Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

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तरबूज हमारी सेहत के ​लिए काफी उपयोगी होता है, क्योकी इसमें 92% तक पानी रहता है जो की पाचन तंत्र के लिए उपयोगी है। वही पर तरबूज में विटामिन A, C, B6, पोटेशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते है जो की स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। और यही कारण है कि मानव तरबूज को ज्यादा से ज्यादा पसंद करता है।

मगर तरबूज पर शायरी की बात करे, तो यह तरबूज के लाल व मीठे निकले पर अधिक होती है । क्योकी तरबूज जीतना लाल होता है वह उतना ही अधिक मीठा लगता है। और यही कारण है शायरी भी मीठी लगती है।

खैर इस लेख में हम तरबूज पर शायरी पढेगे, तो आइए पढे,

Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

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लाल साडी पहनकर

वो तरबूज जैसी लगने लगी।

खा जाउ पल भर में

इतनी मीठी मुझे लगने लगी।

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आज तरबूज में भी

अंगूर का स्वाद आ गया।

जैसे गर्मी के मोसम मे

बर्फ का गोला गिर गया।

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तरबूज के मीठे स्वाद ने

बाजार में हलचल मचा रखी है।

न बिक सके कोई फल

ऐसी बात फैला रखी है।

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गर्मी के मोसम में

तरबूज कई खाते है।

जब आता है मजा

तो फिर भर पेट खाते है।

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तपते सूरज की धूप में

तरबूज बडा मुस्कुराता है।

दिखा कर मीठा लाल रस

प्यार से मुझे पिलाता है।

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तरबूज के मीठे रस का दिवाना

अंबानी भी हो गया ।

तभी तो तरबूज लेने

वो खेतों मे आ गया।

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मीठे आम भी फिके लगते है

जब बाजार में तरबुज मिलते है।

अरे आता है स्वाद बडा

जब तरबूज हम कई खाते है।

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केले की मीठास भी

फिकी पड जाती है।

जब खुशबू

तरबूज की आ जाती है।

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तरबूज की खुशबू ने

दिल को बडा महकाया है।

पिला पिलाकर मीठा रस इसने

दिल को बडा हंसाया है।

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दिल भी बडा हंसने लगता है

जब तरबूज पकने लगता है।

अरे आता है स्वाद जीभ को भी

जब तरबूज खाने लगता है।

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Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

संतरे के खट्टे रस पर

दुनिया मर मीटती है।

मगर फिर भी बाजार में

तरबूज की खुशबू बिकती है।

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बचपन की उस दोपहर में

तरबूज कई खाते थे।

जब लगते थे तरबूज मीठे

तो फिर चाव से खाते थे।

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बचपन के वो दिन बडे याद आते है

जब मां हाथों से तरबूज खिलाती थी।

करती थी प्यार हमसे इतना

कि दर्द में मुझे देखकर खुद रो लेती थी।

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बचपन की वो एक टोली

तरबूज कई खाती थी।

जब लगते थे तरबूज मीठे

तो फिर भर पेट खाती थी।

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आंगन में बैठकर

हम सभी तरबूज कई खाते थे।

जब आता था मीठा रस

एक दूसरे को देखकर हंसते थे।

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वो दादी बडी याद आती है

जो तरबूज हमे खिलाती थी।

खाता था तरबूज तो

प्यार से गाल मेरा चुम लेती थी।

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तरबूज के लाल रंग पर

दिल हम हार बैठे।

देखा उसके चांद से मुखडे को

और उसके प्यार में गिर बैठे।

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उसकी लाल साडी का पल्लू

दिल को बडा सताता था।

खाता था जब तरबूज मैं

चेहरा मेरा खुश हो जाता था।

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लाल साडी पहनकर

वो मिलने घर पर आ गई।

लेकर आई जो साथ में तरबूज

जो मुझे प्यार से खिला गई।

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तरबूज के रस को

प्याली भरकर पीते थे।

जब लगते थे तरबूज खेत में

बस उसी से पेट अपना भरते थे।

Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

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अनार भी बाजार में कम बिकने लगे

