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अंगूर के फल को कोन नही जानता है, इसके स्वाद ने हर किसी को दिवाना बना रखा है। इसमें जो खट्टा मीठा स्वाद होता है वो लोगो के दिलों को खुश कर देता है। और यही कारण है कि बहुत से लोग अंगूर का फल खाना पसंद करते है।
यदि आपको भी अंगूर खाना पसंद है, तो आप जरूर अंगूर पर शायरी पढना पसंद करेगे। और आज के इस लेख में हम अंगूर पर कई तरह की शायरी लेकर आए है, तो आइए दोस्त अंगूर पर शायरी पढे,
175+ अंगूर पर शायरी Angoor Par Shayari (खट्टी-मीठी बातें)

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अंगूर का स्वाद तो
दिलों को महकाता है।
फैलाकर खुशबू अपनी
ग्राहकों को पास बुलाता है।
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अंगूर की खुशबू ने
चांद को भी दिवाना बना रखा है।
फैलाकर खुशबू का जादू
धरती पर चांद को बुला रखा है।
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चांद भी देखकर तडपता होगा
जब अंगूर की खुशबू लेता होगा।
अरे आता है मजा चांद को भी
जब अंगूर वो खाता होगा।
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आम के मीठे स्वाद पर
दुनिया मर जाती है।
मगर अंगूर के खट्टे स्वाद से
आम को भी भूल जाती है।
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अंगूर का खट्टा मीठा स्वाद
दिवाना अपना बना गया।
पिलाकर रस प्यार का
दिल को धडका गया।
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केले से महंगे होकर भी
बाजारों मे राज करते है।
तभी तो अंगूर
इतने ज्यादा बिकते है।
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सेब के मीठे अहसास को भूल गया
जब अंगूर के स्वाद को चख लिया।
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फलो का राजा आम होता है
मगर फिर भी अंगूर के
सामने छिपकर बिकता है।
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सेब खाने से शरीर को ताक्त मिलती है
मगर फिर भी दुनिया अंगूर पर मरती है।
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जब तु मुस्कुराती है
खुदा कसम अंगूर जैसी मीठी लगती है।
चुम लु तेरे गुलाबी गालों को
ऐसी दिल में प्यास जगती है।
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अंगूर की मीठास भी
फिकी पड जाती है।
जब तेरे गुलाबी होठों को
हंसी आ जाती है।

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अंगूर जैसा रस तेरे होठो में भरा है
देखकर मेरे दिल का बुरा हाल हुआ है।
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तेरी हर एक बात मुझे
अंगूर जैसी मीठी लगती है।
तभी तो खा कर अंगूर
तेरी याद मुझे आती है।
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जब लगती थी भुख हमे
तो अंगूर चुराकर खाया करते थे।
जब आता था माली पकडने हमें
तो भाग जाया करते थे।
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वो बचपन भी बडा याद आता है
जब अंगूर मैं चुराता था।
अरे लगते थे स्वाद अंगूर मुझे
इतने में माली मुझे पकड लेता था।
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छोटे छोटे हाथों मे
अंगूर का गुच्छा होता था।
तब जाकर चेहरे पर
मुस्कान का बसेरा होता था।
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अंगूर गुच्छे से टूटकर अलग हो गए
इतने में अंगूर भी बडे सस्ते हो गए।
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लोमडी को भी अंगूर खाना पसंद था
तभी तो वो माली के पास जाती थी।
अरे खाती थी अंगूर बडे चाव से
फिर भाग जाया करती थी।
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बचपन के उन दिनों मे
मां खुब प्यार किया करती थी।
जब लगती थी भूख मुझे
अपने हाथों से अंगूर खिलाया करती थी।
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वो मां भी साथ छोडकर चली गई
जो बचपन में अंगूर खिलाती थी।
जब लगती थी छोटी सी चोट
मां ही बडी फिकर करती थी।
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अंगूर के मीठे स्वाद ने
दिल को खुश कर दिया।
जो था दिल में इश्क का घाव
उसे अंगूर ने दूर कर दिया।
