177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

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दोस्त, कहते है कि पेड जब तक हरे भरे रहते है तब ही अच्छे लगते है। और जैसे की पेड सूख जाते है वे बेकार लगते है। इसलिए उन्हे काट देना चाहिए। और आज के समाज में ऐसा ही होता है।

खैर जो पेड अभी हरे भरे है वो कभी न कभी तो सूख ही जाएगे और यह हम सभी को पता है। तो जो पेड सूख चूके है और जो सूखने वाले है उनपर कुछ शायरियां होती है । इस लेख में हम उन ही सूखे पेड पर शायरी लेकर आए है।

तो आइए दोस्त, सूखे पेड पर शायरी पढे,

177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

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वो पेड भी आज सूखकर कंकाल बन गया।

जिसके निचे हमारा पूरा बचपन बित गया।

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कभी जिन टहनियों पर लटककर

जीवन के हर पल बिताते थे दिन रात।

आज वही सूखा हुआ पेड करता है

अपने बिते दिनों को याद।

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वो सूखा हुआ पेड भी

हमारी उन बातों को बताता है।

कैसे खेलते थे उसके पास

वो कहानी सूरज से तपकर सुनाता है।

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अब वो बचपने के

दिन भी बडे याद आते है ।

जब सूखा हुए पेड

आंखो के सामने आते है।

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सूखे हुए पेड की एक एक

टहनी को काट लिया है।

जो बितया था जीवन इसके साथ

उन बातों को मिटा लिया है।

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जो कभी मिठे रसीले आम देता था

आज वही पेड सूख गया है।

तपता है दिन भर सूरज से

ओर खडा रहकर थक गया है।

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वो सूखा हुआ बरगद का पेड

मुझे आज भी याद आता है।

जब लटकते थे उसकी टहनियों पर

वो बचपन का खेल याद आता है।

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सूखा हुआ पेड रह गया

लटकती टूटी टहनियों के साथ।

अरे भूल गए वो लोग

इस पेड की शीतल छाया का साथ।

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जो धूप से कभी बचाता था

आज वो खुद धूप से जल गया।

जो देता था शीतल छाया

आज वो सुखा पेड छाया को तरस गया।

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जो लगते थे मीठे फल

वो सब बिखरकर रह गए।

जब तपने लगा सूरज आग सा

सारे पेड सूख गए।

177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

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जो महकते थे फूल

वो फूल भी आज रूठ गए।

जब सूरज से तप तपकर

पेड भी सारे सूख गए।

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जब पेड सूख जाता है

तो आग जालने के काम में आता है।

देता है सर्दी मे गर्मी का अहसास

जब आग के पास जाता है।

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वो गांव का हरा भरा पेड

न जाने कब सूख गया।

जो देता था शीतल छाया

वो खुद छाया से रूठ गया।

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समय का पहिया बडा मजबूत होता है

तभी तो हर पेड हरा न होता है।

सूख जाता है जब हरा पेड

तो पक्षियों का भी वहां पर बसेरा न होता है।

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हर सूखा पेड पक्षियों का ढेरा नही होता ।

तभी तो ऐसा पेड धरती पर खडा नही होता।

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जो गांव मे बरगद के पेड हुआ करते थे

वो भी सूरज से लडते लडते सुख गए है।

देते थे जो कभी शीलत छाया लोगो को

आज वो भी धरती पर गिर गए है।

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जब हरा भरा पेड सूख जाता है

पक्षियों को भी दूख होता है।

अरे बैठते थे जिस पेड के निचे

वो भी सूरज से जल जाता है।

177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

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सूखे पेड के निचे

छांव का बसेरा नही होता ।

तभी तो इसके उपर

किसी चिडिया का घर नही होता।

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परिदों को भी जो पेड

पसंद नही आता है।

वही पेड तो सूरज की

तपती धूप में सूख जाता है।

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जो गुजरते थे राहगीर रास्तों से

तो उन्हे छांव दिया करता था।

जो आज सूख गया है पेड

वो कभी हरियाली के गीत गाया करता था।

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सूरज से जलकर यह

लोगो को छांव देता था।

आज जो सूख गया है पेड

वो कभी हरा भरा हुआ करता था।

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ना कोई पत्ता है

ना कोई हरियाली होती है ।

अरे जो सूख जाए पेड

उसकी फिर बुरी कहानी होती है।

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सूखे हुए पेड के निचे

बसेरा नही होता है।

तपता है वहां पर भी सूरज

तभी तो छांव का अहसास न होता है।

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सूखे हुए पेड की हरियाली ने भी