जब तरबूज देखकर लोग खुश होने लगे।

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आम फलो का राज होकर भी

बाजार में बिक नही पाया।

जब तरबूज ही

सबके दिलों को भाया।

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अंगूर के साथ रहकर

तरबूज भी मंहगा हो गया।

तभी तो तरबूज

आज इतना कम बिक गया।

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गुलाब सी खुशबू

तरबूज के अंदर से आती है।

तभी तो तरबूज को देखकर

महबूबा याद मुझे आती है ।

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नारियल का पानी भी फिका पड गया

जब तरबूज गले से उतर गया ।

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दिल का दर्द दूर हो जाता है

जब तरबूज खाया जाता है।

अरे आता है तरबूज खाने में बडा स्वाद

तभी तो खरीदकर इसे घर लाया जाता है।

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बच्चों को तरबूज बडा पसंद होता है

तभी तो इसे चाव से खाते है।

अरे निकलता है अगर तरबूज लाल

तो फिर ताबडतोड खाते है।

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उस किसान का भी शुक्रिया

जिसने तरबूज को हाथों से बनाया है।

जो देता है गर्मी में ठंडक का अहसास

ऐसा किसान ने तरबूज बनाया है।

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सूरज की तपती धूप में

किसान दिनभर जलता रहा।

तब जाकर एक तरबूज

​इतना मीठा बनता रहा।

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किसान ने पसीना दिन भर बहाया था

तब जाकर मीठा तरबूज बन पाया था।

अरे है यह तभी तो इतना लाल

क्योंकी किसान ने इसे खुन अपना पिलाया था।

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किसान के हाथों मे

छाले कई पड जाते है

तब जाकर तरबूज

इतने मीठे बन जाते है।

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धूप में वो दिनभर तपता रहा

तब जाकर तरबूज पकता रहा।

आज खाते है जिसे चाव से

वो किसान के साथ से ही महकता रहा।

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ईश्वर भी धरती पर आते है

जब खेतों में तरबूज पकते है।

अरे लगते है बडे मीठे तरबूज

जब ईश्वर काटकर खाते है।

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लाल साडी में वो पटाका लगती है।

खा कर तरबूज बडा खुश लगती है।

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तरबूज खाते ही दिल मीठा हो जाता है

तभी तो ​आवारा दिल किसी का खास हो जाता है।

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बालकनी मे आना तो एक बहाना है

असल में तरबूज खिलाने के लिए हमे बुलाना था।

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नन्हे हाथों मे

तरबूज की वो लडी होती थी

खाते थे जब चाव से तरबूज

तो चेहरे पर भी हंसी होती थी।

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तरबूज खिलाने के लिए

वो छत पर आ गई।

खिलाकर तरबूज मुझे

गालों को चुम गई।

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वो दिन बडे याद आते है

जब एक तरबूज खेतों से चुराते थे।

खाते थे तरबूज प्यार से

इतने में ​पकडे हम जाते थे।

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तरबूज चुराकर खाने का

एक अलग ही मजा होता था।

तभी तो चेहरे पर

हंसी का खिलोना होता था।

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काली साडी में लिपटकर

मिलने छत पर आ गई।

लेकर तरबूज वो

खिलाने मुझे आ गई।

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बचपन के उन दिनों को

याद करकर बडा रोया था।

जब एक तरबूज के लिए

अपनों से झगडा किया था।

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तरबूज के लाल रंग पर

फिदा हर दिल हो जाता है।

खाता है तरबूज

ओर फिर मस्त हो जाता है।

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तरबूज की खुशबू ने

धरती को स्वर्ग बनाया है।

खिलकर किसान के हाथों मे

दिलो को मीठा बनया है।

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तरबूज की खुशबू ने

चांद को भी दिवाना बनया है।

खिलाने के लिए तरबूज

चांद को धरती पर बुलाया है।

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Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

