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कद्दू एक प्रकार की सब्जी होती है जो को की लौकी की प्रजाति में आती है। और विज्ञान में इस लौकी को कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) परिवार का हिस्सा माना गया है। कद्दू में मुख्य रुप से विटामिन A, C, पोटेशियम और फाइबर अच्छी मात्रा में होता है। और इसलिए लोग अक्सर कद्दू को खाना पसंद करते है।
यदि आपको भी कद्दू खाना पसंद है, तो जाहिर है कि आप कद्दू पर शायरी पढने से पीछे नही हटेगे। ओर आज हम आपके लिए कद्दू पर शानदार शायरी लेकर आए है। जिन्हे पढ कर आप भी कहोगे वहां भाई मजा आ गया।
तो आइए कद्दू पर इसी प्रकार की शायरी पढे,
187+ kaddu par shayari कद्दू पर दो लाइन शायरी

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कद्दू के स्वाद पर
दुनिया जान लुटाती है।
मगर फिर भी कद्दु न जाने
कम क्यों खाती है।
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कद्दू सा मुंह लेकर
वो सरेआम फिरने लग गए।
तभी तो आज कल
लोग उन पर हंसने लग गए।
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आलू की होड में
कद्दू भी दुल्हा बन गया।
करने के लिए शादी वो
मिर्ची के पास चला गया।
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लोगो की भींड में
कद्दू का ही नाम होता है।
तभी तो देखकर कद्दू को
सलाम चारो ओर होता है।
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बुलेट लेकर कद्दू भी
घर से निकलने लग गया।
तभी तो आजकल कद्दू
ज्यादा महंगा हो गया।
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तेज हवाओं ने
कद्दू को दिन रात सताया है।
और जलाकर सुरज की किरणों ने
कद्दू को काला कोयला बनाया है।
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सुरज की आग ने
जिसे जलाना चाह था।
उसी कद्दू ने लोगो को
मीठा रस पिलाना चाह था।
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देखकर हरी मिर्च की प्यारी सी सुरत को
कद्दू को भी इश्क होने लग गया ।
जो रहता था हमेशा उदास
आज उस कद्दू का दिल भी हंसने लग गया।
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हरी मिर्च की पतली कमर ने
न जाने कितनों के दिल धड़काया है।
मगर कद्दू के डोले सोलो ने
हरी मिर्च का दिल धडकाया है।
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बैंगन को लगी है मिर्ची,
लौकी ने भी मुंह फुलाया है।
जब से कद्दू के डोले सोलो ने,
हरी मिर्च को पटाया है।
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पनीर की सफेद सुरत ने
कद्दू का दिल जीत लिया।
और जब किया कद्दू ने इश्क का इजहार
तो पनीर ने बुरा मान लिया।

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भरी हुई महफिल में
कद्दू बदनाम हो गया।
जब हरी मिर्ची के साथ
कद्दू दिखने लग गया।
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तेरी सक्ल में न जाने क्या बात है
कद्दू जैसा तेरे होठो का स्वाद है।
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कद्दू खा कर दिमाग के
दरवाजे खुल जाते है।
तभी तो खाने के लिए कद्दू
हम शहर से गांव आ जाते है।
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कद्दू की मीठी मीठी बातों ने
पनीर के दिल को धडकाया है।
तभी तो कद्दू मिलने
पनीर के घर आया है।
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तेरी काली आंखो में
अजीब सा नशा छिपा है।
जैसे कद्दू के अंदर
प्यार का रस छिपा है।
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तु दिखती है तो चांद भी शर्माता है।
और है जो तेरे होठ लाल लाल
कद्दू भी उन्हे चुमना चाहता है।
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तेरे गुलाबी मुखडे ने
मेरे दिल को धडकाया है।
और खिलाने के लिए कद्दू मुझे
पास तुने अपने बुलाया है।
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कद्दू भी अकड कर चलने लग गया।
जब हर कोई कद्दू खा नही पाया।
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लेकर बुलेट कद्दू गांव की
गली में चक्कर काटता है।
देखता है छोरियों को प्यार से
और लाइन उन पर मारता है।
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किसान की मेहनत ने
न जाने कोनसा रस पिलाया है।
तभी तो खेतों में कद्दू
इतना मस्त बन पाया है।

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सुरज की तेज किरणों ने
कद्दू को दिन रात जलाया था।
पर किसान ने देकर छांव कद्दू को
इतना प्यारा बनाया था।
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खेत में उगने वाला कद्दू भी
दिलों पर राज करने लग गया।
जब एक अकेला कद्दू
मटर पनीर पर भारी पडने लग गया।
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आसमान में तारों को देखकर
कद्दू उनसे बातें कर लेता है।
जब देखता है मिर्ची को पास अपने
तो इश्क का इजहार कर देता है।
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कद्दू की सब्जी ने
इंसान को बडा सताया है।
मगर देकर स्वास्थ्य लाभ
किसान को तंदुरुस्त बनाया है।
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सेब का मीठा रस भी
फिका लगने लग जाता है।
जब सेब कद्दू के साथ
दिखने लग जाता है।
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टमाटर के साथ रहकर
कद्द भी लाल होने लग गया।
मगर फिर भी सादा सा कद्दू
न जाने फिका क्यों रह गया।
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आम का मीठा रस
हर किसी को भाता है।
मगर फिर भी वो
कद्दू सबसे पहले खाता है।
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कोट पैंट पहनकर कद्दू
खुदको अमीर समझने लग गया।
और देखकर बैंगन की पतली कमर को
छेडने बैंगन लग गया।

