।
और देखकर ग्राहक को सामने
खुशबू का जादू चलाता रहता है।
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आग का हर एक दाग
सौगात बन गया।
जब मक्के का भुट्टा
बाजार में महंगा बिक गया।
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मक्के का भुट्टा भी
सजकर बिकने लग जाता है।
जब बाजार में अमीर लोग
दिखने लग जाता है।
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जो आग से नही डरता है
आखिर वही तो मक्के का भुट्टा
ज्यादा महंगा बिक पाता है।
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जलकर आग में वो
बडा मुस्कुराता रहता है।
जो मक्के का भुट्टा
बना रहता है।
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दबाव में आकर भी
अकड कर रहता है।
तभी तो मक्का
पॉपकॉर्न बनता है।
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छोटे छोटे मक्के के दानो की
दर्द भरी कहानी होती है।
जैसे पॉपकॉर्न सी मस्त
उसकी जवानी होती है।

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फिल्म भी फिकी लगती है
जब पॉपकॉर्न की खुशबू महंगी मिलती है।
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मक्के के दाने दाने में
इश्क की खुशी छिपी है।
जब बनकर पॉपकॉर्न
वो छत पर आकर खडी है।
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तेरी यादो का स्वाद भी
बडा खास होता है।
जब बनकर मक्के का दाना
तु पास मेरे आता है।
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लाल गुलाबी साडी पहनकर
वो मक्के जैसी दिखने लग गई।
देखता था जिसे दिन रात मैं
न जाने वो आज कहा चली गई।
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तेरे मक्के जैसी मस्त जवानी पर
दिल मेरा फिदा हो गया।
देखा तेरी नशीली आंखो को
तो नशा मेरे दिल को हो गया।
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कानों मे बाली पहनकर
वो मटक कर चलने लग जाती है।
जब वो हाथ में मक्के का भुट्टा लेकर
अकेली खाने लग जाती है।
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मक्के का भुट्टा खाते हुए
वो बडी प्यारी लगती है।
और देखकर मुझे
वो बार बार हंसती है।
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तेरे साथ हर पल मुझे खास लगता है।
जैसे मक्के का भुट्टा नींबू के साथ अच्छा लगता है।
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तेरे बिना
हर पल फीका लगता है
जैसे बिना नींबू नमक के
मक्के का भुट्टा लगता है।
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गोरे गोरे हाथों मे जला हुआ
मक्के का भुट्टा लेकर
वो पास मेरे आ जाती है।
और देखकर मुझे अकेला
गाल चुमकर चली जाती है।
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आसान से बारीश जब जब आती है
जले हुए मक्के के भुट्टे की याद मुझे आती है।
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बारिश के दिनों मे
चाव से खाया करता था।
जब मक्के का भुट्टा
5 रुपय का मिला करता था।

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जो मिलता था कभी 10 रुपय का
आज वो मक्के का भुट्टा महंगा हो गया।
तभी तो देखकर मक्के के भुट्टे को
दिल मेरा उदास हो गया।
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महंगाई की मार में
सब कुछ महंगा हो गया।
मगर गरीब के खेत का मक्का
फिर भी न जाने क्यों सस्ता हो गया।
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किसान की आंखो में
आंसू आने लग जाते है।
जब चंद पैसों मे बिका मक्का
शहर में महंगे बिकने लग जाते है।
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मक्के का हर एक दाना
नींबू को देखकर हंसता है।
जैसे नींबू से इश्क की
बातें मक्का करता है।
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हवा भी बादलो मे छिप जाती है
जब मक्के की फसल पक जाती है।
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मक्के के भुट्टे की खुशबू ने
बाजार को बडा महकाया है।
बुलाकर ग्राहकों को पास अपने
भुट्टे का स्वाद चखाया है।
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देखों फिर से
गर्मी का मौसम आया है
देखकर मक्के की फसल को
किसान का दिल भर आया है।

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आलू की महफिल में
टमाटर बदनाम होता गया।
जब देखा ग्राहक ने मक्का को
तो मक्का भी शर्मा गया।
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तो इस तरह से दोस्त, मक्का पर शायरी कैसी लगी कमेंट मे जरूर बताना।
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