एक तरबूज खाकर

वो मस्त बन गई।

खाया तरबूज ओर फिर

आंखो मे बस गई।

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लाल साडी में वो धमाल लगती है

खाती है तरबूज तो कमाल लगती है।

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गुलाबी होंठो से

वो तरबूज खाती है।

देखकर उसकी अदाओं को

दिल की धडकन बढ जाती है।

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बाजार में भी हंगामा मच गया।

जब एक तरबूज सफेद निकल गया।

देता था जो मीठा स्वाद

आज न जाने क्यों वो फिका निकल गया।

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खुदा को भी किसान पर नाज होता होगा

जो इतना मीठा फल बनाता होगा।

अरे खाता है तरबूज खुदा भी

तभी तो खुश दिखता होगा ।

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काली काली आंखो में

ख्वाब कई पलते है।

तब जाकर तरबूज

लाल निकलते है।

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Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

धूप भी जिसे जला न पाए

वही तो किसान कहलाए।

देता है जो मीठे तरबूज

वो किसान फिर खुदा कहलाए।

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सूरज की तेज धूप में

धरती भी महकने लगती है।

जब तरबूज की खुशबू

बिखरने लगती है।

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बाजार में बडी गर्मी आ गई

देखकर तरबूज को हंसी आ गई।

जो लगता था मीठा तरबूज मुझे

आज खा कर उसे हिचकी आ गई।

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किसान के होठो पर भी

हंसी आ जाती है।

जब तरबूज के पकने की

शुखबू आ जाती है।

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चारों तरफ बडा

खूबसूरत नजारा होगा।

दिखेगा लाल तरबूज

वो खेत हमारा होगा।

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जिसे बोया था अपने हाथों से

आज वो उपहार लेकर आया है।

करने तरबूज दिल को खुश

मीठा रस साथ लाया है।

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सेब की चमक भी

खूबसूरत लगती है।

मगर यह तरबूज की लाली

के सामने कहां टिकती है।

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सेब भी चमकना भूल गया

जब तरबूज महकना शुरु किया।

आया दिल को भी बडा स्वाद

जब तरबूख खाना मैंने शुरु किया।

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तरबूज मीठा होकर

बाजारों मे लगातार बिकने लगा।

तभी तो संतरा देखकर

पीछे हटने लगा।

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संतरे की मुलाकात तरबूज से हुई

तो संतरा भी खुश हो गया।

रहने लगे साथ दोनो

फिर मंडी पर दोनो ने राज किया।

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अनानास भी फिका लगने लगा

जब तरबूज तपते सूरज में महकने लगा।

अरे हुआ दिल तरबूज खाने का

जब तरबूज लाल और मीठा निकलने लगा।

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तरबूज भी मीठा निकलता है

तभी तो यह बाजारों मे बिकता है।

अरे आता है स्वाद खाने में

जब यह लालम लाल निकलता है।

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अंगूर का गुच्छा मंहगा होता रहा

इधर तरबूज सस्ता होकर बिकता रहा।

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गर्मी के वो दिन बडे याद आते है

जब स्कूल से लोकर तरबूज खाते थे।

अरे निकलता था जब तरबूज मीठा

तो फिर भर पेट हम खाते थे।

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बचपन का वो मीठा रस याद आ गया।

जो बाजारों मे जाकर तरबूज बन गया।

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जिन्हे बोते थे नन्हे हाथों से