साथ पेड का छोड दिया।

करकर हवाले सूजर के

इस दुनिया को छोड दिया।

177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

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जब हरा भरा पेड सूख जाता है

तो खून के आंसू वो रोता है।

करता है अपने बिते दिन याद

जब आस पास के पेड को देखता है।

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सूखे हुए पेड को भी

जलन होने लग जाती है।

जब सूरज की तेज धूप

उस पर पड जाती है।

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पत्तों ने भी साथ छोड दिया

तभी तो यह पेड सूख गया।

पर है जडे आज भी जिंदा इसकी

पर फिर भी पेड रूठ गया।

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जब पेड सूख जाता है

तो मनुष्य चाव से काटता है।

अरे होता है दर्द इसे भी

यह मनुष्य क्यो न जानता है।

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हर सूखा हुआ पेड

अपने दर्द के दिनों को याद करता है।

देखता है हरे भरे पेडो को

ओर अपनी किस्मत पर रोता है।

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मैं एक हरा भरा पेड हुआ करता था

पर आज मैं भी सूख गया हू।

तडता था कभी सूरज से

पर आज मैं थक गया हूं।

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कल तक जो हरा रहता था

लोगो को शीतल छाया देता था।

आज वही पेड सूख गया है।

तभी तो दर्द से यह तडप गया है।

177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

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जब पेड सूखता है

पत्तों को दर्द का अहसास न होता है।

लगता है उन्हे फिर लोट आएगे

मगर हक्कित का उन्हे मालूम न होता है।

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सूखा हुआ पेड भी

छांव से बचा लेता है

जब सूरज की किरणों को

वो खडा होकर रोक लेता है।

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हर सूखा हुआ पेड

अपने जीवन के दूख गाता है।

करते थे वार लोग इस पर

उन पलो को याद करता है।

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जो पेड कभी सूरज से लडता था

आज वही सूरज से डरता है।

तपता है दिन भर यह

तभी तो आंखे बंद कर लेता है।

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घर के आंगन में

एक सूखा हुआ पेड खडा है।

करता है इंतजार हमारे आने का

तभी तो बरसों से वही पडा है।

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जिसके साथ रहकर

जीवन का बचपन बिताया।

आज उसी सूखे पेड की टहनियों से

सर्दी को दूर भगया।

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सफल होने के चक्कर में

हमने अपनों को खोया है।

लगया था जिन्हे अपने हाथों से

उन पेड को सूखा खोया है।

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177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

पेड के हर पत्ते में

यादे कई बसती है।

जब सुखता है पेड

तो पत्ते यादे बनकर झडती है।

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जब पेड सूख गया

तब सुख भी मुझसे रूठ गया।

खाते थे जिससे फल तोडकर हम

आज वो पेड ही साथ छोड गया।

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जब पेड यह सुख जाएगा

तब पत्तो का साथ छूट गया।

आती रही इस पेड की याद मुझे

जब सूरज भी आग बनकर बरस गया।

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सूरज की आग से जो बचाया करता था

आज वह पेड भी सुख गया है।

बिताया था जो अनमोल पर इस पर

आज वो भी पत्तो के साथ झड गया।

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यादों का जब सैलाब आता है

दुखो का पहाड बढ जाता है।

अरे सुख जाते है वो पेड भी

जब जलता सूरज पास आता है।

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जो ख्वाब रात में देखते है

वो कभी पूरा नही होता है।

सुख जाते है पेड भी

जब समय का पहिया फिरता है।

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सपनों मे जिसे मैंने देखा

वो ​हक्कित बनकर तु आई है।

जब सुख गया है पेड मेरा

तब दुल्हन बनकर वो आई है।

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177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

जब पेड सूख जाता है

तो यह मोसम से डरता नही है।

अरे जो होती है जान इसमें

पास वो रहती नही है।

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सुखे हुए पेड पर

बसेरा प​क्षियों का नही होता।

तभी तो तपते सूरज में

छांव का असर नही होता।

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खुदा को भी बडा दुख होता है

जब हरा पेड सुख जाता है।

अरे देता था जो मीठे फल

वो भी खुदा से रूठ जाता है।

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जब बारिस समय पर न होती है

पेड को भी बडा कष्ट होता है।

जब जलता है सूरज दिन रात

तो पेड भी सूख जाता है।

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सुखे हुए पेड पर

फल नही लगते।

तभी तो इसके पास

मनुष्य नही रहते।

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हर सुखा हुआ पेड इंतजार करता है

देखकर चांद को प्यार उससे करता है।

जब न होती है बारिश

तो सुखा पेड भी बारिश के लिए तरसता है।

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177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

जब आम का पेड सूख गया

तो वह भी खडा खडा थक गया।

देखता है चांद को रात भर

मगर फिर भी जमीन पर गिर गया।

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चांद को देखने के लिए

पेड ने खुद को सुखा लिया।

न हो झगडा भाईयों में

इसलिए खुद को मार लिया।

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सुखे हुए पेड पर

भूतों का बसेरा होता है।

तभी तो इसके उपर

पक्षियों का घर न होता है।

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परिंदों ने भी बसेरा छोड दिया।

