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संतारा एक ऐसा फल है जो की मानव को कई स्वास्थ्य लाभ देता है। और इसी के कारण से डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते है। दूसरा की बच्चों को संतरा बडा पसंद होता है क्योकी बच्चे इसके खट्टे मिठे स्वाद पर फिदा रहते है और इसे चाव से खाते है।
तो दोस्त यदि आपको भी संतरा पसंद है, और आप संतरा पर शायरी पढना चाहते है। तो आपने बिल्कुल सही स्थान का चयन किया है। क्योकी इस लेख में हम संतरा पर बेहतरीन शायरी पढने वाले है। तो आइए शायरी पढे,
Top 192+ Santra Par Shayari (संतरे का खट्टा-मीठा स्वाद)

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पीली साडी मे तुम
संतरे के रस से भरी बोतल लगती हो।
पी जाउ इसे पल भर में
ऐसी खट्टी मीठी लगती हो।
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सेब के लाल रंग को देखकर
हर कोई उसे खरीदने में लग गया।
जब उतरा मैंदान में संतरा
बाजार में तहलका मच गया।
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जहां पर संतरा मिलता हो
वहां आम कोन खरीदता है।
जब बिकता हो संतरा सस्ता
तो फिर आम कहां बिकता है।
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अंगूर मीठा बनता गया
ओर संताना खट्टा बनता गया।
पर जब आए ग्राहक खरीदने
तो संतरा ही सबसे ज्यादा बिकता गया।
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पीली साडी में वो
संतरे की टॉकरी लगती है।
खा जाउ उसे पल भर में
इतनी खट्टी मीठी लगती है।
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संतरे के खट्टे मीठे रस पर
अमीर भी अपने दिल हार बैठे।
जो था संतरा 5 रुपय का एक
उसे अमीर 50 का एक खरीद बैठे।
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संतरा खाने से टेंसन कम हो जाती है
तभी तो संतरा देखकर
चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
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एक संतरे के रस की प्याली ने
खुशबू का अहसास दिलाया है।
पिलाकर इसने अपना रस
दिल को बडा महकाया है।

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खुदा भी जमीन आ जाते है
जब संतरे बागों मे पक जाते है।
अरे होते किसाने के दिल बडे खुश
जब संतरे भी महक जाते है।
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जो खेतों मे संतरे उगता है
वो भी ब्रह्मा बन जाता है।
देता है मीठे मीठे फल
तभी तो किसान ईश्वर कहलाता है।
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खुदा को भी नाज होता है
जब संतरा बागों मे खिलता है।
रहता है सस्ता बाजारों मे
ओर फिर गरीब का पेट भरता है।
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बचपन में संतरा खा कर
उसके छिलके के रस से खेला करते थे।
डालते थे रस अपने दोस्त की आंख में
फिर जोर जोर से हंसा करते थे।
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जब संतरे का रस आंखो में डाला जाता है
खुदा कसम खुशी के आंसू आ जाता है।
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जो अपने हाथों से संतरा उगाता था
वो संतरे के स्वाद के लिए तरस गया।
जब सरकार ने खेत उसका छिन लिया।
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जब बाजरो मे आम मिलता है
तब संतरा बहुत कम बिकता है।
पर जब हो संतरा खट्टा मीठा
तो फिर बाजार में ताबडतोड बिकता है।
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बचपन में संतरे की एक एक फांक को
गिन गिनकर खाते थे।
जब निकलते थे फांक ज्यादा
तो बहन को बडा चिडाते थे।

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बचपन के वो दिन बडे याद आते है
जब संतरे की फांक को गिरनकर हम खाते थे।
आता था मुझको बडा मजा
जब तेरी आंखो में छिलके का रस डालते थे।
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कीवी अपना भाव बढता गया
तभी तो बाजार में संतरा बिकता गया।
अरे रहता है संतरा बडा सस्ता
तभी तो यह थेलों मे जाता रहा।
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फलो की महफिल में
बडा शोर होता रहता है।
मगर फिर भी चुप रहकर
संतरा ताबडतोड बिकता रहता है।
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अंगूर का जूस भी बुरा मान गया
जब संतरे का जूस संस्ता पड गया।
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सस्ता होकर भी
ताक्त ज्यादा देता है
तभी तो संतरा
सेब से ज्यादा बिकता है।
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एक एक संतरा करते हुए
वो सारा खरीदता गया ।
जब पता चला है संतरा सस्ता
हर कोई संतरा ही लेता गया।
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किमत इसकी सबसे कम होती है
तभी तो यह इतना बिकता है।
अरे महलों में इसे जाना पसंद नही
तभी तो गलियों मे ज्यादा दिखता है।