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बैंगन की मस्त जवानी ने
कद्दू को बडा सताया है।
बुलाकर पास अपने
प्यार का रस पिलाया है।
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मटर के साथ
कद्दू की शादी होने लग गई।
तभी तो मटर की सहेलियां
कद्दू के साथ नाचने लग गई।
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लेकर हाथ में कट्टा
जब कद्द निकलता है।
बाजार में भी
हंगामा हो जाता है।
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आलू की मुस्कान देखकर
कद्दू दिल का दर्द भुल गया।
कैसे मिला था धोका प्यार में
वो बुरा पल भुल गया।
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आत्माओं को बुलाना
कद्दू ने भी सिख लिया।
तभी तो आजकल
कद्दू खुद से बातें करने लग गया।
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करले का कडवा रस
जीभ को अच्छा लगता नही।
मगर देखकर कद्दू को
दिल खाने को करता नही।
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काली काली आंखो में
इश्क का नशा छिपा है।
जैसे कद्दू की मुस्कान के पीछे
खुशी का कोई राज छिपा है।
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तेरे लाल होठो को देखकर
दिल मेरा घायल हो जाता है।
और खाता हूं जब मैं कद्दू की सब्जी
तो मेरे दिल को बुरा लग जाता है।
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बाजार में शरेआम हंगामा हो गया।
जब कद्दू महंगा होकर ज्यादा बिक गया।
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बैंगन की शादी में
आम राजा बनकर आया है।
पर देखकर कद्दू को बैंगन के साथ
आम जलकर कोयला बन गया है।

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बरसों से आज वो
खुशी का पल आया है।
जब कद्दू बनकर दुल्हा
दुल्हन लेने बारात लेकर आया है।
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सारे दुख रेत तले दब जाते है।
जब कद्दू खुदा की तरह मदद करने आते है।
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कद्दू के फिके स्वाद ने
जीभ को बडा सताया है।
मगर फिर आज वो
कद्दू खरीद ले आया है।
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देखने वालो की नजरों ने
टमाटर को भी बुरा बता दिया।
और जो था फिका कद्दू
उसे सब्जयों का राजा बना दिया।
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ग्राहकों की भीड
मंडी में बढने लग जाती है।
जब कद्दू के अंदर
चांदी की चैन निकल जाती है।
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कद्दू के सफेद रंग ने
चांदी का अहसास दिलाया है
पिलाकर अपना ठंडा रस
तन बदन को सितल बनाया है।
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कारों में आते होगे देश के पीएम
पर कद्दू तो घोडी लेकर आता है।
जब बनती है दुल्हन भींडी
तब कद्दू विवाह करने आता है।
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हंसकर जो गले लगाती थी
आज न जाने वो कहा चली गई।
जो खिलाती थी कद्दू की सब्जी
आज वो मां छोडकर चली गई।
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मां के हाथ से बना वो खाना
दिल को भी अच्छा लगता था।
जब बनाती थी मां कद्दू की सब्जी
तो जीभ से लार टपकता था।

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वो बचपन के दिन
आज याद आते है।
जब मां के हाथ से बने
कद्दू के पराठे हम खाते थे।
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कद्दू की हिरे जैसी चमक ने
बाजार में हंगामा मचा दिया।
जो नही खरीदता था कद्दू कभी
आज वो ग्राहक भी खरीदने कद्दू आ गया।
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दिल भी खुश हो जाता है
जब कद्दू का स्वाद आता है।
अरे हंसता है तन बदन भी
जब साथ महबुब का मिलता है।
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कद्दू के फूलों ने
बाग को बडा महकाया है।
खिलता रहे किसान का दिल
इतना तगडा माहौल बनाया है।
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सूरज की तपती किरणों मे
दिन रात किसान काम करता है।
तब जाकर खेतों मे
कद्दू हिरा बनकर चमकता है।
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सूरज ने भी किसान को बडा सताया है
न पाल सके कद्दू जैसे फलों को
इसलिए आग का गोला बरसाया है।
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सूरज की आग भी
किसान को झुका न पाई।
तभी तो खेतों मे
कद्दू की फसल पक पाई।
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स्वास्थ्य का दाता बनकर
कद्दू दिलों को महकाता है।
जब पडती है तेज धूप
तो तन बदन को ठंडा रख पाता है।
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पेट की गर्मी को
पल भर में बुझा देता है।
जब कद्दू का रायता
पेट मे चला जाता है।