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अंगूर का रस भी बडा प्यार होता है
तभी तो बच्चो का यह पसंदिदा होता है।
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अंगूर की मीठास तो
आम को भी फैल कर देती है।
तभी तो अंगूर की बेल
इतनी ज्यादा चमकती है।
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सूरज की रोशनी से
अंगूर को डर लगता है।
तभी तो चांद देखकर
अंगूर खुश हो जाता है।
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किसानों के हाथों मे जब छाले होते है।
तब जाकर अंगूर इतने मीठे होते है।
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अंगूर के मीठे स्वाद ने
किसान को भी खुश कर दिया।
जो कि है मेहनत किसान ने
उसका फल अंगूर की बेल ने दे दिया।
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उसकी चांद सी सुरत ने
दिल पर वार है किया।
खिलाकर हाथों से अंगूर
उसने इश्क इजहार है किया।
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वो इश्क का इजहार जब करती है
अंगूर खिलाकर मुझे जाती है।
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फलो की महफिल में
आम का ही राज होता है।
मगर फिर भी अंगूर
इतना ज्यादा बिकता है।
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किसान की छांव में
अंगूर मीठे बनते है।
तभी तो यह बाजार में
इतने ज्यादा मिलते है।

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वो माली भी खुश होता होगा
जो अंगूर जैसा फल बनाता होगा।
अरे खाते है जिसे बच्चे चाव से
वो अंगूर भी कुछ खास होता होगा।
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अंगूर का गुच्छा भी सजकर रहता है
तभी तो ग्राहक इसे ज्यादा खरीदता है।
अरे आता है स्वाद भी बडा
जब ग्राहक चखकर अंगूर देखता है।
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तेरे लाल होठ मुझे
अंगूर जैसे मीठे लगते है।
चुमता रहा इन्हे दिन रात
इतने खास लगते है।
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आंखो पे नश्मा लगाकर
वो घर मिलने आती है।
करती है प्यार की बातें मुझसे
ओर अंगूर मुझे खिलाती है।
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अंगूर खिलाने के बहाने
वो मिलने मुझसे आती है।
करती है प्यार की बातें
ओर चुमकर गाल जाती है।
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उसके गुलाबी होठो की मुस्कान ने
दिल को घायल कर दिया।
खिलाकर अंगूर अपने हाथों से
दिवाना मुझे अपना बना लिया।
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मासी मेरी जब मिलने आती है
अंगूर से भरकर थैली साथ लाती है।
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संतरे के पीले फल पर
दिल हम हार बैठे ।
जब खाया अंगूर खट्टा मीठा
तो दिल का दर्द भुला बैठे।
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अंगर खा कर दिल बडा पच्छाता है।
कैसा फल है जो पल भर में निपट जाता है।
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जामून समझकर
वो अंगूर खा गया।
जो लगता था इतना मीठा
उसे बुरा बता गया।
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जामून भी बुरा मान गया
जब अंगूर उससे ज्यादा बिक गया।
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घर की खिडकी के सामने
अंगूर का पेड होता था।
मगर फिर भी अंगूर को
खा मैं नही सकता था।
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सेब और अनार सस्ते हो गए
जब अंगूर खट्टे होकर
सारे के सारे बिक गए।
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अंगूर भी बिक जाते है
जब स्वाद उनका मीठा होता है।
अरे आता है खाने में मजा अंगूर
जब महबूबा का साथ होता है।
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हाथ में अंगूर लेकर
वो छत पर आती है।
जब देखकती है मुझे
अंगूर कई खाती है।
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लाल साडी पहनकर
वो बालकनी में आती है।
देखकर मेरी सुरत को
अंगूर कई खाती है।
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अंगूर खाने के लिए
मिलने उसने बुलाया था।
खिला खिलाकर अंगूर
पेट मेरा भर दिया था।