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जब जेब में हो 5 रुपय
संतरा एक आराम से मिल जाता है।
खाते है बडे चाव से
तभी पेट भर जाता है।
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गरीबों की दुनिया में
संतरो का ही राज होता है।
तभी तो मंडियों मे
यह सबसे ज्यादा बिकता है।
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जब संतरा मिलता है 100 का 4 किलो
तो बाजारों में लूट मच जाती है।
खरदते है लोग भर भरकर थैले
जैसे इससे गरीबी दूर हो जाती है।
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संतरा भी बाजरों मे सजा हुआ मिलता
अगर अमीर के घर इसे जाना होता।
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जब आते है बाजार में अमीर लोग
तो संतरे भी टोकरी में सजकर जाते है।
पर जब आते है गरीब लोग
तो संतरे खुश होकर जाते है।
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संतरे की खट्टी मीठी खुशबू ने
जादू अपना फैला रखा है।
बुला बुलाकर ग्रहाकों को पास
मंडी में अपना रोला जमा रखा है।
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जिस मंडी में संतरा सस्ता मिलता है
वहां पर सेब कोन खरीदता है।
अरे लेते है आते जाते लोग संतरा
तभी तो यह इतना खुश दिखता है।

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माली का दिल भी खुश होता होगा
जब बाजरों मे संतरा सबसे ज्यादा बिकता होगा।
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जब मिलता है बाजार में सबसे सस्ता
तो दिल गरीब का खुश हो जाता है।
लेता है वो भर भरकर थैले संतरा
जैसे कल फिर यह महंगा हो जाता है।
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जब संतरा मिलता है बाजार में
तो केले भी कम बिकते है।
देखते है संतरे के ठैले को
ओर केले जल जाते है।
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संतरे के रस का दिवाना तो
खुदा भी होता है।
तभी तो संतरा खाने के लिए
जमीन पर उतर आता है।
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वो बचपन के दिल बडे याद आते है
जब संतरे के छिलके से खेलते थे।
आता था बडा मजा हमें
जब रस आंखो मे एक दूसरे के डाते थे ।
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जिस संतरे को तुम खाते हो चाव से
वो पनप जाता है माली की छांव से।
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वो संतरे की एक फांक
खट्टा मीठा रस दे गया।
देकर दिल को प्यारा अहसास
संतरे ने खुश कर दिया।
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चांद की चांदनी रात में
संतरा खुब चमकता रहा ।
ओर देखकर चांद संतरे को
खुदकी किश्मत पर रोता रहा।

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चांद को भी संतरा पसंद होता है
पर वो धरती पर आ नही सकता।
इसलिए तो चांद संतरे को खा नही सकता।
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पीले पीले संतरा का
जुस बनाकर पिया करते थे।
जब मामा जी घर हमारे
मिलने आया करते थे।
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वो बचपन भी बडा प्यारा था
जिसमें संतरे का छिलका हमारा था।
डालते थे इसका रंस आंखो में
वो पल ही यारों सबसे न्यारा था।
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जब आंखो में छिलके का रस जाता था
रोते रोते भी मैं खुशी से हंस लेता था।
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संतरा दवा होता नही है
फिर भी दवा से कम नही होता।
अरे देता है यह स्वास्थ्य लाभ
फिर डॉक्टर के पास नही जाना होता।
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अनार का भाव बढता गया
और इधर संतरा लगातार बिकता गया।
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डॉक्टर कहते है कि संतरे में
विटामिन सी होता है।
तभी तो इसे खाने से
शरीर ताक्तवर होता है।
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एक संतरे में कई फांक निकल जाती है।
जो बच्चों को बडी पसंद आती है।
अरे खाते है इसे बडे चाव से
तभी यह खट्टी लग जाती है।
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दिनभर की थकान को मिटाने के लिए
संतरा वरदान बनकर आया है।
जो भर दे पेट को पल भर में
ऐसा खट्टा मीठा रस साथ लाया है।
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तेरी प्यारी सी आंखों मे
संतरे का रस भरा है।
तभी तो इन्हे देखकर
मेरे दिल को कुछ हुआ है।

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खुदा भी धरती पर आता होगा
जब संतरा खुशबू स्वर्ग तक फैलाता होगा।
अरे आता है स्वाद खुदा को भी
जब वो पेट भरकर संतरा खाता होगा।
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संतरे से टक्कर लेने के लिए
धरती पर देखो आम आया है।
बनकर मीठा फल यह
सभी के दिलों मे जादू चलाया है।
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संतरा भी गजब का महकता है
जब गुलाब का साथ मिलता है।
आता है स्वाद खाने में
जब जूस बनाकर पिया जाता है।
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संतरे के जूस का दिवाना
मेरा दिल हो गया ।
देखकर उसकी कातिल आंखो को
मेरे दिल का बुरा हाल हो गया।
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आंखो में काजल लगाकर
वो इतराकर चलती है।
जब देखती है संतरे का थैला
तो दौडकर चुरा लेती है।
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बागों मे भी संतरा खिलाता होगा
तभी तो यह दिन रात बिकता होगा।
अरे आता है स्वाद इसे खाने में
तभी तो इसका जूस पिया जाता होगा ।
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किताब के एक एक पन्ने में
संतरे की कहानी लिखी होती है।
कैसे बना है यह संतरा
वो दास्तान लिखी होती है।
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नीले आसमान के निचे
पीला फल पेड पर लटका है।
देखकर मेरा दिल उसमें
जा अटका है।