जब हरा भरा पेड अचानक से सुख गया।

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जब लगते थे रसीले फल

तो परिंदे भी बैठा करते थे।

आज सुख गया है पेड

तो परिंदे पास आते तक नही ।

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शिकायते करे तो किससे करे

अपनों ने ही धोका दिया है।

सुखा कर पेड को

पानी सारा सोख लिया है।

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पानी की कमी ने

उस पेड को सुखा दिया।

फिर मनुष्य ने उसकी टहनियों को

आग में जला दिया।

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177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

सुखा हुआ पेड भी

हवा में हिलता रहता है।

लगता है बडा बुरा

जैसे भिख पानी की मागता है।

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पतझड़ का बहाना लेकर

वो पेड पानी की कमी से सुख गया।

जो तडता था की सुरज से

आज वो आग में जल गया।

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उस पेड को भी दुख बडा होता है

जब पत्तों को पैर के तले कुचला जाता है।

जब सुख जाता है यही पेड

तो इसे भी आग में डाला जाता है।

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हर सुखे हुए पेड की

जवानी बडी रंगीन होती है।

करता है वो मदद मनुष्य की

ऐसी उसकी कहानी होती है।

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जब पेड सुख जाता है

तो उसके जवानी के दिन याद आते है।

कैसे करता था सुरज से हिफाजत हमारी

वो दर्द भरी बातें याद आती है।

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सूरज की धूप में जलकर

वो ठंडी छाया देता था।

आज सुख गया है पेड

तो उसे आरी से काटा जाता है।

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जब पेड सुख जाते है,

तो उन्हे भी आरी से काटा जाता है।

अरे होता है कष्ट बडा

जब पानी की कमी से उन्हे मारा जाता है।

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177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

पानी न मिलने के कारण से

एक हरा भरा पेड सुख गया।

जो देखता था सपने अपने

वो आज सुरज से जल गया।

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सुखा हुआ पेड अपनी दास्तान सुनाता है

कैसे रहते थे खुश उसके पास लोग

वो बाते कहानी बनाकर बताता है।

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जब था मैं हरा भरा

लोग मेरे निचे महफिल सजाते थे।

आज सुख गया हूं मैं

तभी कोई पास न आता है।

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जब देता था मैं मीठे मीठे आम

तो पत्थरों की मार सहनी पडती थी।

आज खडा हूं सुखा कंकाल बनकर

तो कोई पत्थर नही मारता है।

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वो जवानी के दिन याद आते है

जब हरा पेड अचानक सुख जाते है।

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अपनो के साथ ने ही

पेड को सुखाया है।

न देकर समय पर पानी

खुन के आंसू रूलाया है।

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177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

वो टहनियां भी सुख गई

जो कभी हरी हुआ करती थी।

जो देता था पेड छांव

आज वो भी सूख गया।

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परिंदे भी आकर चोट मारते है

जब पेड खेडे खडे सूख जाते है।

अरे होता है कष्ट बडा

जब लोग आरी से काटते है।

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आरी के एक एक वार ने

सुखे पेड को भी तडपाया है।

देकर दर्द पुराना

खुन के आंसू रूलाया है।

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जब सूख जाते है पेड

तो लोग भी वार कई करते है।

कर देते है एक एक टूकडा

फिर आग में फैंक देते है ।

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तडपता हूं आज गिरने के लिए

पर कोई गिराने वाला न रहा।

जो मारते थे कभी पत्थर

आज उनका साया न रहा।

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वो हरा भरा पेड भी

कभी महकता था गुलाब की तरह

आज वह भी सुख कर पडा है

धरती पर कंकाल की तरह ।

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वो सारे फूल भी साथ छोडकर चले गए

जब पेड भी अचानक से सुख गए।

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आज भी भुजाओं मे दम है

पर वो हरियाली साथ नही है।

महकता था जिन फूलों से

वो भी आज मेरे साथ नही।

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अपनों ने भी साथ छोड दिया

जब खडा खडा मैं सूख गया।

करता था जिसे चांद से इश्क मैं

उसे देखते हुए आज मैं थक गया।

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177+ सूखे पेड़ पर शायरी sukhe hue ped par shayari (सूखे पेड का दर्द)

जो चांद मुझे अपनो से प्यारा था

आज वो भी बुरा लगता है।

जब सुख गया हूं मैं सूरज के ताप से

तो पानी भी मुझे प्यारा लगता है।

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यह शायरियां जो है वह सूखे हुए पेड पर शायरियां है । वैसे दोस्तो आपको बता दे कि इनमें से कुछ शायरियां ऐसी है जो की असल जीवन में लागू होती है मतलब लोग वो पल बिता चुके है जो की शायरियों मे लिखा गया है। और यही कारण है कि शायरियां दिल को छूती है। खैर आपको कैसी शायरी लगी कमेंट में बताना।

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