वो मीठा स्वाद देता था।

वो तरबूज जब पक जाता था

तो अंदर से लाल निकलता था।

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तरबूज खा कर वो

इतराकर चलने लगी।

आया माली पीछे तो

डर कर भागने वो लगी।

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तरबूज के मीठे स्वाद ने

दिल को गुलाब बना रखा है।

खाता रहू दिन रात तरबूज

ऐसा हाल मेरा बना रखा है।

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तरबूज होता है लाल और मीठा

तभी तो यह बाजारों मे मिलता है।

अरे खरीदते है अमीर गरीब सब इसे

तभी तो यह राज दिलों पर करता है।

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तरबूज की मीठी खुबशू ने

सूरज को भी बहकाया है।

पिलाने के लिए तरबूज का रस

अपने पास बुलाया है।

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एक बार जो तरबूज खाए

फिर दिल उसका भूल न पाए।

अरे खाता रहे वो दिन रात तरबूज

ऐसा हा​ल फिर उसका हो जाए।

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तरबूज को देखकर

लार उसकी टपक जाती है।

जो मकअप लगाकर

काजोल बन जाती है।

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उसकी पतली कमर की कसम

वो मस्त पटका लगती है।

खाती है जब तरबूज वो

आसामन से उतरी परी लगती है।

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इश्क का रोग

मेरे दिल को लग गया।

खिलाकर उसने तरबूज

मेरे दिल को चुरा​ लिया।

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लाल तरबूज खिलाना तो एक बहाना था

असल में महबूब को मिलने मुझसे आना था।

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वो तरबूज की बडी दिवानी है

तभी तो खेतों में तरबूज लगाती है।

खाती है दिन रात तरबूज वो

तभी तो लाल बन जाती है।

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जो लगाती है होठो पर लाली

वो दिलों को घायल कर देती है।

खाने के लिए तरबूज

वो बच्ची बन जाती है।

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खुदा कसम तुम कमाल लगती हो

खा कर तरबूज तुम लालम लाल लगती हो।

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तेरे गुलाबी होठो की कसम

हम तुमसे प्यार करते है।

देखकर तेरे तरबूज जैसे होठ

किस हम कर लेते है।

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उसकी कातिल अदाओं ने

बदनाम कर दिया ।

खिलाकर तरबूज उसने

मेरे दिल का बुरा हाल कर दिया।

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फलो की महफिल में

आम का ही राज होता है।

मगर तरबूज फिर भी

आम से ज्यादा बिकता है।

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जब आता है तरबूज का सिजन

चारो ओर तरबूज मिलते है।

खाते है इन्हे बडे चाव से

तो यह अंदर से मीठे मिलते है।

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तरबूज जैसे मीठे रस पर

दिल हम अपना हार बैठे।

देखा उसके लाल गुलाबी होठों को

ओर उसके गाल चुम बैठे।

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खुदा ​कसम

तु कातिल लगती है।

खा कर तरबूज तु

मीठी रसमलाई लगती है।

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किसान का चेहरा भी खिल जाता है

जब तरबूज अंदर से मीठा निकल जाता है।

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खेतों मे भी बडी रोनक मिलती है

तरबूज की फसल जब पकने लगती है।

अरे आता है तरबूज खाने में स्वाद

जब खुशबू इसकी बिखरने लगती है।

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जब पकता है तरबूज

खुशबू इसकी दूर तक जाती है।

कर देती है चांद को भी ​मदहोश

ओर उसे धरती पर रस पिलाने बुलाती है ।

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तरबूज खाने का मन तो

चांद का भी करता होगा ।

तभी तो तरबूज देखकर

चांद इतना हंसता होगा।

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आम मीठे बहुत लगते है

मगर फिर भी गर्मियों मे

तरबूज ज्यादा बिकते है।

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तरबूज के लाल रंग पर

दिल अपना हार बैठे ।

खा कर तरबूज को

दिल के दर्द को मीटा बैठे।

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Best 196+ Tarbuj Par Shayari, मिठास ऐसी कि रूह खुश हो जाए

तरबूज का लाल रंग भी

उसकी याद दिलाता है।

जो खिलाती थी अपने हाथों से तरबूज

उस महबूबा की बात बतता है।

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इस तरह से दोस्त, तरबूज पर शायरी कैसी लगी, कमेंट में जरूर बताना।

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