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जब अंगूर अंदर से मीठा निकलता है
तो फिर बाजारो मे खुब बिकता है।
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केला भी बुरा मान गया
जब अंगूर महंगा होकर
केले से ज्यादा बिक गया।
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जींस टॉप पहनकर
वो अंगूर का गुच्छा साथ लाती है।
खिलाती है मुझे प्यार से
जब इश्क की बाते करती है।
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अंगूर भी खट्टा होता
अगर साथ यह नींबू के बिकता।
न खरीदते ग्राहक फिर इसे
तब जाकर अंगूर भी रोता।
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अंगूर की आंखो में भी आंसू आ गए।
जब अंगूर की खुशबू से ग्राहक दोडकर आ गए।
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अंगूर भी सजता सवरता होगा
तभी तो यह इतना बिकता होगा।
अरे निकलता है यह अंदर से मीठा
तभी तो दिल पर राज करता होगा।
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अंगूर के दिवाने
हर दिल मिल जाते है।
खाते है अंगूर
तो दर्द दूर हो जाते है।
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अंगूर के मीठे स्वाद ने
उसकी याद है दिलाई।
कैसा है उसका दिल
वो बात है बताई।
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उसके चेहरे की मुस्कान ने
अंगूर सा स्वाद दिया है।
चुमकर उसने मेरे गालों को
इश्क का अहसास दिया है।
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काले होकर भी जामून ज्यादा बिकते है
जब अंगूर के साथ यह मिलते है।
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अंगूर का खट्टा मीठा स्वाद
हर किसी को भाता है।
तभी तो हर कोई
अंगूर खरीदकर लाता है।
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एक नन्हा सा फल
दिल पर राज करता है।
लगता है वो मीठा बडा
जो अंगूर कहलाता है।
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अंगूर भी गुलाब के साथ बैठता है
तभी तो यह इतना महंग होता है।
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अंगूर की खुशबू ने
धरती को स्वर्ग बनाया है।
अंगूर खिलाने के लिए किसान ने
खुदा को धरती पर बुलाया है।
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अंगूर भी मीठा होता
अगर साथ यह आम के बिकता।
अरे खरीदते लोग इसे बडे चाव से
जब केले जितना यह सस्ता होता।
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महबूबा जब मुझे
अंगूर खिलाती है
एक एक अंगूर के साथ
किस दे जाती है।
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लाल साडी में वो बवाल लगती है
खा कर अंगूर वो आमसान की परी लगती है।
कैसे बताए उसे वो कितनी खूबसूरत है
तभी तो अंगूर जीतनी मीठी लगती है।
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लाल साडी पहनकर
वो इतराकर चलने लगी।
खाया अंगूर प्यार से
फिर होठो से मुस्कुराने लगी।
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अंगूर जीतना मीठा
उसका बदन लगता है
तभी तो बार बार
चुमने का मन मेरा होता है।
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मीठे मीठे फलों मे
अंगूर सबसे खास होते है।
कर दे दिल के दर्द को दूर
इतने ज्यादा मीठे होते है।
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होठो पर लाल लिपस्टिक लगाकर
वो अंगूर खाने लगती है।
देखकर मुझे सामने
पास बुलाने लगती है।
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रोज वो अंगूर कई खाती है
तभी तो मिलने मुझे बुलाती है।
जाता हूं जब उसे पास
प्यार करना सिखाती है।
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अंगूर की एक छोटी सी बेल पर
कई अंगूर लगते है।
तब जाकर किसान के चेहरे
खुशी से खिलते है।
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इश्क का इजहार अंगूर भी कर देता
अगर यह गुलाब की तरह महक जाता ।
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गुलाब के साथ रहकर
अंगूर ने इश्क करना सिखा है ।
कैसे करते है दिलों को खुश
यह खुशबू फैलाकर सिखा है ।
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अंगूर की बेल को भी
खुद पर घमंड हो गया।