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काली काली जुल्फों मे
वो न जाने कौनसा परफ्युम लगाती है।
जब खाती है संतरा प्यार से
होठों से वो मुस्कुरा देती है।
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दिल उसका आवारा है
तभी तो वो मेरे प्यार का दिवाना है।
करता है दिन रात संतरा संतरा
न जाने ऐसा क्या संतरे का दिवाना है।
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उसके संतरे न जाने
कब तरबूज बन गए।
जब हुई प्यार की पहली निशानी
वो गुलाब का फूल बन गए।
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हाथ में कट्टा लेकर
वो बदमाश बनने लगे।
खा कर संतरा प्यार से
वो गुलाब से महकने लगे।
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जो खाता है संतरा मीठा मीठा
उसका दिल महकने लगता है।
लगा कर आंखो पर चश्मा
वो हिरो जैसा दिखने लगता है।
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सूरज को भी
संतरे से प्यार करता होगा ।
तभी तो खाने के लिए संतरा
वो पेड के पास आता होगा ।
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इश्क की राह पर
चांद को भी उतरना होगा ।
जब देखेगा पीला संतरा
उसका भी खाने का मन होगा ।
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बाजारों मे बडा सस्ता मिलता है
जब तो यह इतना बिकता है।
अरे आता है पसंद हर किसी को
तभी तो यह अंदर से खट्टा मीठा मिलता है।
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एक संतरा खा कर वो
शरीर की ताक्त बढाने चला है।
रखता है दिन रात सेहता का ख्याल
जैसे मानों सेहत सुधारने चला है।
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सेब आम सब फिके लग जाते है ।
जब संतरे बाजार में सस्ते मिल जाते है।
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लाल गुलाबी होठो का रस
फिका लगने लग जाता है।
जब बाजार में संतरा
सस्ता मिलने लग जाता है।

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बचपन के वो दिन याद आते है
जब छत से संतरे का पेड देखते थे।
जब होता था खाने का मन हमारा
एक संतरा तोड लाते थे।
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बचपन में संतरा चुराकर खाता था।
जब देखता था माली मुझे
तुरन्त भाग जाया करता था।
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वो बचपने के दिन याद आते रहे
इधर बाजारों मे संतरे बिकते रहे।
जब आया ख्याल संतरा खाने का
इतनें मे संतरे खत्म हो गए।
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पीले रंग में सजकर वो
संतरे जैसी महकने लगी।
उपर से लगा कर होठो पर लाली
वो आशिक के दिल का बुरा हाल करने लगी।
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खुदा को भी नाज होता होगा
जब संतरे जैसा फल धरती पर देखता होगा ।
आता है स्वाद खुदा को भी
जब संतरे का जूस पीता होगा ।
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आम मीठा होता है
मगर फिर भी बाजार में संतरा बिकता है।
अरे आता है स्वाद संतरा खाने में
तभी तो यह दिलों मे रहता है।
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केला भी सस्ता होता है
और संतरा भी सस्ता होता है।
मगर फिर भी बजार में
न जाने क्यों संतरा ज्यादा बिकता है।
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संतरा भी छिलकर खाया जाता है
तभी तो यह बागों मे उगाया जाता है।
अरे आता है स्वाद बडा दिल को
तभी तो यह इतना खरीदा जाता है।
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जो खाता है अनार
वो बडा पछताता है।
खा कर वो संतरा
तुरन्त खुश हो जाता है।

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संतरे में भी इश्क का जाम होता है
तभी तो इसे खाकर
दिल को कुछ कुछ होता है।
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तेरे इश्क का जाम बनकर
वो संतरे में बस गया ।
तभी तो दिल कहे
खा कर संतरा मजा आ गया।
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कीवी की किमत आसमान छूती है
मगर फिर भी यह बिक जाती है।
पर जब आती है बात संतरे की
तो कीवी भी फिकी पड जाती है।
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जहां पर बिकता है संतरा
वहां कीवी कोन खरीदता है।
अरे होता है संतरा बडा सस्ता
तो महंगा फल कोन खरीदता है।
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जेब में अगर दस का नोट भी हो
तो संतरे दो मिल जाते है।
खाते है जब इन्हे चाव से
दिल को भी मजे आ जाते है।
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संतरा वो दिन रात खाता रहा
तभी तो वो प्यार से मुस्कुराता रहा।
मिलता था जब खट्टा मीठा स्वाद
दिल भी उसका खुश होता रहा।
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आंखो पर चश्मा लगाकर
वो संतरा खाता रहा ।
अमीर होने का दिखावा करने के लिए
वो साथ में सेब भी खरीदता रहा।
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अमीरों के घरों मे तो
फलो का बसेरा होता है।
पर हो जो गरीब
उसके यहां संतरा ही राजा होता है।

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फलो से बना महल
अमीरों के यहां दिखता है।
जब आती है बारी गरीब की
तो संतरा ही पहले दिखता है।
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नीले आसमान के निचे
कई फल पकते है।
पर आता है खुदा को भी मजा
जब संतरे महकने लगते है।
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तो यह सभी शायरी संतरे पर शायरी थी। आपको शायरी कैसी लगी कमेंट में बताना न भूले।
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