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सुखी धरती को हरी बनाता है
तभी तो किसान भगवान कहलाता है।
अरे तपता है सूरज की धूप में दिन रात
और कद्दू की फसल को पकाता है।
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कद्दू की सब्जी ने
दिवाना दिलों को बनाया है।
महकता रहे तन बदन
इतना मीठा स्वाद चखाया है।
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सपने भी भूत बनकर
किसान को डराते है।
जब कद्दू की फसल को
सूरज आग बरसाकर जलाते है।
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जब मिलता है प्यार में धोका आशिको को
तब आशिक छिप छिपकर रोता है।
और देखकर महबूबा को किसी ओर के साथ
कद्दू बना बनाकर खाता है।
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धोका भी बडा अजीब होता है
इसमें दिलों का हजरों टूकडा होता है।
और जब न लगता है खाना पीना आशिकों को
तो फिर आशिक कद्दू बना बनाकर खाता है।
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गोभी की सुंदरता पर
चांद भी दिल हार बैठता है।
मगर जब देखता है कद्दू को
तो चांद गोभी को भुला बैठता है।
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चांद की चमक ने
न जाने कितने आशिक बनाए है।
पर न खाए कोई आशिक कद्दू
ऐसे लोग खुदा ने बहुत बनाए है।
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करेले के कडवे स्वाद ने
मुंह को खारा बना दिया।
और खिलाकर तुने कद्दू का पराठा
मुंह को फिका ओर बना दिया।
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जब काटते चाकु से प्याज
तो आंखो से आंसू कई टपकते है।
पर जब कटते है कद्दू
तो चेहरे भी हंसने लगते है।
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मिर्ची का तिखेपन ने
जीभ को बडा जलाया है।
और खिलाकर तुने कद्दू का पराठा
पेट मेरा ज्यादा भर दिया है।
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कद्दू को भी
एक दिन जेल होगी
जब मिर्ची की मुलाकात
वकिल से होगी।
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कद्दू ने प्यार में धोका
मिर्ची को दिया है।
तभी तो मिर्ची ने
कद्दू पर कैस किया है।

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केले के पीले रंग ने
मधुमक्खियों को पास अपने बुलाया है।
और बुलाकर केले ने पास अपने
मधुमक्खियों को कद्दू का रस पिलाया है।
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कद्दू ने आजकल
हंगामा मचा रखा है
दिखा कर पैसो का रुतबा
बाजार की सारी सब्जियों को पटा रखा है।
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हद हो गई आज तो
कद्दू को भी जेल हो गई।
दिया था धोका मिर्ची को टमाटर ने
पर कद्दू की इज्जत निलाम हो गई।
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टमाटर के साथ रहकर
कद्दू भी शहर में बदनाम हुआ है।
जो था हमेशा से शरिफ
आज वो कद्दू भी बुरा हुआ है।
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तेरे कद्दू जैसे गोल चेहरे ने
मेरे दिल को धडकाया है।
और बुलाकर तुने पास मुझे अपने
आम का रस होठो से पिलाया है।
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आम का मीठा रस भी
फिका लगने लग जाता है।
जब विदेश के मॉल में कद्दू का जूस
ड्रिंक के नाम से बिक जाता है।
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देखकर तेरे गुलाबी होठो की चमक
महोब्बत मेरे दिल को तुझसे हो गई।
और बनाकर खिलाया तुने कद्दू का पराठा मुझे
तो पेट को भी शांति मिल गई।
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तु मेरे नादान दिल की रानी बन जा।
बनाकर दे मुझे रोज कद्दू की सब्जी
ऐसी मेरी घरवाली तु बन जा।
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मेरा नादान दिल तो
छोटी छोटी बातों पर रोता है।
पर देखता है जब तेरे गुलाबी होठ को
दिल भी चुमने को बार बार करता है।
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जब सोता हूं रात को आराम से
तो नींद में भी तेरा चेहरा दिखता है।
बनाती है तु कद्दू का पराठा
इतना प्यारा कद्दू मुझे दिखता है।
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कद्दू जैसा चेहरा
किसी ओर का होता नही।
तभी तो देखकर कद्दू को
दिल हरी मिर्च का धडकता नही।
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तु साथ मेरे हो
तो कद्दू जैसा चेहरा खिल जाता है।
बनाती है तु कद्दू की सब्जी
तो मटर बनीर की बन जाती है।
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कद्दू भी महंगा होकर
बिकने लग गया।
जब साधारण कद्दू
मटर पनीर में पडने लग गया।
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ओ देखने वाले ग्राहक
तेरी नजर किधर जाती है।
अरे है मेरे पास प्यारा कद्दू
तो तुम्हे ठंडगी देती है।
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पंख लगाकर कद्दू
आसमान में उडने लग गया।
जब महंगा होकर कद्दू
बाजार में बिकने लग गया।
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कद्दू ने बाजार में
बडा हंगामा कर दिया।
जो था पनीर महंगा
उससे झगडा कर लिया।
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तो इस तरह से दोस्त, कद्दू पर शायरी कैसी लगी कमेंट में बताना जरूर ।
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