जब एक बेल पर
अंगूर का गुच्छा लग गया।
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संतरे भी कम बिकते है
जब बाजार में अंगूर आते है।
रखरीदते है सब अंगूर
तब जाकर दिल खिलते है।
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उसकी प्यारी प्यारी बातों ने
दिल को धडकना सिखाया है।
कैसा होता है अंगूर का स्वाद
वो अपने होठो से बताया है।
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अंगूर की तरह तेरी आंखे लगती है
देखता रहूं दिन भर तुझे
ऐसी इश्क की बोतल लगती है।
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अंगूर के एक गुच्छे ने
कई दिलों को खुश किया है।
देकर मीठा अहसास इसने
दिल का बुरा हाल किया है।
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अंगूर भी इश्क करने लगा
देखकर चांद को यह मरने लगा।
देखकर चमक चांद की
अंगूर मिलने को तरसने लगा।
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खुदा भी धरती पर आते है
जब अंगूर पक जाते है।
खाते है अंगूर बडे चाव से
फिर वापस चले जाते है ।
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वो किसान भी बडा मेहनत करता है
जो अंगूर की बेल लगाता है।
खिलाता है मीठे फल हमे
ओ दिल के दर्द भूलाता है।
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किसान के हाथों मे तो जादू होता है
तभी तो अंगूर इतना मीठा होता है।
अरे खाते है अंगूर चाव से
तब जाकर किसान का दिल खुश होता है।
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माली बागों मे कई फल लगाता है
मगर फिर भी अंगूर उसके दिलको भाता है।
करता है हिफाजत अंगूर की बेल की
फिर इसके फलों को पकाता है।
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चिंटियों के दिल में हलचल मच जाती है
जब अंगूर की खुशबू उन्हे मिल जाती है।
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अंगूर की खुशबू ने
चिटियों को भी पास बुलाया है।
पीला की चिटिंयो को मीठा रस
उनके दिल का दर्द दूर किया है।
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अंगूर की मीठी खुशबू ने
दिलों को तडपाया है।
पीला कर मीठा रस
अंगूर बिक पाया है।
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बाजार में भी शोर मच गया
जब अंगूर अंदर से मीठा निकल गया।
अरे खरीदने लगे लोग अंगूर पर अंगूर
इतनें में अंगूर ही कम पड गया।
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मीठे स्वाद की चाव में
लोगो ने कई अंगूर के गुच्छे खरीदे है।
मीले खाने में अनोखा स्वाद
इसलिए केले साथ खरीदे है।
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एक अंगूर के गुच्छे के साथ
गुलाब का फूल फ्री में मिलता है।
तभी तो रोज डे पर
अंगूर इतना ज्यादा बिकता है।
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सेब अपनी लाली पर मरता रहा।
इधर बाजार में अंगूर
महंगा होकर भी बिकता रहा।
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महंगे सेब खाकर
मैं गरीब बन गया
जब खाया मीठा अंगूर
तो दिल मेरा अमीर बन गया।
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अंगूर के खट्टे मीठे स्वाद पर
दुनिया जान लुटा देती है।
तभी तो अंगूर महंगे होने पर भी
दुनिया चाव से खा लेती है।
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अंगूर का खट्टा मीठा स्वाद
मेरे दिल में घुल गया।
करकर इसने तेरी तारिफ
दिवाना मुझे तेरा बना दिया।
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अंगूर के स्वाद ने
दिलो को धडकाया है।
सजकर बाजारों मे इसने
ग्राहकों को पास अपने बुलाया है।

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अंगूर के मीठे स्वाद पर
हर कोई दिल हार जाता है।
तभी तो महंगे होने पर भी
अंगूर बाजार से खरीद लाता है।
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अंगूर का स्वाद मुझे शहद जैसा लगता है।
तभी तो पेट बार बार अंगूर मांगता है।
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इस तरह से दोस्त, अंगूर पर शायरी कैसी लगी कमेंट मे जरूर बताना।
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